सुरक्षा क्या है?
सुरक्षा का अर्थ है उन चीज़ों पर ख़तरे से मुक्ति जिन्हें हम सबसे क़ीमती मानते हैं, जैसे जीवन, ज़मीन, आज़ादी और भलाई। राजनीति में सुरक्षा का मतलब आमतौर पर बहुत गंभीर ख़तरों से बचाव है, जो न सँभाले जाएँ तो मूल मूल्यों को भारी नुक़सान पहुँचा दें।
पारंपरिक धारणा: बाहरी सुरक्षा
पारंपरिक सोच में सबसे बड़ा ख़तरा दूसरे देश की सैन्य ताक़त है: यह संप्रभुता, आज़ादी और ज़मीन को ख़तरे में डालती है। सरकार के पास तीन रास्ते हैं: हार मानना, हमला रोकना, या रक्षा करना।
- अपरोध: इतना मज़बूत होना कि हमला बहुत महँगा पड़े और युद्ध टल जाए।
- रक्षा: युद्ध शुरू हो जाए तो उसे सीमित करना या ख़त्म करना।
- शक्ति-संतुलन: ताक़त लगभग बराबर रखना ताकि कोई एक देश हावी न हो।
- गठबंधन बनाना: साझा हितों पर कई देशों का मिलकर हमले को रोकना या उससे बचना (जैसे नाटो)। हित बदलें तो गठबंधन भी बदलते हैं।
पारंपरिक सुरक्षा यह भी मानती है कि बल सीमित हो: युद्ध उचित कारण से हो (आत्मरक्षा या जनसंहार से लोगों को बचाना) और आम नागरिक बचें। यह निरस्त्रीकरण (हथियार छोड़ना, जैसे जैविक और रासायनिक हथियार संधियाँ), अस्त्र नियंत्रण (हथियारों पर सीमा, जैसे NPT, 1968) और विश्वास बहाली (अचानक युद्ध से बचने के लिए जानकारी साझा करना) का समर्थन करती है।
पारंपरिक धारणा: आंतरिक सुरक्षा
आंतरिक सुरक्षा यानी देश के भीतर शांति और व्यवस्था। 1945 के बाद पश्चिमी देश भीतर से लगभग सुरक्षित थे, पर एशिया और अफ़्रीका के कई नए देशों (तीसरी दुनिया) को पड़ोसियों से बाहरी ख़तरा और अलग देश माँगने वाले आंदोलनों से आंतरिक ख़तरा, दोनों एक साथ झेलने पड़े। 1945 के बाद के कई युद्ध देशों के बीच नहीं, बल्कि गृहयुद्ध थे।
अपारंपरिक धारणा: मानव और वैश्विक सुरक्षा
अपारंपरिक सुरक्षा सैन्य ख़तरों से आगे जाती है। यह पूछती है किसकी सुरक्षा और किस ख़तरे से।
- मानव सुरक्षा: केवल राज्य की नहीं, लोगों की रक्षा। संकीर्ण अर्थ में हिंसा से बचाव; व्यापक अर्थ में भूख, बीमारी और आपदा से भी (अभाव से मुक्ति), और कुछ लोग मानव गरिमा भी जोड़ते हैं (भय से मुक्ति)।
- वैश्विक सुरक्षा: ऐसे ख़तरे जो पूरी दुनिया पर असर डालें और कोई देश अकेले न सँभाल सके, जैसे ग्लोबल वार्मिंग, आतंकवाद और महामारी।
ख़तरे के नए स्रोत
- आतंकवाद: डर फैलाने के लिए आम लोगों को निशाना बनाने वाली राजनीतिक हिंसा, जैसे वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला (9/11, 2001) और मुंबई हमले (2008)।
- मानवाधिकार: राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक अधिकार, और मूलवासी व उपनिवेशित लोगों के अधिकार। बहस: क्या किसी देश के भीतर हनन रोकने के लिए UN को दख़ल देना चाहिए (मानवीय हस्तक्षेप)?
- वैश्विक ग़रीबी: ज़्यादातर आबादी ग़रीब देशों में बढ़ रही है; अमीर-ग़रीब देशों की खाई प्रवास बढ़ाती है। शरणार्थी युद्ध या आपदा से भागकर सीमा पार जाते हैं; आंतरिक रूप से विस्थापित लोग अपने ही देश में भागते हैं।
- महामारियाँ: HIV-AIDS, टीबी, मलेरिया, बर्ड फ़्लू, सार्स, इबोला और कोविड-19 यात्रा और व्यापार से फैलती हैं।
- पर्यावरणीय ख़तरे: जलवायु परिवर्तन, जंगलों का नाश और पानी की कमी।
सहयोगी सुरक्षा
नए ख़तरे सीमाएँ पार करते हैं, इसलिए सहयोग ज़रूरी है। यह द्विपक्षीय (दो देश), क्षेत्रीय, महाद्वीपीय या वैश्विक हो सकता है। इसमें UN, WHO, विश्व बैंक, IMF, NGO (जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल, रेड क्रॉस), कंपनियाँ और जानी-मानी हस्तियाँ शामिल हैं। बल का प्रयोग केवल आख़िरी उपाय के रूप में हो, जैसे आतंकियों या जनसंहार करने वालों के ख़िलाफ़, और बेहतर है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की मंज़ूरी से हो।
भारत की सुरक्षा रणनीति
- सैन्य क्षमता मज़बूत करना: भारत ने पड़ोसियों से युद्ध झेले; 1974 और 1998 में परमाणु परीक्षण किए और 'पहले प्रयोग नहीं' की नीति अपनाई।
- अंतर्राष्ट्रीय नियम और संस्थाएँ मज़बूत करना: भारत ने उपनिवेशवाद के अंत, गुटनिरपेक्ष आंदोलन, निरस्त्रीकरण, UN शांति सेना और जलवायु पर क्योटो प्रोटोकॉल का समर्थन किया।
- आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियाँ: पूर्वोत्तर, पंजाब और कश्मीर के आंदोलनों को लोकतंत्र, बातचीत और सत्ता की साझेदारी से सँभालना।
- अर्थव्यवस्था का विकास: लोगों को ग़रीबी से निकालना और असमानता घटाना, क्योंकि मज़बूत अर्थव्यवस्था और संतुष्ट नागरिक देश को सुरक्षित बनाते हैं।
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मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पारंपरिक सुरक्षा: राज्य को सैन्य ख़तरे से बचाना
- उपाय: अपरोध, रक्षा, शक्ति-संतुलन, गठबंधन
- बल पर रोक: निरस्त्रीकरण, अस्त्र नियंत्रण (NPT 1968), विश्वास बहाली
- अपारंपरिक: मानव सुरक्षा + वैश्विक सुरक्षा
- नए ख़तरे: आतंकवाद, मानवाधिकार, ग़रीबी/प्रवास, महामारी, पर्यावरण
- भारत: सेना + अंतर्राष्ट्रीय नियम + आंतरिक सुरक्षा + विकास
हल किए गए उदाहरण
1. अपरोध और रक्षा में अंतर बताइए।
अपरोध हमले को इतना महँगा बनाकर युद्ध रोकता है; रक्षा युद्ध शुरू हो जाने पर उसे सीमित या ख़त्म करती है।
2. मानव सुरक्षा क्या है?
ऐसी सुरक्षा जो केवल राज्यों की नहीं, लोगों की हिंसा, भूख, बीमारी और आपदा से रक्षा करे और उनकी गरिमा बचाए।
3. आज सहयोगी सुरक्षा क्यों ज़रूरी है?
आतंकवाद, महामारी और जलवायु परिवर्तन जैसे ख़तरे सीमाएँ पार करते हैं, इसलिए कोई देश अकेले नहीं निपट सकता; देशों, UN, WHO और NGO को मिलकर काम करना होगा।
4. भारत की सुरक्षा रणनीति के चार घटक बताइए।
सैन्य क्षमता मज़बूत करना, अंतर्राष्ट्रीय नियम और संस्थाएँ मज़बूत करना, आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों से निपटना, और ग़रीबी घटाने के लिए अर्थव्यवस्था का विकास।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि अपारंपरिक सुरक्षा सेना को नकारती है। यह पुराने ख़तरों में नए ख़तरे जोड़ती है।
- निरस्त्रीकरण (हथियार छोड़ना) और अस्त्र नियंत्रण (हथियार सीमित करना) को एक मानना।
- शरणार्थी और आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों को एक समझना। शरणार्थी सीमा पार करते हैं; विस्थापित देश के भीतर रहते हैं।
- भारत की रणनीति में केवल सैन्य बातें लिखना। विकास और अंतर्राष्ट्रीय नियम भी उतने ही ज़रूरी हिस्से हैं।