विश्व संस्कृतियों पर शोध
किसी दूसरी संस्कृति को पढ़ते समय सावधान और निष्पक्ष रहना ज़रूरी है।
योजना और जाँच
साफ़ प्रश्न लिखो, कहाँ खोजोगे यह तय करो (साक्षात्कार, संग्रहालय, सामुदायिक समूह, किताबें, भरोसेमंद वेबसाइट), और थोड़ा पढ़कर परिकल्पना बनाओ। साक्षात्कार से पहले अनुमति लो, और लोग जो न बताना चाहें उसका सम्मान करो।
स्रोत परखो
प्राथमिक स्रोत: किसी बुज़ुर्ग से बातचीत, खुद देखा त्योहार, मूल गीत या वस्तुएँ। द्वितीयक स्रोत: उस संस्कृति पर किताबें और लेख। संस्कृति के अंदर के लोगों की आवाज़ को प्राथमिकता दो। स्वजातीय केंद्रवाद (ethnocentrism) से बचो: दूसरी संस्कृति को अपनी संस्कृति के पैमाने से आँकना। हर स्रोत का नाम दो: यही शैक्षिक ईमानदारी है।
बताओ और सोचो
सही और सम्मानजनक शब्द इस्तेमाल करो (जैसे समूह अपने लिए जो नाम इस्तेमाल करता है)। रूप चुनो: रिपोर्ट, फ़ोटो निबंध, पॉडकास्ट, प्रदर्शनी। अंत में सोचो: शुरू में मैंने क्या माना था जो गलत निकला?
सांस्कृतिक अभिव्यक्तियाँ और उनका काम
संस्कृति किसी समूह के जीने का साझा ढंग है: भाषा, खाना, पहनावा, विश्वास, मूल्य, कला और रीति-रिवाज। यह सीखी जाती है, जन्म से नहीं आती।
हिमखंड
दिखने वाली संस्कृति: खाना, कपड़े, संगीत, नृत्य, त्योहार, इमारतें। छिपी संस्कृति: मूल्य, विश्वास, परिवार, समय, सम्मान और सही-गलत की सोच। छिपा हिस्सा दिखने वाले हिस्से को चलाता है।
सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के प्रकार्य
- पहचान: कोई नृत्य या पोशाक कहती है "हम ऐसे हैं"।
- उत्सव और खुशी: त्योहार लोगों को जोड़ते हैं।
- याद: कहानियाँ, गीत, रस्में इतिहास बच्चों तक पहुँचाते हैं।
- विश्वास: प्रार्थना और अनुष्ठान आस्था व्यक्त करते हैं।
- सामाजिक व्यवस्था: रस्में बड़ा होना, विवाह और मृत्यु चिह्नित करती हैं।
दुनिया भर में मिलते रूप
फसल के त्योहार (भारत में पोंगल, उत्तरी अमेरिका में थैंक्सगिविंग, घाना में होमोवो), रोशनी के त्योहार (दिवाली, हनुक्का, लालटेन उत्सव) और पूर्वजों को याद करना (मेक्सिको में मृतकों का दिन, भारत में पितृ पक्ष) दिखाते हैं कि हर जगह लोग मिलती-जुलती ज़रूरतें अपने ढंग से पूरी करते हैं।
बड़ी परिस्थितियाँ अभिव्यक्ति बदलती हैं
युद्ध, प्रवास, नई तकनीक, आर्थिक बदलाव और उपनिवेशवाद संस्कृति बदलते हैं। संगीत शैलियाँ मिलती हैं (भांगड़ा और हिप-हॉप), त्योहार ऑनलाइन होते हैं, पुराने शिल्प पर्यटन का सामान बनते हैं।
उपनिवेशवाद, आप्रवासन और नीति
उपनिवेशवाद
उपनिवेशवाद वह है जब एक ताकतवर समूह दूसरे लोगों की ज़मीन और जीवन पर कब्ज़ा कर ले। कई देशों के मूलनिवासी लोगों (जैसे कनाडा के फ़र्स्ट नेशंस, इनुइट और मेटिस, ऑस्ट्रेलिया के आदिवासी) के लिए इसका मतलब था ज़मीन छिनना, भाषा और अनुष्ठान पर रोक, और आवासीय स्कूल जो बच्चों को परिवार से अलग करते थे। यह चोट पीढ़ियों तक चली। आज कई समुदाय सांस्कृतिक पुनर्जीवन चला रहे हैं: भाषा फिर से सिखाना, अनुष्ठान लौटाना, सत्य और सुलह की माँग।
आप्रवासन नीति
देश किसे और कैसे आने देता है, इससे उसके सांस्कृतिक समूह बनते हैं। कुछ पुरानी नीतियाँ खुले तौर पर कुछ मूल के लोगों को रोकती थीं (जैसे हेड टैक्स और नस्ल पर आधारित सीमाएँ)। आज ज़्यादातर व्यवस्थाएँ अंक, पारिवारिक रिश्ते या शरणार्थी सुरक्षा पर चलती हैं।
तीन तरीके
- आत्मसात्करण (assimilation): नवागंतुक अपनी संस्कृति छोड़कर बहुमत जैसे बनें ("पिघलता बर्तन")।
- एकीकरण (integration): साझा सार्वजनिक जीवन में जुड़ें, पर अपनी संस्कृति रख सकें।
- बहुसंस्कृतिवाद (multiculturalism): सभी संस्कृतियों को बराबर महत्व और सहारा ("पच्चीकारी")। कनाडा ने 1971 में इसे सरकारी नीति बनाया।
व्यवस्थागत बाधाएँ
व्यवस्थागत बाधा किसी व्यवस्था में बना नियम या तरीका है जो कुछ समूहों को रोकता है, चाहे किसी का इरादा बुरा न हो। उदाहरण: विदेशी डिग्री न मानना, पहली नौकरी के लिए "स्थानीय अनुभव" माँगना, दूसरी भाषाओं में कम सेवाएँ, नौकरी या घर में भेदभाव। हल: डिग्री की मान्यता, भाषा कक्षाएँ, मार्गदर्शन, भेदभाव-विरोधी कानून।
सांस्कृतिक समूहों के लिए सामाजिक कार्य
सामाजिक कार्य का मतलब है लोग मिलकर किसी असली ज़रूरत को पूरा करें।
- ज़रूरत पहचानो: उसी समूह से पूछो। उदाहरण: स्कूल में नए प्रवासी परिवार स्कूल के पत्र नहीं समझ पाते।
- योजना और समर्थन: साफ़ लक्ष्य, समय-सारणी, साथी (शिक्षक, सामुदायिक नेता), पोस्टर या सोशल मीडिया, और जिनकी मदद करनी है उनकी बात सुनो।
- काम करो: जैसे साथी (बडी) कार्यक्रम चलाओ और पत्रों का तीन भाषाओं में अनुवाद करो।
- मूल्यांकन: लक्ष्य पूरा हुआ? पहले और बाद में छोटा सर्वे करो। क्या बदलोगे?
लगने वाले कौशल: संवाद, टीमवर्क, सांस्कृतिक संवेदनशीलता, आयोजन, बजट और आत्म-चिंतन।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संस्कृति: किसी समूह के जीने का साझा, सीखा हुआ ढंग
- सांस्कृतिक अभिव्यक्ति: संस्कृति का दिखने वाला रूप (कला, त्योहार, रस्म, संगीत)
- प्रकार्य: अभिव्यक्ति लोगों के लिए जो काम करती है (पहचान, खुशी, याद, विश्वास)
- उपनिवेशवाद: एक समूह का दूसरे लोगों की ज़मीन और जीवन पर कब्ज़ा
- पुनर्जीवन: खोई भाषा या रिवाज वापस लाना
- आत्मसात्करण / एकीकरण / बहुसंस्कृतिवाद: नवागंतुकों को जोड़ने के तीन तरीके
- व्यवस्थागत बाधा: व्यवस्था में बना नियम जो कुछ समूहों को रोके
- स्वजातीय केंद्रवाद: दूसरी संस्कृतियों को अपने पैमाने से आँकना
हल किए गए उदाहरण
1. असम के स्कूल कार्यक्रम में बिहू नृत्य का प्रकार्य बताओ।
पहचान और उत्सव: यह गर्व से असमिया संस्कृति दिखाता है और लोगों को मिलकर आनंद लेने के लिए जोड़ता है।
2. नए देश गई एक कुशल इंजीनियर टैक्सी चलाती है क्योंकि उसकी डिग्री नहीं मानी जाती। यह क्या है?
व्यवस्थागत बाधा: डिग्री मान्यता की व्यवस्था उसे रोकती है, भले कोई एक व्यक्ति अनुचित न हो। हल: उचित डिग्री मान्यता।
3. एक देश कहता है: घर पर अपनी भाषा रखो, पर स्कूल और काम के लिए साझा भाषा सीखो। यह कौन-सा तरीका है?
एकीकरण: अपनी संस्कृति रखते हुए साझा सार्वजनिक जीवन में जुड़ना।
4. अपने इलाके के उन बुज़ुर्गों के लिए छोटा सामाजिक कार्य सोचो जिनकी भाषा खत्म हो रही है।
ज़रूरत: कम युवा यह भाषा बोलते हैं। योजना: बुज़ुर्गों से मिलो, शिक्षक और जगह ढूँढो, परिवारों को बुलाओ। काम: हर हफ़्ते कहानी-मंडली जहाँ बुज़ुर्ग शब्द और गीत सिखाएँ। मूल्यांकन: 2 महीने बाद बच्चों के सीखे नए शब्द गिनो और परिवारों की राय लो।
आम गलतियाँ
- संस्कृति को सिर्फ़ दिखने वाली चीज़ें मानना। छिपे मूल्य और विश्वास बड़ा हिस्सा हैं।
- दूसरी संस्कृति को 'अजीब' या 'पिछड़ी' कहना। यह स्वजातीय केंद्रवाद है; पहले उसका अर्थ समझो।
- आत्मसात्करण और एकीकरण को एक मानना। आत्मसात्करण संस्कृति छोड़ने को कहता है; एकीकरण नहीं।
- जिस समूह की मदद करनी है उससे पूछे बिना सामाजिक कार्य की योजना बनाना। ज़रूरत उन्हीं से आनी चाहिए।