Italy Secondaria di secondo grado – classe 4ª Stage design disciplines + workshop
अध्याय: 2
1. Stage design
Designing a set · Geometric and scenotechnical drawing
- मंच-सज्जा: थिएटर, फ़िल्म और टीवी के सेट कैसे बनते हैं – मंच-सज्जा (स्टेज डिज़ाइन, scenography) वह जगह योजना और निर्माण से तैयार करती है जहाँ कहानी घटती है। डिज़ाइनर चित्रित, गढ़ी और ढाँचागत सज्जा चुनता है, मंच की मशीनरी (फ़्लाई टावर, रोशनी) के साथ काम करता है, पैमाने से नक़्शे बनाता है, और कार्यशाला में फ़्लैट, चबूतरे और सामान बनवाता है। फ़िल्म और टीवी सेट केवल वही बनते हैं जो कैमरे को दिखता है; आज डिजिटल ड्राइंग और नई तकनीकें हर चरण में मदद करती हैं।
- परिप्रेक्ष्य चित्रण: क्षितिज, लोप बिंदु और छाया – परिप्रेक्ष्य (पर्सपेक्टिव) चित्रण से सपाट काग़ज़ गहरा दिखता है। आँख की ऊँचाई पर क्षितिज रेखा खींचो, फिर दूर जाती रेखाएँ लोप बिंदुओं पर मिलती हैं। दूर की चीज़ें छोटी बनती हैं (आकार ∝ 1 ÷ दूरी)। एक-बिंदु में एक लोप बिंदु, दो-बिंदु में दो। छाया दो काटती रेखाओं से मिलती है।
2. Stage design workshop
Building the set
- मंच-सज्जा: थिएटर, फ़िल्म और टीवी के सेट कैसे बनते हैं – मंच-सज्जा (स्टेज डिज़ाइन, scenography) वह जगह योजना और निर्माण से तैयार करती है जहाँ कहानी घटती है। डिज़ाइनर चित्रित, गढ़ी और ढाँचागत सज्जा चुनता है, मंच की मशीनरी (फ़्लाई टावर, रोशनी) के साथ काम करता है, पैमाने से नक़्शे बनाता है, और कार्यशाला में फ़्लैट, चबूतरे और सामान बनवाता है। फ़िल्म और टीवी सेट केवल वही बनते हैं जो कैमरे को दिखता है; आज डिजिटल ड्राइंग और नई तकनीकें हर चरण में मदद करती हैं।