व्यक्ति: व्यक्तित्व, धारणा और अभिवृत्ति
संगठनात्मक व्यवहार व्यक्ति से शुरू होता है।
- व्यक्तित्व: किसी के सोचने, महसूस करने और काम करने का स्थायी ढंग। यह जन्मजात गुणों और अनुभव से बनता है। एक आम नमूना पाँच गुण बताता है: खुलापन, कर्तव्यनिष्ठा, बहिर्मुखता, सहमति-भाव और भावनात्मक स्थिरता। 'अच्छा' या 'बुरा' व्यक्तित्व नहीं होता, सिर्फ़ काम से कम या ज़्यादा मेल होता है।
- धारणा (perception): व्यक्ति जो देखता-सुनता है उसे चुनने और समझने का तरीक़ा। एक ही घटना को दो लोग अलग पढ़ सकते हैं। आम ग़लतियाँ: पहली छाप का असर, रूढ़िबद्ध धारणा (किसी समूह के नाम पर व्यक्ति को परखना), प्रभामंडल प्रभाव (एक अच्छा गुण सब पर रंग चढ़ा दे)।
- अभिवृत्ति (रवैया): किसी चीज़ के पक्ष या विपक्ष में टिकाऊ भाव, जिसके तीन हिस्से हैं: मैं क्या सोचता हूँ (विश्वास), क्या महसूस करता हूँ (पसंद-नापसंद) और कैसे करता हूँ (झुकाव)। काम के प्रति (नौकरी से संतुष्टि) और नियोक्ता के प्रति (निष्ठा) रवैया अनुपस्थिति और मेहनत को प्रभावित करता है।
यह जानने वाला प्रबंधक काम को लोगों से मिला सकता है और अन्यायपूर्ण फ़ैसलों से बच सकता है।
डिजिटल पहचान
आपकी डिजिटल पहचान वह तस्वीर है जो आपकी ऑनलाइन बनती है: आपकी प्रोफ़ाइल, पोस्ट, फ़ोटो, टिप्पणियाँ और आपके छोड़े डेटा के निशान। संगठन में इसके दो हिस्से हैं: निजी पहचान (सोशल मीडिया) और पेशेवर पहचान (काम का ईमेल, कंपनी की चैट, पेशेवर नेटवर्क)।
- ई-प्रतिष्ठा: जब कोई आपको खोजे तो वह क्या पाता है और क्या सोचता है। नियोक्ता अक्सर देखते हैं।
- पेशेवर उपयोग: काम का खाता संगठन का प्रतिनिधि है; आपके लिखे का असर उसकी छवि पर पड़ता है।
- सुरक्षा: मज़बूत और अलग पासवर्ड, दो-चरणीय लॉगिन, प्राइवेसी सेटिंग, सोच-समझकर साझा करना, और दूसरों की निजता व कंपनी के डेटा का सम्मान।
अच्छी आदतें: पोस्ट करने से पहले सोचिए, काम और निजी जीवन अलग रखिए, और पूछिए 'अगर मेरा प्रबंधक, ग्राहक या माता-पिता इसे देखें तो क्या मैं सहज रहूँगा?'
आपसी संवाद
संवाद का मतलब है संदेश इस तरह पहुँचाना कि वह समझा जाए। रास्ता: भेजने वाला → संदेश बनाता है → माध्यम → पाने वाला समझता है → फ़ीडबैक।
- माध्यम: आमने-सामने, फ़ोन, ईमेल, चैट, सूचना-पट, बैठक। संदेश के हिसाब से माध्यम चुनिए: ज़रूरी और संवेदनशील बात रूबरू कहना बेहतर है।
- शोर (बाधाएँ): भौतिक (शोरगुल), भाषा और कठिन शब्द, भावनाएँ, अलग धारणाएँ, ध्यान से न सुनना, सूचना की भरमार और तकनीकी गड़बड़ी।
- फ़ीडबैक: पाने वाले का जवाब बताता है कि संदेश समझा गया या नहीं। फ़ीडबैक न हो तो संवाद एकतरफ़ा है।
- शाब्दिक और अशाब्दिक: शब्दों के साथ लहजा, चेहरा और हाव-भाव भी अर्थ देते हैं। लिखे संदेश में लहजा आसानी से ग़लत पढ़ा जाता है।
सुझाव: साफ़ और छोटा बोलिए, समझ की जाँच कीजिए, ध्यान से सुनिए और सही समय व साधन चुनिए।
समूह: हैसियत और अपनापन
समूह दो या अधिक लोग हैं जो एक लक्ष्य पाने के लिए आपस में मिलते और एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं। औपचारिक समूह संगठन बनाता है (विभाग, प्रोजेक्ट टीम)। अनौपचारिक समूह दोस्ती या साझा रुचि से बनता है (लंच का समूह)।
- भूमिका: किसी पद से अपेक्षित व्यवहार (टीम लीडर, रिकॉर्ड रखने वाला)।
- हैसियत (status): व्यक्ति को मिला दर्जा या सम्मान, जो पद, कौशल, उम्र या अनुभव से आता है। इससे तय होता है किसकी बात सुनी जाएगी।
- अपनापन: स्वीकार किए जाने की ज़रूरत। जो समूह का हिस्सा महसूस करता है वह उसके लिए ज़्यादा मेहनत करता है, पर ज़्यादा अपनापन अनुरूपता और 'ग्रुपथिंक' तक ले जा सकता है (कोई असहमति जताने की हिम्मत नहीं करता)।
- समूह का विकास: समूह अक्सर बनना (forming), टकराना (storming), नियम तय करना (norming) और अच्छा प्रदर्शन (performing) से गुज़रते हैं।
अच्छा प्रबंधक साफ़ भूमिकाओं, हैसियत के निष्पक्ष व्यवहार और अलग विचारों के लिए जगह वाली टीम बनाता है।
संगठन की संस्कृति और नियम-परंपराएँ (नॉर्म्स)
संस्कृति साझा मूल्यों, विश्वासों और आदतों का वह समूह है जो 'यहाँ हम काम कैसे करते हैं' तय करता है। नॉर्म्स उससे निकले अनकहे नियम हैं: कैसे कपड़े पहनें, बॉस से कैसे बात करें, देर तक काम करना ठीक है या नहीं।
- दिखने वाला हिस्सा: पोशाक, दफ़्तर की बनावट, लोगो, रस्में, क़िस्से।
- छिपा हिस्सा: मूल्य और मान्यताएँ।
नए लोगों को संस्कृति परिचय-कार्यक्रम, क़िस्सों और इस बात से मिलती है कि नेता किसे पुरस्कृत करते हैं। मज़बूत सकारात्मक संस्कृति फ़ैसले तेज़ करती और निष्ठा बढ़ाती है; नकारात्मक संस्कृति (दोष-मढ़ना, गोपनीयता) मनोबल गिराती है। संस्कृति धीरे बदलती है: नेताओं को नया व्यवहार दिखाना, पुरस्कार बदलना और नए क़िस्से सुनाने होते हैं। संगठनात्मक संस्कृति वाला पाठ भी देखिए।
अधिकार, नेतृत्व और प्रेरणा
अधिकार आदेश देने और फ़ैसले लेने का औपचारिक हक़ है, जो पद से जुड़ा होता है। शक्ति विशेषज्ञता या सम्मान से भी आ सकती है। नेतृत्व लोगों को स्वेच्छा से लक्ष्य की ओर काम करने के लिए प्रभावित करना है।
- निरंकुश (autocratic): नेता अकेले तय करता है। तेज़ है, पर प्रेरणा घट सकती है।
- लोकतांत्रिक (democratic): नेता टीम से सलाह लेता है। धीमा है, पर लगाव और विचार बढ़ते हैं।
- खुली छूट (laissez-faire): नेता चुनाव टीम पर छोड़ देता है। कुशल और स्वप्रेरित टीम के लिए अच्छा; वरना कमज़ोर।
अच्छे नेता लोगों और स्थिति के अनुसार शैली बदलते हैं।
प्रेरणा काम करने की भीतरी ताक़त है। दो पुराने विचार: मैस्लो के अनुसार ज़रूरतें बुनियादी (भोजन, सुरक्षा) से अपनापन, सम्मान और विकास तक बढ़ती हैं, और पूरी हो चुकी ज़रूरत प्रेरित नहीं करती। हर्ज़बर्ग स्वच्छता कारकों (वेतन, हालात, नियम), जो नाख़ुशी रोकते हैं, को प्रेरकों (उपलब्धि, पहचान, रोचक काम), जो सच में मेहनत जगाते हैं, से अलग करते हैं। साफ़ लक्ष्य, उचित पुरस्कार, फ़ीडबैक, सराहना और आगे बढ़ने का मौक़ा मदद करते हैं।
टकराव को सँभालना
टकराव लोगों या समूहों के बीच लक्ष्य, विचार, मूल्य या हितों का भिड़ना है। कारण: सीमित संसाधन, अस्पष्ट भूमिकाएँ, अलग लक्ष्य, कमज़ोर संवाद, स्वभाव का टकराव, अन्याय।
टकराव हमेशा बुरा नहीं। थोड़ा टकराव नए विचार ला सकता है; बहुत ज़्यादा भरोसा और नतीजा बिगाड़ता है।
लोग पाँच तरह से प्रतिक्रिया देते हैं:
- बचना: मुद्दे से दूर रहना।
- झुकना: दूसरे की ज़रूरत पहले रखना।
- होड़ करना: जीतने पर ज़ोर।
- समझौता: दोनों थोड़ा-थोड़ा छोड़ें।
- मिलकर हल: साथ सोचकर ऐसा हल जो दोनों को संतुष्ट करे।
सुलझाने के चरण: शांत रहिए, दोनों की सुनिए, असली मुद्दा बताइए, साझा लक्ष्य ढूँढिए, विकल्प सुझाइए, सहमत होइए और बाद में जाँचिए। अगर पक्ष ख़ुद न सुलझा सकें तो कोई निष्पक्ष व्यक्ति (प्रबंधक, मध्यस्थ) मदद कर सकता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संवाद का रास्ता: भेजने वाला → संदेश → माध्यम → पाने वाला → फ़ीडबैक (शोर किसी भी चरण में रोक सकता है)
- मैस्लो: शारीरिक → सुरक्षा → अपनापन → सम्मान → विकास
- हर्ज़बर्ग: स्वच्छता कारक नाख़ुशी रोकते हैं; प्रेरक मेहनत जगाते हैं
- नेतृत्व शैलियाँ: निरंकुश, लोकतांत्रिक, खुली छूट
- टकराव की प्रतिक्रियाएँ: बचना, झुकना, होड़, समझौता, मिलकर हल
हल किए गए उदाहरण
1. प्रबंधक ईमेल भेजता है 'रिपोर्ट जल्दी पूरी करो।' एक कर्मचारी 2 घंटे में देता है और दूसरा 2 दिन में। संवाद में क्या चूक हुई?
संदेश अस्पष्ट था: 'जल्दी' का मतलब सबके लिए अलग है (धारणा)। समझ जाँचने वाला फ़ीडबैक चरण नहीं था। सुधार: समय बताइए ('आज 3 बजे तक') और पाने वाले से पुष्टि करवाइए।
2. एक नया कर्मचारी बैठकों में चुप रहता है जबकि बाक़ी लोग बॉस से हँसी-मज़ाक करते हैं। कौन-सी अवधारणा काम कर रही है और टीम क्या कर सकती है?
समूह के नॉर्म्स और अपनापन: नए व्यक्ति ने अनकहे नियम अभी सीखे नहीं और वह कम हैसियत महसूस कर सकता है। टीम उसका परिचय करा सकती है, साफ़ भूमिका दे सकती है, मित्रवत ढंग से राय पूछ सकती है, और कोई साथी उसे नॉर्म्स समझा सकता है।
3. दुकानदार वेतन बढ़ाता है, फिर भी कर्मचारी ऊबे रहते हैं। हर्ज़बर्ग के अनुसार कारण समझाइए।
वेतन स्वच्छता कारक है: वह नाख़ुशी रोकता है पर टिकाऊ प्रेरणा नहीं बनाता। प्रेरित करने के लिए पहचान, ज़िम्मेदारी और सीखने के मौक़े जैसे प्रेरक जोड़ने होंगे।
4. दो साथी सुबह 10 बजे एक ही बैठक-कक्ष चाहते हैं। इसे सुलझाने के दो तरीक़े बताइए और कौन ज़्यादा 'मिलकर हल' वाला है।
समझौता: एक 10 बजे ले, दूसरा 11 बजे। मिलकर हल: ऐसा रास्ता ढूँढें जिससे दोनों की ज़रूरत पूरी हो, जैसे एक पास का ख़ाली कमरा ले या दोनों संयुक्त बैठक करें। मिलकर हल ज़्यादा साझा है क्योंकि दोनों की ज़रूरत पूरी होती है।
आम गलतियाँ
- यह मान लेना कि संदेश भेजने का मतलब है कि वह समझा गया। फ़ीडबैक से जाँचिए।
- तथ्यों की जगह पहली छाप या समूह के लेबल से किसी को परखना।
- यह सोचना कि वेतन अकेले सबको प्रेरित करता है। पहचान और अर्थपूर्ण काम भी मायने रखते हैं।
- हर टकराव को बुरा मानना, या उसे बढ़ने तक अनदेखा करना। जल्दी और निष्पक्षता से निपटिए।