Netherlands VWO 6 (eindexamenjaar) Social Sciences
अध्याय: 2
1. Binding
Social cohesion · Political institutions and representation · Political bonds: nation and state · Affective bonds: national identity · Policy on national identity
- सामाजिक बंधन: लोग आपस में कैसे जुड़ते हैं – सामाजिक बंधन वह रिश्ता है जो एक व्यक्ति को दूसरों से जोड़ता है और उसे सहारा और अपनापन देता है। हमारे बंधन परिवार, दोस्ती, काम और साझा नागरिकता के होते हैं। दुर्खीम ने दो तरह की एकजुटता बताई: यांत्रिक (लोग एक जैसे हों, जैसे छोटे गाँव में) और सावयवी (लोग अलग-अलग हों पर एक-दूसरे पर निर्भर हों, जैसे बड़े शहर में)। आज के जीवन में वैयक्तिकरण (रिश्ते चुनने की ज़्यादा आज़ादी) और डिजिटल रिश्ते (चौड़े पर अक्सर हल्के) बढ़े हैं। नौकरी जाना, गरीबी, भेदभाव, दूर जाना या झगड़े से रिश्ते टूटते हैं। स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व, सामाजिक सुरक्षा और भेदभाव के विरुद्ध लड़ाई समाज को जोड़े रखती है।
- राजनीतिक संस्थाएँ: संसदीय, अध्यक्षीय और अर्ध-अध्यक्षीय प्रणाली – हर लोकतंत्र में सत्ता तीन हिस्सों में बँटी होती है: विधायिका क़ानून बनाती है, कार्यपालिका सरकार चलाती है और न्यायपालिका विवाद सुलझाती है। देशों में फ़र्क़ इस बात का है कि सरकार का मुखिया कैसे चुना और हटाया जाता है। संसदीय प्रणाली में लोग संसद चुनते हैं और प्रधानमंत्री को संसद का भरोसा चाहिए, इसलिए संसद उसे हटा सकती है। अध्यक्षीय प्रणाली में लोग राष्ट्रपति और संसद को अलग-अलग चुनते हैं; राष्ट्रपति का कार्यकाल तय होता है और उसे सिर्फ़ महाभियोग से हटाया जा सकता है। अर्ध-अध्यक्षीय प्रणाली दोनों का मेल है। कार्यकाल सीमा किसी एक व्यक्ति को बहुत लंबे समय तक सत्ता में रहने से रोकती है। स्वतंत्र विधायिका क़ानून, बजट, प्रश्न और समितियों से सरकार पर नज़र रखती है।
- विश्व संस्कृतियाँ: संस्कृति कैसे दिखती, बदलती और जुड़ती है – संस्कृति किसी समूह के जीने का साझा ढंग है। हिमखंड की तरह इसका छोटा हिस्सा दिखता है (खाना, पहनावा, संगीत, त्योहार) और बड़ा हिस्सा छिपा रहता है (मूल्य और विश्वास)। कला, त्योहार और रस्में लोगों के लिए काम करती हैं: पहचान, खुशी, याद और विश्वास; और कई संस्कृतियाँ मिलते-जुलते रूप अपनाती हैं। व्यापार, प्रवास और उपनिवेशवाद जैसी बड़ी घटनाएँ संस्कृति बदलती हैं; कुछ भाषाएँ और रिवाज खो जाते हैं और बाद में लौटाए जाते हैं। देश आत्मसात्करण, एकीकरण या बहुसंस्कृतिवाद की नीतियाँ अपनाते हैं, और नवागंतुकों को अक्सर व्यवस्थागत बाधाएँ मिलती हैं। सामाजिक कार्य एक चक्र है: ज़रूरत, योजना-समर्थन, काम, मूल्यांकन।
2. Change
Rationalisation, individualisation, institutionalisation · State formation, democratisation, globalisation · Effects of modernisation · Political views on change
- आधुनिकीकरण के रास्ते: जापान, चीन और कोरिया – जापान, चीन और कोरिया तीनों आधुनिक बने, पर अलग-अलग रास्तों से। 1853 में अमेरिकी जहाज़ों ने जापान को खुलने पर मजबूर किया; 1868 से मेजी सुधार हुए: रेल, कारखाने, स्कूल और सम्राट के नीचे मज़बूत सेना। फिर जापान साम्राज्य बना, दूसरा विश्व युद्ध लड़ा और 1945 में हारा। अमेरिकी कब्ज़े में उसे शांति वाला संविधान मिला और वह फिर अमीर देश बना (1964 ओलंपिक)। चीन में 1911 में सन यात-सेन के नेतृत्व में राजशाही ख़त्म हुई; गृहयुद्ध और जापानी हमले के बाद 1949 में माओ की कम्युनिस्ट पार्टी जीती। माओ की "महान छलांग" और "सांस्कृतिक क्रांति" से अर्थव्यवस्था को नुक़सान हुआ। 1978 से देंग शियाओपिंग ने चार आधुनिकीकरण के साथ बाज़ार खोले और चीन तेज़ी से बढ़ा। कोरिया 1910–45 तक जापान का उपनिवेश रहा, दो हिस्सों में बँटा और युद्ध झेला (1950–53); दक्षिण कोरिया निर्यात वाले कारखानों से बढ़ा और 1987 में लोकतंत्र बना।
- राजनीतिक विचारधारा: राजनीति के बड़े सवालों के अलग-अलग जवाब – राजनीतिक विचारधारा लोगों, समाज और राज्य के बारे में जुड़े हुए विचारों का सेट है, साथ में समाज को बनाए रखने या बदलने की योजना। हम राजनीतिक विचार राजनीतिक समाजीकरण से सीखते हैं (परिवार, स्कूल, दोस्त, मीडिया, घटनाएँ)। “वाम” और “दक्षिण” शब्द 1789 की फ़्रांसीसी सभा में बैठने की जगह से आए। मुख्य विचारधाराएँ हैं उदारवाद (व्यक्ति की आज़ादी और अधिकार), रूढ़िवाद (परंपरा, व्यवस्था, धीमा बदलाव) और समाजवाद (समानता, साझा धन)। इनके अलावा नारीवाद, पर्यावरणवाद, अराजकतावाद, बहुसंस्कृतिवाद और राष्ट्रवाद। दो धुरियों वाला मॉडल (अर्थव्यवस्था और आज़ादी-सत्ता) एक रेखा से बेहतर तस्वीर देता है। विचारधाराएँ दलों के घोषणापत्र और नीतियाँ तय करती हैं, और जनमत सर्वेक्षण से इन्हें नापा जाता है।