विषय और सवाल चुनना
विषय (theme) कोई बड़ा मुद्दा है जो तुम्हें ज़रूरी लगे: जलवायु और आपदाएँ, बूढ़ी होती आबादी, असमानता, संघर्ष और शांति, प्रवास, या तकनीक। ऐसा विषय चुनो जो अतीत को आज से जोड़े।
फिर एक सवाल बनाओ। अच्छा सवाल साफ़ होता है, इतना छोटा कि उत्तर मिल सके, और "हाँ या न" में नहीं निपटता।
- कमज़ोर: "क्या जलवायु बुरी है?"
- बेहतर: "1850 से कोयला और तेल जलाने से आज मौसम गर्म कैसे हुआ?"
सुझाव: सवाल क्यों, कैसे या क्या बदला से शुरू करो।
स्रोतों से शोध
स्रोत (source) वह है जो अतीत या वर्तमान का सबूत देता है।
- प्राथमिक स्रोत: उसी समय बना। जैसे चिट्ठियाँ, फ़ोटो, क़ानून, नक़्शे, जनगणना के आँकड़े, उस दिन की ख़बरें।
- द्वितीयक स्रोत: बाद में उस समय को पढ़ने वाले ने बनाया। जैसे पाठ्यपुस्तकें, लेख, डॉक्यूमेंट्री।
हर स्रोत को चार सवालों से जाँचो: किसने बनाया? कब? क्यों (बताने, बेचने या मनाने के लिए)? क्या दूसरे स्रोत भी यही कहते हैं? कम से कम दो तरह के स्रोत लो और लिखो कि हर एक कहाँ से मिला।
आँकड़ों में भी सावधानी रखो: इकाई, साल और गिनने वाले को देखो। कटे हुए अक्ष वाला चार्ट भ्रम पैदा कर सकता है।
अतीत से कारण खोजना
आज की ज़्यादातर समस्याओं की जड़ें पुरानी घटनाओं में होती हैं। एक कारण की ज़ंजीर बनाओ: पुराना कारण, फिर घटना, फिर आज की समस्या। उदाहरण: कोयले से चलने वाले कारख़ाने (कारण), शहरों और व्यापार की बढ़त (घटना), ज़्यादा कार्बन डाइऑक्साइड और गरमाती दुनिया (आज की समस्या)।
ध्यान रहे: दो घटनाएँ एक के बाद एक हुईं तो ज़रूरी नहीं कि एक दूसरी का कारण हो। जोड़ का सबूत ढूँढो और बताओ कि तुम कितने पक्के हो।
टिकाऊ भविष्य का सुझाव
टिकाऊ (sustainable) यानी आज के लोगों की ज़रूरतें पूरी हों और कल के लोगों के मौक़े न छिनें। तीन टाँगों वाले स्टूल की तरह सोचो: लोग (सेहत, न्याय, पढ़ाई), अर्थव्यवस्था (काम, व्यापार, बचत) और प्रकृति (हवा, पानी, मिट्टी, जीव)। कोई एक टाँग छोटी हो तो स्टूल झुक जाता है।
अच्छे सुझाव में ये होते हैं: समस्या, कारण की ज़ंजीर, एक-दो साफ़ क़दम, कौन क्या करेगा (तुम, स्कूल, सरकार, कंपनियाँ), और कैसे पता चलेगा कि काम हुआ। लागत और समझौतों की भी ईमानदारी से बात करो।
क़दमों के उदाहरण: घर में बिजली बचाना, पेड़ लगाना, ज़िम्मेदारी से ख़रीदारी, बुज़ुर्गों की मोहल्ले में देखभाल, और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को जाँच-सूची की तरह इस्तेमाल करना।
आज़माओ: अपनी छोटी जाँच
अपने शहर की एक समस्या चुनो (जैसे पानी या कचरा)। एक सवाल लिखो। दो स्रोत ढूँढो: एक प्राथमिक (अपनी खींची फ़ोटो या ख़ुद गिना आँकड़ा) और एक द्वितीयक (कोई ख़बर)। लिखो कि हर एक किसने और क्यों बनाया। तीन कड़ियों की ज़ंजीर बनाओ। अंत में स्टूल की हर टाँग के लिए एक क़दम सुझाओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- चरण: विषय, सवाल, स्रोत, कारण, सुझाव
- प्राथमिक स्रोत = उसी समय बना; द्वितीयक स्रोत = बाद में बना
- स्रोत की जाँच: किसने, कब, क्यों, क्या दूसरे भी सहमत हैं?
- कारण की ज़ंजीर: पुराना कारण, घटना, आज की समस्या
- टिकाऊ स्टूल: लोग + अर्थव्यवस्था + प्रकृति, तीनों मज़बूत
हल किए गए उदाहरण
1. 1960 में लिखी स्कूल की डायरी 1960 के जीवन के लिए प्राथमिक स्रोत है या द्वितीयक?
प्राथमिक। वह उसी समय, उसी समय में रहने वाले ने लिखी।
2. एक कंपनी का विज्ञापन कहता है कि उसका सामान सबसे हरित है। इसे कैसे जाँचोगे?
देखो कि किसने बनाया (कंपनी ने), क्यों (बेचने के लिए), और कोई दूसरा स्वतंत्र स्रोत ढूँढो, जैसे जाँच रिपोर्ट। अकेला विज्ञापन कमज़ोर सबूत है।
3. शहर में ट्रैफ़िक जाम की कारण-ज़ंजीर बनाओ।
पुराना कारण: बहुत लोग शहर में आए। घटना: कारें बढ़ीं और बसें कम रहीं। आज की समस्या: लंबे जाम और गंदी हवा। सुझाव: बेहतर सार्वजनिक परिवहन।
आम गलतियाँ
- बहुत बड़ा विषय चुनना, जैसे "पूरी दुनिया"। उसे छोटा साफ़ सवाल बनाओ।
- सिर्फ़ एक स्रोत लेना, या सिर्फ़ वे जो तुम्हारी बात से मिलते हैं।
- द्वितीयक स्रोत को प्राथमिक समझना, या विज्ञापन पर बिना जाँचे भरोसा करना।
- सिर्फ़ इच्छा लिखकर रुक जाना। सुझाव में क़दम, ज़िम्मेदार लोग और जाँचने का तरीक़ा चाहिए।