South 고등학교 2학년 Exploring the Modern World through History
अध्याय: 5
1. The modern world and historical inquiry
Post-war order · Choosing contemporary issues
- शीत युद्ध (1945–1991) – शीत युद्ध (1945–1991) दो महाशक्तियों के बीच लंबी होड़ थी: पश्चिमी साथियों के साथ अमेरिका (पूँजीवाद, बहुदलीय चुनाव) और पूर्वी साथियों के साथ सोवियत संघ (साम्यवाद, एक दल का शासन)। दोनों आपस में सीधे कभी नहीं लड़े। उन्होंने विरोधी गुट बनाए (नाटो, वारसा संधि), परमाणु हथियार और अंतरिक्ष की होड़ की, छद्म युद्धों में उलटे पक्षों का साथ दिया (कोरिया, वियतनाम, अफ़ग़ानिस्तान) और 1962 में क्यूबा में परमाणु युद्ध के करीब पहुँचे। भारत जैसे कई नए देश गुटनिरपेक्ष रहे। 1970 के दशक में तनाव-शैथिल्य आया। सोवियत सुधार, बर्लिन दीवार का गिरना (1989) और सोवियत संघ का विघटन (1991) इसका अंत बने।
- ऐतिहासिक चिंतन: इतिहासकार कैसे काम करते हैं – इतिहास साक्ष्य के सहारे अतीत का अध्ययन है। घटनाओं को समय-रेखा पर क्रम से रखिए और उनके संदर्भ में पढ़िए। प्राथमिक स्रोत (उसी समय बने) और द्वितीयक स्रोत (बाद में बने) दोनों का उपयोग कीजिए। हर स्रोत को परखिए: किसने, कब, क्यों बनाया और क्या छूट गया। घटनाओं के कई कारण होते हैं: धीमे दीर्घकालिक कारण और एक तात्कालिक कारण। परिवर्तन और निरंतरता दोनों देखिए, महत्व तय कीजिए और साक्ष्य के साथ तर्क दीजिए।
2. Cold War and hot wars
Human rights and peace after 1945 · Hot wars in the Cold War · War memorials worldwide
- मानव अधिकार: अर्थ, इतिहास, प्रकार और संरक्षण – मानव अधिकार वे मूल स्वतंत्रताएँ और सुरक्षाएँ हैं जो हर व्यक्ति को मनुष्य होने के कारण मिलती हैं। ये सार्वभौमिक, अविच्छेद्य, अविभाज्य और गरिमा पर आधारित हैं। मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (1948) ने सबके लिए एक साझा मानक बनाया, जिसे बाद में संधियों से बाध्यकारी बनाया गया। संविधान, न्यायालय, आयोग, संयुक्त राष्ट्र और नागरिक समाज इनकी रक्षा करते हैं, और केवल दूसरों की रक्षा के लिए बने उचित क़ानून ही इन्हें सीमित कर सकते हैं।
- शीत युद्ध (1945–1991) – शीत युद्ध (1945–1991) दो महाशक्तियों के बीच लंबी होड़ थी: पश्चिमी साथियों के साथ अमेरिका (पूँजीवाद, बहुदलीय चुनाव) और पूर्वी साथियों के साथ सोवियत संघ (साम्यवाद, एक दल का शासन)। दोनों आपस में सीधे कभी नहीं लड़े। उन्होंने विरोधी गुट बनाए (नाटो, वारसा संधि), परमाणु हथियार और अंतरिक्ष की होड़ की, छद्म युद्धों में उलटे पक्षों का साथ दिया (कोरिया, वियतनाम, अफ़ग़ानिस्तान) और 1962 में क्यूबा में परमाणु युद्ध के करीब पहुँचे। भारत जैसे कई नए देश गुटनिरपेक्ष रहे। 1970 के दशक में तनाव-शैथिल्य आया। सोवियत सुधार, बर्लिन दीवार का गिरना (1989) और सोवियत संघ का विघटन (1991) इसका अंत बने।
- इतिहास और स्मृति: हम अतीत को कैसे याद रखते हैं – स्मृति यानी लोग और समूह अतीत को कैसे याद करते हैं; इतिहास यानी सबूतों के आधार पर अतीत का सावधान अध्ययन। किसी घटना के बाद गवाह कुछ पीढ़ियों तक जीवित स्मृति रखते हैं। दस्तावेज़, फ़ोटो, वस्तुएँ और बातचीत जैसे स्रोत ज़्यादा समय तक बचे रहते हैं। समाज याद को स्मारक, संग्रहालय, सड़कों के नाम और स्मृति दिवस में बदलता है। अलग समूह एक ही घटना को अलग तरह से याद कर सकते हैं, इसलिए इतिहासकार स्रोतों की तुलना करके याद को जाँचते हैं और मिथक सुधारते हैं। पुराने अन्याय को याद रखना न्याय और मेल-मिलाप में मदद करता है।
3. Growth, abundance and ecology
Economic growth and innovation · Consumer society and environment · Climate agreements
- आर्थिक इतिहास: समय के साथ लोग रोज़ी-रोटी कैसे कमाते रहे – आर्थिक इतिहास पढ़ता है कि लोग समय के साथ कैसे उत्पादन, व्यापार और धन का बँटवारा करते रहे। ज़्यादातर इतिहास में अर्थव्यवस्था खेती पर टिकी थी और शासक फ़सल, श्रम या सिक्कों में कर लेते थे। व्यापार, मुद्रा और बैंकों ने आय धीरे-धीरे बढ़ाई। औद्योगिक क्रांति ने प्रति व्यक्ति उत्पादन तेज़ी से बढ़ाया। 20वीं सदी में देशों ने बाज़ार, योजनाबद्ध और मिश्रित मॉडल आज़माए। विकास के साथ संकट भी आए: प्रथम विश्व युद्ध के बाद अति-मुद्रास्फीति, 1929 की महामंदी, 1997 का एशियाई वित्तीय संकट और 2008 का वैश्विक संकट। आज चुनौती है न्यायपूर्ण और टिकाऊ विकास।
- जलवायु परिवर्तन और हरितगृह प्रभाव – जलवायु किसी जगह का लगभग 30 साल का औसत मौसम है। कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी हरितगृह गैसें पृथ्वी से निकलने वाली कुछ ऊष्मा रोक लेती हैं। मनुष्यों ने ईंधन जलाकर और जंगल काटकर ये गैसें बहुत बढ़ा दी हैं, इसलिए पृथ्वी गर्म हो रही है। इससे बर्फ़ पिघलती है, समुद्र तल बढ़ता है और मौसम उग्र होता है। हम गैसें घटा सकते हैं (शमन) और बदलाव के लिए तैयार हो सकते हैं (अनुकूलन)।
4. Conflict and reconciliation
Causes of armed conflicts · The Global South after the Cold War · Efforts at reconciliation
- अंतरराष्ट्रीय संबंध: देश एक-दूसरे से कैसे व्यवहार करते हैं – अंतरराष्ट्रीय संबंध (IR) पढ़ता है कि राज्य और दूसरे कर्ता (अंतरराष्ट्रीय संगठन, कंपनियाँ, NGO) आपस में कैसे व्यवहार करते हैं। राज्य संप्रभु हैं और कोई विश्व सरकार नहीं है, इसलिए हर राज्य विदेश नीति से अपना राष्ट्रीय हित साधता है: कूटनीति, व्यापार, सहायता, गठबंधन और, सबसे बुरे हाल में, बल। ज़मीन, संसाधन, शक्ति और पहचान पर टकराव और सुरक्षा दुविधा से संघर्ष होता है। साझा फ़ायदे, संधियों, अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संगठनों से सहयोग बढ़ता है। यथार्थवाद शक्ति पर, उदारवाद सहयोग पर ज़ोर देता है। शांति बातचीत, मध्यस्थता, शांति सेना और न्याय से बनती है।
- विकास का भूगोल: कोई जगह अमीर या गरीब क्यों? – विकास का मतलब है लोग बेहतर जीवन जिएँ: ज़्यादा आय, अच्छा स्वास्थ्य, ज़्यादा पढ़ाई और चुनने की आज़ादी। इसे सूचकों से नापते हैं, जैसे प्रति व्यक्ति GNI, जीवन प्रत्याशा और स्कूली वर्ष, और मानव विकास सूचकांक (HDI, 0 से 1) से, जो तीनों को जोड़ता है। विकास असमान है: अमीर कोर और गरीब परिधि दुनिया के क्षेत्रों के बीच भी हैं और एक देश के अंदर भी। जहाँ अमीर और गरीब इलाक़े मिलते हैं, वहाँ मज़दूर, सामान, कारख़ाने और पैसे का आना-जाना होता है, जिसके अच्छे और बुरे दोनों असर हैं। विकास का एक ही मॉडल नहीं: देश निर्यात कारख़ानों, सेवाओं, या खनन और खेती से बढ़े हैं, हर रास्ते के अपने जोखिम हैं।
- शांति शिक्षा: लोग स्थायी शांति कैसे बनाते हैं – शांति का मतलब सिर्फ़ 'युद्ध नहीं' नहीं है। नकारात्मक शांति = लड़ाई नहीं। सकारात्मक शांति = सबके लिए न्याय, भरोसा और अच्छा जीवन। हिंसा तीन तरह की होती है: प्रत्यक्ष (मारना, युद्ध), संरचनात्मक (अन्यायी नियम जो लोगों को गरीब रखें) और सांस्कृतिक (ऐसे विचार जो नुकसान को सामान्य दिखाएँ)। विचारकों ने रास्ते दिए: मोज़ी ने सबसे बराबर प्रेम और हमलावर युद्ध का विरोध सिखाया; कांट ने कहा न्यायपूर्ण सरकारें, आज़ाद देशों का संघ और मेहमानों से अच्छा बर्ताव शांति को स्थायी बनाते हैं; गांधी ने अहिंसक विरोध दिखाया। टकराव क़दम-दर-क़दम सुलझता है: शांत हों, सुनें, ज़रूरत खोजें, उपाय सोचें, समझौता करें। बँटवारे या युद्ध के बाद मेल-मिलाप पुल की तरह बनता है: बातचीत, सच, माफ़ी, व्यापार, परिवार मिलन और साझा काम। जर्मनी (1990) और दक्षिण अफ़्रीका का सत्य आयोग इसके उदाहरण हैं; कोरियाई प्रायद्वीप जैसे बँटे लोग आज भी शांतिपूर्ण एकीकरण पर चर्चा करते हैं।
5. A challenged world
Economic globalisation and its effects · Multicultural conflicts historically · International norms on cultural diversity
- वैश्वीकरण और वैश्विक शासन – वैश्वीकरण यानी सामान, पूँजी, सूचना और श्रम के प्रवाह का बढ़ना, जो जगहों को आपस में जोड़ता है। तकनीक, परिवहन और व्यापार समझौते इसे चलाते हैं। प्रवाह असमान हैं: अमीर देशों के पास ज़्यादा ताक़त है, ग़रीब देशों की बाज़ार तक पहुँच कमज़ोर है। TNC एक ही चीज़ को कई जगह बनवाती हैं। UN, WTO, IMF और विश्व बैंक जैसी संस्थाएँ इन प्रवाहों को संभालने की कोशिश करती हैं, और संधियाँ अंटार्कटिका जैसे साझा क्षेत्रों को बचाती हैं। वैश्वीकरण विकास और सस्ता सामान लाता है, पर असमानता, टकराव और पर्यावरण का नुक़सान भी।
- सांस्कृतिक विविधता – सांस्कृतिक विविधता का मतलब है अलग-अलग जीवन-शैली वाले कई समूह साथ रहते हैं। नृजातिकेंद्रितता दूसरों को अपनी संस्कृति से जाँचती है; सांस्कृतिक सापेक्षवाद पहले रिवाज़ को उसके अपने संदर्भ में समझता है। पूर्वाग्रह और रूढ़ छवियाँ सम्मान में रुकावट हैं। समाज में मुख्यधारा, उपसंस्कृतियाँ और प्रतिसंस्कृतियाँ होती हैं। सार्वभौमिक मानव अधिकार सीमा तय करते हैं: फ़र्क का सम्मान हो, इंसान को नुक़सान नहीं।