उद्योग का विकास
लगभग 250 साल तक जापान के भीतर कोई बड़ा युद्ध नहीं हुआ। शांति में लोग खेती और व्यापार में पैसा लगा सके।
- खेती: किसानों ने नए खेत खोले और भारी कुदाल व दाना निकालने के औज़ार जैसे बेहतर साधन इस्तेमाल किए। उन्होंने सूखी सार्डिन मछली और खली जैसी खाद डाली। पैदावार बढ़ी।
- नक़दी फ़सलें: कई किसान बेचने के लिए कपास, सरसों, नील और शहतूत भी उगाने लगे। गाँवों में सिर्फ़ चावल नहीं, पैसा भी चलने लगा।
- दस्तकारी और खानें: बुनाई, मिट्टी के बर्तन, साके, काग़ज़ और खनन बढ़े। कारख़ानों में काम के बदले मज़दूरी मिलती थी।
- व्यापारी: संघ (काबु-नाकामा) तय करते थे कि कौन व्यापार करे, और सर्राफ़ पैसे की व्यवस्था चलाते थे।
ओसाका को राष्ट्र की रसोई कहा जाता था क्योंकि चावल और सामान सबसे पहले वहीं पहुँचता था। एदो की आबादी लगभग दस लाख हो गई। क्योटो बारीक दस्तकारी के लिए जाना जाता रहा।
परिवहन: सड़कें और जहाज़
सामान और लोगों को रास्ते चाहिए। शोगुनेट ने एदो से निकलने वाले पाँच मुख्य राजमार्ग (गोकाइदो) बनवाए, जैसे समुद्र के किनारे का तोकाइदो। रास्ते में सराय और घोड़ों के अस्तबल वाले डाक-पड़ाव थे और चौकियाँ थीं जहाँ अधिकारी यात्रियों की जाँच करते थे।
इन सड़कों ने दाइम्यो की बारी-बारी से एदो हाज़िरी की यात्राओं में मदद की। व्यापारियों और तीर्थयात्रियों को भी लाभ हुआ।
भारी सामान के लिए जहाज़ सस्ते पड़ते थे। मालवाहक जहाज़ ओसाका और एदो के बीच, और उत्तरी तट पर चलते थे और चावल, कपास, तेल व साके ले जाते थे। जल-यात्रा के लिए अच्छे बंदर चाहिए थे, इसलिए बंदरगाह-नगर भी बढ़े।
शिक्षा का प्रसार
एदो जापान में पढ़ाई बहुत फैली।
- मंदिर-स्कूल (तेराकोया): किसानों और नगरवासियों के बच्चे पढ़ना, लिखना और सोरोबान (गिनती-पट्टी) तथा शिष्टाचार सीखते थे। शिक्षक पुजारी, सामुराई या कोई नगरवासी हो सकता था। 1800 के दशक तक ऐसे हज़ारों स्कूल थे।
- डोमेन-स्कूल (हांको): हर डोमेन अपना स्कूल चलाता था, जिसमें सामुराई के बेटे कन्फ़्यूशियस की किताबें, लेखन, युद्धकला और बाद में चिकित्सा पढ़ते थे।
- उच्च अध्ययन: विद्वान जापान की अपनी पुरानी किताबें (कोकुगाकु) और डच किताबों से पश्चिमी विज्ञान (रांगाकु), जैसे चिकित्सा और खगोल, पढ़ते थे। 1774 में शरीर-रचना की एक जापानी किताब छपी।
सस्ती छपी किताबों और किताब किराये पर देने वाली दुकानों से बहुत लोग पढ़ सके। यही एक कारण है कि जापान आगे चलकर नई चीज़ें जल्दी सीख सका।
नगरवासियों की संस्कृति
नगरों में व्यापारी और कारीगर (चोनिन) अमीर हो गए, हालाँकि वर्ग-क्रम में वे नीचे थे। उन्होंने मनोरंजन पर पैसा ख़र्च किया और उनके लिए एक नई संस्कृति बनी।
- गेन्रोकु संस्कृति (लगभग 1688-1704): केंद्र ओसाका और क्योटो। चिकामात्सु ने कठपुतली-रंगमंच और काबुकी के लिए नाटक लिखे, इहारा साइकाकु ने व्यापारियों पर हास्य-कथाएँ लिखीं और मात्सुओ बाशो ने हाइकु (17 मात्राओं की कविता) को प्रसिद्ध किया।
- काबुकी: संगीत, श्रृंगार और बड़े हाव-भाव वाली जीवंत मंच-कला।
- उकियो-ए: अभिनेताओं, सुंदर लोगों और दृश्यों के लकड़ी के ब्लॉक से बने रंगीन छापे। इनकी बहुत प्रतियाँ बन सकती थीं, इसलिए ये सस्ते थे।
- बुंका-बुनसेई संस्कृति (लगभग 1804-1830): केंद्र एदो। होकुसाई और हिरोशिगे ने प्रसिद्ध दृश्य-छापे बनाए और हास्य-कथाएँ लोकप्रिय थीं।
करके देखिए: कड़ी बनाइए
एक पंक्ति में चार डिब्बे बनाइए: खेती, सड़कें और जहाज़, स्कूल, नगरवासियों की संस्कृति। डिब्बों के बीच लिखिए कि पहला अगले की मदद कैसे करता है, जैसे: ज़्यादा अन्न और नक़दी से व्यापार बढ़ा। फिर 3D के खेल-चरण में हर भाग पर टैप करके जाँचिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- खेती: नए खेत + औज़ार + खाद + नक़दी फ़सलें
- एदो से पाँच राजमार्ग (गोकाइदो); डाक-पड़ाव और चौकियाँ
- ओसाका = राष्ट्र की रसोई; एदो की आबादी लगभग दस लाख
- तेराकोया = आम बच्चों का मंदिर-स्कूल; हांको = सामुराई का डोमेन-स्कूल
- गेन्रोकु संस्कृति (लगभग 1700, ओसाका-क्योटो); बुंका-बुनसेई (1800 के शुरू, एदो)
हल किए गए उदाहरण
1. एक गाँव में 200 कोकु चावल होता है। कर पैदावार का 35 प्रतिशत है। गाँववालों के पास कितना चावल बचा?
कर = 0.35 x 200 = 70 कोकु। बचा = 200 - 70 = 130 कोकु। नक़दी फ़सलों से गाँववालों के पास बेचने को और सामान होता है।
2. चावल के लिए जहाज़ अक्सर सड़कों से बेहतर क्यों थे?
जहाज़ घोड़ों या कुलियों से कहीं ज़्यादा वज़न कम ख़र्च में ले जाता है। चावल भारी होता है, इसलिए ओसाका-एदो के समुद्री रास्ते बहुत काम आए।
3. वर्ग-क्रम में नीचे होकर भी नगरवासियों ने नई संस्कृति कैसे बनाई?
व्यापार से वे धनी थे और उनके पास पैसा व समय था। उन्होंने नाटकों, कविताओं और छापों पर पैसा लगाया, इसलिए कलाकारों ने उन्हीं के लिए रचा।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि सिर्फ़ सामुराई पढ़ सकते थे। आम बच्चे मंदिर-स्कूलों में जाते थे।
- गेन्रोकु (लगभग 1700, ओसाका-क्योटो) और बुंका-बुनसेई (1800 के शुरू, एदो) को मिला देना।
- यह मानना कि किसान सिर्फ़ चावल उगाते थे। कई कपास जैसी नक़दी फ़सलें उगाते थे।
- व्यापारियों को सबसे ऊँचा वर्ग कहना। वर्ग-क्रम में वे नीचे थे, भले अमीर हों।