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पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन

जलवायु परिवर्तन और ओज़ोन क्षरण जैसी समस्याएँ सीमाएँ पार करती हैं, इसलिए ये विश्व राजनीति का हिस्सा बनीं। खुला समुद्र, वायुमंडल, अंटार्कटिका और बाहरी अंतरिक्ष जैसी वैश्विक साझी संपदा किसी की नहीं है और इन्हें बचाना कठिन है। साझी पर अलग-अलग ज़िम्मेदारी का सिद्धांत कहता है कि सब देश क़दम उठाएँ, पर पहले प्रदूषण करने वाले अमीर देश ज़्यादा करें। भारत प्रति व्यक्ति कम उत्सर्जन और विकास के अधिकार पर ज़ोर देता है और स्वच्छ ऊर्जा पर काम करता है। पर्यावरण आंदोलन, तेल-खनिज-पानी पर संघर्ष और मूलवासियों के अधिकार भी इसी राजनीति का हिस्सा हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. चार वैश्विक साझी संपदाएँ दिखती हैं: खुला समुद्र, वायुमंडल, अंटार्कटिका और बाहरी अंतरिक्ष। इनका मालिक कोई एक देश नहीं।
  2. एक तराज़ू: वर्षों का स्लाइडर खिसकाइए। अमीर देशों का पुराना उत्सर्जन (लाल) विकासशील देशों (नारंगी) से कहीं ज़्यादा जमा होता है। इसीलिए ज़िम्मेदारियाँ अलग हैं।
  3. भारत का पक्ष: भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन (हरा) अमीर देशों के औसत (लाल) से बहुत कम है। फिर भी भारत स्वच्छ और सौर ऊर्जा से क़दम उठाता है।
  4. पर्यावरण आंदोलन: गाँव वाले पेड़ों की रक्षा करते हैं (चिपको) और लोग बड़े बाँधों के ख़िलाफ़ नदी के साथ खड़े हैं (नर्मदा)।
  5. संसाधनों की राजनीति और मूलवासी: तेल और पानी पर होड़ होती है, और आदिवासी अपनी ज़मीन बचाते हैं जो उनका जीवन है।
  6. खुला खेल: साझे समुद्र में मछली पकड़ने वाली नावें बढ़ाइए और मछलियाँ ग़ायब होते देखिए। यही साझी संपदा की त्रासदी है।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

वैश्विक साझी संपदा का मालिक कौन है?

कोई एक देश नहीं। ये सबकी साझी हैं, इसीलिए इनके लिए समझौते चाहिए।

जब प्रदूषण सबकी समस्या है, तो अमीर देश ज़्यादा क्यों दें?

क्योंकि दो सदियों में ज़्यादातर गैसें उन्होंने छोड़ीं और उनके पास सुधारने के लिए ज़्यादा पैसा व तकनीक है।

क्या भारत ज़िम्मेदारी से बच रहा है?

नहीं। भारत ने मुख्य समझौतों पर हस्ताक्षर किए और स्वच्छ ऊर्जा बढ़ा रहा है, पर प्रति व्यक्ति उत्सर्जन के आधार पर न्याय माँगता है।

क्या आम लोग पर्यावरण नीति बदल सकते हैं?

हाँ। चिपको जैसे आंदोलनों से जंगल बचाने के नियम बने।

आदिवासी कुछ खदानों और बाँधों का विरोध क्यों करते हैं?

उनकी ज़मीन, जंगल और जीवन-शैली छिन जाती है, और अक्सर फ़ायदों में उचित हिस्सा नहीं मिलता।

हर कोई समुद्र से ज़रूरत भर क्यों नहीं ले सकता?

अगर बहुत लोग बहुत ज़्यादा लें तो संसाधन सबके लिए ख़त्म हो जाता है। यही साझी संपदा की त्रासदी है।

पर्यावरण राजनीतिक मुद्दा क्यों बना

खेती की ज़मीन की उर्वरता घट रही है, मीठा पानी कम है, जंगल कट रहे हैं, ओज़ोन परत पतली हुई और जलवायु गर्म हो रही है। ये समस्याएँ सीमाएँ पार करती हैं, इसलिए कोई देश अकेले इन्हें नहीं सुलझा सकता। 1960 के दशक से ये विश्व राजनीति का हिस्सा बनीं। क्लब ऑफ़ रोम की रिपोर्ट 'लिमिट्स टू ग्रोथ' (1972) ने संसाधनों के उपयोग पर चेतावनी दी। रियो डी जनेरियो में पृथ्वी सम्मेलन (1992) से जलवायु परिवर्तन और जैव-विविधता पर समझौते और एजेंडा 21 निकला, जो टिकाऊ विकास (ऐसा विकास जो भविष्य को नुक़सान न पहुँचाए) की बात करता है।

वैश्विक साझी संपदा

साझी संपदा वे संसाधन हैं जिनका मालिक एक व्यक्ति नहीं, पूरा समुदाय होता है। वैश्विक साझी संपदा वे इलाक़े हैं जो किसी एक देश के नियंत्रण से बाहर हैं और सबके साझे हैं: पृथ्वी का वायुमंडल, अंटार्कटिका, समुद्र-तल और खुला समुद्र, और बाहरी अंतरिक्ष।

साझी पर अलग-अलग ज़िम्मेदारियाँ

उत्तर के अमीर देश चाहते हैं कि प्रदूषण घटाने का काम सब बराबर बाँटें। दक्षिण के विकासशील देश कहते हैं कि ज़्यादातर नुक़सान दो सदियों में औद्योगिक देशों ने किया, इसलिए उन्हें ज़्यादा करना चाहिए।

रियो घोषणा (1992) ने साझी परंतु अलग-अलग ज़िम्मेदारियों (CBDR) का सिद्धांत माना: धरती की रक्षा सब देश करें, पर विकसित देशों की ज़िम्मेदारी ज़्यादा है क्योंकि उन्होंने पहले प्रदूषण किया और उनके पास ज़्यादा पैसा व तकनीक है।

जलवायु परिवर्तन पर UN फ़्रेमवर्क कन्वेंशन (1992) और क्योटो प्रोटोकॉल (1997) ने औद्योगिक देशों के लिए उत्सर्जन घटाने के लक्ष्य तय किए; क्योटो में भारत और चीन को कटौती से छूट थी। पेरिस समझौता (2015) हर देश से अपने लक्ष्य तय करने को कहता है।

पर्यावरण पर भारत का पक्ष

पर्यावरण आंदोलन

कई सबसे मज़बूत क़दम सरकारों से नहीं, जन-आंदोलनों से आए।

ये आंदोलन विविध हैं, अक्सर स्थानीय लोग इन्हें चलाते हैं, और इन्होंने राजनीति में नए विचार और काम के नए तरीक़े जोड़े।

संसाधनों की भू-राजनीति

संसाधनों की भू-राजनीति का सवाल है: किसे, कौन-सा संसाधन, कब और कैसे मिले।

मूलवासियों के अधिकार

UN के अनुसार मूलवासी उन लोगों के वंशज हैं जो किसी जगह पर दूसरों के आकर बसने से पहले रहते थे। इनमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ़िलीपींस और भारत (अक्सर आदिवासी या जनजातीय लोग कहलाते हैं) के समुदाय शामिल हैं।

करके देखें

एक दिन की 'ऊर्जा डायरी' रखिए: हर बार जब आपने बिजली, ईंधन या प्लास्टिक इस्तेमाल किया, लिखिए। निशान लगाइए कि किन्हें घटा सकते हैं। फिर 3D में नावों का स्लाइडर खिसकाइए और अपने शब्दों में साझी संपदा की त्रासदी समझाइए।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. वैश्विक साझी संपदा क्या है? दो उदाहरण दीजिए।

वे इलाक़े या संसाधन जो किसी एक देश के नियंत्रण से बाहर हैं और सबके साझे हैं, जैसे वायुमंडल और अंटार्कटिका (खुला समुद्र और बाहरी अंतरिक्ष भी)।

2. 'साझी परंतु अलग-अलग ज़िम्मेदारियाँ' समझाइए।

सभी देश पर्यावरण की रक्षा करें, पर विकसित देश ज़्यादा करें क्योंकि पुराना ज़्यादातर प्रदूषण उन्होंने किया और उनके पास ज़्यादा पैसा व तकनीक है।

3. जलवायु परिवर्तन पर भारत के पक्ष के दो बिंदु बताइए।

भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन बहुत कम है, इसलिए मुख्य बोझ अमीर देशों पर हो; विकासशील देशों को बढ़ने की जगह और पैसा-तकनीक मिलनी चाहिए।

4. मूलवासी कई विकास परियोजनाओं का विरोध क्यों करते हैं?

खदानें और बाँध अक्सर उनकी ज़मीन और जंगल ले लेते हैं, उन्हें विस्थापित करते और उनकी जीवन-शैली नष्ट करते हैं, जबकि उन्हें फ़ायदा कम मिलता है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. 1992 का पृथ्वी सम्मेलन कहाँ हुआ?
2. इनमें वैश्विक साझी संपदा कौन-सी है?
3. मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल किसकी रक्षा करता है?
4. चिपको आंदोलन किससे जुड़ा है?
5. CBDR के अनुसार विकसित देशों को:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कक्षा 12 राजनीति विज्ञान में वैश्विक साझी संपदा क्या है?

किसी एक देश के नियंत्रण से बाहर और सबके साझे इलाक़े: वायुमंडल, अंटार्कटिका, खुला समुद्र और समुद्र-तल, और बाहरी अंतरिक्ष।

साझी परंतु अलग-अलग ज़िम्मेदारियों का क्या अर्थ है?

पर्यावरण बचाने का कर्तव्य सब देशों का है, पर विकसित देश अपने पुराने प्रदूषण और ज़्यादा क्षमता के कारण ज़्यादा करें।

जलवायु परिवर्तन पर भारत का पक्ष क्या है?

भारत वैश्विक कार्रवाई और CBDR का समर्थन करता है, अपने कम प्रति व्यक्ति उत्सर्जन और विकास के अधिकार पर ज़ोर देता है, और देश में स्वच्छ ऊर्जा बढ़ाता है।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 12समकालीन विश्व राजनीति

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