दो सवाल: विषय के रूप में महिला और कलाकार के रूप में महिला
जब हम कला को लैंगिक दृष्टि से देखते हैं तो दो सरल सवाल पूछते हैं।
- कौन दिखाया गया? यह कृति के विषय के बारे में है।
- किसने बनाया? यह कलाकार के बारे में है।
इनके उत्तर अक्सर अलग होते हैं। हज़ारों चित्रों और मूर्तियों में महिलाएँ दिखती हैं, पर लंबे समय तक उनमें से बहुत कम महिलाओं ने बनाए। 3D दीवार में उदाहरण है: दस में से 7 चित्रों में महिलाएँ हैं, पर केवल 1 महिला ने बनाया। ये संख्याएँ सीखने के लिए बनाया गया नमूना हैं, असली गिनती नहीं।
महिलाओं को कैसे दिखाया गया: महिलाओं के चित्र
कई पुरानी कृतियों में महिलाएँ कुछ तय भूमिकाओं में दिखती हैं: देवी, माँ, देखने लायक सुंदरता, मॉडल, सहायक। चित्र अक्सर देखने वाले को खुश करने के लिए बनता था। कला पर लिखने वाले इसे पुरुष-दृष्टि (male gaze) कहते हैं: दुनिया को पुरुष चित्रकार और पुरुष खरीदार की आँखों से देखना।
आलोचनात्मक दृष्टि का मतलब है रुककर पूछना: यह मुद्रा किसने चुनी? पैसा किसने दिया? क्या छूट गया? जैसे, एक महिला को शांत वस्तु की तरह दिखाया गया, जबकि उसी समय महिलाएँ खेती सँभालती, पढ़ाती, इलाज करती और राज चलाती थीं।
हर चित्र बुरा नहीं होता। मक़सद ध्यान से देखना है और यह समझना कि चित्र एक चुनाव है, पूरा सच नहीं।
इतिहास में महिला कलाकार
हर युग में महिलाओं ने कला बनाई, चाहे कठिनाई रही।
- सोफ़ोनिस्बा एंगुइसोला (इटली, 1500 का दशक) ने जीवंत व्यक्ति-चित्र बनाए और उन्हें राजदरबार बुलाया गया।
- आर्तेमीसिया जेंतिलेस्की (इटली, 1600 का दशक) ने बारोक शैली में पुरानी कथाओं की साहसी महिलाएँ चित्रित कीं।
- रोज़ा बोनर (फ़्रांस, 1800 का दशक) जानवरों के चित्रों के लिए प्रसिद्ध थीं।
- अमृता शेरगिल (भारत, 1900 का दशक) ने यूरोपीय प्रशिक्षण को भारतीय गाँव-जीवन से जोड़ा।
- फ़्रीडा काहलो (मेक्सिको, 1900 का दशक) ने आत्म-चित्रों से अपना दर्द और पहचान कही।
- घरों और गाँवों की महिलाओं ने रज़ाई, कढ़ाई, मधुबनी और वारली कला बनाई। हस्ताक्षर न हो तो भी यह कला है।
बंद दरवाज़े और दिखाई देने का संघर्ष
जाने-माने महिला कलाकार इतने कम क्यों थे? 3D में तीन बंद दरवाज़े दिखते हैं।
- कला-विद्यालय: कई अकादमियाँ महिलाओं को नहीं लेती थीं।
- मॉडल से चित्रण: जीवित मॉडल से मानव शरीर बनाना मुख्य प्रशिक्षण था, और महिलाओं को लंबे समय तक इससे दूर रखा गया।
- बेचना: महिलाओं के लिए स्टूडियो चलाना, अनुबंध करना या बड़ी प्रदर्शनी में आना कठिन था।
1971 में कला-इतिहासकार लिंडा नॉकलिन ने लिखा कि असली समस्या प्रतिभा की नहीं, मौक़ों की कमी की थी। 1985 में गुरिल्ला गर्ल्स नाम के कलाकारों के समूह ने गोरिल्ला का मुखौटा पहनकर पोस्टर लगाए और संग्रहालयों से और महिलाओं को दिखाने को कहा। जैसे दरवाज़े खुले, जाने-माने महिला कलाकार बढ़े। आज हम सभी लिंगों के लिए बराबर वेतन, पुरस्कार और जगह भी माँगते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- विषय = कृति में जो या जो कोई दिखाया गया
- कलाकार = कृति बनाने वाला/वाली
- दृष्टि (gaze) = चित्र किसकी आँखों के लिए बना
- दृश्यता = किसी का काम कितनी बार दिखाया, नामित और याद किया जाए
- हिस्सा (%) = (महिलाओं की कृतियाँ ÷ कुल कृतियाँ) × 100
हल किए गए उदाहरण
1. एक गैलरी में 40 चित्र हैं। 6 महिलाओं के हैं। महिलाओं का प्रतिशत क्या है?
हिस्सा = 6 ÷ 40 × 100 = 15%।
2. 3D दीवार पर 10 में से 7 चित्रों में महिलाएँ हैं और 1 महिला ने बनाया। एक वाक्य में तुलना करो।
सात चित्रों में महिलाएँ दिखती हैं, पर बनाया केवल एक को महिला ने। यानी महिला दिखाई गई 7 बार, बनाने वाली 1 बार।
3. एक फ़िल्म-पोस्टर में महिला कैमरे की ओर मुस्कुरा रही है और उसके पीछे गंभीर पुरुष है। एक आलोचनात्मक सवाल बताओ।
यह मुद्रा किसने चुनी? महिला को देखने के लिए और पुरुष को मज़बूत क्यों दिखाया? पोस्टर चुनने वाली टीम में कोई महिला थी? इनमें से कोई भी अच्छा सवाल है।
आम गलतियाँ
- "कला में महिलाएँ" का मतलब केवल महिलाओं के चित्र समझना। इसमें महिला कलाकार भी आती हैं।
- यह कहना कि पहले महिला कलाकार थीं ही नहीं। बहुत थीं; किताबों में उनके नाम छूटे।
- 3D दीवार की संख्याओं को असली आँकड़े मानना। वे सीखने का नमूना हैं।
- पुराने कलाकारों को आज के नियमों से तौलना। देखो कि उस समय क्या अनुमति थी।