France Terminale History-Geography
अध्याय: 8
1. History 1: 1929–1945
The 1929 crisis · Totalitarian regimes · World War II
- महामंदी (1929–1939) – महामंदी बीसवीं सदी का सबसे बड़ा आर्थिक संकट था। यह अक्टूबर 1929 में अमेरिका के वॉल स्ट्रीट शेयर बाज़ार के गिरने से शुरू हुई। शेयर गिरे, बैंक डूबे, कारखाने बंद हुए और 1933 तक अमेरिका में हर चार में से एक मज़दूर बेरोज़गार था। देशों ने आयात पर भारी कर (टैरिफ़) लगाए, जिससे दुनिया का व्यापार लगभग दो-तिहाई घट गया और संकट यूरोप, एशिया, अफ़्रीका तक फैल गया। अमेरिका ने न्यू डील अपनाई; जर्मनी और जापान में संकट ने उग्र राष्ट्रवादी दलों को ताक़त दी, जो आगे दूसरे विश्व युद्ध की ओर ले गया।
- सर्वसत्तावाद (Totalitarianism) – सर्वसत्तावादी शासन एक-दलीय राज्य है जो जीवन के हर हिस्से — राजनीति, अर्थव्यवस्था, अख़बार, स्कूल और लोगों के विचार तक — को एक नेता, प्रचार और आतंक के सहारे नियंत्रित करना चाहता है। पहले विश्व युद्ध और 1929 की मंदी के बाद ऐसे शासन फ़ासीवादी इटली (1922), स्तालिन के सोवियत संघ (1920 के दशक का अंत) और नाज़ी जर्मनी (1933) में आए। उनके विचार अलग थे पर तरीक़े मिलते-जुलते, और उनका उदय दूसरे विश्व युद्ध की एक वजह बना।
- द्वितीय विश्व युद्ध (1939–1945) – द्वितीय विश्व युद्ध इतिहास का सबसे जानलेवा युद्ध था। इसकी जड़ें थीं: पहले विश्व युद्ध के बाद की नाराज़गी, महामंदी, और जर्मनी, इटली व जापान में तानाशाहों का उदय। यह 1 सितंबर 1939 को जर्मनी के पोलैंड पर हमले से शुरू हुआ। धुरी राष्ट्र (जर्मनी, इटली, जापान) मित्र राष्ट्रों (ब्रिटेन और उसका साम्राज्य, फ़्रांस, सोवियत संघ, अमेरिका, चीन आदि) से लड़े। यह संपूर्ण युद्ध और विनाश का युद्ध था: होलोकॉस्ट में लगभग 60 लाख यहूदियों की हत्या हुई और कुल 7–8.5 करोड़ लोग मरे। जर्मनी ने मई 1945 और जापान ने सितंबर 1945 में आत्मसमर्पण किया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र बना, शीत युद्ध शुरू हुआ और साम्राज्य टूटे।
2. History 2: a bipolar world 1945–1970s
End of WWII and a new world order · Bipolarity and the Third World · France’s new place in the world
- शीत युद्ध (1945–1991) – शीत युद्ध (1945–1991) दो महाशक्तियों के बीच लंबी होड़ थी: पश्चिमी साथियों के साथ अमेरिका (पूँजीवाद, बहुदलीय चुनाव) और पूर्वी साथियों के साथ सोवियत संघ (साम्यवाद, एक दल का शासन)। दोनों आपस में सीधे कभी नहीं लड़े। उन्होंने विरोधी गुट बनाए (नाटो, वारसा संधि), परमाणु हथियार और अंतरिक्ष की होड़ की, छद्म युद्धों में उलटे पक्षों का साथ दिया (कोरिया, वियतनाम, अफ़ग़ानिस्तान) और 1962 में क्यूबा में परमाणु युद्ध के करीब पहुँचे। भारत जैसे कई नए देश गुटनिरपेक्ष रहे। 1970 के दशक में तनाव-शैथिल्य आया। सोवियत सुधार, बर्लिन दीवार का गिरना (1989) और सोवियत संघ का विघटन (1991) इसका अंत बने।
- विउपनिवेशीकरण: साम्राज्य कैसे खत्म हुए और नए देश कैसे बने – विउपनिवेशीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें उपनिवेश स्वतंत्र देश बने। यह ज़्यादातर 1945 से 1970 के दशक तक हुआ। दूसरे विश्व युद्ध ने शासक देशों को कमज़ोर किया, आज़ादी के आंदोलन मज़बूत हुए, और संयुक्त राष्ट्र ने हर जनता के स्वशासन के अधिकार का साथ दिया। कुछ उपनिवेश बातचीत और जन-आंदोलन से आज़ाद हुए (भारत 1947, घाना 1957), कुछ लंबे युद्ध से (अल्जीरिया 1962)। नए देशों के सामने गरीबी, एक फ़सल पर टिकी अर्थव्यवस्था, अनुचित सीमाएँ और शीत युद्ध का दबाव था; कई ने गुटनिरपेक्षता चुनी।
- फ्रांस का पाँचवाँ गणराज्य – फ्रांस आज पाँचवें गणराज्य में है, जो 1958 में कमज़ोर चौथे गणराज्य और अल्जीरिया संकट के बाद बना। जनरल दे गॉल फिर नेता बने। नए संविधान ने राष्ट्रपति को बड़ी शक्तियाँ दीं और 1962 से जनता उसे सीधे चुनती है। सांसद दो चरणों के बहुमत वाले मतदान से चुने जाते हैं। फिर सत्ता वाम और दक्षिण के बीच बदलती रही, और कभी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री विरोधी खेमों के रहे (सहवास)।
3. History 3: challenges 1970–1991
Shifts in the world economy and politics · France 1974–1988
- वैश्विक दुनिया का बनना – लोग, सामान, विचार और बीमारियाँ हज़ारों साल से दुनिया में घूम रहे हैं: रेशम मार्ग पर, आलू-मक्का जैसी फ़सलों के साथ और चेचक जैसी बीमारियों के साथ। 1815 से 1914 के बीच विश्व अर्थव्यवस्था तीन धाराओं से बढ़ी: माल, मज़दूर और पूँजी; रेल, भाप के जहाज़ और ठंडे जहाज़ों ने मदद की। उपनिवेशों ने क़ीमत चुकाई: अफ़्रीका में रिंडरपेस्ट और भारत से गिरमिटिया मज़दूर। पहले विश्व युद्ध के बाद अमेरिका में बड़े पैमाने पर उत्पादन और फिर 1929 की महामंदी आई, जिसने भारत के किसानों को बहुत चोट पहुँचाई। 1945 के बाद ब्रेटन वुड्स व्यवस्था, IMF और विश्व बैंक ने दुनिया की अर्थव्यवस्था फिर से खड़ी की।
- गाँव और नगर में सामाजिक परिवर्तन और सामाजिक व्यवस्था – सामाजिक परिवर्तन यानी समाज के ढाँचे में बड़ा और टिकाऊ बदलाव। यह धीमा (उद्विकासीय) या अचानक (क्रांतिकारी) हो सकता है, और ढाँचे, विचार या मूल्य बदल सकता है। इसके कारण हैं पर्यावरण, तकनीक और अर्थव्यवस्था, राजनीति और संस्कृति। सामाजिक व्यवस्था दूसरा पहलू है: समाज साझा मूल्यों, प्रभुत्व, सत्ता और कानून से स्थिर रहता है। व्यवस्था को प्रतिरोध, अपराध और हिंसा चुनौती देते हैं। गाँव, कस्बा और नगर आकार, घनत्व और काम में अलग हैं, और सब अपने ढंग से बदलते हैं।
4. History 4: since the 1990s
New power relations · European integration · The French Republic today
- आज की दुनिया के संघर्ष: कारण, कीमत और शांति की खोज – 1989–91 में शीत युद्ध खत्म होने के बाद दुनिया दो महाशक्तियों से कई शक्ति केंद्रों की ओर गई। आज के संघर्षों में राज्यों के बीच युद्ध, गृहयुद्ध, आतंकवाद और हाइब्रिड या साइबर हमले शामिल हैं। इनके कारण संसाधन, पहचान, ज़मीन, कमज़ोर राज्य और बाहरी ताकतें मिलकर बनते हैं। सबसे बड़ी कीमत आम लोग चुकाते हैं, इसलिए दुनिया कूटनीति, संयुक्त राष्ट्र शांति सेना और अंतरराष्ट्रीय अदालतों से युद्ध रोकने और सबसे बुरे अपराधों को सज़ा देने की कोशिश करती है।
- यूरोपीय संघ – यूरोपीय संघ (EU) 27 यूरोपीय देशों का समूह है जो कुछ फ़ैसले और क़ानून साझा करते हैं। इसकी शुरुआत 1951 में हुई, जब छह देशों ने कोयला और इस्पात साझा किया ताकि उनके बीच युद्ध असंभव हो जाए। धीरे-धीरे यह एकल बाज़ार बना जहाँ सामान, लोग, सेवाएँ और पैसा आज़ादी से चलते हैं। आयोग क़ानून का प्रस्ताव रखता है, संसद और परिषद उसे पारित करते हैं, और न्यायालय देखता है कि उसका पालन हो। 21 सदस्य यूरो चलाते हैं। यूनाइटेड किंगडम 2020 में बाहर हो गया।
5. Geography 1: seas and oceans
Seas as vectors of globalisation · Appropriation, protection, freedom of navigation
- समुद्र और महासागर वैश्वीकरण में: जहाज़, बंदरगाह, केबल और समुद्री कानून – महासागर पृथ्वी के लगभग 71% हिस्से को ढकते हैं और मात्रा के हिसाब से विश्व व्यापार का लगभग 80% ढोते हैं। कंटेनर जहाज़ बड़े बंदरगाहों के बीच मार्गों पर चलते हैं और जलसंधियों व नहरों से निकलते हैं। समुद्र-तल के केबल महाद्वीपों के बीच लगभग सारा डेटा ले जाते हैं। समुद्री कानून में तटीय देश का 12 समुद्री मील पर प्रादेशिक सागर और 200 समुद्री मील तक का विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) होता है, जबकि खुले समुद्र में सभी देशों के जहाज़ चल सकते हैं। समुद्र जलवायु नियंत्रित करते हैं, भोजन देते हैं और उन्हें बचाने की ज़रूरत है।
6. Geography 2: territories in globalisation
Unequal integration · Cooperation and tension
- वैश्विक दुनिया का बनना – लोग, सामान, विचार और बीमारियाँ हज़ारों साल से दुनिया में घूम रहे हैं: रेशम मार्ग पर, आलू-मक्का जैसी फ़सलों के साथ और चेचक जैसी बीमारियों के साथ। 1815 से 1914 के बीच विश्व अर्थव्यवस्था तीन धाराओं से बढ़ी: माल, मज़दूर और पूँजी; रेल, भाप के जहाज़ और ठंडे जहाज़ों ने मदद की। उपनिवेशों ने क़ीमत चुकाई: अफ़्रीका में रिंडरपेस्ट और भारत से गिरमिटिया मज़दूर। पहले विश्व युद्ध के बाद अमेरिका में बड़े पैमाने पर उत्पादन और फिर 1929 की महामंदी आई, जिसने भारत के किसानों को बहुत चोट पहुँचाई। 1945 के बाद ब्रेटन वुड्स व्यवस्था, IMF और विश्व बैंक ने दुनिया की अर्थव्यवस्था फिर से खड़ी की।
7. Geography 3: the EU in globalisation
EU policies: competitiveness and cohesion · The EU and the world
- यूरोपीय संघ – यूरोपीय संघ (EU) 27 यूरोपीय देशों का समूह है जो कुछ फ़ैसले और क़ानून साझा करते हैं। इसकी शुरुआत 1951 में हुई, जब छह देशों ने कोयला और इस्पात साझा किया ताकि उनके बीच युद्ध असंभव हो जाए। धीरे-धीरे यह एकल बाज़ार बना जहाँ सामान, लोग, सेवाएँ और पैसा आज़ादी से चलते हैं। आयोग क़ानून का प्रस्ताव रखता है, संसद और परिषद उसे पारित करते हैं, और न्यायालय देखता है कि उसका पालन हो। 21 सदस्य यूरो चलाते हैं। यूनाइटेड किंगडम 2020 में बाहर हो गया।
8. Geography conclusion: France and its regions
French regions: strengths and change
- स्थानिक नियोजन: सीमित ज़मीन को न्याय से बाँटना – स्थानिक नियोजन तय करता है कि ज़मीन का हर हिस्सा किस काम आएगा और सेवाएँ कहाँ होंगी। ज़मीन सीमित है, पर घर, खेती, प्रकृति, पानी और ऊर्जा सबको जगह चाहिए, और कुछ जगहों पर सेवाएँ बहुत कम हैं। योजनाकार ज़ोनिंग, यातायात और नई सेवाओं जैसे औज़ार अपनाते हैं, सबके हितों को तौलते हैं और भविष्य के परिदृश्य सोचते हैं।