तीन नाटकों के तीन अंश
आप तीन छोटे अंशों पर काम करते हैं, हर एक अलग नाटक से। ऐसे अंश चुनिए जो काल, शैली या विधा में अलग हों (जैसे एक यथार्थवादी, एक हास्य, एक शास्त्रीय पाठ से)।
हर एक के लिए पूरा नाटक कुछ पंक्तियों में जानिए: कहानी, मुख्य विचार, यह अंश कहाँ आता है और क्यों ज़रूरी है। अंश एक खिड़की है; आपको वह कमरा भी पता होना चाहिए जिसमें वह खुलती है।
पहले पाठ पढ़ना
शब्दों से शुरू कीजिए, मंचन के चमकदार विचारों से नहीं। पूछिए:
- कौन है और उनका आपस में क्या रिश्ता है?
- कहाँ और कब हो रहा है?
- इस दृश्य में हर कोई क्या चाहता है और उसे क्या रोकता है?
- अंश की शुरुआत और अंत के बीच क्या बदलता है?
- भाषा में क्या संकेत हैं (लंबी या छोटी पंक्तियाँ, प्रश्न, विराम, दोहराए शब्द)?
ये तथ्य दी गई परिस्थितियाँ (given circumstances) हैं। आगे का हर चुनाव इनसे मेल खाना चाहिए।
अभिनेता के चुनाव
अभिनेता आवाज़, शरीर और जगह से अर्थ दिखाता है।
- आवाज़: गति, स्वर की ऊँचाई, विराम, मुख्य शब्द पर ज़ोर।
- शरीर: मुद्रा, इशारे, चेहरे के भाव, नज़र।
- जगह: पात्रों के बीच दूरी, कौन ऊँचा खड़ा है, कौन किसका रास्ता रोकता है।
- रिश्ता: नज़दीकी, दर्जा, भरोसा या डर।
आज़माइए: एक पंक्ति तीन तरह से बोलिए। दो कदम पास आइए, फिर दो कदम दूर जाइए। देखिए क्या बदला और वह पाठ से क्यों मेल खाता है।
डिज़ाइनर के चुनाव
डिज़ाइनर तय करता है कि मंच कैसा दिखे और सुनाई दे।
- मंच-सज्जा: आकार, स्तर और वस्तुएँ; खुली जगह या भरा कमरा।
- रोशनी: रंग, चमक और कोण (गर्म = अपनापन, ठंडी = दूरी, नीची बगल की रोशनी = ख़तरा)।
- ध्वनि: संगीत, चुप्पी, मंच के बाहर की आवाज़ें।
- वेशभूषा और वस्तुएँ: रंग, उम्र, दर्जा, पात्र के हाथ में क्या है।
हर डिज़ाइन-विचार का कारण पाठ से चाहिए: जैसे "ठंडी नीली रोशनी क्योंकि पात्र अब करीब नहीं रहे"।
निर्देशक की अवधारणा (Concept)
Concept एक साफ़ विचार है जो हर चुनाव को दिशा देता है। उदाहरण: "यह दृश्य एक पूछताछ है।" तब अभिनेता तनकर बैठता है, रोशनी कठोर और ठंडी होती है, जगह तंग होती है।
- अवधारणा को एक वाक्य में लिखिए।
- तय कीजिए कि वह थीम के बारे में क्या कहती है।
- अभिनय और डिज़ाइन के चुनाव उसी के पीछे चलाइए।
- जाँचिए: क्या दर्शक बिना बताए यह समझ लेंगे?
अवधारणा को पाठ का सम्मान करना होगा। पंक्तियाँ साथ न दें तो पंक्तियाँ नहीं, अवधारणा बदलिए।
व्यावहारिक खोज और उसे दर्ज करना
आज़माने के व्यावहारिक तरीके:
- Hot-seating: कोई पात्र बनकर सवालों के जवाब देता है।
- Still image: दृश्य को जमाकर रिश्ते दिखाइए।
- Thought-tracking: पात्र का छिपा विचार ज़ोर से बोलिए।
- भूमिका-अदला-बदली और दृश्य अलग शैलियों में दोहराना।
एक छोटी डायरी रखिए: क्या आज़माया, क्या हुआ, कौन सी पंक्ति उसका समर्थन करती है और क्या रखेंगे। लिखते समय ढाँचा रखिए: बिंदु - पाठ से प्रमाण - दर्शक पर असर।
करके देखिए: दो पात्रों का कोई दृश्य लीजिए। एक बार पास और गर्म, एक बार दूर और ठंडा खेलिए। दो पंक्तियों में लिखिए कि पाठ से कौन सा रूप ज़्यादा मेल खाता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- शुरुआत: दी गई परिस्थितियाँ = कौन + कहाँ + कब + चाहत
- अभिनेता = आवाज़ + शरीर + जगह + रिश्ता
- डिज़ाइनर = मंच-सज्जा + रोशनी + ध्वनि + वेशभूषा
- निर्देशक = एक अवधारणा जो सबको जोड़ती है
- लेखन: बिंदु - पाठ से प्रमाण - दर्शक पर असर
हल किए गए उदाहरण
1. दो बहनें रात को रसोई में झगड़ती हैं। एक की नौकरी अभी गई है। दी गई परिस्थितियाँ लिखिए।
कौन: दो बहनें। कहाँ: रसोई। कब: रात। चाहत: एक को सहारा या मदद चाहिए, दूसरी दोष से बचना चाहती है। नौकरी जाना दबाव है।
2. पाठ में छोटी पंक्तियाँ हैं: "जाओ।" "नहीं।" "प्लीज़।" अभिनेता इसका उपयोग कैसे करे?
छोटी पंक्तियाँ तनाव या चोट दिखाती हैं। तेज़ गति और विराम, कम हरकत और जैसे ही विनती शुरू हो दूरी कम करना।
3. डिज़ाइनर शांत पारिवारिक दृश्य के लिए लाल रोशनी चुनता है। क्या यह सही है?
तभी जब पाठ समर्थन करे (जैसे छिपा गुस्सा)। पाठ के कारण के बिना नरम गर्म रोशनी ज़्यादा ठीक है। हर डिज़ाइन-चुनाव को प्रमाण चाहिए।
4. वर्षों बाद मिलते दो पुराने दोस्तों के अंश के लिए एक वाक्य की अवधारणा लिखिए।
एक नाज़ुक मिलन, जिसमें दोनों डरते हैं कि दूसरा बदल गया है। (हल्की गर्म रोशनी, धीमा पास आना, झिझक भरे विराम।)
आम गलतियाँ
- पाठ से जुड़े बिना रोमांचक प्रभाव चुनना। हर चुनाव के लिए कोई पंक्ति खोजिए जो उसका समर्थन करे।
- सब कुछ एक साथ बदलना। एक बार में एक बदलाव आज़माइए ताकि पता चले असर किससे हुआ।
- दृश्य का वर्णन करना, दर्शक पर असर न समझाना।
- ऐसी अवधारणा जो शब्दों के उलट जाए। पंक्तियाँ विरोध करें तो अवधारणा बदलिए।