सामाजिक बदलाव और विद्रोह
शोगुनेट और डोमेन चावल-कर पर टिके थे। पर धन की अर्थव्यवस्था बढ़ चुकी थी। चावल के दाम ऊपर-नीचे होते थे, व्यापारी अमीर होते गए, और चावल में वेतन पाने वाले कई सामुराई क़र्ज़ में डूबे।
प्राकृतिक आपदाओं ने हालत बिगाड़ी। तीन बड़े अकाल आए: क्योहो (1732), तेम्मेई (1782-87) और तेम्पो (1833-39)। फ़सलें बिगड़ीं, चावल महँगा हुआ और बहुत लोग मरे।
- किसानों के विद्रोह (ह्याकुशो इक्की) बढ़े। किसान कम कर और उचित दाम माँगते थे।
- नगरों में तोड़-फोड़ (उचिकोवाशी): ग़रीब नगरवासी चावल के व्यापारियों की दुकानें तोड़ते थे।
- 1837 में ओसाका के पूर्व अधिकारी ओशियो हेइहाचिरो ने भूखों की मदद के लिए विद्रोह किया। वह जल्दी दबा दिया गया, पर शासक-वर्ग के भीतर से उठने के कारण नेताओं को झटका लगा।
शोगुनेट के सुधार
शोगुनेट ने तीन बड़े सुधार आज़माए।
- क्योहो सुधार (1716-45), शोगुन तोकुगावा योशिमुने का: कड़ी बचत, ऊँचा चावल-कर, नए खेत निकालना, सुझाव-पेटी, लिखित क़ानून-संहिता (1742), और ग़ैर-धार्मिक पश्चिमी किताबों की अनुमति। कुछ समय वित्त सुधरा।
- कांसेई सुधार (1787-93), मात्सुदाइरा सादानोबु का: नगर चले गए लोगों को खेतों में लौटने को कहा, अकाल के लिए चावल जमा किया, निचले सामुराई के क़र्ज़ रद्द किए, और किताबों व पढ़ाई पर कड़ाई की। यह अलोकप्रिय रहा।
- तेम्पो सुधार (1841-43), मिज़ुनो तादाकुनी का: विलासिता घटाई, दाम घटाने के लिए व्यापारी संघ भंग करने का आदेश दिया, नगरवासियों को गाँव लौटाया, और एदो-ओसाका के पास की ज़मीन वापस लेने की कोशिश की। दाइम्यो और किसानों ने विरोध किया और दो साल में यह असफल हुआ।
ये अधूरे क्यों रहे? ये चावल-आधारित पुरानी दुनिया में लौटना चाहते थे, जबकि धन की अर्थव्यवस्था बढ़ती गई।
पश्चिमी शक्तियों का आना
जब जापान घर में जूझ रहा था, यूरोप और अमेरिका के जहाज़ पास आने लगे।
- 1792: रूसी अधिकारी लाक्समन उत्तरी जापान आया और व्यापार माँगा।
- 1804: रूसी दूत रेज़ानोव नागासाकी आया और मना कर दिया गया।
- 1808: एक ब्रिटिश युद्धपोत नागासाकी बंदरगाह में घुसा (फ़ेटन घटना)।
- 1825: शोगुनेट ने विदेशी जहाज़ों को खदेड़ने का आदेश दिया।
- 1842: ब्रिटेन के हाथों अफ़ीम-युद्ध में चिंग चीन की हार सुनकर शोगुनेट ने आदेश ढीला किया और विदेशी जहाज़ों को ईंधन-पानी लेने दिया।
1853 में पेरी के नेतृत्व में चार अमेरिकी युद्धपोत एदो के पास पहुँचे। आगे क्या हुआ, यह मेइजी पुनर्स्थापना वाले पाठ में है। कड़ी याद रखिए: कमज़ोर शोगुनेट के सामने मज़बूत विदेशी नौसेनाएँ थीं।
करके देखिए: कारण की कड़ी
काग़ज़ पर कड़ी लिखिए: ख़राब फ़सल, चावल महँगा, भूख, विद्रोह, सुधार, कमज़ोर शोगुनेट। विदेशी जहाज़ों से कमज़ोर शोगुनेट तक एक दूसरा तीर जोड़िए। एक डिब्बा ढककर दोस्त से भरवाइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- बड़े अकाल: क्योहो 1732, तेम्मेई 1782-87, तेम्पो 1833-39
- क्योहो सुधार: योशिमुने, 1716-45
- कांसेई सुधार: मात्सुदाइरा सादानोबु, 1787-93
- तेम्पो सुधार: मिज़ुनो तादाकुनी, 1841-43
- विदेशी संपर्क: रूस 1792 और 1804, ब्रिटेन 1808, अफ़ीम-युद्ध की ख़बर 1842, अमेरिकी जहाज़ 1853
हल किए गए उदाहरण
1. अकाल से पहले चावल की एक बोरी 100 सिक्के की है। अकाल में वह 250 सिक्के की हो जाती है। दाम कितने गुना बढ़ा?
250 / 100 = 2.5 गुना। जो ग़रीब परिवार अपनी ज़्यादातर कमाई चावल पर ख़र्च करते थे, वे पूरा अन्न नहीं ख़रीद सके, इसलिए भूख फैली।
2. तेम्पो सुधार क्यों असफल रहा?
उसने संघ भंग करने, लोगों को गाँव लौटाने और बड़े नगरों के पास की ज़मीन वापस लेने की कोशिश की। व्यापारी, दाइम्यो और किसान सब ने विरोध किया, और वह बढ़ती धन-अर्थव्यवस्था से मेल नहीं खाता था।
3. 1837 का ओशियो विद्रोह छोटा होकर भी क्यों महत्त्वपूर्ण था?
उसका नेता अधिकारी था, किसान नहीं, और वह व्यापार के मुख्य नगर ओसाका में हुआ। इससे दिखा कि भीतर के लोग भी व्यवस्था को विफल मानते थे।
आम गलतियाँ
- क्रम मिला देना: क्योहो (1716), कांसेई (1787), तेम्पो (1841)।
- यह सोचना कि 1853 में पेरी पहला विदेशी जहाज़ था। रूसी 1792 में और ब्रिटिश 1808 में आए थे।
- यह कहना कि सुधार पूरी तरह सफल हुए। सिर्फ़ क्योहो कुछ समय के लिए सहायक रहा।
- ओशियो हेइहाचिरो को किसान समझना। वह पूर्व अधिकारी था।