वैश्वीकरण और अंतरराष्ट्रीयकरण
अंतरराष्ट्रीयकरण का मतलब है कि देश आपस में व्यापार और लेन-देन करते हैं, पर हर देश अपना बाज़ार, नियम और कंपनियाँ रखता है। दो दुकानदारों के बीच माल की अदला-बदली सोचो।
वैश्वीकरण का मतलब है कि बाज़ार, उत्पादन, पैसा, लोग और जानकारी पूरी दुनिया में जुड़ जाते हैं। एक कंपनी एक देश में डिज़ाइन कर सकती है, कई देशों में पुर्ज़े बना सकती है और सौ देशों में बेच सकती है।
इसे बढ़ाने वाली बातें:
- सस्ते जहाज़, हवाई जहाज़ और कंटेनर।
- इंटरनेट और मोबाइल फ़ोन।
- कम व्यापार रुकावटें (जैसे आयात पर टैक्स)।
- बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, जो काम वहाँ रखती हैं जहाँ वह सबसे अच्छा होता है।
फ़ायदे: ज़्यादा चुनाव, कम दाम, नई नौकरियाँ, विचारों का आदान-प्रदान। नुक़सान: कुछ स्थानीय नौकरियाँ और कंपनियाँ पिछड़ती हैं, देश एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं और एक जगह की मुसीबत (युद्ध, तूफ़ान, वायरस) दूसरों तक फैल सकती है।
जापानी अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति
जापान दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और कारों, मशीन टूल, रोबोट तथा इलेक्ट्रॉनिक पुर्ज़ों और सामग्री में अग्रणी है। मुख्य बातें सरल रूप में:
- कम प्राकृतिक संसाधन: उसे तेल, गैस, कोयला और खाने का बड़ा हिस्सा आयात करना पड़ता है। इसीलिए व्यापार उसके लिए बहुत ज़रूरी है।
- निर्यात: वाहन, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक पुर्ज़े और रसायन, जो दुनिया भर में बिकते हैं। कई कंपनियाँ विदेश में भी कारख़ाने लगाती हैं।
- बूढ़ी होती और घटती आबादी: लगभग हर 10 में से 3 लोग 65 साल या उससे ज़्यादा के हैं और कम बच्चे पैदा होते हैं। यानी कामगार कम और देखभाल व पेंशन का ख़र्च ज़्यादा।
- कई सालों तक धीमी वृद्धि और कम महँगाई, फिर हाल में वेतन और दाम को धीरे-धीरे बढ़ाने की कोशिशें।
- विनिमय दर: दुनिया की घटनाओं से येन का मूल्य बदलता रहता है। कमज़ोर येन से निर्यात विदेशियों के लिए सस्ता और आयात महँगा होता है। मज़बूत येन से उलटा।
इसके जवाब में: ज़्यादा स्वचालन और रोबोट, महिलाओं और बुज़ुर्गों को काम में मदद, ज़्यादा विदेशी कामगारों का स्वागत, और हरित ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों में वृद्धि।
जापान के लिए विनिमय दर कैसे काम करती है
विनिमय दर एक मुद्रा का दूसरी मुद्रा में दाम है। अगर 1 अमेरिकी डॉलर 150 येन का है, तो 3,000,000 येन की कार विदेश में 3,000,000 / 150 = 20,000 डॉलर की पड़ती है। येन मज़बूत हो जाए और 1 डॉलर 100 येन का रह जाए तो वही कार 30,000 डॉलर की होगी। तब विदेशी ख़रीदार दूसरी कारें चुन सकते हैं। उसी समय डॉलर में बिकने वाला तेल येन में सस्ता हो जाता है। इसीलिए जापान येन पर इतनी नज़र रखता है।
करके देखो
3D में करके देखो: येन का स्लाइडर चलाने से पहले अंदाज़ा लगाओ कि येन मज़बूत होने पर कौन-सी पट्टी ऊपर जाएगी। फिर जाँचो।
घर पर करके देखो: अपने कमरे की पाँच चीज़ें (फ़ोन, कमीज़, जूते, बोतल, खिलौना) देखो। लेबल पढ़ो। कितने अलग देशों ने इन्हें बनाया है? तुमने अभी एक छोटा वैश्वीकरण का जाल बना लिया।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- विदेश में दाम = येन में दाम / (येन प्रति डॉलर)
- व्यापार संतुलन = निर्यात - आयात
- आयात निर्भरता (%) = आयात / कुल उपयोग x 100
- मज़बूत येन: निर्यात विदेश में महँगा, आयात घर में सस्ता
हल किए गए उदाहरण
1. एक जापानी मशीन 1,200,000 येन की है। दर 120 येन प्रति डॉलर है। डॉलर में दाम क्या है?
1,200,000 / 120 = 10,000 डॉलर।
2. येन मज़बूत होकर 100 येन प्रति डॉलर हो गया। अब उसी मशीन का डॉलर में दाम क्या है?
1,200,000 / 100 = 12,000 डॉलर। विदेशी ख़रीदारों के लिए यह महँगी है, इसलिए वे कम ख़रीद सकते हैं।
3. किसी देश का निर्यात 90 इकाई और आयात 110 इकाई है। व्यापार संतुलन निकालो।
90 - 110 = -20, यानी 20 इकाई का व्यापार घाटा।
4. एक देश 200 इकाई ऊर्जा इस्तेमाल करता है और उसमें से 170 आयात करता है। कितने प्रतिशत आयात है?
170 / 200 x 100 = 85%। देश आयात पर बहुत निर्भर है।
आम गलतियाँ
- 'वैश्वीकरण' और 'अंतरराष्ट्रीयकरण' को एक ही शब्द मानना। वैश्वीकरण गहरा जुड़ाव है, सिर्फ़ दो देशों का व्यापार नहीं।
- यह सोचना कि मज़बूत मुद्रा हमेशा अच्छी है। इससे निर्यात विदेश में महँगा हो जाता है।
- यह कहना कि संसाधन कम हैं तो जापान में उद्योग नहीं है। वह ऊँचे मूल्य का माल बनाकर और बेचकर कमाता है।
- यह मानना कि बूढ़ी आबादी सिर्फ़ ख़र्च है। इससे देखभाल सेवाओं और रोबोट की माँग भी बनती है।