कंपनी की संगठनात्मक संरचना
बड़ी फर्म उत्तरदायित्व केंद्रों में बँटती है, हर केंद्र का एक प्रबंधक नतीजों के लिए जवाबदेह होता है। फर्म कार्य (उत्पादन, बिक्री, वित्त), उत्पाद या क्षेत्र के आधार पर बँट सकती है। ऊपर मुख्यालय होता है, नीचे प्रभाग या विभाग।
- लागत केंद्र: प्रबंधक केवल लागत नियंत्रित करता है (कारखाना, मानव संसाधन विभाग)।
- लाभ केंद्र: प्रबंधक लागत और आय दोनों नियंत्रित करता है (दुकान, उत्पाद-शृंखला)।
- निवेश केंद्र: प्रबंधक यह भी तय करता है कि कितना धन लगे (वह प्रभाग जो संयंत्र खरीद सके)।
निष्पक्ष नियम: प्रबंधक को उस बात का दोषी न ठहराएँ जो उसके नियंत्रण में नहीं।
कार्य-निष्पादन मापन की विधियाँ
लागत केंद्र: वास्तविक लागत की बजट से तुलना। बजट से अधिक = प्रतिकूल।
लाभ केंद्र: लाभ = आय - लागत, इसकी भी बजट से तुलना।
निवेश केंद्र के दो मौद्रिक माप हैं:
- ROI = लाभ ÷ निवेश × 100। जितना ऊँचा प्रतिशत, उतना अच्छा।
- अवशिष्ट आय (RI) = लाभ - (निवेश × आवश्यक दर)। यह प्रयुक्त पूँजी चुकाने के बाद बचा लाभ दिखाती है। धनात्मक RI मूल्य जोड़ती है।
केवल ROI भ्रम क्यों दे सकता है
ऊँचे ROI वाला प्रबंधक 12% कमाने वाली नई परियोजना ठुकरा सकता है यदि प्रभाग अभी 20% कमा रहा है, क्योंकि औसत गिरेगा। पर फर्म को केवल 8% चाहिए तो परियोजना फर्म के लिए अच्छी है। RI यह ठीक करती है: जो भी परियोजना आवश्यक दर से अधिक कमाए, RI बढ़ाती है। इसलिए कई फर्में दोनों उपयोग करती हैं।
संतुलित स्कोरकार्ड: धन से आगे
धन के आँकड़े पीछे देखते हैं। संतुलित स्कोरकार्ड चार दृष्टिकोण जोड़ता है: वित्त, ग्राहक, आंतरिक प्रक्रियाएँ, और सीखना व विकास। हर दृष्टिकोण के लिए कुछ माप चुने जाते हैं, जैसे लाभ वृद्धि, ग्राहक संतुष्टि, दोष दर और प्रशिक्षण घंटे। इससे पता चलता है कि फर्म भविष्य की ताक़त बना रही है या सिर्फ़ आज का लाभ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ROI = (लाभ ÷ निवेश) × 100
- अवशिष्ट आय = लाभ - (निवेश × आवश्यक दर)
- लाभ = आय - लागत
- लागत अंतर = वास्तविक लागत - बजट लागत
हल किए गए उदाहरण
1. लागत केंद्र का बजट ₹50 हज़ार था और वास्तविक लागत ₹60 हज़ार। अंतर निकालें।
60 - 50 = ₹10 हज़ार बजट से अधिक (प्रतिकूल)।
2. दुकान की आय ₹100 हज़ार और लागत ₹70 हज़ार है। लाभ निकालें।
100 - 70 = ₹30 हज़ार।
3. प्रभाग X: लाभ ₹20 हज़ार, निवेश ₹100 हज़ार। ROI निकालें।
ROI = 20 ÷ 100 × 100 = 20%।
4. आवश्यक दर 8% है। X (लाभ 20, निवेश 100) और Y (लाभ 30, निवेश 250) की अवशिष्ट आय निकालें (हज़ार ₹)।
X: 20 - 100 × 0.08 = 20 - 8 = ₹12 हज़ार। Y: 30 - 250 × 0.08 = 30 - 20 = ₹10 हज़ार। X की RI अधिक है।
5. Y का ROI 12% है। फर्म को 8% चाहिए। Y के प्रबंधक की सराहना हो या दोष? क्यों?
Y आवश्यक 8% से ऊपर कमा रहा है, RI धनात्मक (₹10 हज़ार) है। वह मूल्य जोड़ रहा है, भले उसका ROI X से कम है।
आम गलतियाँ
- लागत केंद्र को लाभ से परखना। उसकी कोई बिक्री नहीं, उसे बजट के सामने लागत से परखें।
- निवेश केंद्र में केवल लाभ देखना और लगा धन भूल जाना।
- ROI प्रतिशत में लिखते समय 100 से गुणा भूल जाना।
- सोचना कि ऊँचा ROI हमेशा पूरी फर्म के लिए अच्छा निर्णय है। अवशिष्ट आय भी देखें।