उपनिवेशवाद का अंत: उपनिवेश कैसे आज़ाद हुए
1945 में अफ़्रीका के केवल लगभग चार देश स्वतंत्र थे (मिस्र, इथियोपिया, लाइबेरिया और दक्षिण अफ़्रीका)। बाकी पर यूरोपीय शक्तियों का उपनिवेश के रूप में शासन था। दूसरे विश्व युद्ध के बाद उपनिवेशी शक्तियाँ कमज़ोर थीं, स्वशासन के विचार मज़बूत थे और स्थानीय आंदोलन बढ़े। लीबिया (1951), फिर सूडान, मोरक्को, ट्यूनीशिया (1956) और घाना (1957) स्वतंत्र हुए। 1960, यानी "अफ़्रीका वर्ष", में 17 देश आज़ाद हुए। कुछ राहें शांतिपूर्ण थीं (घाना, विरोध और बातचीत से)। दूसरों में लंबे युद्ध हुए: अल्जीरिया (1962 में स्वतंत्र), अंगोला और मोज़ाम्बिक (1975)। ज़िम्बाब्वे 1980 में और नामीबिया 1990 में आया। आज अफ़्रीका में 54 देश हैं।
तेल और खाड़ी की ताकत
दुनिया का बहुत-सा तेल खाड़ी की भूमि के नीचे है। कभी उस पर विदेशी कंपनियों का नियंत्रण था। 1960 में तेल बेचने वाले पाँच देशों ने बेहतर दाम और ज़्यादा नियंत्रण के लिए ओपेक बनाया। 1973–74 में, इज़राइल और अरब देशों से जुड़े युद्ध के दौरान, ओपेक सदस्यों ने आपूर्ति घटाई और दाम लगभग चार गुना हो गए। यूरोप, अमेरिका, जापान और भारत जैसे तेल आयातकों को झटका लगा; तेल निर्यातकों को भारी आमदनी और राजनीतिक वज़न मिला। कई ने शहरों, सड़कों, स्कूलों और रोज़गार में निवेश किया, पर कुछ अर्थव्यवस्थाएँ तेल पर ज़्यादा निर्भर हैं।
मध्य पूर्व में संघर्ष और बदलाव
- 1948: इज़राइल राज्य बना; पड़ोसी अरब देशों ने युद्ध किया। कई फ़िलिस्तीनियों ने घर छोड़े या खो दिए। दो समुदाय, यहूदी और फ़िलिस्तीनी, आज भी एक ही भूमि पर दावा करते हैं।
- 1956: मिस्र ने स्वेज़ नहर अपने हाथ में ली; ब्रिटेन, फ्रांस और इज़राइल ने हमला किया, पर अमेरिका और सोवियत संघ के दबाव से वे पीछे हटे।
- 1967 और 1973: और युद्ध हुए। 1979 में मिस्र और इज़राइल ने शांति संधि की।
- 1979: ईरान की क्रांति ने बादशाह का शासन खत्म किया और धार्मिक गणराज्य बनाया।
- 2011: अरब वसंत: ट्यूनीशिया, मिस्र और दूसरे देशों में लंबे समय से शासन कर रहे नेताओं के विरुद्ध सड़क पर प्रदर्शन। नतीजे हर देश में अलग रहे।
दक्षिण अफ़्रीका: रंगभेद का अंत
1948 के बाद दक्षिण अफ़्रीका की श्वेत-अल्पसंख्यक सरकार ने रंगभेद के कानूनों से लोगों को नस्ल के आधार पर अलग किया: कहाँ रह सकते हैं, काम कर सकते हैं और पढ़ सकते हैं। अश्वेत बहुसंख्यकों को मत का अधिकार नहीं था। प्रदर्शन, हड़तालें, अफ़्रीकन नेशनल कांग्रेस और दूसरे देशों के प्रतिबंधों ने बदलाव के लिए दबाव डाला। नेल्सन मंडेला 27 साल जेल में रहने के बाद 1990 में रिहा हुए, बातचीत हुई, और अप्रैल 1994 में सभी वयस्कों ने सभी नस्लों के पहले चुनाव में मत दिया। मंडेला राष्ट्रपति बने।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 1945: अफ़्रीका के लगभग 4 स्वतंत्र देश; 1960: लगभग 27; आज: 54
- घाना 1957; अफ़्रीका वर्ष 1960 (17 देश); अल्जीरिया 1962; अंगोला और मोज़ाम्बिक 1975; नामीबिया 1990
- ओपेक की स्थापना 1960; 1973–74 में तेल का दाम लगभग 4 गुना
- इज़राइल 1948; स्वेज़ 1956; युद्ध 1967, 1973; मिस्र-इज़राइल शांति 1979; ईरान 1979
- रंगभेद लगभग 1948–1991; मंडेला रिहा 1990; सर्व-नस्ल चुनाव 1994
हल किए गए उदाहरण
1. 1960 के आसपास इतने अफ़्रीकी देश आज़ाद क्यों हुए?
दूसरे विश्व युद्ध से यूरोपीय शक्तियाँ कमज़ोर हो चुकी थीं; स्थानीय नेता और आंदोलन मज़बूत हो गए थे; अमेरिका और सोवियत संघ पुराने साम्राज्यों के पक्ष में नहीं थे; और 1957 में घाना के उदाहरण के बाद दूसरे लोगों ने भी वही माँगा।
2. 1973 में तेल के दाम की उछाल से यूरोप और जापान को नुकसान और खाड़ी देशों को फ़ायदा क्यों हुआ?
यूरोप और जापान ज़्यादातर तेल आयात करते हैं, इसलिए ऊँचे दाम से लागत बढ़ी और वृद्धि धीमी हुई। खाड़ी देश तेल बेचते हैं, इसलिए उनकी आमदनी तेज़ी से बढ़ी।
3. रंगभेद के अंत की ओर ले जाने वाले तीन चरण बताइए।
दक्षिण अफ़्रीका के भीतर प्रदर्शन और हड़तालें; दूसरे देशों के प्रतिबंध और दबाव; 1990 में मंडेला की रिहाई के बाद बातचीत, और 1994 में सभी नस्लों का चुनाव।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि उपनिवेशवाद का अंत एक ही तारीख को हुआ। यह 1950 के दशक से 1990 और उसके बाद तक चला।
- यह कहना कि अफ़्रीका की सारी आज़ादी शांतिपूर्ण थी। अल्जीरिया, अंगोला और मोज़ाम्बिक में लंबे युद्ध हुए।
- ओपेक (तेल बेचने वालों का समूह, 1960) को नाटो या संयुक्त राष्ट्र से मिला देना।
- मध्य पूर्व के संघर्षों को एक ही कारण का नतीजा समझना। भूमि के दावे, तेल, बाहरी शक्तियाँ और स्थानीय राजनीति सबकी भूमिका रही।