मेसोपोटामिया: ज़मीन और लोग (तीसरी सहस्राब्दी ई.पू.)
मेसोपोटामिया यूनानी शब्द है, अर्थ है 'नदियों के बीच'। यह दजला (टिगरिस) और फ़रात (यूफ्रेटीस) के बीच है, आज के इराक़ क्षेत्र में। तीसरी सहस्राब्दी ई.पू. यानी 3000 से 2001 ई.पू.।
दो तरह की ज़मीन
- उत्तर और उत्तर-पूर्व: हरे मैदान और पहाड़ियाँ, खेती लायक़ बारिश, भेड़-बकरी के लिए चरागाह।
- दक्षिण: बारिश बहुत कम, पर नदी की छोड़ी मिट्टी बहुत उपजाऊ। किसानों ने फ़रात से नहरें खोदीं।
नहरों से दक्षिण में ख़ूब जौ, गेहूँ और खजूर हुए। चरवाहों से दूध, ऊन और मांस मिला। नदियाँ मछली देती थीं और नावों का रास्ता थीं। पहले नगर लगभग 3500 ई.पू. में दक्षिण में ही बने।
हमें कैसे पता?
पुरातत्वविदों ने कई पुराने टीलों की खुदाई की। हज़ारों मिट्टी की पट्टियाँ कीमतें, काम, क़ानून और राजाओं के बारे में बताती हैं।
नगरों का विकास
नगर के लिए खेतों से ज़्यादा चाहिए। ऐसा अतिरिक्त अनाज चाहिए जो खेती न करने वालों को खिला सके, और उसे इकट्ठा करके बाँटने की व्यवस्था।
पहले मंदिर
शुरू में छोटे देवस्थान बने। समय के साथ मंदिर उसी जगह बार-बार और बड़े बने, और ऊँचा सीढ़ीदार ज़िगुरात बन गया। मंदिर के पास ज़मीन, पशु और कारख़ाने थे। वह अनाज, ऊन और तेल जमा करता और मज़दूरों को राशन देता था। इसलिए मंदिर नगर का केंद्र बना।
फिर राजा
बस्तियाँ ज़मीन और पानी के लिए लड़ती थीं। सफल युद्ध-नेता लूट बाँटता और बंदियों से काम लेता। धीरे-धीरे ऐसे नेता स्थायी राजा बन गए। राजाओं ने नगर की दीवारें और महल बनाए, मंदिरों को दान दिया और नहर जैसे बड़े काम करवाए।
नगरों के उदाहरण
- उरुक: सबसे पुराने और बड़े नगरों में से एक; लगभग 3000 ई.पू. में लगभग 250 हेक्टेयर में फैला, मज़बूत दीवार के साथ।
- उर: टेढ़ी-मेढ़ी सँकरी गलियों वाला नगर, कोई नगर योजना नहीं; ख़ज़ानों से भरी शाही क़ब्रें।
- मारी (बाद में, लगभग 2000 ई.पू.): फ़रात के ऊपरी हिस्से पर शाही नगर, जहाँ किसान और चरवाहे मिलते और व्यापार करते।
यानी नगर तीन चीज़ों से बढ़े: नहरों से अतिरिक्त अनाज, मंदिर की व्यवस्था, और राजाओं की ताक़त।
प्रारंभिक शहरी समाज
श्रम विभाजन
नगर में लोग अलग-अलग काम करते हैं: किसान, चरवाहे, कुम्हार, बुनकर, धातुकार, मुहर बनाने वाले, नाविक, व्यापारी, लिपिक, पुजारी और अधिकारी। यही श्रम विभाजन है। धातुकार को तांबा लाने के लिए व्यापारी चाहिए और खाने के लिए किसान। इसलिए शहरी जीवन में सब एक-दूसरे पर निर्भर हैं।
समाज में ऊँच-नीच
समाज बराबर नहीं था। छोटा अभिजात वर्ग (राजा, पुजारी, अधिकारी, अमीर व्यापारी) ज़्यादातर धन रखता था। उर की शाही क़ब्रों में सोना, गहने और सेवक भी दफ़न मिले। ज़्यादातर लोग किसान और मज़दूर थे जिन्हें जौ का राशन मिलता था।
परिवार और घर
एकल परिवार (पिता, माता, बच्चे) आम था। पिता मुखिया था। विवाह में दोनों परिवारों के बीच उपहार दिए जाते; घर आमतौर पर बेटे को मिलता। उर में घरों की खिड़कियाँ गली की ओर नहीं खुलती थीं, बीच में खुला आँगन होता था, और नालियाँ घर के अंदर के गड्ढों में जाती थीं।
व्यापार और मुहरें
दक्षिण में धातु, पत्थर और अच्छी लकड़ी नहीं थी। व्यापारी दूर से तांबा, टिन (कांसे के लिए), पत्थर और लकड़ी लाते, और अनाज, कपड़ा और तेल भेजते। बेलनाकार मुहर (नक़्क़ाशीदार छोटा पत्थर का बेलन) बोरी या घड़े को बंद करने वाली गीली मिट्टी पर घुमाई जाती। छाप से पता चलता कि माल किसने भेजा और खोला नहीं गया।
लेखन की शुरुआत
लेखन गिनती से निकला। पहले मिट्टी के छोटे टोकन सामान को दर्शाते थे। फिर लगभग 3200 ई.पू. में उरुक में मिट्टी की पट्टियों पर चीज़ों (जैसे भेड़, अनाज) और संख्याओं के चिह्न बने।
जल्द ही लिपिक नुकीले सरकंडे से नरम मिट्टी में कील जैसे निशान दबाने लगे। यही कीलाक्षर (क्यूनिफ़ॉर्म) है। पट्टी धूप में सुखाई जाती और हज़ारों साल टिकती।
कीलाक्षर में सैकड़ों चिह्न थे; हर चिह्न एक अक्षर-समूह या शब्द बताता था, एक अकेला अक्षर नहीं। इसलिए लिखना सीखने में लिपिक-पाठशाला में वर्षों लगते थे। पहले सुमेरियन भाषा लिखी गई, बाद में अक्कादी भी। कीलाक्षर लगभग 3,000 वर्ष चला।
लेखन के उपयोग पर बहस
लेखन किस काम आया?
- हिसाब: सबसे पहली और सबसे ज़्यादा पट्टियाँ अनाज, पशु, कपड़े और मज़दूरी की सूचियाँ हैं। मंदिरों और महलों के लेन-देन बहुत थे।
- शासन: राजाओं ने जीत, देवताओं को दान और आदेश लिखवाए। बाद में क़ानून-संहिताएँ बनीं; बेबीलोन के हम्मुराबी (लगभग 1750 ई.पू.) की संहिता प्रसिद्ध है।
- पत्र और अनुबंध: बिक्री, क़र्ज़ और विवाह लिखकर मुहर लगाकर रखे जाते।
- साहित्य: उरुक के राजा गिलगमेश की महाकथा जैसी कहानियों ने नगर और नायकों की याद रखी।
- ज्ञान: 60 पर आधारित गणित, तारों और ग्रहण की सूचियाँ। हमारा 60 मिनट का घंटा और 12 महीने का वर्ष यहीं से आए।
लेखन किसके काम आया?
इतिहासकारों में बहस है।
- मत 1: रिकॉर्ड का साधन। शहरी लेन-देन इतने थे कि याद रखना मुश्किल था। लेखन से व्यापार, कर और अनुबंध भरोसेमंद बने।
- मत 2: ताक़त का साधन। बहुत कम लोग पढ़ सकते थे। लिपिक मंदिर और राजा के लिए काम करते थे। लिखे क़ानून और जीत के लेख राजा को ताक़तवर और न्यायी दिखाते थे। आम लोगों को अपने पत्र पढ़वाने के लिए भी लिपिक चाहिए था।
- मत 3: स्मृति का साधन। कथाओं और राजाओं की सूचियों ने नगर का साझा इतिहास बनाया।
संतुलित निष्कर्ष: लेखन नगरों की ज़रूरत से बना, पर सीखना कठिन था, इसलिए ज़्यादातर पहले से ताक़तवर लोगों के काम आया। फिर भी इसने ऐसा ज्ञान बचाया जो बाद में सबके काम आया।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मेसोपोटामिया = दजला और फ़रात के बीच की ज़मीन
- तीसरी सहस्राब्दी ई.पू. = 3000 से 2001 ई.पू.
- पहले नगर ~3500 ई.पू. (दक्षिण); लेखन ~3200 ई.पू. (उरुक)
- कीलाक्षर = मिट्टी पर सरकंडे से दबाए कील जैसे चिह्न
- ज़िगुरात = सीढ़ीदार मंदिर मीनार
- बेलनाकार मुहर = गीली मिट्टी पर घुमाया जाने वाला पत्थर का बेलन
- नगर का विकास = नहर से अतिरिक्त अनाज + मंदिर + राजा
- श्रम विभाजन = हर व्यक्ति एक तरह का काम
- लेखन के उपयोग: हिसाब, क़ानून, पत्र, साहित्य, विज्ञान
हल किए गए उदाहरण
1. पहले नगर बारिश वाले उत्तर में नहीं, सूखे दक्षिण में क्यों बने?
दक्षिण की नदी वाली मिट्टी बहुत उपजाऊ थी। फ़रात की नहरों से सिंचाई हुई और ख़ूब अतिरिक्त अनाज मिला। यही अनाज खेती न करने वालों को खिला सकता था, इसलिए नगर वहाँ बने।
2. कारण-परिणाम की कड़ी से बताओ कि गाँव नगर कैसे बना।
नहरें → अतिरिक्त अनाज → मंदिर जमा करके बाँटता है → कारीगर, पुजारी जैसे ग़ैर-किसान बढ़ते हैं → बस्तियों में युद्ध → युद्ध-नेता राजा बनते हैं → दीवार, महल, बड़ी आबादी → नगर।
3. व्यापार में बेलनाकार मुहर क्यों उपयोगी थी?
व्यापारी बोरी बंद करने वाली गीली मिट्टी पर मुहर घुमाता। छाप मालिक बताती और अगर टूटी नहीं है तो साबित करती कि माल रास्ते में खोला नहीं गया।
4. पहले लेख कविताएँ नहीं, हिसाब क्यों थे?
मंदिरों में बहुत अनाज, पशु और मज़दूरी का लेन-देन था। हर सौदा याद रखना मुश्किल था, इसलिए रिकॉर्ड चाहिए थे। कहानियाँ तब भी बोलकर सुनाई जाती थीं।
5. कीलाक्षर लगभग 3200 ई.पू. से 75 ई. तक चला। कितने वर्ष?
3200 + 75 − 1 = 3274, यानी लगभग 3,300 वर्ष।
6. लेखन ताक़त का साधन था, इसके पक्ष में एक तर्क दो।
केवल प्रशिक्षित लिपिक पढ़ सकते थे। वे राजा और मंदिर के लिए काम करते थे, और राजा क़ानून और जीत लिखवाकर अपना अधिकार दिखाते थे। आम लोग इन्हीं कुछ लोगों पर निर्भर थे।
आम गलतियाँ
- मेसोपोटामिया को एक देश समझना। यह दो नदियों के बीच की ज़मीन है, जिसमें कई नगर-राज्य थे।
- कहना कि लेखन पहले साहित्य के लिए था। पहले लेख हिसाब और सूचियाँ थे।
- कीलाक्षर को ABC जैसी वर्णमाला समझना। इसमें शब्दों और अक्षर-समूहों के सैकड़ों चिह्न थे।
- सभी मेसोपोटामियाई नगरों को हड़प्पा की तरह योजनाबद्ध मानना। उर में टेढ़ी-मेढ़ी गलियाँ थीं।