मेइजी बहाली और संवैधानिक सरकार
1868 में युवा समुराई और दरबारी नेताओं के एक समूह ने 'सम्राट के नाम पर' नई सरकार बनाई। इसे मेइजी बहाली कहते हैं। शुरुआती क़दम तेज़ थे:
- एक राज्य: 1871 में हान ख़त्म हुए और उनकी जगह प्रांत (प्रीफ़ेक्चर) आए।
- नई सेना: 1873 में पुरुषों को सेवा के लिए बुलाया जाने लगा (अनिवार्य भर्ती), और समुराई का ख़ास दर्जा और वेतन ख़त्म हुआ।
- नया कर: पैसे में दिया जाने वाला भूमि कर (1873) राज्य को पक्की आमदनी देता था।
संविधान और संसद
स्वतंत्रता और जन-अधिकार आंदोलन में लोगों ने सरकार में हिस्सेदारी माँगी। सरकार ने सभा का वादा किया और 1889 का संविधान बनाया (यूरोपीय ढाँचों, ख़ासकर प्रशा, का अध्ययन करके)। सम्राट के पास बहुत अधिकार थे, और चुनी हुई डायट (संसद) 1890 से बैठने लगी। शुरू में केवल धनी पुरुष (लगभग 1% लोग) वोट दे सकते थे। 1925 में 25 साल और ऊपर के सब पुरुषों को वोट मिला (लगभग 20% लोग)।
सभ्यता और ज्ञानोदय, औद्योगिक क्रांति
नारा बुन्मेई काइका ('सभ्यता और ज्ञानोदय') का मतलब था पश्चिम से सीखना। सरकार ने इवाकुरा मिशन (1871-73) विदेश भेजा, अनिवार्य स्कूल (1872) शुरू किए, टोक्यो-योकोहामा रेलवे (1872) बनाई और तोमिओका रेशम मिल जैसे नमूना कारख़ाने शुरू किए।
औद्योगिक बढ़त
रेशम और सूती धागा बड़े निर्यात बने। लोहा, जहाज़ और हथियार जैसे भारी उद्योग सरकारी मदद से बढ़े। मित्सुई और मित्सुबिशी जैसे बड़े कारोबारी घराने (ज़ाइबात्सू) मज़बूत हुए। चीन (1894-95) और रूस (1904-05) से युद्धों में जीत से जापान को नई ज़मीनें मिलीं और वह उभरती ताक़त बना, पर सेना और नौसेना की भूमिका भी बढ़ी।
रोज़ की ज़िंदगी में बदलाव
शहर बढ़े, लोग पश्चिमी कपड़े पहनने लगे, अख़बार फैले। कारख़ानों के मज़दूर, अकसर कपड़ा मिलों की युवा महिलाएँ, लंबे घंटे कम वेतन पर काम करते थे। प्रदूषण और मज़दूर विवाद शुरू हुए।
मंदी, सैन्यवाद और युद्ध
1920 के दशक में दलों की सरकारें और खुली संस्कृति बढ़ी ('ताइशो लोकतंत्र')। पर 1923 के कांतो भूकंप और 1927 के बैंक संकट ने अर्थव्यवस्था को चोट दी, और 1929 की महामंदी ने रेशम के निर्यात को बुरी तरह मारा। किसान और मज़दूर परेशान हुए।
सेना का उभार
कई अफ़सर कहते थे कि बाहर विस्तार ही इलाज है। 1931 में सेना ने सरकार के आदेश के बिना मंचूरिया में कार्रवाई शुरू की (मंचूरिया घटना)। 1932 में प्रधानमंत्री पर हमले से दलीय सरकार ख़त्म हो गई। प्रेस और बोलने पर पाबंदी लगी।
युद्ध
1937 में चीन से युद्ध छिड़ा, और 1941 में जापान ने अमेरिका और ब्रिटेन पर हमला किया, जिससे युद्ध पूरे एशिया और प्रशांत में फैला। युद्ध में भारी जानहानि हुई, शहरों पर बमबारी हुई, और अगस्त 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिरे। जापान ने 15 अगस्त 1945 को आत्मसमर्पण किया।
यह पाठ बिना भयावह दृश्यों के तथ्य बताता है। हर जगह सबसे ज़्यादा कष्ट आम लोगों ने झेला।
क़ब्ज़ा-काल के सुधार और युद्धोत्तर जापान
1945 से 1952 तक अमेरिका की अगुवाई में मित्र शक्तियों ने क़ब्ज़ा रखा (जनरल मैकआर्थर प्रभारी थे)। उनके सुधारों ने, अकसर जापानी नेताओं की मदद से, व्यवस्था बदली:
- नया संविधान (1946 में बना, 1947 से लागू): जनता सर्वोच्च है, सम्राट प्रतीक है, अनुच्छेद 9 विवाद सुलझाने के लिए युद्ध छोड़ता है।
- महिलाओं को वोट (1945-46): अब लगभग आधे लोग वोट दे सकते थे।
- भूमि सुधार: बटाईदार किसान जो ज़मीन जोतते थे उसे ख़रीद सके।
- ज़ाइबात्सू टूटे, मज़दूरों को यूनियन बनाने की छूट मिली, शिक्षा व्यवस्था सुधारी गई।
क़ब्ज़े के बाद
सैन फ़्रांसिस्को शांति संधि 1952 में लागू हुई। 1950 के दशक के मध्य से 1970 के दशक की शुरुआत तक जापान की अर्थव्यवस्था बहुत तेज़ी से बढ़ी ('उच्च वृद्धि काल'); 1964 के टोक्यो ओलंपिक ने नया जापान दुनिया को दिखाया।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 1868: मेइजी बहाली; 1871: हान ख़त्म; 1873: अनिवार्य भर्ती और भूमि कर
- 1889: संविधान; 1890: पहली डायट; 1925: सब पुरुषों को वोट
- 1894-95 चीन से युद्ध; 1904-05 रूस से युद्ध; 1929 मंदी
- 1931 मंचूरिया; 1937 चीन से युद्ध; 1941 प्रशांत युद्ध; 1945 आत्मसमर्पण
- 1945-52 क़ब्ज़ा; 1947 नया संविधान (अनुच्छेद 9); महिलाओं को वोट
हल किए गए उदाहरण
1. मेइजी बहाली (1868) और पहली डायट (1890) के बीच कितने साल हुए?
1890 - 1868 = 22 साल।
2. 1890 में लगभग 100 में 1 वोट दे सकता था। 1946 के बाद लगभग 100 में 50। वोटर-हिस्सा कितना गुना हुआ?
50 / 1 = 50 गुना।
3. 1929 की मंदी से सेना को समर्थन क्यों मिला?
रेशम का निर्यात गिरा और किसान-मज़दूर ग़रीब हुए। कई लोगों का दलीय सरकारों से भरोसा उठा, और कुछ को लगा कि बाहर विस्तार से धन और सुरक्षा मिलेगी। सेना के नेताओं ने इसका फ़ायदा उठाया।
आम गलतियाँ
- सोचना कि मेइजी सम्राट बिना किसी सरकार के अकेला राज करता था। बहाली का नेतृत्व युवा नेताओं ने किया जो 'सम्राट के नाम पर' शासन करते थे।
- कहना कि 1889 में जापान पूरा लोकतंत्र बन गया। शुरू में वोट कुछ अमीर पुरुषों को ही था।
- तारीख़ें मिलाना: 1889 संविधान, 1925 पुरुष मताधिकार, 1946-47 नया संविधान।
- क़ब्ज़ा-काल के सुधारों को केवल विदेशी मान लेना। जापानी नेता और नागरिक भी इसमें शामिल थे।