संरक्षण क्या है?
संरक्षण कलाकारों को दी गई मदद है, आमतौर पर पैसा, जो संरक्षक देता है। बदले में उसे कलाकृति, प्रतिष्ठा या जनता तक पहुँचने वाला संदेश मिलता है। कमीशन किसी ख़ास कलाकृति का ऑर्डर है। संग्राहक पहले से बनी कलाकृतियाँ ख़रीदता है।
हर कलाकृति के लिए तीन सवाल: किसने पैसा दिया? क्यों? कलाकार कितना स्वतंत्र था?
इतिहास में संरक्षक
- धर्म: मिस्र और भारत के मंदिर, बौद्ध मठ (अजंता), मस्जिदें, गिरजाघर। कला आस्था सिखाती और ईश्वर का सम्मान करती।
- शासक: सम्राट और राजा महल, मूर्तियों और चित्रित पुस्तकों से शक्ति दिखाते। अकबर जैसे मुगल बादशाहों के यहाँ चित्रकारों की कार्यशालाएँ (कारख़ाने) थीं; यूरोप के राजाओं के दरबारी चित्रकार थे।
- व्यापारी और श्रेणियाँ: पुनर्जागरण के फ़्लोरेंस में मेडिची जैसे बैंकर और व्यापारिक गिल्ड चर्च, प्रार्थना-कक्ष और मूर्तियाँ बनवाते, अक्सर शहर में सम्मान पाने के लिए।
- खुला बाज़ार: 17वीं सदी के डच गणराज्य में कई मध्यमवर्गीय ख़रीदार रोज़मर्रा के जीवन और प्राकृतिक दृश्यों के छोटे चित्र ख़रीदते; कलाकार पहले बनाते, बाद में बेचते।
- आधुनिक समय: डीलर, गैलरी, नीलामी, संग्रहालय, सरकार, फ़ाउंडेशन, कंपनियाँ और क्राउडफ़ंडिंग।
संरक्षकों ने कलाकृतियों को कैसे ढाला
संरक्षक अक्सर विषय, आकार, स्थान और सामग्री तय करते। पुराने अनुबंधों में कभी-कभी लिखा होता था कि महँगा अल्ट्रामरीन नीला या सोने का वर्क कितना लगेगा और काम कब पूरा होगा। संरक्षक धार्मिक दृश्य के किनारे घुटनों के बल बैठे दाता-चित्र के रूप में ख़ुद को बनवाते। कला प्रचार भी थी: घोड़े पर शासक, सिक्के पर चेहरा, चौराहे पर विशाल मूर्ति, सब कहते हैं "सत्ता मेरी है"।
कलाकार शैली, नए प्रयोग और प्रसिद्धि से अपनी बात रखते। माइकलएंजेलो जैसे प्रसिद्ध कलाकार पोप से भी बहस कर लेते थे; ज़्यादातर कलाकारों के पास इतनी ताक़त नहीं थी।
संग्रह, संग्रहालय और कला पर लेखन
संग्राहक पहले "अजूबों की अलमारियों" में, फिर निजी गैलरियों में वस्तुएँ जमा करते। कई शाही और निजी संग्रह (18वीं सदी से) सार्वजनिक संग्रहालय बने। संग्रहालय क्या ख़रीदता और दिखाता है, उससे जनता तय करती है कि क्या महत्वपूर्ण है।
कला पर लेखन भी मूल्य तय करता है: कलाकारों की जीवनियाँ (जैसे वसारी की इतालवी कलाकारों की जीवनियाँ, 1550), आलोचकों की समीक्षाएँ, घोषणापत्र और आज ब्लॉग व सोशल मीडिया। कुछ संग्रह युद्ध या औपनिवेशिक शासन में ले जाए गए थे; इन्हें लौटाने (पुनर्वापसी) पर बहस होती है।
आज का संरक्षण
आज मदद सरकारी पैसे (कला परिषदें, संस्कृति मंत्रालय), निजी फ़ाउंडेशन, कंपनियों (प्रायोजन, अक्सर छवि सुधारने के लिए), अमीर संग्राहकों और ऑनलाइन कई छोटे प्रशंसकों से आती है। हर एक के साथ ताक़त भी आती है: प्रायोजक अपनी आलोचना करने वाली कला से बच सकता है; सरकारी पैसे के साथ नियम आ सकते हैं। कलाकार आज भी आज़ादी और रोज़ी-रोटी में संतुलन बनाते हैं।
करके देखें: अपने शहर का स्मारक पढ़ें
अपने पास की कोई मूर्ति, मंदिर, भित्ति-चित्र या इमारत चुनें। शिलापट्ट या इंटरनेट से पता करें कि इसे किसने और कब बनवाया। तीन पंक्तियाँ लिखें: किसने पैसा दिया, वह क्या संदेश देना चाहता था, और कलाकृति का एक विवरण जो संरक्षक को दिखाता है (नाम, कुल-चिह्न, चित्र, तारीख़)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संरक्षक = पैसा देने या मदद करने वाला
- कमीशन = ख़ास कलाकृति का ऑर्डर
- संग्राहक = बनी हुई कलाकृतियाँ ख़रीदने वाला
- दाता-चित्र = कलाकृति के अंदर संरक्षक का चित्र
- तीन सवाल: किसने पैसा दिया? क्यों? कलाकार कितना स्वतंत्र?
हल किए गए उदाहरण
1. 15वीं सदी के एक प्रार्थना-कक्ष के चित्र में पवित्र दृश्य के किनारे एक बैंकर घुटनों पर है। क्यों?
वह संरक्षक था। दाता-चित्र उसकी आस्था दिखाता है और सबको याद दिलाता है कि पैसा किसने दिया, जिससे परिवार का सम्मान बढ़ता है।
2. 17वीं सदी के डच कलाकार छोटे प्राकृतिक दृश्य और रोज़मर्रा के चित्र क्यों बनाते थे?
बहुत से मध्यमवर्गीय ख़रीदार थे जिनके घर थे, महल नहीं। वे परिचित चीज़ों के सस्ते, छोटे चित्र चाहते थे, इसलिए कलाकार खुले बाज़ार के लिए बनाते थे।
3. एक कंपनी बड़ी प्रदर्शनी प्रायोजित करती है। कंपनी का एक लाभ और कला का एक ख़तरा बताइए।
लाभ: बेहतर छवि और विज्ञापन। ख़तरा: प्रदर्शनी उन कलाकृतियों से बच सकती है जो कंपनी या उसके उद्योग की आलोचना करती हैं।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि कलाकार हमेशा अपना विषय ख़ुद चुनते थे: ज़्यादातर इतिहास में संरक्षक बहुत कुछ तय करते थे।
- संरक्षक (बनवाने वाला) और संग्राहक (बनी चीज़ ख़रीदने वाला) को एक समझना।
- संरक्षण को केवल अमीर यूरोपियों का काम मानना: मंदिर, मुगल दरबार, अफ़्रीकी राज्य और चीनी सम्राट भी बड़े संरक्षक थे।
- लेखन और संग्रहालयों को भूलना: आलोचक, लेखक और संग्रह भी कला का मूल्य तय करते हैं।