प्राकृतिक रोशनी में खुले में चित्र (प्लेन-एयर)
प्लेन-एयर फ़्रांसीसी शब्द है, मतलब "खुली हवा"। इसका मतलब है स्टूडियो में नहीं, बाहर चित्र बनाना। 1800 के दशक में धातु की रंग-ट्यूबों से रंग ले जाना आसान हो गया। क्लॉड मोने जैसे कलाकारों ने खेत, नदियाँ और घास के ढेर बनाए।
बाहर रोशनी बदलती है: सुबह गर्म और नरम, दोपहर तेज़ और छोटी परछाई, शाम नारंगी। प्लेन-एयर चित्रकार को जल्दी काम करके उस पल का एहसास पकड़ना होता है। 3D में सूरज हिलाओ और कैनवास का रंग बदलते देखो।
कला के रूप में प्रकृति की फ़ोटोग्राफ़ी
जब फ़ोटोग्राफ़ी लोकप्रिय हुई तो कुछ कलाकारों ने ब्रश की जगह कैमरा चुना। अच्छी प्रकृति की फ़ोटो नक़ल नहीं होती। फ़ोटोग्राफ़र फ़्रेम (क्या रखना, क्या काटना), रोशनी, क्षण और कोण चुनता है। 3D में एक ही दृश्य के तीन फ़्रेम तीन अलग चित्र देते हैं।
ऐन्सल एडम्स जैसे फ़ोटोग्राफ़रों ने पहाड़ी उद्यानों की श्वेत-श्याम तस्वीरें लीं और लोगों को उन्हें बचाने के लिए भी जगाया।
लैंड आर्ट और पर्यावरण कला
लैंड आर्ट (भू-कला या पर्यावरण कला) वह कला है जो भू-दृश्य में, उसी की चीज़ों से बनती है। जगह सिर्फ़ पृष्ठभूमि नहीं, वह सामग्री और अर्थ का हिस्सा है।
- रॉबर्ट स्मिथसन का स्पाइरल जेटी (1970) अमेरिका के यूटा में खारी झील में पत्थर और मिट्टी का सर्पिल है।
- रिचर्ड लॉन्ग सीधी रेखा में चलते हैं और रास्ते में पत्थर के घेरे और रेखाएँ बनाते हैं।
- एंडी गोल्ड्सवर्दी पत्तों, बर्फ़, पत्थरों और टहनियों से बनाते हैं और मौसम को उन्हें बदलने देते हैं।
ऐसी कई कृतियाँ अस्थायी होती हैं: लहरें, हवा या बर्फ़ उन्हें ले जाती हैं। रिकॉर्ड के लिए अक्सर फ़ोटो रखी जाती है। यह सिखाता है कि प्रकृति हमेशा बदलती है। पत्थरों की ढेरियाँ, फूलों की रंगोली और गाँव की मिट्टी की कला भारत में इसके क़रीब के विचार हैं।
कला, पर्यावरण-चेतना और टिकाऊ अभ्यास
इको आर्ट के दो काम हैं।
- जागरूकता बढ़ाना: कृति प्रदूषित नदी, पिघलती बर्फ़ या खोते जंगल दिखाकर लोगों को समस्या महसूस करा सकती है।
- टिकाऊ होना: कृति बनाने का तरीक़ा भी प्रकृति के प्रति दयालु हो।
टिकाऊ कला-अभ्यास का मतलब: कचरा (बोतलें, कपड़ा, धातु के टुकड़े) दोबारा इस्तेमाल करना, प्राकृतिक या विषरहित रंग लेना, एक बार काम आने वाला प्लास्टिक न लेना, ऐसी कृतियाँ बनाना जिन्हें खोलकर रीसाइकल किया जा सके, और औज़ार साझा करना। चंडीगढ़ का नेक चंद रॉक गार्डन कचरे से बना है; कलाकार एल अनात्सुई बोतलों के ढक्कनों से विशाल दीवार-आवरण बनाते हैं।
हर कलाकार के लिए ईमानदार सवाल: क्या मेरी कला खुद कचरा छोड़ती है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्लेन-एयर = प्राकृतिक रोशनी में खुले में चित्र
- फ़्रेम = दृश्य का वह हिस्सा जो फ़ोटोग्राफ़र चुनता है
- लैंड आर्ट = भू-दृश्य में और उसकी चीज़ों से बनी कला
- इको आर्ट = जागरूकता या टिकाऊ तरीक़े वाली कला
- दोबारा इस्तेमाल + कम इस्तेमाल + रीसाइकल = टिकाऊ कला की तीन आदतें
हल किए गए उदाहरण
1. एक चित्रकार ने सुबह 8 बजे आसमान का अध्ययन पूरा किया और उसी जगह वही रोशनी चाहती है। कल वह दिन के किस समय लौटे?
लगभग उसी समय, सुबह 8 बजे, क्योंकि रोशनी और परछाइयाँ दिन भर बदलती हैं और लगभग उसी समय दोहराती हैं।
2. एक लैंड आर्ट सर्पिल में 24 पत्थर हैं। लहरें 6 बहा ले जाती हैं। कितने बचे और कितने प्रतिशत गए?
24 − 6 = 18 पत्थर बचे। गए = 6 ÷ 24 × 100 = 25%।
3. एक कक्षा 36 प्लास्टिक बोतलें इकट्ठी करती है और हर छोटी मूर्ति में 9 बोतलें लगाती है। कितनी मूर्तियाँ बनेंगी?
36 ÷ 9 = 4 मूर्तियाँ। यही दोबारा इस्तेमाल है: बोतलें कचरे की जगह कला बनीं।
आम गलतियाँ
- प्लेन-एयर को फ़ोटो देखकर चित्र बनाना समझना। इसका मतलब है दृश्य के सामने, मौक़े पर चित्र बनाना।
- प्रकृति की फ़ोटो को केवल नक़ल समझना। फ़्रेम और रोशनी कलात्मक निर्णय हैं।
- लैंड आर्ट को हमेशा रहने वाला मानना। कई कृतियाँ बदलने या मिटने के लिए बनती हैं।
- इको आर्ट को केवल प्रकृति के बारे में कला समझना। सामग्री और प्रक्रिया भी प्रकृति के प्रति दयालु हो।