व्यावसायिक निर्णयों का परिचय
व्यावसायिक निर्णय का मतलब है लक्ष्य पाने के लिए दो या ज़्यादा कामों में से एक चुनना। प्रबंधकीय लेखाशास्त्र में हम हर विकल्प का पैसे पर असर तौलते हैं।
- कार्यगत निर्णय: अल्पकालीन, मौजूदा ढाँचे के अंदर, छोटी रकम, आसानी से बदलने वाले (एक बार के ऑर्डर का दाम, बनाओ या खरीदो, कौन-सा उत्पाद आगे बढ़ाएँ)।
- संरचनात्मक निर्णय: दीर्घकालीन, व्यवसाय का रूप बदलने वाले, बड़ी रकम, बदलना मुश्किल (नई फ़ैक्टरी, नई मशीन, नई उत्पाद श्रृंखला, शाखा बंद करना)।
मुख्य नियम: सिर्फ़ प्रासंगिक लागत लो। लागत तब प्रासंगिक है जब वह भविष्य की नक़द लागत हो और विकल्पों में अलग हो। डूबी लागत (जो पहले खर्च हो चुकी) कभी प्रासंगिक नहीं होती।
कार्यगत निर्णय
आम कार्यगत निर्णय:
- बनाओ या खरीदो: बनाने की अतिरिक्त लागत (सामग्री, श्रम, परिवर्ती ओवरहेड) की तुलना बाहर से खरीदने की कीमत से करो। जो लागतें वही रहती हैं, जैसे किराया, छोड़ दो।
- विशेष ऑर्डर: खाली क्षमता हो तो तब स्वीकार करो जब अतिरिक्त आय अतिरिक्त लागत से ज़्यादा हो। देखो कि इससे सामान्य कीमतें न बिगड़ें।
- सीमित कारक: कोई चीज़ कम हो (मशीन-घंटे) तो उस दुर्लभ साधन की प्रति इकाई सबसे ज़्यादा योगदान वाला उत्पाद पहले बनाओ।
- विकल्पों में सम-विच्छेद: बनाने में स्थिर लागत हो तो वह इकाई संख्या खोजो जहाँ दोनों विकल्प बराबर पड़ें।
योगदान = बिक्री कीमत - प्रति इकाई परिवर्ती लागत।
संरचनात्मक निर्णय
संरचनात्मक निर्णयों में अभी पैसा लगाकर कई सालों में कमाते हैं, इसलिए समय और जोखिम मायने रखते हैं।
- पेबैक अवधि = निवेश / सालाना नक़द आय (जब आय बराबर हो)। छोटी अवधि सुरक्षित है, पर वह पेबैक के बाद का पैसा नहीं देखती।
- वर्तमान मूल्य: बाद का पैसा आज के पैसे से कम मूल्य का है। भविष्य की रकम को (1 + दर)^वर्ष से भाग दो। आय का कुल वर्तमान मूल्य निवेश से ज़्यादा हो तो शुद्ध वर्तमान मूल्य (NPV) धनात्मक है और योजना करने लायक है।
- जोखिम, लोगों, ग्राहकों और योजना फ़ेल होने पर क्या होगा, यह भी सोचो।
खुद करके देखो: तीन संख्याओं से फ़ैसला
मेले के लिए 20 कपकेक खुद बना सकते हो (आटा, चीनी, गैस: 6 रुपये प्रत्येक) या तैयार 8 रुपये प्रत्येक में खरीद सकते हो। ओवन पहले से तुम्हारा है, उसकी लागत डूबी है। कौन-सा सस्ता है और कितना? फिर 3D स्लाइडर से देखो: कितनी इकाइयों पर 400 रुपये की स्थिर लागत वाली मशीन फ़ायदे में आती है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रासंगिक लागत = भविष्य की लागत जो विकल्पों में अलग हो
- प्रति इकाई योगदान = बिक्री कीमत - परिवर्ती लागत
- पेबैक अवधि = निवेश / सालाना आय
- सम-विच्छेद इकाइयाँ (बनाओ/खरीदो) = स्थिर लागत / (खरीद कीमत - बनाने की परिवर्ती लागत)
- वर्तमान मूल्य = भविष्य की रकम / (1 + r)^n
- NPV = आय का वर्तमान मूल्य - निवेश
हल किए गए उदाहरण
1. 100 पुर्ज़े बनाने में सामग्री और श्रम 700 रुपये लगते हैं। किराया 300 रुपये दोनों हालत में देना है। खरीदने में 800 रुपये। बनाओ या खरीदो?
किराया बराबर है, छोड़ दो। बनाना = 700, खरीदना = 800। बनाना 100 रुपये सस्ता है।
2. खाली क्षमता है। एक ग्राहक 50 इकाइयाँ 9 रुपये में माँगता है। परिवर्ती लागत 7 रुपये प्रति इकाई। स्वीकार करें?
अतिरिक्त आय = 450, अतिरिक्त लागत = 350, लाभ = 100 रुपये। स्वीकार करो।
3. एक मशीन 600 रुपये की है और हर साल 200 रुपये लाती है। पेबैक अवधि निकालो।
600 / 200 = 3 साल।
4. बनाने में 400 रुपये स्थिर लागत और 4 रुपये प्रति इकाई लगते हैं। खरीदना 8 रुपये प्रति इकाई है। सम-विच्छेद इकाइयाँ निकालो।
400 / (8 - 4) = 100 इकाई। 100 से कम पर खरीदो, ज़्यादा पर बनाओ।
5. मशीन-घंटे सीमित हैं। A 2 घंटे में 12 रुपये योगदान देता है; B 3 घंटे में 15 रुपये। पहले कौन?
A: 12/2 = 6 रुपये प्रति घंटा। B: 15/3 = 5 रुपये प्रति घंटा। पहले A बनाओ।
6. अभी 1,000 रुपये लगाओ और एक साल बाद 1,100 रुपये पाओ। दर 5% है। क्या यह ठीक है?
वर्तमान मूल्य = 1,100 / 1.05 = 1,047.62। NPV = 47.62, धनात्मक है। करने लायक।
आम गलतियाँ
- डूबी लागत (जो पहले खर्च हो चुकी) को फ़ैसले में गिनना।
- वह लागत जोड़ना जो दोनों विकल्पों में बराबर है, जैसे बनाओ-या-खरीदो में किराया।
- प्रति इकाई सबसे बड़ा योगदान देखना, प्रति दुर्लभ घंटा नहीं।
- पेबैक को मुनाफ़े का सबूत समझना। वह पेबैक के बाद का नक़द और पैसे का समय-मूल्य नहीं देखता।