Italy Secondaria di secondo grado – classe 5ª (esame di Stato) History
अध्याय: 1
1. The contemporary age
Mass society and World War I · Interwar crisis and totalitarianism · World War II and the Shoah · Cold War to the global world · Decolonisation and development · Italy after 1945 · Geographic themes of today
- प्रथम विश्व युद्ध (1914–1918): कारण, घटनाक्रम और परिणाम – प्रथम विश्व युद्ध 1914 से 1918 तक मित्र राष्ट्रों (फ़्रांस, ब्रिटेन, रूस, बाद में इटली, अमेरिका आदि) और केंद्रीय शक्तियों (जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, ऑटोमन साम्राज्य और बुल्गारिया) के बीच लड़ा गया। चार दीर्घकालिक कारणों ने तनाव बढ़ाया: सैन्यवाद, गठबंधन, साम्राज्यवाद और राष्ट्रवाद (MAIN)। चिंगारी थी 28 जून 1914 को साराजेवो में आर्चड्यूक फ़्रांज़ फ़र्डिनेंड की हत्या। पश्चिमी मोर्चे पर युद्ध खाइयों का गतिरोध बन गया; नए हथियारों ने इसे बहुत घातक बनाया। यह संपूर्ण युद्ध था: पूरी अर्थव्यवस्था, महिला कामगार और उपनिवेश लगाए गए, जिनमें लगभग 13 लाख भारतीय भी थे। 1917 की क्रांति के बाद रूस बाहर हुआ, अमेरिका 1917 में आया, और 11 नवंबर 1918 के युद्धविराम से लड़ाई रुकी। 1919–1920 की शांति संधियों, जिनमें वर्साय भी है, ने यूरोप को नया रूप दिया, चार साम्राज्य ख़त्म किए, राष्ट्र संघ बनाया और ऐसा ग़ुस्सा छोड़ा जिसने दूसरे विश्व युद्ध का रास्ता बनाया।
- सर्वसत्तावाद (Totalitarianism) – सर्वसत्तावादी शासन एक-दलीय राज्य है जो जीवन के हर हिस्से — राजनीति, अर्थव्यवस्था, अख़बार, स्कूल और लोगों के विचार तक — को एक नेता, प्रचार और आतंक के सहारे नियंत्रित करना चाहता है। पहले विश्व युद्ध और 1929 की मंदी के बाद ऐसे शासन फ़ासीवादी इटली (1922), स्तालिन के सोवियत संघ (1920 के दशक का अंत) और नाज़ी जर्मनी (1933) में आए। उनके विचार अलग थे पर तरीक़े मिलते-जुलते, और उनका उदय दूसरे विश्व युद्ध की एक वजह बना।
- द्वितीय विश्व युद्ध (1939–1945) – द्वितीय विश्व युद्ध इतिहास का सबसे जानलेवा युद्ध था। इसकी जड़ें थीं: पहले विश्व युद्ध के बाद की नाराज़गी, महामंदी, और जर्मनी, इटली व जापान में तानाशाहों का उदय। यह 1 सितंबर 1939 को जर्मनी के पोलैंड पर हमले से शुरू हुआ। धुरी राष्ट्र (जर्मनी, इटली, जापान) मित्र राष्ट्रों (ब्रिटेन और उसका साम्राज्य, फ़्रांस, सोवियत संघ, अमेरिका, चीन आदि) से लड़े। यह संपूर्ण युद्ध और विनाश का युद्ध था: होलोकॉस्ट में लगभग 60 लाख यहूदियों की हत्या हुई और कुल 7–8.5 करोड़ लोग मरे। जर्मनी ने मई 1945 और जापान ने सितंबर 1945 में आत्मसमर्पण किया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र बना, शीत युद्ध शुरू हुआ और साम्राज्य टूटे।
- शीत युद्ध (1945–1991) – शीत युद्ध (1945–1991) दो महाशक्तियों के बीच लंबी होड़ थी: पश्चिमी साथियों के साथ अमेरिका (पूँजीवाद, बहुदलीय चुनाव) और पूर्वी साथियों के साथ सोवियत संघ (साम्यवाद, एक दल का शासन)। दोनों आपस में सीधे कभी नहीं लड़े। उन्होंने विरोधी गुट बनाए (नाटो, वारसा संधि), परमाणु हथियार और अंतरिक्ष की होड़ की, छद्म युद्धों में उलटे पक्षों का साथ दिया (कोरिया, वियतनाम, अफ़ग़ानिस्तान) और 1962 में क्यूबा में परमाणु युद्ध के करीब पहुँचे। भारत जैसे कई नए देश गुटनिरपेक्ष रहे। 1970 के दशक में तनाव-शैथिल्य आया। सोवियत सुधार, बर्लिन दीवार का गिरना (1989) और सोवियत संघ का विघटन (1991) इसका अंत बने।
- विउपनिवेशीकरण: साम्राज्य कैसे खत्म हुए और नए देश कैसे बने – विउपनिवेशीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें उपनिवेश स्वतंत्र देश बने। यह ज़्यादातर 1945 से 1970 के दशक तक हुआ। दूसरे विश्व युद्ध ने शासक देशों को कमज़ोर किया, आज़ादी के आंदोलन मज़बूत हुए, और संयुक्त राष्ट्र ने हर जनता के स्वशासन के अधिकार का साथ दिया। कुछ उपनिवेश बातचीत और जन-आंदोलन से आज़ाद हुए (भारत 1947, घाना 1957), कुछ लंबे युद्ध से (अल्जीरिया 1962)। नए देशों के सामने गरीबी, एक फ़सल पर टिकी अर्थव्यवस्था, अनुचित सीमाएँ और शीत युद्ध का दबाव था; कई ने गुटनिरपेक्षता चुनी।
- 1945 के बाद इटली: पुनर्निर्माण, उछाल, सुधार और संकट – 1945 में युद्ध और तानाशाही के बाद इटली खंडहर था। 1946 में लोगों ने जनमत-संग्रह से गणराज्य चुना और 1948 में नया संविधान शुरू हुआ। मार्शल योजना की मदद और कड़ी मेहनत से लगभग 1950 से 1963 तक आर्थिक उछाल आया: कारख़ाने बढ़े, शहर भरे और लाखों लोग ग़रीब दक्षिण से औद्योगिक उत्तर गए। 1960 के दशक के अंत के आंदोलनों से सुधार हुए, जैसे सबके लिए एक मिडिल स्कूल, मज़बूत श्रमिक अधिकार, क्षेत्रीय सरकारें, तलाक़ क़ानून और राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा। उन्हीं सालों में छोटे उग्र समूहों का आतंकवाद भी आया: 1969 में मिलान, 1978 में मोरो की हत्या और 1980 में बोलोन्या। 1990 के शुरू में "साफ़ हाथ" जाँच ने तांजेंतोपोली नाम की रिश्वत-व्यवस्था खोली और पुरानी बड़ी पार्टियाँ गिर गईं। फिर इटली नए राजनीतिक दौर में पहुँचा।
- संसाधन, प्रवास, जनसंख्या और जलवायु – प्राकृतिक और ऊर्जा संसाधन हर जगह बराबर नहीं हैं। सूखा और गरीबी जैसे धक्का कारक तथा काम जैसे खिंचाव कारक लोगों को प्रवास कराते हैं। जनांकिकी लोगों की संख्या और उम्र गिनती है, और जनसंख्या पिरामिड बढ़ती या बूढ़ी आबादी दिखाता है। जलवायु खेती, काम और आमदनी बदलती है, इसलिए प्रवास बढ़ा सकती है।