जापान का खुलना: पेरी के जहाज़ और अन्यायपूर्ण संधियाँ
200 से ज़्यादा साल तक तोकुगावा शोगुन के राज में जापान ने बहुत कम विदेशी व्यापार होने दिया। फिर भाप और लोहे के जहाज़ों ने दुनिया छोटी कर दी।
- 1853: अमेरिका के कमोडोर पेरी चार युद्धपोत ('काले जहाज़') लेकर आते हैं और जापान से खुलने को कहते हैं।
- 1854: जापान अमेरिकी जहाज़ों के लिए दो बंदरगाह खोलने पर राज़ी होता है।
- 1858: बड़ी संधि से और बंदरगाह खुलते हैं। यह असमान है: अपराध के आरोपी विदेशी का मुक़दमा उनके अपने अधिकारी सुनते हैं, और जापान अपना आयात-कर ख़ुद तय नहीं कर सकता।
असर: दाम बढ़े, कमज़ोर शोगुन पर बहुत लोग नाराज़ हुए, और नेता मज़बूत, एकजुट देश चाहने लगे। उन्होंने यह भी देखा कि एशिया के दूसरे देशों के साथ क्या हुआ, और उपनिवेश बन जाने से डरे।
शोगुन से मेइजी सरकार तक
1867-68 में शोगुन ने सत्ता छोड़ दी। युवा सम्राट मेइजी ('प्रबुद्ध शासन') के नाम पर नई सरकार चली। राजधानी एदो हुई, जिसका नाम बदलकर टोक्यो रखा गया।
मुख्य विचार था एक देश बनाना। इससे पहले लगभग 260 डोमेन थे, हर एक का अपना सरदार और छोटी सेना।
- 1869: सरदार अपनी ज़मीन के रजिस्टर सम्राट को लौटा देते हैं।
- 1871: डोमेन ख़त्म करके प्रांत (प्रीफ़ेक्चर) बनाए गए, जो टोक्यो से चलते थे।
- समुराई के विशेष अधिकार चले गए (तलवार रखने का हक़ और चावल का वेतन)।
अमीर देश, मज़बूत सेना (फुकोकू क्योहेई)
सरकार मानती थी: मज़बूत सेना का ख़र्च उठाने के लिए देश अमीर हो, और आज़ाद रहने के लिए मज़बूत। दो नारे साथ चले: फुकोकू क्योहेई (अमीर देश, मज़बूत सेना) और शोकुसान कोग्यो (उद्योग बढ़ाओ, नए कारोबार को सहारा दो)।
- रेल: पहली लाइन, टोक्यो से योकोहामा (लगभग 29 किमी), 1872 में खुली।
- कारख़ाने: सरकार ने आदर्श कारख़ाने बनाए, जैसे तोमिओका रेशम मिल (1872), और बाद में बहुत-से निजी कंपनियों को बेच दिए।
- सेना: 1873 में सिर्फ़ समुराई नहीं, सभी नौजवानों को सेना में बुलाया जा सकता था।
- कर: पैसे में चुकाया जाने वाला भूमि-कर (1873) राज्य को पक्की आमदनी देता था।
- स्कूल: 1872 में राष्ट्रीय स्कूल-व्यवस्था शुरू हुई ताकि कुशल मज़दूर और सैनिक पढ़-लिख सकें।
सभ्यता और ज्ञानोदय (बुनमेइ काइका)
सरकारी योजनाओं के साथ रोज़ की ज़िंदगी भी बदली। लोग इसे बुनमेइ काइका यानी 'सभ्यता और ज्ञानोदय' कहते थे।
- विचार: फ़ुकुज़ावा यूकिची जैसे विचारकों ने लिखा कि पढ़ाई से इंसान और देश दोनों मज़बूत होते हैं। इवाकुरा मिशन (1871-73) अमेरिका और यूरोप गया ताकि सीखे कि वहाँ चीज़ें कैसे चलती हैं।
- चीज़ें: तार (टेलीग्राफ़), डाक, अख़बार, ईंट के मकान और योकोहामा, टोक्यो जैसे शहरों में गैस-बत्ती।
- आदतें: पश्चिमी कपड़े और बाल कटवाना, गोमांस खाना, और 1873 से दुनिया भर में चलने वाला सौर कैलेंडर।
सबको यह रफ़्तार पसंद नहीं आई। कुछ समुराई नाराज़ हुए और कुछ ने बग़ावत की, पर हार गए। जापान ने पुराने और नए को मिलाया और जो काम का लगा वही लिया।
करके देखिए: समय की पट्टी
3D में समय की पट्टी को बाएँ से दाएँ खिसकाइए। हर पड़ाव पर पहले अंदाज़ा लगाइए (क्या दिखेगा?) और फिर जाँचिए। फिर घर पर चार डिब्बों की कड़ी बनाइए: जहाज़ आए → नेता चिंतित → एक राज्य, रेल और सेना → स्कूल और नए तौर-तरीक़े। हर तीर को 'क्योंकि' शब्द से समझाइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 1853: पेरी के चार जहाज़; 1854 और 1858 की संधियाँ (असमान)
- 1868: मेइजी पुनर्स्थापना; 1871: डोमेन बने प्रांत
- फुकोकू क्योहेई = अमीर देश, मज़बूत सेना
- शोकुसान कोग्यो = उद्योग बढ़ाओ
- बुनमेइ काइका = सभ्यता और ज्ञानोदय
- 1872: रेल, पहले राष्ट्रीय स्कूल, तोमिओका रेशम मिल; 1873: अनिवार्य सैन्य सेवा, भूमि-कर, नया कैलेंडर
हल किए गए उदाहरण
1. 1854 और 1858 में जापान ने ऐसी संधियाँ क्यों कीं जो उसे पसंद नहीं थीं?
जापान के जहाज़ और तोपें अमेरिकी युद्धपोतों से कमज़ोर थीं। मना करने का मतलब युद्ध हो सकता था, इसलिए शोगुन मान गया। संधियाँ असमान थीं (विदेशियों का मुक़दमा उनके अपने अधिकारी सुनते थे), और इससे बहुत जापानी नाराज़ हुए।
2. 1871 में डोमेन प्रांत बने तो क्या बदला?
पहले हर डोमेन का अपना सरदार, सेना और नियम थे। 1871 के बाद प्रांत टोक्यो से भेजे अफ़सर चलाने लगे, कर एक सरकार के पास गए, और देश मिलकर योजना बना सका।
3. जापान को 'अमीर' और 'मज़बूत' बनाने के लिए 1872-73 में बने या शुरू हुए तीन काम बताइए।
टोक्यो से योकोहामा तक रेल, तोमिओका रेशम मिल, राष्ट्रीय स्कूल-व्यवस्था (1872), और 1873 में आम लोगों की सेना और पैसे में भूमि-कर। कोई भी तीन सही हैं।
4. पेरी के आने और शोगुन के शासन के अंत के बीच कितने साल बीते?
1868 - 1853 = 15 साल।
5. रोज़ की ज़िंदगी में 'सभ्यता और ज्ञानोदय' का एक उदाहरण दीजिए और बताइए वह क्यों ज़रूरी था।
उदाहरण: अख़बार। वे आम लोगों तक नए विचार पहुँचाते थे, इसलिए ज़्यादा लोग दुनिया के बारे में जान सके और बदलाव में शामिल हुए।
6. क्या मेइजी पुनर्स्थापना सिर्फ़ पश्चिम की नक़ल थी? समझाइए।
नहीं। जापान ने जो काम का लगा (रेल, स्कूल, कारख़ाने) वही लिया और अपना सम्राट, भाषा और कई रीति-रिवाज़ रखे। उसने विचारों को अपनी ज़रूरत के हिसाब से ढाला, सब कुछ नहीं नक़ल किया।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि पेरी ने जापान को जीत लिया। वे युद्धपोतों और एक माँग के साथ आए थे; जापान ने बिना युद्ध के संधियाँ कीं।
- 1853 (जहाज़ आए) और 1868 (मेइजी पुनर्स्थापना) को मिला देना। याद रखिए: बीच में 15 साल की चिंता थी।
- यह मानना कि सम्राट अकेले शासन करते थे। असल में युवा नेताओं का एक छोटा समूह उनके नाम पर सरकार चलाता था।
- यह कहना कि सारे समुराई ख़ुश थे। उनकी तलवारें और वेतन गए, और कुछ ने लड़ाई भी की।