South 고등학교 1학년 Korean History 1
अध्याय: 3
1. Understanding pre-modern Korean history
Formation of ancient states · Goryeo government and ruling groups · Founding and politics of Joseon · Changes in late Joseon
- गोर्यो राजवंश (918–1392) – गोर्यो कोरिया का एक राज्य था जो 474 साल चला। वांग गन ने 918 में इसकी नींव रखी और 936 में बँटी हुई ज़मीन को एक किया। इसने थांग जैसी सरकार बनाई, परीक्षा से अधिकारी चुने, सोंग से व्यापार किया, खितान को रोका, फिर सेनापतियों का शासन देखा, मंगोलों से लड़ा और युआन के असर में रहा, जब तक राजा गोंगमिन ने सुधार नहीं किए। 1392 में सेनापति यी सोंग-गे ने इसे समाप्त किया। "कोरिया" नाम गोर्यो से ही निकला है।
- जोसॉन राजवंश (1392-1910) – जोसॉन कोरिया का वह राज्य था जो 1392 से 1910 तक, लगभग 518 साल चला। यह कन्फ़्यूशियाई राज्य था: एक राजा, छह मंत्रालय, निगरानी करने वाले कार्यालय और अधिकारी चुनने की परीक्षा। इसने जापानी (1592) और मांचू (1627, 1636) हमले झेले, कर-सुधार और व्यावहारिक विद्या से खुद को सँभाला, फिर ससुराल-परिवारों के राज और किसान अशांति से कमज़ोर हुआ।
2. Inquiry into pre-modern Korean history
Foreign relations and exchange · Tax systems and farm economy · Social status system · Thought and culture in exchange · Student inquiry project
- पूर्वी एशिया का इतिहास: चीन, कोरिया और जापान ने एक-दूसरे को कैसे बदला – पूर्वी एशिया (चीन, कोरिया, जापान, मंगोलिया और वियतनाम जैसे पास के इलाक़े) का इतिहास आपस में जुड़ा है। स्टेपी के पशुपालक और नदी मैदानों के किसान मिले भी और लड़े भी। शुरुआती राज्य साम्राज्य बने। नज़राना व्यवस्था, चीनी लिपि, कन्फ़्यूशियस के विचार, बौद्ध धर्म और क़ानून संहिताओं ने पूरे क्षेत्र को जोड़ा। व्यापार, मंगोल विजय और 1590–1640 के युद्धों ने इसे बदला, फिर छिंग, जोसॉन और एदो का दौर आया।
- आर्थिक इतिहास: समय के साथ लोग रोज़ी-रोटी कैसे कमाते रहे – आर्थिक इतिहास पढ़ता है कि लोग समय के साथ कैसे उत्पादन, व्यापार और धन का बँटवारा करते रहे। ज़्यादातर इतिहास में अर्थव्यवस्था खेती पर टिकी थी और शासक फ़सल, श्रम या सिक्कों में कर लेते थे। व्यापार, मुद्रा और बैंकों ने आय धीरे-धीरे बढ़ाई। औद्योगिक क्रांति ने प्रति व्यक्ति उत्पादन तेज़ी से बढ़ाया। 20वीं सदी में देशों ने बाज़ार, योजनाबद्ध और मिश्रित मॉडल आज़माए। विकास के साथ संकट भी आए: प्रथम विश्व युद्ध के बाद अति-मुद्रास्फीति, 1929 की महामंदी, 1997 का एशियाई वित्तीय संकट और 2008 का वैश्विक संकट। आज चुनौती है न्यायपूर्ण और टिकाऊ विकास।
- सामाजिक इतिहास: आम लोग कैसे जीते थे – सामाजिक इतिहास सिर्फ़ राजाओं, युद्धों और संधियों का नहीं, आम लोगों के जीवन का अध्ययन है। यह पूछता है कि लोग कैसे काम करते, रहते, खाते, कपड़े पहनते, शादी करते, पूजा करते, बीमार पड़ते और मनोरंजन करते थे, और समाज किन समूहों में बँटा था। आधुनिक समय से पहले ज़्यादातर समाज पिरामिड जैसे थे: ऊपर थोड़े शासक और सामंत, फिर पुरोहित और धनी परिवार, बीच में नगरवासी, व्यापारी और कारीगर, और नीचे किसानों की बहुत बड़ी परत, साथ में कुछ बंधुआ लोग जैसे भूदास या ग़ुलाम। गाँव अपना समुदाय खुद चलाते थे; शहर बाज़ार, गिल्ड और अलग-अलग समूहों के मेल की जगह थे। औद्योगीकरण ने लोगों को खेतों से कारख़ानों में पहुँचाया, मज़दूर वर्ग और बढ़ता मध्य वर्ग बनाया, और यूनियन, नए क़ानून और बाद में कल्याणकारी राज्य लाया। नई रोशनी, यातायात, अख़बार, स्कूल और दवाओं से रोज़ का जीवन बदला। सामाजिक इतिहासकार "छिपे" लोगों (महिलाएँ, ग़रीब, अल्पसंख्यक, प्रवासी) को भी खोजते हैं, और यह भी देखते हैं कि भावनाएँ और रीति-रिवाज कैसे बदले।
- सांस्कृतिक इतिहास: लोगों के विचार, कलाएँ और जीने के ढंग कैसे बदलते हैं – सांस्कृतिक इतिहास इतिहास का वह हिस्सा है जो पढ़ता है कि लोग क्या सोचते, मानते, बनाते और कैसे जीते थे, सिर्फ़ राजाओं और सेनाओं ने क्या किया यह नहीं. इसके चार स्तंभ हैं: विश्वास और धर्म, कलाएँ (साहित्य, संगीत, चित्र, भवन), ज्ञान (शिक्षा, विज्ञान, तकनीक) और रोज़ का जीवन (भोजन, पहनावा, परिवार, त्योहार, खेल). इतिहासकार वस्तुएँ, भवन, किताबें, चित्र और चिट्ठियाँ जैसे स्रोत इस्तेमाल करते हैं. व्यापार मार्गों, यात्राओं, धर्म-प्रचार और प्रवास से विचारों के लेन-देन से संस्कृति बदलती है, जैसे कागज़, अंक और धर्म फैले. छपाई, अख़बार, रेडियो और इंटरनेट जैसी तकनीकों से ज्ञान तेज़ी से फैला, और सबके लिए स्कूलों से दुनिया की साक्षरता 1820 के लगभग 12% से आज लगभग 87% हुई. हर देश में राष्ट्रीय स्कूल, विश्वविद्यालय, वैज्ञानिक संस्थाएँ, लेखक और कलाकार लोगों की पहचान गढ़ते हैं.
- ऐतिहासिक चिंतन: इतिहासकार कैसे काम करते हैं – इतिहास साक्ष्य के सहारे अतीत का अध्ययन है। घटनाओं को समय-रेखा पर क्रम से रखिए और उनके संदर्भ में पढ़िए। प्राथमिक स्रोत (उसी समय बने) और द्वितीयक स्रोत (बाद में बने) दोनों का उपयोग कीजिए। हर स्रोत को परखिए: किसने, कब, क्यों बनाया और क्या छूट गया। घटनाओं के कई कारण होते हैं: धीमे दीर्घकालिक कारण और एक तात्कालिक कारण। परिवर्तन और निरंतरता दोनों देखिए, महत्व तय कीजिए और साक्ष्य के साथ तर्क दीजिए।
3. Efforts to build a modern state
Opening of ports in world context · Reform movements for a modern state · Social and economic change after opening · Loss of sovereignty and resistance
- साम्राज्यवाद: साम्राज्य क्यों फैले और लोगों ने कैसे विरोध किया – साम्राज्यवाद तब होता है जब एक ताक़तवर राज्य युद्ध, संधि या पैसे से दूसरी भूमि और लोगों पर नियंत्रण कर लेता है। उपनिवेशवाद इसका एक रूप है: उपनिवेश पर सीधा शासन। लगभग 1870 से 1914 तक ('नव साम्राज्यवाद') औद्योगिक देशों में अफ़्रीका, एशिया और प्रशांत में उपनिवेशों की होड़ लगी। उन्हें कच्चा माल, बाज़ार, पूँजी लगाने की जगह, बंदरगाह और रुतबा चाहिए था, और इसे नस्लवादी विचारों से सही ठहराया गया। नियंत्रण व्यापार चौकी से असमान संधि और फिर पूरे उपनिवेश तक बढ़ा। उपनिवेशों का धन बाहर गया: कच्चा माल सस्ते में गया, मशीनी माल लौटा, स्थानीय उद्योग गिरे। लोगों ने विद्रोह, सुधार और जन आंदोलनों से विरोध किया, और 1970 के दशक तक ज़्यादातर उपनिवेश स्वतंत्र हो गए। पीछे छूटी सीमाएँ और असमानता आज भी दुनिया को प्रभावित करती हैं।
- आधुनिकीकरण के रास्ते: जापान, चीन और कोरिया – जापान, चीन और कोरिया तीनों आधुनिक बने, पर अलग-अलग रास्तों से। 1853 में अमेरिकी जहाज़ों ने जापान को खुलने पर मजबूर किया; 1868 से मेजी सुधार हुए: रेल, कारखाने, स्कूल और सम्राट के नीचे मज़बूत सेना। फिर जापान साम्राज्य बना, दूसरा विश्व युद्ध लड़ा और 1945 में हारा। अमेरिकी कब्ज़े में उसे शांति वाला संविधान मिला और वह फिर अमीर देश बना (1964 ओलंपिक)। चीन में 1911 में सन यात-सेन के नेतृत्व में राजशाही ख़त्म हुई; गृहयुद्ध और जापानी हमले के बाद 1949 में माओ की कम्युनिस्ट पार्टी जीती। माओ की "महान छलांग" और "सांस्कृतिक क्रांति" से अर्थव्यवस्था को नुक़सान हुआ। 1978 से देंग शियाओपिंग ने चार आधुनिकीकरण के साथ बाज़ार खोले और चीन तेज़ी से बढ़ा। कोरिया 1910–45 तक जापान का उपनिवेश रहा, दो हिस्सों में बँटा और युद्ध झेला (1950–53); दक्षिण कोरिया निर्यात वाले कारखानों से बढ़ा और 1987 में लोकतंत्र बना।