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समकालीन विश्व में सुरक्षा

सुरक्षा का मतलब है अपनी क़ीमती चीज़ों पर ख़तरे से मुक्ति। पारंपरिक सुरक्षा राज्य को बाहर के सैन्य ख़तरे और भीतर की अव्यवस्था से बचाती है, और इसके उपाय हैं अपरोध, रक्षा, शक्ति-संतुलन और गठबंधन। अपारंपरिक सुरक्षा घेरा बड़ा करके लोगों (मानव सुरक्षा) और पूरी धरती (वैश्विक सुरक्षा) की रक्षा करती है। आतंकवाद, मानवाधिकार हनन, ग़रीबी, प्रवास, महामारी और जलवायु परिवर्तन जैसे नए ख़तरे सीमाएँ पार करते हैं, इसलिए सहयोगी सुरक्षा चाहिए। भारत की रणनीति में सैन्य ताक़त, अंतर्राष्ट्रीय नियम, आंतरिक शांति और विकास चारों हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. देश दीवार के पीछे एक घर है। लाल तीर बाहर की सेना है। पारंपरिक सुरक्षा के चार उपाय चुनिए।
  2. ख़तरा भीतर से भी आता है। कई नए आज़ाद देशों को एक साथ पड़ोसियों से और भीतर के हथियारबंद गुटों से ख़तरा था।
  3. हरा घेरा बड़ा करने के लिए स्लाइडर खिसकाइए: केवल राज्य से, लोगों तक, फिर पूरी धरती तक।
  4. नए ख़तरे धरती के चारों ओर खड़े हैं: आतंकवाद, मानवाधिकार हनन, ग़रीबी और प्रवास, बीमारी और जलवायु परिवर्तन।
  5. सहयोगी सुरक्षा: कई हाथ एक साझे ख़तरे की ओर। लेबल भारत की चार हिस्सों वाली रणनीति बताते हैं।
  6. खुला खेल: कोई ख़तरा चुनिए और देखिए किस तरह की सुरक्षा उसका सबसे अच्छा जवाब है।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

मज़बूत सेना काफ़ी क्यों नहीं?

सेना दूसरी सेना को रोक सकती है, पर वायरस, ग़रीबी या बढ़ते समुद्र को नहीं।

नए देश यूरोप से कम सुरक्षित क्यों थे?

उन्हें एक साथ बाहर पड़ोसियों और भीतर हथियारबंद गुटों का सामना करना पड़ा।

'किसकी सुरक्षा' का क्या अर्थ है?

यह पूछता है कि हम केवल राज्य की रक्षा करें या लोगों और धरती की भी।

बीमारी सुरक्षा का मुद्दा क्यों है?

महामारी युद्ध से ज़्यादा लोगों की जान ले सकती है और पूरी अर्थव्यवस्था रोक सकती है।

क्या सहयोगी सुरक्षा का अर्थ है सेना न रखना?

नहीं। देश सेना रखते हैं, पर पहले मिलकर काम करते हैं और बल आख़िरी उपाय रहता है।

सुरक्षा क्या है?

सुरक्षा का अर्थ है उन चीज़ों पर ख़तरे से मुक्ति जिन्हें हम सबसे क़ीमती मानते हैं, जैसे जीवन, ज़मीन, आज़ादी और भलाई। राजनीति में सुरक्षा का मतलब आमतौर पर बहुत गंभीर ख़तरों से बचाव है, जो न सँभाले जाएँ तो मूल मूल्यों को भारी नुक़सान पहुँचा दें।

पारंपरिक धारणा: बाहरी सुरक्षा

पारंपरिक सोच में सबसे बड़ा ख़तरा दूसरे देश की सैन्य ताक़त है: यह संप्रभुता, आज़ादी और ज़मीन को ख़तरे में डालती है। सरकार के पास तीन रास्ते हैं: हार मानना, हमला रोकना, या रक्षा करना।

पारंपरिक सुरक्षा यह भी मानती है कि बल सीमित हो: युद्ध उचित कारण से हो (आत्मरक्षा या जनसंहार से लोगों को बचाना) और आम नागरिक बचें। यह निरस्त्रीकरण (हथियार छोड़ना, जैसे जैविक और रासायनिक हथियार संधियाँ), अस्त्र नियंत्रण (हथियारों पर सीमा, जैसे NPT, 1968) और विश्वास बहाली (अचानक युद्ध से बचने के लिए जानकारी साझा करना) का समर्थन करती है।

पारंपरिक धारणा: आंतरिक सुरक्षा

आंतरिक सुरक्षा यानी देश के भीतर शांति और व्यवस्था। 1945 के बाद पश्चिमी देश भीतर से लगभग सुरक्षित थे, पर एशिया और अफ़्रीका के कई नए देशों (तीसरी दुनिया) को पड़ोसियों से बाहरी ख़तरा और अलग देश माँगने वाले आंदोलनों से आंतरिक ख़तरा, दोनों एक साथ झेलने पड़े। 1945 के बाद के कई युद्ध देशों के बीच नहीं, बल्कि गृहयुद्ध थे।

अपारंपरिक धारणा: मानव और वैश्विक सुरक्षा

अपारंपरिक सुरक्षा सैन्य ख़तरों से आगे जाती है। यह पूछती है किसकी सुरक्षा और किस ख़तरे से।

ख़तरे के नए स्रोत

सहयोगी सुरक्षा

नए ख़तरे सीमाएँ पार करते हैं, इसलिए सहयोग ज़रूरी है। यह द्विपक्षीय (दो देश), क्षेत्रीय, महाद्वीपीय या वैश्विक हो सकता है। इसमें UN, WHO, विश्व बैंक, IMF, NGO (जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल, रेड क्रॉस), कंपनियाँ और जानी-मानी हस्तियाँ शामिल हैं। बल का प्रयोग केवल आख़िरी उपाय के रूप में हो, जैसे आतंकियों या जनसंहार करने वालों के ख़िलाफ़, और बेहतर है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की मंज़ूरी से हो।

भारत की सुरक्षा रणनीति

  1. सैन्य क्षमता मज़बूत करना: भारत ने पड़ोसियों से युद्ध झेले; 1974 और 1998 में परमाणु परीक्षण किए और 'पहले प्रयोग नहीं' की नीति अपनाई।
  2. अंतर्राष्ट्रीय नियम और संस्थाएँ मज़बूत करना: भारत ने उपनिवेशवाद के अंत, गुटनिरपेक्ष आंदोलन, निरस्त्रीकरण, UN शांति सेना और जलवायु पर क्योटो प्रोटोकॉल का समर्थन किया।
  3. आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियाँ: पूर्वोत्तर, पंजाब और कश्मीर के आंदोलनों को लोकतंत्र, बातचीत और सत्ता की साझेदारी से सँभालना।
  4. अर्थव्यवस्था का विकास: लोगों को ग़रीबी से निकालना और असमानता घटाना, क्योंकि मज़बूत अर्थव्यवस्था और संतुष्ट नागरिक देश को सुरक्षित बनाते हैं।

करके देखें

कॉपी में दो कॉलम बनाइए: 'देश पर ख़तरा' और 'लोगों पर ख़तरा'। आज का अख़बार पढ़कर हर ख़बर को किसी कॉलम में लिखिए। कौन-सा कॉलम लंबा है? फिर 3D के खुले खेल में हर ख़तरे को उसके सबसे अच्छे जवाब से मिलाइए।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. अपरोध और रक्षा में अंतर बताइए।

अपरोध हमले को इतना महँगा बनाकर युद्ध रोकता है; रक्षा युद्ध शुरू हो जाने पर उसे सीमित या ख़त्म करती है।

2. मानव सुरक्षा क्या है?

ऐसी सुरक्षा जो केवल राज्यों की नहीं, लोगों की हिंसा, भूख, बीमारी और आपदा से रक्षा करे और उनकी गरिमा बचाए।

3. आज सहयोगी सुरक्षा क्यों ज़रूरी है?

आतंकवाद, महामारी और जलवायु परिवर्तन जैसे ख़तरे सीमाएँ पार करते हैं, इसलिए कोई देश अकेले नहीं निपट सकता; देशों, UN, WHO और NGO को मिलकर काम करना होगा।

4. भारत की सुरक्षा रणनीति के चार घटक बताइए।

सैन्य क्षमता मज़बूत करना, अंतर्राष्ट्रीय नियम और संस्थाएँ मज़बूत करना, आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों से निपटना, और ग़रीबी घटाने के लिए अर्थव्यवस्था का विकास।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. पारंपरिक सुरक्षा मुख्य रूप से किससे जुड़ी है?
2. नाटो किसका उदाहरण है?
3. NPT (1968) किसका उदाहरण है?
4. युद्ध के कारण देश छोड़कर भागने वाले लोग कहलाते हैं:
5. इनमें से क्या भारत की सुरक्षा रणनीति का हिस्सा नहीं है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पारंपरिक और अपारंपरिक सुरक्षा में क्या अंतर है?

पारंपरिक सुरक्षा राज्य को सैन्य ख़तरे से बचाती है; अपारंपरिक सुरक्षा लोगों और धरती को ग़रीबी, बीमारी और जलवायु परिवर्तन जैसे व्यापक ख़तरों से बचाती है।

पारंपरिक सुरक्षा के घटक कौन-से हैं?

अपरोध, रक्षा, शक्ति-संतुलन और गठबंधन, साथ में बल पर रोक जैसे निरस्त्रीकरण, अस्त्र नियंत्रण और विश्वास बहाली।

सहयोगी सुरक्षा क्या है?

वह सुरक्षा जो देश, अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ और NGO साझे ख़तरों के ख़िलाफ़ मिलकर हासिल करते हैं, बल को आख़िरी उपाय रखते हुए।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

पोलैंडLiceum ogólnokształcące, klasa IIIA world of global interdependence
स्पेन1º BachilleratoChallenges of today's world
सीबीएसई (भारत)कक्षा 12समकालीन विश्व राजनीति
दक्षिण कोरिया고등학교 2학년Peace and security
जर्मनीJahrgangsstufe 12Peace and security in German foreign policy

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