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प्रत्यक्ष लागत विधि (Direct Costing)

प्रत्यक्ष लागत विधि में उत्पाद की लागत में केवल परिवर्ती लागत गिनी जाती है। स्थिर लागत उसी अवधि के खर्च में पूरी चढ़ती है। लाभ = बिक्री - परिवर्ती लागत - स्थिर लागत। अवशोषण लागत में स्थिर लागत हर बनी इकाई पर बँटती है, इसलिए बिना बिके माल के साथ कुछ स्थिर लागत आगे चली जाती है। स्टॉक बढ़े तो अवशोषण लाभ ज़्यादा दिखता है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. एक छोटा कारखाना 300 पेन बनाता है। नीला ब्लॉक: हर पेन का माल और मज़दूरी (परिवर्ती)। स्लेटी ब्लॉक: किराया और मशीन, हर महीने एक-सा (स्थिर)।
  2. प्रत्यक्ष लागत: पेन की लागत सिर्फ़ नीला भाग है। पूरा स्लेटी ब्लॉक इसी महीने चुकता है। 200 पेन बिके, 100 स्टॉक में हैं।
  3. अवशोषण लागत में स्लेटी ब्लॉक सभी 300 पेन में बँटता है। बिना बिके 100 पेन अपना हिस्सा स्टॉक में ले जाते हैं। लाभ बड़ा दिखता है।
  4. अब सारे 300 पेन बिक गए। स्टॉक नहीं बचा, इसलिए कुछ आगे नहीं गया। दोनों विधियों में लाभ बराबर है।
  5. अब सिर्फ़ 100 पेन बिके। अवशोषण विधि दो-तिहाई स्थिर लागत स्टॉक में छिपा लेती है। प्रत्यक्ष विधि हानि दिखाती है, अवशोषण लाभ।
  6. अपने से करें: बने और बिके के स्लाइडर चलाएँ। स्टॉक ब्लॉक और दोनों लाभ देखें।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

नीले और स्लेटी ब्लॉक में क्या अंतर है?

नीला हर बने पेन के साथ बदलता है (परिवर्ती)। स्लेटी तब भी वही रहता है जब एक भी पेन न बने (स्थिर)।

प्रत्यक्ष लागत में स्थिर लागत कहाँ जाती है?

पूरी इसी महीने के लाल खर्च ब्लॉक में जाती है। स्टॉक में कुछ स्लेटी नहीं रखा जाता।

स्टॉक बचे तो अवशोषण लाभ बड़ा क्यों?

स्लेटी ब्लॉक का हिस्सा नारंगी स्टॉक ब्लॉक में चला जाता है, इसलिए इस महीने कम लागत चढ़ती है।

दोनों विधियों में लाभ कब बराबर?

जब जो बना सब बिक गया। स्टॉक नहीं तो स्थिर लागत आगे नहीं जाती।

बहुत कम पेन बिकें तो क्या होगा?

प्रत्यक्ष लागत में हानि दिखती है, क्योंकि सारी स्थिर लागत छोटी बिक्री पर पड़ती है। अवशोषण उसका बड़ा हिस्सा स्टॉक में छिपा लेती है।

क्या छिपी स्थिर लागत ग़ायब हो जाती है?

नहीं। जब स्टॉक बिकता है तब वह बाहर आती है। प्रत्यक्ष लागत उसे पहले ही दिखा देती है।

प्रत्यक्ष लागत का उद्देश्य

लागत दो तरह की होती है। परिवर्ती लागत बनी इकाइयों के साथ बदलती है (माल, इकाई-दर मज़दूरी)। स्थिर लागत अवधि में एक-सी रहती है (किराया, वेतन, मशीन का ह्रास)।

प्रत्यक्ष लागत विधि (परिवर्ती लागत विधि) में उत्पाद की लागत में केवल परिवर्ती लागत गिनी जाती है। स्थिर लागत स्टॉक में नहीं जाती, पूरी अवधि के खर्च में चढ़ती है।

फ़ायदा: प्रबंधक देख पाता है कि हर अतिरिक्त इकाई कितना कमाती है, और लाभ केवल बिक्री से बदलता है, उत्पादन से नहीं।

प्रत्यक्ष लागत का आय विवरण

विवरण अंशदान (contribution) प्रारूप में बनता है:

स्टॉक का मूल्य सिर्फ़ परिवर्ती लागत पर आँका जाता है। कर, बैंक और वार्षिक खातों के लिए आम तौर पर अवशोषण लागत चाहिए, इसलिए अवधि के अंत में एक से दूसरे में बदलते हैं।

प्रत्यक्ष और अवशोषण लागत में अंतर

अवशोषण लागत हर बनी इकाई पर स्थिर लागत का हिस्सा जोड़ती है: प्रति इकाई स्थिर लागत = स्थिर लागत ÷ बनी इकाइयाँ। बिना बिकी इकाइयाँ यह हिस्सा लेकर स्टॉक में रहती हैं।

लाभ का अंतर = प्रति इकाई स्थिर लागत × स्टॉक की इकाइयों में बदलाव।

अल्पकालीन लाभ योजना में उपयोग

अंशदान साफ़ दिखने से प्रत्यक्ष लागत अल्पकालीन योजना की नींव है। सम-विच्छेद बिक्री = स्थिर लागत ÷ प्रति इकाई अंशदान। लक्ष्य बिक्री = (स्थिर लागत + लक्ष्य लाभ) ÷ प्रति इकाई अंशदान। विशेष ऑर्डर लेना या उत्पाद बंद करना जैसे निर्णयों में भी काम आती है: अंशदान धनात्मक है तो वह उत्पाद स्थिर लागत चुकाने में मदद करता है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. बिक्री ₹2,000, परिवर्ती लागत ₹800, स्थिर लागत ₹1,000। प्रत्यक्ष लागत विधि से लाभ निकालें।

अंशदान = 2,000 - 800 = 1,200। लाभ = 1,200 - 1,000 = ₹200।

2. कीमत ₹10, परिवर्ती लागत ₹4 प्रति पेन, स्थिर लागत ₹1,000। 300 बने, 200 बिके। अवशोषण लाभ निकालें।

प्रति पेन स्थिर = 1,000 ÷ 300 = 3.33। प्रति पेन लागत = 4 + 3.33 = 7.33। लाभ = 200 × (10 - 7.33) = लगभग ₹533।

3. वही आँकड़े। दोनों लाभों का अंतर निकालें।

प्रत्यक्ष लाभ = 200 × 6 - 1,000 = 200। अवशोषण = 533। अंतर = 333। जाँच: 3.33 × (300 - 200) = 333।

4. सभी 300 पेन बिक जाएँ तो दोनों लाभ?

प्रत्यक्ष: 300 × 6 - 1,000 = 800। अवशोषण: 300 × (10 - 7.33) = 800। बराबर, क्योंकि स्टॉक नहीं बचा।

5. 300 में से केवल 100 बिके। दोनों लाभ निकालें।

प्रत्यक्ष: 100 × 6 - 1,000 = -400 (हानि)। अवशोषण: 100 × 2.67 = लगभग ₹267 लाभ। अंतर = 3.33 × 200 = 667।

6. पिछले माह स्टॉक 500 इकाई बढ़ा। प्रति इकाई स्थिर लागत ₹2 थी। अवशोषण लाभ कितना अधिक था?

2 × 500 = ₹1,000 अधिक।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. प्रत्यक्ष लागत में स्टॉक का मूल्य होता है:
2. अंशदान =
3. बनी = बिकी हो तो दोनों लाभ:
4. स्टॉक बढ़ा। किसका लाभ अधिक?
5. प्रत्यक्ष लागत में स्थिर लागत किस पर चढ़ती है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रत्यक्ष लागत विधि क्या है?

लाभ निकालने का तरीका जिसमें उत्पाद की लागत में केवल उत्पादन के साथ बदलने वाली लागत गिनी जाती है। स्थिर लागत उसी अवधि में पूरी चुकती है।

क्या वार्षिक वित्तीय विवरणों में प्रत्यक्ष लागत मान्य है?

आम तौर पर नहीं। प्रकाशित खातों के नियम में कारखाने की स्थिर लागत स्टॉक में चाहिए, इसलिए फर्म अंदर प्रत्यक्ष लागत चलाती हैं और अंत में बदलती हैं।

क्या प्रत्यक्ष लागत और सीमांत लागत एक ही हैं?

लगभग हाँ। दोनों अंशदान का उपयोग करती हैं और स्थिर लागत को अवधि की लागत मानती हैं। किताबों में नाम अलग-अलग मिलते हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

जापान高校(専門学科)1〜3年Cost Accounting

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