प्रागैतिहासिक कला: गुफ़ाएँ और महापाषाण
प्रागैतिहासिक का मतलब है लिखावट से पहले का समय। तब किताबें नहीं थीं, पर लोग कला छोड़ गए।
- गुफ़ा चित्र (लगभग 40,000 साल पहले से): बाइसन, घोड़े, हिरण जैसे जानवर और हाथ की छाप। रंग गेरू (लाल-पीली मिट्टी) और कोयले से बनता था, जिसे चर्बी या पानी में मिलाया जाता था। उदाहरण: लास्को (फ़्रांस), अल्तामीरा (स्पेन), भीमबेटका (भारत)।
- छोटी नक्काशीदार मूर्तियाँ, जैसे विलेनडॉर्फ़ की वीनस, शायद भोजन और संतान की कामना से जुड़ी थीं।
- महापाषाण (महा = बड़ा, पाषाण = पत्थर), लगभग 4000–2000 ई.पू.: अकेले खड़े पत्थर (मेनहिर), पत्थर की मेज़ (डोलमेन) और स्टोनहेंज जैसे पत्थर-घेरे।
खंभा-और-लिंटल
दो खड़े खंभे ऊपर एक सपाट लिंटल (धरन) थामते हैं। दरवाज़ा बनाने का यह सबसे सरल तरीका है। कमज़ोरी: लंबी पत्थर की धरन बीच में झुककर टूट जाती है, इसलिए दरवाज़े संकरे रहते हैं।
मिस्र की कला: अमरता के लिए
मिस्र की कला (लगभग 3000–30 ई.पू.) ज़्यादातर राजाओं (फ़राओ), देवताओं और मृत्यु के बाद के जीवन के लिए थी।
- पिरामिड और मंदिर बहुत बड़े बने ताकि ताक़त दिखे और वे हमेशा टिके रहें।
- आकृतियाँ कड़े नियम मानती हैं: सिर और पैर बगल से, आँख और कंधे सामने से। ज़रूरी व्यक्ति बड़ा बनाया जाता था (इसे पद-अनुसार आकार कहते हैं)।
- मूर्तियाँ सीधी अकड़ी खड़ी हैं, एक पैर आगे, बाँहें शरीर से सटी। लगभग 3,000 साल तक शैली बहुत कम बदली।
यूनानी कला: संतुलन और आदर्श सुंदरता
यूनानी कला (लगभग 900–31 ई.पू.) चार कालों से गुज़री: ज्यामितीय, आर्कैइक, शास्त्रीय, हेलेनिस्टिक।
- मंदिर संगमरमर में खंभा-लिंटल से बने। स्तंभ की तीन शैलियाँ (ऑर्डर): डोरिक (सादा शीर्ष), आयोनिक (कुंडलियाँ), कोरिंथियन (पत्तियाँ)।
- एथेंस का पार्थेनन (447–432 ई.पू.): त्रिकोणीय पेडिमेंट में मूर्तियाँ, नक्काशीदार पट्ट (मेटोप) और जुलूस दिखाती लंबी पट्टी (फ़्रीज़)।
- मूर्तिकला अकड़े खड़े युवक (कूरोस) से सहज कॉन्त्रापोस्तो मुद्रा तक, फिर भावनाओं से भरी हेलेनिस्टिक मूर्तियों तक पहुँची।
- रंगमंच पहाड़ी ढलान में कटे खुले अर्धवृत्त थे, ताकि हज़ारों लोग अभिनेताओं को सुन सकें।
रोमन कला: मेहराब, कंक्रीट और सत्ता
रोमन यूनानी कला के प्रशंसक थे और कई यूनानी मूर्तियों की नकल बनाई। पर उन्होंने निर्माण के नए तरीके जोड़े।
- मेहराब (आर्च): फन्नी जैसे पत्थर (वूसुआर) एक-दूसरे पर दबाव डालते हैं; सबसे ऊपर का कीस्टोन उन्हें बाँधता है। दबाव में पत्थर बहुत मज़बूत है, इसलिए मेहराब धरन से ज़्यादा चौड़ी जगह पाटता है।
- कंक्रीट और गुंबद: रोम के पैंथियन का कंक्रीट गुंबद लगभग 43 मी चौड़ा है।
- इंजीनियरिंग: सीधी पक्की सड़कें, पुल और जलसेतु जो मेहराबों की कतार पर घाटियों के पार पानी ले जाते थे।
- सार्वजनिक भवन: स्नानघर, फ़ोरम (नगर चौक), कोलोसियम जैसे एम्फ़ीथिएटर, और मेहराबों पर बने रंगमंच (सिर्फ़ ढलान पर नहीं)।
- कला और राजनीति: नेताओं की असली जैसी अर्धप्रतिमाएँ, विजय-द्वार और ट्राजन स्तंभ जैसे स्तंभ, जो जीत की कहानी कहते और सम्राट की प्रशंसा करते थे।
घर पर आज़माइए
दो किताबों पर एक स्केल रखिए और बीच में दबाइए: वह झुकता है। अब कार्ड की पट्टी को दो किताबों के बीच मेहराब जैसा मोड़िए और ऊपर दबाइए। मेहराब आपके दबाव को घुमाव के साथ भेज देता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रागैतिहासिक = लिखावट से पहले; गेरू + कोयला = पहले रंग
- महापाषाण = बड़ा पत्थर; खंभा-लिंटल = दो खंभे + एक धरन
- मिस्र का नियम: सिर बगल से, आँख और कंधे सामने से; ज़रूरी = बड़ा
- यूनानी ऑर्डर: डोरिक (सादा), आयोनिक (कुंडली), कोरिंथियन (पत्तियाँ)
- रोमन मेहराब: फन्नी पत्थर + कीस्टोन; पत्थर दबाव में मज़बूत, मुड़ने में कमज़ोर
- रोमन देन: कंक्रीट, गुंबद, जलसेतु, एम्फ़ीथिएटर, असली जैसे चेहरे
हल किए गए उदाहरण
1. एक चित्र में आदमी का सिर और पैर बगल से दिखते हैं, पर आँख और कंधे सामने से। वह आसपास के लोगों से बहुत बड़ा है। यह किस सभ्यता का है और क्यों?
मिस्र का। मिस्री कलाकार तय नियम मानते थे: शरीर का हर भाग सबसे साफ़ कोण से बनता था, और सबसे ज़रूरी व्यक्ति (अक्सर फ़राओ) सबसे बड़ा।
2. रोमन लंबे पुल और जलसेतु क्यों बना सके, जबकि महापाषाण बनाने वाले नहीं?
महापाषाण में पत्थर की धरन होती है, जो मुड़ने पर टूटती है, इसलिए दूरी छोटी रखनी पड़ती है। रोमनों ने मेहराब बनाए: पत्थर सिर्फ़ एक-दूसरे को दबाते हैं, और दबाव में पत्थर बहुत मज़बूत है। कई मेहराब साथ जोड़कर लंबा पुल या जलसेतु बनता है।
3. यूनानी मंदिर और रोमन पैंथियन की तुलना कीजिए।
यूनानी मंदिर संगमरमर में खंभा-लिंटल है, बाहर स्तंभ और ऊपर पेडिमेंट; लोग ज़्यादातर बाहर खड़े होते थे। पैंथियन के आगे यूनानी जैसा स्तंभों वाला बरामदा है, पर पीछे कंक्रीट गुंबद के नीचे बहुत बड़ा गोल कमरा है। रोमनों ने नई सामग्री से बड़ी अंदरूनी जगह बनाई।
आम गलतियाँ
- सोचना कि गुफ़ा चित्र ब्रश और बोतल वाले रंग से बने। लोग पिसी मिट्टी, कोयला, उँगलियाँ, फ़र के टुकड़े और खोखली हड्डी से फूँककर रंग लगाते थे।
- रोमन कला को सिर्फ़ यूनानी कला की नकल कहना। रोमनों ने मूर्तियाँ नकल कीं, पर मेहराब, कंक्रीट गुंबद, जलसेतु और असली जैसे चेहरे खुद बनाए।
- खंभा-लिंटल और मेहराब में उलझना। खंभा-लिंटल में सपाट धरन है; मेहराब घुमावदार है और उसमें कीस्टोन है।
- सोचना कि प्राचीन मूर्तियाँ सादी सफ़ेद थीं। यूनानी और रोमन मूर्तियाँ आमतौर पर रंगी जाती थीं; रंग समय के साथ उतर गया।