महामंदी जापान तक पहुँची
अक्टूबर 1929 में न्यूयॉर्क में शेयरों के दाम धड़ाम से गिरे। बैंक बंद हुए और कारख़ाने रुक गए। देश आपस में व्यापार करते हैं, इसलिए संकट फैल गया। इस दुनिया-भर की मंदी को महामंदी (Great Depression) कहते हैं।
जापान पर दो तरह से असर पड़ा:
- निर्यात गिरा। जापान अमेरिका को बहुत कच्चा रेशम बेचता था। अमेरिकियों के पास पैसे घटे तो रेशम के दाम गिरे और रेशम के कीड़े पालने वाले किसान परिवारों की कमाई गई।
- सख़्त मुद्रा नीति। 1930 में जापान पुरानी दर पर फिर स्वर्ण मानक (gold standard) पर गया। इससे निर्यात और महँगा हुआ और मंदी बढ़ गई। इसे शोवा मंदी कहते हैं।
1931 में उत्तर-पूर्व में फ़सल ख़राब हुई। बहुत मज़दूर बेरोज़गार हुए, कुछ शहरी लोग गाँव लौटे और बड़े व्यापारिक घरानों (ज़ाइबात्सु) तथा बेबस दिखते राजनीतिक दलों पर ग़ुस्सा बढ़ा।
सैन्यवाद का उभार
सैन्यवाद (militarism) का मतलब है कि सेना और उसके विचारों के पास चुने हुए नेताओं से ज़्यादा ताक़त हो जाए और देश मुख्यतः युद्ध के लिए चले। जापान में यह ऐसे बढ़ा:
- 1931, मंचूरिया घटना: सेना के अफ़सरों ने चीन के उत्तर-पूर्व में रेल-पटरी पर धमाका किया और दोष चीन पर डाला। फिर सरकार के आदेश के बिना ही सेना ने वह इलाक़ा ले लिया। 1932 में कठपुतली राज्य मंचूकुओ बना। 1933 में जापान राष्ट्र संघ से अलग हो गया।
- 1932, 15 मई की घटना: नौसेना के युवा अफ़सरों ने प्रधानमंत्री इनुकाई को गोली मार दी। इसके बाद दलों के नेता मंत्रिमंडल का नेतृत्व नहीं कर सके।
- 1936, 26 फ़रवरी की घटना: सेना के कुछ अफ़सरों ने टोक्यो में बग़ावत की कोशिश की। वह विफल रही, पर इसके बाद सेना की बात और भारी हो गई।
- 1937 के बाद: चीन से युद्ध फैला। 1938 के क़ानून से सरकार युद्ध के लिए पैसा, मज़दूर और सामान अपने क़ाबू में ले सकी। 1940 में राजनीतिक दल भंग करके एक संगठन में मिला दिए गए।
अख़बारों और स्कूलों पर नियंत्रण था और युद्ध के विरुद्ध बोलने पर गिरफ़्तारी हो सकती थी।
द्वितीय विश्व युद्ध और उसकी तबाही
1939 में यूरोप में युद्ध शुरू हुआ। 1940 में जापान जर्मनी और इटली के साथ संधि में शामिल हुआ। 8 दिसंबर 1941 (जापानी समय) को जापान ने हवाई और दक्षिण-पूर्व एशिया के ठिकानों पर हमला किया और प्रशांत युद्ध शुरू हुआ। जापान ने एशिया में बहुत-सी जगहें ले लीं, पर 1942 से वह हारने लगा। 1944 से बमवर्षक जापानी शहरों पर आने लगे। 10 मार्च 1945 की रात के हमले में पूर्वी टोक्यो का बड़ा हिस्सा जल गया। अप्रैल से जून 1945 तक ओकिनावा की लंबी लड़ाई में बहुत-से आम स्थानीय लोग मारे गए। अगस्त 1945 में हिरोशिमा (6 अगस्त) और नागासाकी (9 अगस्त) पर परमाणु बम गिरे। 15 अगस्त 1945 को युद्ध ख़त्म हुआ।
मानवीय क़ीमत: पूरी दुनिया में 7 करोड़ से ज़्यादा लोग मरे। लगभग 30 लाख जापानी मरे। चीन, कोरिया, फ़िलीपींस और दूसरे एशियाई देशों के लोगों ने भी भयानक कष्ट सहा और यूरोप में लगभग 60 लाख यहूदी मारे गए। बच्चों को शहरों से गाँव भेजा गया, खाना राशन से मिलता था और विद्यार्थी कारख़ानों में काम करते थे। युद्ध के बाद शहर फिर बने और बहुत-से बचे लोगों ने शांति के लिए काम किया।
करके देखो: चार पट्टियाँ
3D का आख़िरी चरण खोलो और साल वाला स्लाइडर खींचो। पहले अंदाज़ा लगाओ: 1931 में कौन-सी पट्टी सबसे ऊँची है? फिर जाँचो। अब 1941 पर जाओ। "बेरोज़गार" की जगह अब कौन-सी पट्टी मुख्य कहानी है? घर पर परिवार के किसी बुज़ुर्ग से पूछो कि उनकी जवानी के कठिन समय के बारे में वे क्या जानते हैं और उनके दो शब्द लिख लो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य वर्ष: 1929 दुनिया में बाज़ार धड़ाम · 1931 मंचूरिया घटना · 1932 15 मई की घटना · 1937 चीन से युद्ध फैला · 1941 प्रशांत युद्ध · 1945 युद्ध समाप्त
- कारणों की कड़ी: मंदी → तकलीफ़ और ग़ुस्सा → सेना की ताक़त (सैन्यवाद) → युद्ध
- सैन्यवाद: सेना और युद्ध के लक्ष्य चुने हुए नेताओं से ज़्यादा ताक़तवर हो जाना
- द्वितीय विश्व युद्ध की मानवीय क़ीमत: दुनिया में 7 करोड़ से ज़्यादा मौतें, लगभग 30 लाख जापानी
हल किए गए उदाहरण
1. 1929 के बाज़ार-संकट से 1945 में युद्ध के अंत तक कितने साल बीते?
1945 - 1929 = 16 साल।
2. दो पंक्तियों में समझाओ कि मंदी से सेना को समर्थन क्यों मिला।
बहुत लोगों की नौकरी और कमाई गई और वे दलों और बड़े व्यापार पर नाराज़ थे। सेना ने बाहर ज़मीन और संसाधनों का वादा किया, इसलिए बहुत-से लोगों ने उसका नेतृत्व मान लिया।
3. 1929 में रेशम की एक गाँठ 100 येन की थी और 1931 में 40 येन की। दाम कितने प्रतिशत गिरा?
गिरावट = 100 - 40 = 60 येन। 60 / 100 = 60 प्रतिशत।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि मंदी सिर्फ़ अमेरिका में थी। व्यापार के रास्ते वह जापान और पूरी दुनिया तक पहुँची।
- कहना कि सैन्यवाद 1941 में अचानक आया। वह 1931 से क़दम-क़दम बढ़ा।
- युद्ध की शुरुआत गड़बड़ाना: यूरोप में 1939, जापान के लिए प्रशांत में 1941, और चीन से युद्ध 1937 में फैला।
- युद्ध की क़ीमत में सिर्फ़ सैनिक गिनना। द्वितीय विश्व युद्ध में मरने वालों में ज़्यादातर आम लोग थे।