जापान की औद्योगिक क्रांति: पहले हल्के उद्योग
मेइजी पुनर्स्थापना के बाद जापान ने विदेश से मशीनें लीं और सरकारी मदद से कारख़ानों में उत्पादन शुरू किया।
- हल्के उद्योग (1880 का दशक): रेशम की रीलिंग और सूत कातने की मिलें तेज़ी से बढ़ीं। कच्चा रेशम और सूत विदेश बेचा गया, और उससे मशीनें और ईंधन ख़रीदे गए। लगभग 1909 तक जापान कच्चे रेशम का दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक बन गया।
- हल्के उद्योग पहले क्यों? इनमें इस्पात से कम पैसा लगता है, और देश में सस्ते मज़दूर और रेशम-कीड़े पालने वाले खेत थे।
- कारोबारी घराने: कुछ बहुत बड़े पारिवारिक कारोबार, जिन्हें जाइबात्सु कहा जाता है (जैसे मित्सुई और मित्सुबिशी), बहुत बड़े हो गए। उनके पास एक साथ बैंक, खदानें, जहाज़ और कारख़ाने थे।
भारी उद्योग: कोयला, लोहा और इस्पात
लगभग 1900 में जापान भारी उद्योग की ओर बढ़ा, जिसमें बहुत पैसा और बड़ी मशीनें लगती हैं।
- यावाता स्टील वर्क्स (1901 में खुला, उत्तरी क्यूशू में कोयला क्षेत्र के पास) लौह-अयस्क और कोयले से स्टील बनाता था। इसे बनाने का कुछ पैसा चीन-जापान युद्ध (1894-95) के बाद चीन से मिले मुआवज़े से आया।
- स्टील यानी रेल, जहाज़, मशीनें और हथियार। जहाज़-निर्माण और रेल बढ़ी।
- चीन और रूस से युद्धों (1894-95, 1904-05) ने स्टील और जहाज़ों की माँग बढ़ाई।
- रेल मुख्य द्वीपों में फैली और खदानों, मिलों व बंदरगाहों को जोड़ने लगी।
उद्योग के साथ आई सामाजिक समस्याएँ
उद्योग ने जापान को अमीर बनाया, पर फ़ायदा सबको नहीं मिला।
- मज़दूर: मिलों में ज़्यादातर किसान परिवारों की युवा लड़कियाँ और महिलाएँ काम करती थीं। दिन 12 घंटे या उससे ज़्यादा का, मज़दूरी कम, और रहने की जगह भीड़ वाली।
- विरोध: 1880 के दशक से मज़दूरों ने हड़तालें कीं। 1890 के दशक में मज़दूर संघ बनाने वाले पहले समूह उभरे। आख़िर 1911 में कारख़ाना क़ानून बना (1916 में लागू हुआ)।
- प्रदूषण: आशियो तांबा खदान ने वातारासे नदी में ज़हर बहाया, जिससे खेत और गाँव बर्बाद हुए। स्थानीय नेता तानाका शोज़ो ने संसद (डायट) में आवाज़ उठाई और किसानों के लिए बरसों लड़े।
- शहर तेज़ी से बढ़े, और उनमें भीड़ वाले, ग़रीब इलाक़े बन गए।
याद रखिए: ये कारण और परिणाम हैं: तरक़्क़ी (कारण) से समस्याएँ (परिणाम) बनीं, और विरोध सरकार को कदम उठाने के लिए धकेलता है।
आधुनिक संस्कृति: पुराने और नए का मेल
लोग शहरों में आए और पढ़ना सीखने लगे, तो नई संस्कृति बनी। 1907 तक स्कूल छह साल के लिए मुफ़्त और अनिवार्य हो गए, और अख़बार फैले।
- लेखन: लेखक जैसे लोग बोलते हैं वैसा लिखने लगे (पुरानी दरबारी शैली छोड़कर)। नात्सुमे सोसेकी, मोरी ओगाई और हिगुची इचियो इस दौर के जाने-माने लेखक हैं।
- कला: कुछ चित्रकारों ने पश्चिमी तेल-चित्रकला सीखी (कुरोदा सेइकी); कुछ ने जापानी शैली की चित्रकला को बचाने और नया रूप देने का काम किया।
- विज्ञान और चिकित्सा: किताज़ातो शिबासाबुरो (टिटनेस और प्लेग), नोगुची हिदेयो और ताकामीने जोकिची (अधिवृक्क ग्रंथि से बनी दवा) दुनिया भर में मशहूर हुए।
- रोज़मर्रा की ज़िंदगी: अख़बार, पत्रिकाएँ, थिएटर और 1897 से चलचित्र।
करके देखिए: बढ़त और समस्या की जोड़ियाँ
समय की पट्टी और 'एक मिल जोड़ें' बटन चलाइए। घर पर दो कॉलम की तालिका बनाइए: बाएँ क्या बढ़ा (मिलें, इस्पात, निर्यात, अख़बार), दाएँ उसके साथ कौन-सी समस्या या बदलाव आया (लंबे घंटे, प्रदूषण, विरोध, नए विचार)। हर पंक्ति के साथ एक 'क्योंकि' लिखिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 1880 का दशक: रेशम और सूती मिलें (पहले हल्के उद्योग)
- 1901: यावाता स्टील वर्क्स (भारी उद्योग)
- जाइबात्सु = बड़े पारिवारिक कारोबारी घराने (जैसे मित्सुई, मित्सुबिशी)
- समस्याएँ: लंबे घंटे, कम मज़दूरी, भीड़ वाले शहर, आशियो खदान का प्रदूषण
- संस्कृति: बोलचाल के उपन्यास, पश्चिमी शैली की चित्रकला, नया विज्ञान, अख़बार
हल किए गए उदाहरण
1. जापान ने इस्पात कारख़ानों से पहले रेशम और सूती मिलें क्यों बनाईं?
कपड़ा मिलों में इस्पात कारख़ानों से कम पैसा और सरल मशीनें लगती हैं। जापान के पास पहले से रेशम के खेत और सस्ते मज़दूर थे, और कपड़ा-धागा विदेश बेचकर बाद में भारी उद्योग के लिए पैसा मिल सकता था।
2. जाइबात्सु क्या है?
बहुत बड़ा पारिवारिक कारोबारी घराना जिसके पास कई तरह की कंपनियाँ एक साथ होती थीं, जैसे बैंक, खदानें, जहाज़रानी और कारख़ाने (जैसे मित्सुई और मित्सुबिशी)।
3. आशियो खदान की समस्या का एक कारण और एक परिणाम बताइए।
कारण: तांबा खदान का कचरा नदी में गया। परिणाम: आगे के खेत और गाँव बर्बाद हुए, और किसानों ने विरोध किया और संसद से कदम उठाने को कहा।
4. एक मिल हर घंटे 1 रील बनाती है। 5 मिलें 8 घंटे में कितनी रीलें बनाएँगी?
5 मिलें × 1 रील × 8 घंटे = 40 रीलें।
5. अख़बार और स्कूल ने आधुनिक संस्कृति को बढ़ने में कैसे मदद की?
स्कूलों ने ज़्यादा लोगों को पढ़ना सिखाया, और अख़बारों ने उन्हें सस्ते में ख़बरें और नए विचार दिए। पाठक बढ़े तो ज़्यादा लेखकों, कलाकारों और विचारकों की बात सुनी गई।
6. औद्योगिक बढ़त से दो फ़ायदे और दो नुक़सान बताइए।
फ़ायदे: ज़्यादा नौकरियाँ, ज़्यादा निर्यात और पैसा, और रेल व जहाज़ के लिए स्टील। नुक़सान: लंबे काम के दिन और कम मज़दूरी, तथा नदी का प्रदूषण और भीड़ वाले शहर।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि भारी उद्योग पहले आया। पहले हल्के उद्योग (रेशम और सूत) आए, फिर 1900 के आसपास इस्पात।
- यह कहना कि यावाता स्टील वर्क्स मेइजी पुनर्स्थापना के साल खुला। वह 1901 में खुला।
- समस्याओं को भूल जाना। हमेशा दोनों पहलू बताइए: तरक़्क़ी और उसकी सामाजिक समस्याएँ।
- कारण और परिणाम उलझाना: प्रदूषण खदान के कचरे का परिणाम है, और विरोध प्रदूषण का परिणाम है।