प्रेरणा: लोग अच्छा काम क्यों करते हैं
प्रेरणा वह अंदरूनी धक्का है जो इंसान को काम शुरू करने, चलते रहने और मेहनत करने को कहता है। इसे दो पुराने सिद्धांत समझाते हैं।
मास्लो का आवश्यकता पदानुक्रम: ज़रूरतों के पाँच स्तर हैं: (1) शरीर की, जैसे खाना और आराम; (2) सुरक्षा, जैसे पक्की नौकरी; (3) अपनापन, जैसे दोस्त और टीम; (4) सम्मान, जैसे प्रशंसा और पद; (5) आत्म-विकास, जैसे अपनी प्रतिभा का उपयोग। अगला स्तर तब ज़ोर से खींचता है जब निचला काफ़ी हद तक पूरा हो। आलोचना: असली लोग हमेशा इसी क्रम में नहीं चलते।
हर्ज़बर्ग का द्वि-कारक सिद्धांत: स्वच्छता कारक (वेतन, कार्य-परिस्थितियाँ, नौकरी की सुरक्षा, कंपनी के नियम, साथियों से संबंध) प्रेरित नहीं करते; ये खराब हों तो लोग नाखुश होते हैं, अच्छे हों तो बस नाखुश नहीं रहते। प्रेरक (उपलब्धि, पहचान, ज़िम्मेदारी, दिलचस्प काम, आगे बढ़ने का मौका) असली संतोष और मेहनत देते हैं। इसलिए प्रबंधक पहले बुनियादी ठीक करें, फिर प्रेरक जोड़ें।
और विचार: मैकग्रेगर का सिद्धांत X (लोग काम से बचते हैं, निगरानी चाहिए) और सिद्धांत Y (लोग काम पसंद करते हैं, ज़िम्मेदारी चाहते हैं)।
कार्य-जीवन की गुणवत्ता
कार्य-जीवन की गुणवत्ता का मतलब है कि किसी कंपनी में काम करना कितना अच्छा लगता है: सुरक्षित जगह, उचित वेतन, ठीक घंटे, सम्मान, फ़ैसलों में राय, काम और परिवार में संतुलन और सीखने के मौके। कंपनियाँ इसे लचीले घंटे, घर से काम के विकल्प, साफ़ भूमिकाएँ, टीम भावना, कर्मचारियों की बात सुनने और निष्पक्ष पदोन्नति से सुधारती हैं। ऊँची गुणवत्ता से अनुपस्थिति और नौकरी छोड़ना घटता है और काम बढ़ता है। जाँचने का सरल तरीका: छोटा कर्मचारी सर्वे और हर साल कितने लोग गए इसकी गिनती।
कार्य-परिस्थितियाँ और अर्गोनॉमिक्स
कार्य-परिस्थितियाँ काम की भौतिक और सामाजिक जगह हैं: रोशनी, शोर, गर्मी, हवा, सुरक्षा, घंटे, ब्रेक और पालियाँ।
अर्गोनॉमिक्स (कार्य-अनुकूलन विज्ञान) का मतलब है काम को इंसान के अनुकूल बनाना, इंसान को काम के अनुकूल नहीं। उदाहरण: पीठ को सहारा देने वाली कुर्सी, आँख की सीध में स्क्रीन, हाथ के नाप के औज़ार, लंबे बैठने के बीच ब्रेक, साफ़ बटन वाली मशीनें। खराब अर्गोनॉमिक्स से पीठ दर्द, थकी आँखें और बार-बार के काम से चोट होती है; अच्छा अर्गोनॉमिक्स इन्हें रोकता है और काम तेज़ व सुरक्षित बनाता है।
CSR और सामाजिक प्रदर्शन
कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) का मतलब है कि कंपनी सिर्फ़ मुनाफ़ा कमाने के साथ लोगों और प्रकृति पर अपने असर की ज़िम्मेदारी लेती है। इसमें कर्मचारी (उचित वेतन, सुरक्षा, बराबर मौके), ग्राहक (ईमानदार उत्पाद), स्थानीय समुदाय (रोज़गार, स्कूल, स्वास्थ्य) और पर्यावरण (कम कचरा और प्रदूषण) आते हैं। भारत में एक सीमा से बड़ी कंपनियों को मुनाफ़े का एक हिस्सा CSR पर ख़र्च करना होता है; कई देश नियमों और स्वैच्छिक रिपोर्टों पर निर्भर हैं।
सामाजिक प्रदर्शन बताता है कि कंपनी इन सामाजिक लक्ष्यों पर कितनी अच्छी है। इसे सामाजिक संकेतकों से मापते हैं: कर्मचारी छोड़ने की दर, दुर्घटना दर, प्रशिक्षण घंटे, समान वेतन का अंतर और कर्मचारी संतुष्टि। अच्छा सामाजिक प्रदर्शन अच्छे कर्मचारी और भरोसेमंद ग्राहक लाता है, इसलिए अक्सर वित्तीय रूप से भी फ़ायदा होता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मास्लो स्तर: शरीर → सुरक्षा → अपनापन → सम्मान → विकास
- हर्ज़बर्ग: स्वच्छता कारक नाखुशी रोकते हैं; प्रेरक संतोष बनाते हैं
- कर्मचारी छोड़ने की दर (%) = छोड़ने वाले ÷ औसत कर्मचारी × 100
- अनुपस्थिति दर (%) = खोए दिन ÷ संभव दिन × 100
हल किए गए उदाहरण
1. एक कारखाने में वेतन, सुरक्षित इमारत और साफ़ शौचालय सुधरे, फिर भी कर्मचारी उत्साही नहीं। हर्ज़बर्ग से समझाओ।
वेतन, सुरक्षा और सफ़ाई स्वच्छता कारक हैं। ये नाखुशी हटाते हैं पर प्रेरणा नहीं बनाते। कंपनी को प्रशंसा, प्रशिक्षण और ज़िम्मेदारी जैसे प्रेरक जोड़ने चाहिए।
2. औसतन 200 कर्मचारियों वाली कंपनी में साल भर में 30 लोग गए। छोड़ने की दर ज्ञात करो।
दर = 30 ÷ 200 × 100 = 15%।
3. 50 लोगों की टीम महीने में 20 दिन काम करती है। अनुपस्थिति से 40 कार्य-दिन खोए। अनुपस्थिति दर ज्ञात करो।
संभव दिन = 50 × 20 = 1000। दर = 40 ÷ 1000 × 100 = 4%।
4. दिन भर टाइप करने वालों के लिए दो अर्गोनॉमिक बदलाव बताओ।
पीठ के सहारे वाली कुर्सी और आँख की सीध में स्क्रीन लगाओ; हर घंटे छोटा ब्रेक दो और कीबोर्ड कोहनी की ऊँचाई पर रखो। इससे पीठ और कलाई का दर्द घटता है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि ज़्यादा वेतन हमेशा प्रेरित करता है। हर्ज़बर्ग के अनुसार वेतन ज़्यादातर नाखुशी रोकता है; पहचान और विकास प्रेरित करते हैं।
- मास्लो की सीढ़ियों को कठोर नियम मानना। कुछ निचली ज़रूरतें अधूरी हों तब भी लोग सम्मान चाह सकते हैं।
- अर्गोनॉमिक्स को सजावट समझना। यह सेहत और शरीर-काम के मेल का विषय है।
- CSR को सिर्फ़ दान मानना। यह रोज़ के काम में कर्मचारियों, ग्राहकों और प्रकृति से व्यवहार भी है।