सबसे पहले संदर्भ क्यों
कोई भी पाठ ख़ाली जगह में नहीं लिखा जाता। संदर्भ (context) का मतलब है वह समय, स्थान और स्थिति जिसमें पाठ लिखा गया: तब क्या चल रहा था, कौन बोल रहा था, कौन सुन रहा था और क्यों। पढ़ने से पहले तीन सवाल पूछिए: यह कब लिखा गया? तब क्या हो रहा था? यह किसके लिए लिखा गया?
बड़े बदलाव के समय के पाठों के लिए यह सबसे ज़रूरी है, जैसे क्रांति या राष्ट्रीय संघर्ष। उस समय लोग जल्दी में और गहरी उम्मीद या चिंता के साथ लिखते थे। संदर्भ पता हो तो तेज़ शब्द समझ आते हैं। न पता हो तो वे ज़्यादा ऊँचे लग सकते हैं। किसी भी देश के क्रांतिकारी दौर के पाठ पढ़ते समय पहले उन्हें समय-रेखा पर रखिए: घटना से पहले, घटना के दौरान, घटना के बाद।
सुझाव: नोट्स में सबसे ऊपर तारीख़ और जगह लिख लें। पाँच सेकंड लगते हैं और आगे हर सवाल में काम आता है।
समाचार: पहले तथ्य
समाचार हाल की घटना को साफ़ और छोटे रूप में बताता है। उसका काम सूचना देना है। अच्छा समाचार छह सवालों के जवाब देता है, जिन्हें 5W1H कहते हैं: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों और कैसे। सबसे ज़रूरी बातें पहले आती हैं (शीर्षक और पहला अनुच्छेद), फिर बाक़ी ब्योरा महत्त्व के क्रम में। इसे उलटा पिरामिड कहते हैं।
समाचार में लेखक की राय नहीं होती। सरल शब्द, छोटे वाक्य और तीसरा पुरुष ('मंत्री ने कहा') होता है। 3D में तथ्य की मीनार सबसे ऊँची और भावना की मीनार लगभग ख़ाली दिखती है।
रिपोर्ताज: तथ्य और आँखों देखा हाल
रिपोर्ताज सच्ची घटना का ऐसा वर्णन है जो कहानी लिखने की कला से लिखा जाता है। लेखक मौक़े पर गया, देखा, लोगों से बात की और फिर लिखा। यह समाचार और कहानी के बीच की विधा है।
रिपोर्ताज की विशेषताएँ:
- सच्ची घटनाएँ: असली लोग, जगहें, तारीख़ें। कुछ गढ़ा नहीं जाता।
- आँखों देखा दृश्य: लेखक कहता है 'मैंने देखा', इसलिए पाठक को लगता है कि वह वहीं है।
- जीवंत ब्योरा: आवाज़ें, रंग, मौसम, चेहरे।
- भावना: लेखक का सम्मान, चिंता या उम्मीद झलकती है।
- कहानी जैसी बनावट: शुरुआत, चरम क्षण और याद रह जाने वाला अंत।
3D में तथ्य और भावना दोनों मीनारें ऊँची हैं। यही रिपोर्ताज की पहचान है।
भाषण: शब्द जो लोगों को चलाते हैं
भाषण सुनने के लिए लिखा जाता है। वक्ता चाहता है कि श्रोता कुछ मानें या कुछ करें। सुनने वाला दोबारा पढ़ नहीं सकता, इसलिए अच्छे भाषण में होता है:
- दोहराव: मुख्य पंक्ति बार-बार आती है।
- तीन की टोली: 'हमने मेहनत की, हमने इंतज़ार किया, हम जीते।'
- सीधा संबोधन: 'आप', 'हम', 'हमारा'।
- प्रश्न: 'क्या हम तैयार हैं?'
- साफ़ आह्वान: अंतिम पंक्तियाँ बताती हैं कि क्या करना है।
3D में आह्वान की मीनार सबसे ऊँची है। तथ्य हैं, पर वे आह्वान की सेवा करते हैं।
ख़ुद करके देखें: तीन पाठ छाँटिए
घर पर 10 मिनट में करें। आज का अख़बार (या कोई समाचार साइट) लीजिए। इनमें से तीन चुनिए: (1) एक छोटा समाचार, (2) किसी जगह या लोगों का वर्णन करने वाला लंबा लेख, (3) किसी वक्ता की एक पंक्ति। हर पाठ के लिए तथ्य, भावना, आह्वान की तीन मीनारें बनाइए और अंदाज़े से 1 से 5 तक ब्लॉक रंगिए। फिर 3D में बटन दबाकर मिलाइए। अगर आपकी मीनारें तीन नमूनों में से किसी से मिलती हैं तो आपने पाठ का प्रकार सही पहचाना।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- समाचार = ज़्यादातर तथ्य (5W1H, उलटा पिरामिड)
- रिपोर्ताज = तथ्य + भावना (आँखों देखा, जीवंत ब्योरा)
- भाषण = भावना + आह्वान (दोहराव, तीन की टोली, 'हम')
- संदर्भ = कब + कहाँ + किसने लिखा + किसने सुना
- 5W1H = कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
हल किए गए उदाहरण
1. वाक्य: 'नदी पर बना पुल 4 मई को खुला। पहले दिन 300 से ज़्यादा लोग पार हुए।' यह समाचार है, रिपोर्ताज या भाषण? क्यों?
समाचार। इसमें सिर्फ़ तथ्य हैं (क्या, कब, कितने), सरल शब्द हैं, न भावना है और न कोई आह्वान।
2. वाक्य: 'मैं भोर में नए पुल पर खड़ा था। नदी चमक रही थी और एक बूढ़े ने रेलिंग को ऐसे छुआ जैसे वह जीवित हो।' यह किस प्रकार का पाठ है?
रिपोर्ताज। 'मैं खड़ा था' आँखों देखा गवाह दिखाता है, ब्योरा जीवंत है (चमकती नदी, बूढ़ा) और भावना झलकती है।
3. वाक्य: 'साथियो, यह पुल हमारा है। हमने बनाया, हम बचाएँगे और कल अगला बनाएँगे। क्या आप मेरे साथ हैं?' प्रकार बताइए और दो तकनीकें गिनाइए।
भाषण। तकनीकें: दोहराव और तीन की टोली ('बनाया, बचाएँगे, बनाएँगे'), सीधा संबोधन ('साथियो', 'आप') और कार्य के लिए पुकारता प्रश्न।
4. बाढ़ का समाचार कहता है: 'सोमवार को नदी चढ़ी।' इसे रिपोर्ताज की एक पंक्ति में लिखिए।
जैसे: 'सोमवार को मैंने भूरे पानी को गाँव की सीढ़ियों पर एक-एक करके चढ़ते देखा, और बच्चे किताबें सिर पर रखे चल रहे थे।' तथ्य वही है, आँखों देखा स्वर और जीवंत ब्योरा जुड़ा है।
5. किसी नेता का जनसभा में दिया पाठ है। पढ़ने से पहले तीन संदर्भ-प्रश्न बताइए।
यह कब और कहाँ दिया गया? श्रोता कौन थे और वे क्या चाहते या डरते थे? उस समय देश में क्या हो रहा था?
आम गलतियाँ
- रिपोर्ताज को कल्पित कहानी समझना। वह सच्चा होता है, केवल लिखने की शैली कहानी जैसी होती है।
- हर ज़ोरदार पाठ को भाषण कह देना। भाषण बोलने के लिए होता है और आह्वान पर ख़त्म होता है।
- पुराने पाठ को संदर्भ जाने बिना पढ़ना और उसके तेज़ शब्दों को आज के शांत लहजे से तौलना।
- समाचार में लेखक की राय डाल देना। समाचार में भावना बाहर और तथ्य अंदर रहते हैं।