बहुसंस्कृतिवाद क्या है?
संस्कृति = किसी समूह के जीने का तरीका: भाषा, धर्म, खाना, कपड़े, त्योहार, मूल्य। जातीय समूह (ethnic group) वह समूह है जिसकी संस्कृति साझी हो और जिसे साझे मूल का एहसास हो।
बहुसंस्कृतिवाद के दो अर्थ हैं:
- एक तथ्य: एक समाज में कई संस्कृतियाँ रहती हैं;
- एक नीति: सरकार सांस्कृतिक विविधता को मानती और सहारा देती है, जबकि सबके अधिकार, कानून और कर्तव्य एक जैसे रहते हैं।
तीन मॉडल: आत्मसात, एकीकरण, बहुसंस्कृतिवाद
- बहिष्कार / अलगाव: कुछ समूहों को बाहर या दूर रखा जाता है (जैसे नस्लवादी प्रवेश कानून, अलगाव)।
- आत्मसात ("मेल्टिंग पॉट"): नए लोग और अल्पसंख्यक अपनी संस्कृति छोड़कर बहुसंख्यक संस्कृति अपनाएँ। पहले यह अक्सर ज़बरदस्ती होता था: कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में मूल निवासी बच्चों को आवासीय या बोर्डिंग स्कूल भेजा गया और अपनी भाषा बोलने पर सज़ा दी गई।
- एकीकरण (integration): लोग साझा जीवन (स्कूल, काम, वोट) में पूरी तरह भाग लेते हैं और अपनी संस्कृति रख सकते हैं।
- बहुसंस्कृतिवाद ("मोज़ेक" या "सलाद का कटोरा"): विविधता को ताकत माना जाता है; समूह बराबर अधिकारों के साझा आधार पर अपनी पहचान रखते हैं।
सरकारी नीतियाँ और कार्यक्रम
- कनाडा: सरकारी बहुसंस्कृतिवाद नीति अपनाने वाला पहला देश (1971); कनाडाई बहुसंस्कृतिवाद कानून (1988); अधिकार और स्वतंत्रता चार्टर (1982) बराबरी की रक्षा करता है।
- ऑस्ट्रेलिया: "श्वेत ऑस्ट्रेलिया" नीति (1973 तक पूरी तरह) खत्म की और 1970 के दशक में बहुसांस्कृतिक नीति अपनाई।
- भारत: संविधान अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों की रक्षा करता है (अनुच्छेद 29–30) और 22 अनुसूचित भाषाओं को मान्यता देता है।
- आम साधन: भेदभाव-विरोधी और मानव अधिकार कानून, विरासत भाषाओं और त्योहारों के लिए पैसा, बसाने की सेवाएँ, कई भाषाओं में सरकारी जानकारी, पुराने अन्याय के लिए सरकारी माफ़ी और मुआवज़ा।
बदलती सोच और बहस
20वीं सदी में सोच खुले नस्लवाद से सहनशीलता और बराबर सम्मान की ओर बढ़ी; 1945 के बाद के नागरिक और मानव अधिकार आंदोलनों और जातीय समुदायों की अपनी मेहनत से।
- पक्ष में तर्क: न्याय और गरिमा; समृद्ध संस्कृति, खाना, विचार और व्यापार; जिन्हें सम्मान मिलता है वे वफ़ादार नागरिक बनते हैं।
- विरोध या चिंताएँ: समूह अलग-थलग रह सकते हैं; कुछ को लगता है साझे मूल्य कमज़ोर होते हैं; कुछ रिवाज महिलाओं या बच्चों के बराबर अधिकारों से टकरा सकते हैं।
- सच्चाई: नीतियों को पैसा और जनता का साथ चाहिए (भाषा कक्षाएँ, निष्पक्ष भर्ती, नस्लवाद-विरोधी शिक्षा), वरना वे कागज़ पर ही रह जाती हैं।
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मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संस्कृति: किसी समूह के जीने का साझा तरीका (भाषा, विश्वास, खाना, रिवाज)
- जातीय समूह: साझी संस्कृति और साझे मूल के एहसास वाले लोग
- आत्मसात: अल्पसंख्यक अपनी संस्कृति छोड़कर बहुसंख्यकों की अपनाएँ
- एकीकरण: अपनी संस्कृति रखते हुए समाज में पूरी भागीदारी
- बहुसंस्कृतिवाद: सबके बराबर अधिकारों के साथ कई संस्कृतियों का सम्मान
- मेल्टिंग पॉट = आत्मसात; मोज़ेक / सलाद का कटोरा = बहुसंस्कृतिवाद
- संस्थागत नस्लवाद: कानूनों या संस्थाओं में बना हुआ अन्याय
- मुआवज़ा / निवारण (redress): पुराने अन्याय की भरपाई के लिए सरकारी कदम
हल किए गए उदाहरण
1. एक सरकार स्कूलों में बहुसंख्यक भाषा के अलावा सारी भाषाओं पर रोक लगाती है। यह कौन-सा मॉडल है?
आत्मसात। चरण 1: यह एक अहम जगह (स्कूल) से अल्पसंख्यक संस्कृति हटाता है। चरण 2: बच्चों को बहुसंख्यक संस्कृति अपनाने को मजबूर करता है। इसलिए यह मेल्टिंग पॉट मॉडल है।
2. एक शहर शनिवार को पंजाबी, तमिल और मंदारिन की कक्षाओं को पैसा देता है और नए लोगों को राष्ट्रीय भाषा भी सिखाता है। कौन-सा मॉडल?
एकीकरण के साथ बहुसंस्कृतिवाद: विरासत भाषाएँ बचती हैं (हर रंग रहता है) और सब साझी भाषा सीखते हैं (साझा फ़र्श)।
3. नीति के रूप में बहुसंस्कृतिवाद की एक ताकत और एक कमज़ोरी बताओ।
ताकत: लोग अपनी पहचान रखते और सम्मानित महसूस करते हैं, जिससे भरोसा और वफ़ादारी बढ़ती है। कमज़ोरी: अगर समूह अलग रहें और मिलें नहीं, तो साझे अपनेपन की भावना कमज़ोर हो सकती है। अच्छी नीतियाँ दोनों में संतुलन रखती हैं।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि बहुसंस्कृतिवाद का मतलब "कोई साझे नियम नहीं"। सब एक ही कानून मानते हैं और सबके अधिकार बराबर हैं।
- आत्मसात और एकीकरण को एक समझना। एकीकरण में अपनी संस्कृति छोड़नी नहीं पड़ती।
- यह सोचना कि आत्मसात हमेशा अपनी मर्ज़ी से होता था। पहले यह अक्सर ज़बरदस्ती था, जैसे आवासीय स्कूलों में।
- यह सोचना कि सिर्फ़ नीति से नस्लवाद खत्म हो जाता है। सोच, पैसा और रोज़ का व्यवहार भी ज़रूरी हैं।