Poland Liceum ogólnokształcące, klasa II History of art (extended level)
अध्याय: 5
1. Chronology of art history
Prehistory and ancient art · Medieval art
- प्राचीन कला: गुफ़ा की दीवारों से रोमन मेहराब तक – प्राचीन कला गुफ़ा चित्रों (40,000 साल से ज़्यादा पुराने) से लेकर रोम के पतन (476 ई.) तक फैली है। प्रागैतिहासिक लोगों ने गेरू और कोयले से जानवर और हाथ बनाए, और खंभा-लिंटल से महापाषाण खड़े किए। मिस्र ने अमर जीवन के लिए नियमों में बँधी आकृतियाँ बनाईं। यूनान ने संगमरमर के मंदिरों और मूर्तियों में आदर्श सुंदरता और संतुलन खोजा। रोम ने यूनानी रूप अपनाए पर मेहराब, कंक्रीट और गुंबद जोड़े, और कला से राज्य की ताक़त दिखाई।
- मध्यकालीन कला: मोज़ेक से गोथिक गिरजाघरों तक – यूरोप और भूमध्य क्षेत्र की मध्यकालीन कला लगभग 300 से 1400 ई. तक फैली है। प्रारंभिक ईसाई कला ने रोमन बेसिलिका और कैटाकॉम्ब चित्र अपनाए। बाइज़ेंटाइन कला ने गुंबद, सुनहरे मोज़ेक और आइकन जोड़े। रोमनेस्क चर्च (लगभग 1000–1150) में गोल मेहराब, मोटी दीवारें और छोटी खिड़कियाँ हैं, दरवाज़ों पर शिक्षा देने वाली मूर्तियाँ। गोथिक गिरजाघर (लगभग 1140 से) नुकीले मेहराब, पसलीदार छत और उड़ते पुश्तों से ऊँची पतली दीवारें बनाते हैं जिनमें रंगीन काँच भरा है। भिक्षुओं ने सचित्र पांडुलिपियाँ बनाईं। जॉटो जैसे उत्तर गोथिक चित्रकारों ने कला को जीवंत बनाया और पुनर्जागरण का रास्ता खोला। इस युग की कला मुख्यतः आस्था के लिए थी और न पढ़ पाने वालों को कहानियाँ सिखाती थी।
2. Contexts and changes in art history
Context and placing art in time and space · Patrons, influences and texts about art
- कला का इतिहास: गुफा की दीवारों से आज तक – मनुष्य कम से कम 40,000 साल से कला बना रहा है। प्रागैतिहासिक कला में गुफा की दीवारों पर जानवर और हाथ की छाप हैं। प्राचीन सभ्यताओं ने शासकों, देवताओं और परलोक के लिए कला बनाई। शास्त्रीय परंपराएँ यूनान-रोम, भारत, चीन, अफ़्रीका और अमेरिका में पनपीं। पुनर्जागरण ने परिप्रेक्ष्य और यथार्थ दिया; आधुनिक कला (लगभग 1860 से) ने ये नियम तोड़े; समकालीन कला कोई भी सामग्री अपनाती है। किसी कलाकृति को समझने के लिए वर्णन, विश्लेषण, संदर्भ में व्याख्या और कारण सहित निर्णय करें।
- कला संरक्षण: कला का ख़र्च कौन उठाता है और क्यों – संरक्षक (patron) वह व्यक्ति या समूह है जो कला का ख़र्च उठाता, उसे बनवाता या कलाकार की मदद करता है। इतिहास में संरक्षक बदलते रहे: मंदिर और चर्च, राजा और सम्राट, अमीर व्यापारी और श्रेणियाँ (गिल्ड), फिर डीलरों और ख़रीदारों का खुला बाज़ार, और आज संग्रहालय, सरकारें, फ़ाउंडेशन, कंपनियाँ और ऑनलाइन प्रशंसक। संरक्षक अक्सर विषय, आकार, सामग्री और रंग तक तय करते थे और कला से आस्था, शक्ति, धन या रुचि दिखाते थे। बाज़ार बढ़ने के साथ कलाकारों को ज़्यादा आज़ादी मिली। संग्राहक, आलोचक और लेखक भी तय करते हैं कि कौन-सी कला मूल्यवान है।
3. Masterpieces of architecture and visual art
Recognising and dating works · Genres, functions, symbols and iconography · Formal and comparative analysis
- कला का इतिहास: गुफा की दीवारों से आज तक – मनुष्य कम से कम 40,000 साल से कला बना रहा है। प्रागैतिहासिक कला में गुफा की दीवारों पर जानवर और हाथ की छाप हैं। प्राचीन सभ्यताओं ने शासकों, देवताओं और परलोक के लिए कला बनाई। शास्त्रीय परंपराएँ यूनान-रोम, भारत, चीन, अफ़्रीका और अमेरिका में पनपीं। पुनर्जागरण ने परिप्रेक्ष्य और यथार्थ दिया; आधुनिक कला (लगभग 1860 से) ने ये नियम तोड़े; समकालीन कला कोई भी सामग्री अपनाती है। किसी कलाकृति को समझने के लिए वर्णन, विश्लेषण, संदर्भ में व्याख्या और कारण सहित निर्णय करें।
- प्रतिमा-विज्ञान: कला की शैलियाँ, काम, प्रतीक और चिह्न – किसी कलाकृति को पढ़ने के लिए चार सवाल पूछो। यह किस तरह का चित्र है (शैली: व्यक्ति-चित्र, भू-दृश्य, समुद्र-दृश्य, स्थिर-जीवन, दैनिक दृश्य, धार्मिक, पौराणिक या ऐतिहासिक दृश्य)? यह असलियत के कितना पास है (यथार्थ → सरलीकृत → अमूर्त)? यह किस काम के लिए बनी (पूजा, मृतक-सम्मान, स्मारक, सजावट, शिक्षा, प्रचार)? इसकी चीज़ों का क्या अर्थ है (प्रतीक, रूपक और विशेषता-चिह्न)? इन अर्थों का अध्ययन प्रतिमा-विज्ञान (iconography) है: त्रिशूल, उल्लू या चाबियाँ बता देती हैं कि आकृति कौन है।
- कला आलोचना: कलाकृति को कैसे देखें और परखें – कला आलोचना यानी कला के बारे में सोच-समझकर बात करना। इसके चार चरण हैं: जो दिखे उसका वर्णन, हिस्से कैसे रखे हैं उसका विश्लेषण, अर्थ या भाव की व्याख्या, और कारण देकर निर्णय। आलोचक अलग-अलग दृष्टिकोण (रूप, भाव, संदर्भ) से देखते हैं और सही कला-शब्द इस्तेमाल करते हैं। यही तरीका चित्र, मूर्ति, इमारत, नृत्य, नाटक और फ़िल्म पर भी चलता है।
4. Great artists
Artists and their work · Comparing artists and phases
- कला का इतिहास: गुफा की दीवारों से आज तक – मनुष्य कम से कम 40,000 साल से कला बना रहा है। प्रागैतिहासिक कला में गुफा की दीवारों पर जानवर और हाथ की छाप हैं। प्राचीन सभ्यताओं ने शासकों, देवताओं और परलोक के लिए कला बनाई। शास्त्रीय परंपराएँ यूनान-रोम, भारत, चीन, अफ़्रीका और अमेरिका में पनपीं। पुनर्जागरण ने परिप्रेक्ष्य और यथार्थ दिया; आधुनिक कला (लगभग 1860 से) ने ये नियम तोड़े; समकालीन कला कोई भी सामग्री अपनाती है। किसी कलाकृति को समझने के लिए वर्णन, विश्लेषण, संदर्भ में व्याख्या और कारण सहित निर्णय करें।
- कला आलोचना: कलाकृति को कैसे देखें और परखें – कला आलोचना यानी कला के बारे में सोच-समझकर बात करना। इसके चार चरण हैं: जो दिखे उसका वर्णन, हिस्से कैसे रखे हैं उसका विश्लेषण, अर्थ या भाव की व्याख्या, और कारण देकर निर्णय। आलोचक अलग-अलग दृष्टिकोण (रूप, भाव, संदर्भ) से देखते हैं और सही कला-शब्द इस्तेमाल करते हैं। यही तरीका चित्र, मूर्ति, इमारत, नृत्य, नाटक और फ़िल्म पर भी चलता है।
5. Terms: structure, form, subject and technique
Describing architecture and images · Techniques of art · Architectural elements by style
- कला आलोचना: कलाकृति को कैसे देखें और परखें – कला आलोचना यानी कला के बारे में सोच-समझकर बात करना। इसके चार चरण हैं: जो दिखे उसका वर्णन, हिस्से कैसे रखे हैं उसका विश्लेषण, अर्थ या भाव की व्याख्या, और कारण देकर निर्णय। आलोचक अलग-अलग दृष्टिकोण (रूप, भाव, संदर्भ) से देखते हैं और सही कला-शब्द इस्तेमाल करते हैं। यही तरीका चित्र, मूर्ति, इमारत, नृत्य, नाटक और फ़िल्म पर भी चलता है।
- कला सामग्री और तकनीकें: सही माध्यम कैसे चुनें – कलाकार वह सामग्री (माध्यम) चुनते हैं जिससे मनचाहा असर मिले। हर रंग (पेंट) में पिगमेंट यानी रंगीन चूर्ण और बाइंडर यानी चिपकाने वाला द्रव होता है: तैल रंग में अलसी का तेल, जल रंग में गोंद (गम अरेबिक), एक्रेलिक में एक्रेलिक राल, टेम्परा में अंडा। सूखे माध्यम हैं ग्रेफ़ाइट पेंसिल (H = सख़्त और हल्की, B = नरम और गहरी), चारकोल, पेस्टल और रंगीन पेंसिल। गीले माध्यम हैं स्याही, जल रंग, गुआश, एक्रेलिक और तैल रंग। पारदर्शी माध्यम में नीचे की परत दिखती है, अपारदर्शी उसे ढक देता है। सपोर्ट वह सतह है जिस पर काम होता है: कागज़, कैनवास, लकड़ी, दीवार। त्रि-आयामी काम में मिट्टी से गढ़ना, तराशना, जोड़ना और ढलाई आते हैं; छापा कला में एक ब्लॉक या स्क्रीन से कई प्रतियाँ बनती हैं। डिजिटल माध्यम में टैबलेट, फ़ोटो और वीडियो हैं। अच्छे कलाकार सामग्री को परखते हैं, प्रयोग से काम निखारते हैं और उसे सुरक्षित व टिकाऊ ढंग से इस्तेमाल करते हैं।
- वास्तुकला: इमारतें कैसे खड़ी रहती हैं, दिखती और महसूस होती हैं – वास्तुकला लोगों के लिए इमारतें और जगहें डिज़ाइन करने की कला और विज्ञान है। हर इमारत को अपना भार ज़मीन तक पहुँचाना होता है: स्तंभ-धरन से, मेहराब, वॉल्ट और गुंबद से, या स्टील-कंक्रीट के ढाँचे से। हर युग की अपनी शैली रही: मिस्री, यूनानी-रोमन, बाइज़ेंटाइन, रोमनस्क, गॉथिक, पुनर्जागरण और आधुनिक। वास्तुकार नक़्शों (प्लान, उन्नयन, सेक्शन), मॉडल और CAD से योजना बनाते हैं, और जगह, रोशनी व पहुँच ऐसे सोचते हैं कि जगह सबके काम आए और अच्छी लगे।