South 고등학교 2학년 Understanding International Relations
अध्याय: 4
1. Understanding international relations
Formation of modern international relations · Realism and liberalism · Actors in world politics
- अंतरराष्ट्रीय संबंध: देश एक-दूसरे से कैसे व्यवहार करते हैं – अंतरराष्ट्रीय संबंध (IR) पढ़ता है कि राज्य और दूसरे कर्ता (अंतरराष्ट्रीय संगठन, कंपनियाँ, NGO) आपस में कैसे व्यवहार करते हैं। राज्य संप्रभु हैं और कोई विश्व सरकार नहीं है, इसलिए हर राज्य विदेश नीति से अपना राष्ट्रीय हित साधता है: कूटनीति, व्यापार, सहायता, गठबंधन और, सबसे बुरे हाल में, बल। ज़मीन, संसाधन, शक्ति और पहचान पर टकराव और सुरक्षा दुविधा से संघर्ष होता है। साझा फ़ायदे, संधियों, अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संगठनों से सहयोग बढ़ता है। यथार्थवाद शक्ति पर, उदारवाद सहयोग पर ज़ोर देता है। शांति बातचीत, मध्यस्थता, शांति सेना और न्याय से बनती है।
- अंतर्राष्ट्रीय संगठन – अंतर्राष्ट्रीय संगठन देशों को शांति, पैसे, व्यापार और अधिकारों पर मिलकर काम करने में मदद करते हैं। राष्ट्र संघ की विफलता के बाद 1945 में संयुक्त राष्ट्र बना; इसके छह मुख्य अंग हैं और सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्यों के पास वीटो है। 1945 के बाद दुनिया बदल गई है, इसलिए UN, ख़ासकर सुरक्षा परिषद में सुधार ज़रूरी है, और भारत स्थायी सीट माँगता है। IMF, विश्व बैंक, WTO, ILO और IAEA पैसे, विकास, व्यापार, मज़दूरों और परमाणु सुरक्षा को देखते हैं, और एमनेस्टी जैसे NGO मानवाधिकारों पर नज़र रखते हैं।
2. Balanced development and mutual benefit
Inequality between countries · Fair trade and development aid · Korea's standing in the world
- विकास का भूगोल: कोई जगह अमीर या गरीब क्यों? – विकास का मतलब है लोग बेहतर जीवन जिएँ: ज़्यादा आय, अच्छा स्वास्थ्य, ज़्यादा पढ़ाई और चुनने की आज़ादी। इसे सूचकों से नापते हैं, जैसे प्रति व्यक्ति GNI, जीवन प्रत्याशा और स्कूली वर्ष, और मानव विकास सूचकांक (HDI, 0 से 1) से, जो तीनों को जोड़ता है। विकास असमान है: अमीर कोर और गरीब परिधि दुनिया के क्षेत्रों के बीच भी हैं और एक देश के अंदर भी। जहाँ अमीर और गरीब इलाक़े मिलते हैं, वहाँ मज़दूर, सामान, कारख़ाने और पैसे का आना-जाना होता है, जिसके अच्छे और बुरे दोनों असर हैं। विकास का एक ही मॉडल नहीं: देश निर्यात कारख़ानों, सेवाओं, या खनन और खेती से बढ़े हैं, हर रास्ते के अपने जोखिम हैं।
- वैश्विक न्याय: उचित व्यापार, सहायता और असमानता घटाना – वैश्विक न्याय यह पूछता है कि दुनिया के देशों और लोगों के बीच क्या उचित है। आमदनी में बहुत असमानता है। उचित व्यापार (fair trade) उत्पादकों को सही दाम देता है, और विकास सहायता (ODA) ग़रीब देशों को स्कूल, स्वास्थ्य और रोज़गार बनाने में मदद करती है। असली न्याय के लिए शांति, ईमानदार नियम और ग़रीब देशों की आवाज़ भी ज़रूरी है।
- अंतरराष्ट्रीय संबंध: देश एक-दूसरे से कैसे व्यवहार करते हैं – अंतरराष्ट्रीय संबंध (IR) पढ़ता है कि राज्य और दूसरे कर्ता (अंतरराष्ट्रीय संगठन, कंपनियाँ, NGO) आपस में कैसे व्यवहार करते हैं। राज्य संप्रभु हैं और कोई विश्व सरकार नहीं है, इसलिए हर राज्य विदेश नीति से अपना राष्ट्रीय हित साधता है: कूटनीति, व्यापार, सहायता, गठबंधन और, सबसे बुरे हाल में, बल। ज़मीन, संसाधन, शक्ति और पहचान पर टकराव और सुरक्षा दुविधा से संघर्ष होता है। साझा फ़ायदे, संधियों, अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संगठनों से सहयोग बढ़ता है। यथार्थवाद शक्ति पर, उदारवाद सहयोग पर ज़ोर देता है। शांति बातचीत, मध्यस्थता, शांति सेना और न्याय से बनती है।
3. Peace and security
State of peace and security · Human, national, global security · Korea's security environment
- समकालीन विश्व में सुरक्षा – सुरक्षा का मतलब है अपनी क़ीमती चीज़ों पर ख़तरे से मुक्ति। पारंपरिक सुरक्षा राज्य को बाहर के सैन्य ख़तरे और भीतर की अव्यवस्था से बचाती है, और इसके उपाय हैं अपरोध, रक्षा, शक्ति-संतुलन और गठबंधन। अपारंपरिक सुरक्षा घेरा बड़ा करके लोगों (मानव सुरक्षा) और पूरी धरती (वैश्विक सुरक्षा) की रक्षा करती है। आतंकवाद, मानवाधिकार हनन, ग़रीबी, प्रवास, महामारी और जलवायु परिवर्तन जैसे नए ख़तरे सीमाएँ पार करते हैं, इसलिए सहयोगी सुरक्षा चाहिए। भारत की रणनीति में सैन्य ताक़त, अंतर्राष्ट्रीय नियम, आंतरिक शांति और विकास चारों हैं।
4. Resolving international disputes
Diplomacy and international organisations · International law and its sources · Regional integration
- अंतर्राष्ट्रीय संगठन – अंतर्राष्ट्रीय संगठन देशों को शांति, पैसे, व्यापार और अधिकारों पर मिलकर काम करने में मदद करते हैं। राष्ट्र संघ की विफलता के बाद 1945 में संयुक्त राष्ट्र बना; इसके छह मुख्य अंग हैं और सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्यों के पास वीटो है। 1945 के बाद दुनिया बदल गई है, इसलिए UN, ख़ासकर सुरक्षा परिषद में सुधार ज़रूरी है, और भारत स्थायी सीट माँगता है। IMF, विश्व बैंक, WTO, ILO और IAEA पैसे, विकास, व्यापार, मज़दूरों और परमाणु सुरक्षा को देखते हैं, और एमनेस्टी जैसे NGO मानवाधिकारों पर नज़र रखते हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय कानून: राज्य नियम कैसे बनाते और निभाते हैं – अंतर्राष्ट्रीय कानून वे नियम हैं जिन्हें राज्य (और अंतर्राष्ट्रीय संगठन) आपसी व्यवहार में बाध्यकारी मानते हैं। कोई विश्व संसद या विश्व पुलिस नहीं है, इसलिए राज्य खुद नियम बनाते हैं, मुख्य रूप से संधियों और रिवाजों से, साथ में कानून के सामान्य सिद्धांत; अदालती फ़ैसले और विद्वानों के लेख नियम समझने में मदद करते हैं। यह बराबर संप्रभु राज्यों के विचार (1648) से संयुक्त राष्ट्र (1945) और मानव अधिकार कानून (1948 से) तक बढ़ा। संयुक्त राष्ट्र और उसका अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय शांति बनाए रखने और विवाद सुलझाने में मदद करते हैं। राज्य बातचीत, मध्यस्थता, पंच निर्णय या अदालत से विवाद सुलझाते हैं। हर देश तय करता है कि संधि उसके अपने (नगरपालिका/राष्ट्रीय) कानून में कैसे आए: एकवादी देश सीधे लागू करते हैं; भारत और ब्रिटेन जैसे द्वैतवादी देशों में संसद का अधिनियम चाहिए।
- क्षेत्रीय एकीकरण – क्षेत्रीय एकीकरण का मतलब है पड़ोसी देश कदम-दर-कदम एक साथ आते हैं। वे कम कर के साथ व्यापार करते हैं, एक बाज़ार बनाते हैं और कभी-कभी एक मुद्रा और नियम भी साझा करते हैं। उदाहरण: यूरोपीय संघ (EU), आसियान (ASEAN), USMCA। इससे सामान सस्ता होता है, पर देशों को कुछ अधिकार छोड़ने पड़ते हैं।