Netherlands HAVO 4 (bovenbouw, 2e fase) Arts (general)
अध्याय: 2
1. Skills for looking and listening
Terms from the four art disciplines · Working with sources
- कला के तत्व और डिज़ाइन के सिद्धांत – कला के तत्व वे ईंटें हैं जिनसे हर कलाकृति बनती है: रेखा, आकार, रूप, रंग, मान (हल्का-गहरा), बनावट और स्थान; कई शिक्षक बिंदु को भी जोड़ते हैं। डिज़ाइन के सिद्धांत बताते हैं कि इन ईंटों को कैसे जमाएँ: संतुलन, विरोधाभास (कंट्रास्ट), बल (एम्फ़ेसिस), गति, लय और पैटर्न, अनुपात और पैमाना, एकता और विविधता।
- शोध कौशल: प्रश्न से पूरे प्रोजेक्ट तक – शोध उत्तर खोजने का सावधान तरीका है। आप एक साफ़, सीमित प्रश्न पूछते हैं, उसका उत्तर पाने की योजना बनाते हैं, जानकारी खोजते हैं और हर स्रोत पर भरोसे की जाँच करते हैं, अपने आँकड़े जुटाकर विश्लेषण करते हैं, सबूत पर टिका निष्कर्ष निकालते हैं, और हर स्रोत को श्रेय देते हुए उसे साझा करते हैं।
2. Viewpoints for reflection
Art and religion or worldview · Art and aesthetics · Artist, patron and power · Art and entertainment · Art, science and technology · Art across cultures
- कला का दर्शन: कला क्या है, और क्यों ज़रूरी है? – कला का दर्शन (सौंदर्यशास्त्र का हिस्सा) पूछता है: कला क्या है, सुंदरता क्या है, क्या रुचि सिर्फ़ निजी है, रचनाकार कौन है, और क्या कला सच दिखा सकती है? जवाब बदलते रहे हैं: "कला प्रकृति की नक़ल है" से "कला भावना है" तक और "विचार ही कला है" तक।
- कला संरक्षण: कला का ख़र्च कौन उठाता है और क्यों – संरक्षक (patron) वह व्यक्ति या समूह है जो कला का ख़र्च उठाता, उसे बनवाता या कलाकार की मदद करता है। इतिहास में संरक्षक बदलते रहे: मंदिर और चर्च, राजा और सम्राट, अमीर व्यापारी और श्रेणियाँ (गिल्ड), फिर डीलरों और ख़रीदारों का खुला बाज़ार, और आज संग्रहालय, सरकारें, फ़ाउंडेशन, कंपनियाँ और ऑनलाइन प्रशंसक। संरक्षक अक्सर विषय, आकार, सामग्री और रंग तक तय करते थे और कला से आस्था, शक्ति, धन या रुचि दिखाते थे। बाज़ार बढ़ने के साथ कलाकारों को ज़्यादा आज़ादी मिली। संग्राहक, आलोचक और लेखक भी तय करते हैं कि कौन-सी कला मूल्यवान है।
- प्रदर्शन कलाएँ: संगीत, नृत्य और रंगमंच, जीवंत – प्रदर्शन कलाएँ वे कलाएँ हैं जो कलाकार के शरीर और आवाज़ से, समय में, जीवंत होती हैं: संगीत, नृत्य और रंगमंच (और ओपेरा, म्यूज़िकल, नुक्कड़ नाटक जैसे मिश्रित रूप)। हर प्रदर्शन को कलाकार, दर्शक और स्थान चाहिए। शो विचार से रिहर्सल, फिर प्रदर्शन और समीक्षा तक बढ़ता है।
- कला और तकनीक: नए आविष्कार कला को कैसे बदलते हैं – नई तकनीक ने कला को बार-बार बदला है। छापाख़ाने (लगभग 1450) से एक चित्र की कई प्रतियाँ बनने लगीं, तो कला आम लोगों तक पहुँची। धातु की ट्यूब में रंग (1841) से चित्रकार बाहर जाकर पेंट करने लगे। फ़ोटोग्राफ़ी (1839) ने हूबहू नक़ल का काम ले लिया, तो चित्रकला रंग, भावना और देखने के नए तरीक़ों की ओर मुड़ी। सिनेमा (1895) ने समय और गति जोड़ी। कंप्यूटर (1960 से, 1980 के बाद आम) से डिजिटल, इंटरनेट और अब AI कला आई, जहाँ कॉपी मुफ़्त है और कलाकृति दर्शक के साथ बदल सकती है। कलाकार विज्ञान का भी उपयोग करते हैं: परिप्रेक्ष्य (ज्यामिति), रंग-सिद्धांत (प्रकाश और प्रिज़्म), नए पदार्थ, और आज 'कलात्मक शोध'। हर नया औज़ार सवाल उठाता है: मौलिक क्या है, लेखक कौन है, कला किसलिए है?
- विश्व संस्कृतियाँ: संस्कृति कैसे दिखती, बदलती और जुड़ती है – संस्कृति किसी समूह के जीने का साझा ढंग है। हिमखंड की तरह इसका छोटा हिस्सा दिखता है (खाना, पहनावा, संगीत, त्योहार) और बड़ा हिस्सा छिपा रहता है (मूल्य और विश्वास)। कला, त्योहार और रस्में लोगों के लिए काम करती हैं: पहचान, खुशी, याद और विश्वास; और कई संस्कृतियाँ मिलते-जुलते रूप अपनाती हैं। व्यापार, प्रवास और उपनिवेशवाद जैसी बड़ी घटनाएँ संस्कृति बदलती हैं; कुछ भाषाएँ और रिवाज खो जाते हैं और बाद में लौटाए जाते हैं। देश आत्मसात्करण, एकीकरण या बहुसंस्कृतिवाद की नीतियाँ अपनाते हैं, और नवागंतुकों को अक्सर व्यवस्थागत बाधाएँ मिलती हैं। सामाजिक कार्य एक चक्र है: ज़रूरत, योजना-समर्थन, काम, मूल्यांकन।