लागत क्या है? लागत की अवधारणा
लागत (Cost) उन चीज़ों का मुद्रा-मूल्य है जो कोई सामान बनाने या सेवा देने में खर्च हुईं। यह सामान से जुड़ी हो और कारोबार चलाने का सामान्य हिस्सा हो।
- बैग में लगा कपड़ा लागत है।
- सिलाई करने वाले की मज़दूरी लागत है।
- दान, कर्ज़ का ब्याज या आग से हुआ नुकसान सामान की सामान्य लागत नहीं हैं। इन्हें सामान की लागत में नहीं जोड़ते।
लागत और दाम एक नहीं हैं। दाम वह है जो ग्राहक देता है। दाम = लागत + लाभ।
लागत के तीन तत्व: माल, श्रम, खर्च
सारी लागत तीन समूहों में आती है, जिन्हें लागत के तत्व कहते हैं:
- माल (Material): जो सामान का हिस्सा बन जाए (कपड़ा, लोहा, आटा)।
- श्रम (Labour): सामान पर काम करने वालों की मज़दूरी।
- खर्च (Expenses): बाकी सब, जैसे बिजली, किराया, मशीन की घिसावट।
हर तत्व प्रत्यक्ष हो सकता है (एक सामान से सीधे जोड़ना आसान, जैसे एक बैग का कपड़ा) या अप्रत्यक्ष (कई सामान के बीच साझा, जैसे फ़ैक्टरी का किराया)।
| नाम | मतलब |
|---|---|
| मूल लागत (Prime cost) | प्रत्यक्ष माल + प्रत्यक्ष श्रम + प्रत्यक्ष खर्च |
| कारखाना उपरिव्यय (Factory overhead) | फ़ैक्टरी के सारे अप्रत्यक्ष खर्च |
| निर्माण लागत | मूल लागत + कारखाना उपरिव्यय |
| कुल लागत | निर्माण लागत + दफ़्तर, बिक्री और वितरण खर्च |
| बिक्री मूल्य | कुल लागत + लाभ |
लागत लेखांकन की विशेषताएँ
लागत लेखांकन वह व्यवस्था है जो लागत को दर्ज करती, छाँटती और जोड़ती है, ताकि हर सामान की लागत पता रहे। यह कारोबार के अंदर के लिए है। मुख्य विशेषताएँ:
- यह सिर्फ़ कुल लाभ नहीं, हर सामान की लागत बताता है।
- यह प्रबंधकों के काम आता है: दाम तय करना, बचत और योजना।
- इसके नियम और रिकॉर्ड पूरे साल चलते हैं, सिर्फ़ साल के अंत में नहीं।
- यह बने और बिके माल की लागत देकर वित्तीय खातों की मदद करता है।
वित्तीय लेखांकन मालिकों और कर-विभाग को पूरे कारोबार का हाल बताता है। लागत लेखांकन प्रबंधकों को बताता है कि हर सामान पर कितना खर्च आया।
ढाँचा: लागत गणना के तीन चरण
लागत की गणना तीन चरणों में होती है, एक के बाद एक:
- तत्व के अनुसार: कितना माल, श्रम और खर्च लगा, यह निकालना।
- विभाग के अनुसार: अप्रत्यक्ष खर्चों को विभागों (जैसे कटाई और सिलाई) में बाँटना।
- उत्पाद के अनुसार: प्रत्यक्ष लागत और अप्रत्यक्ष का हिस्सा जोड़कर हर उत्पाद या खेप की लागत निकालना।
अगले पाठ हर चरण को पढ़ाते हैं। कॉस्ट शीट वह तालिका है जो ये सारी परतें क्रम से दिखाती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मूल लागत = प्रत्यक्ष माल + प्रत्यक्ष श्रम + प्रत्यक्ष खर्च
- निर्माण लागत = मूल लागत + कारखाना उपरिव्यय
- कुल लागत = निर्माण लागत + दफ़्तर, बिक्री और वितरण खर्च
- बिक्री मूल्य = कुल लागत + लाभ
हल किए गए उदाहरण
1. माल 50, श्रम 30, खर्च 20। निर्माण लागत निकालिए।
50 + 30 + 20 = 100।
2. प्रत्यक्ष माल 60, प्रत्यक्ष श्रम 40, प्रत्यक्ष खर्च 10, कारखाना उपरिव्यय 30। मूल लागत और निर्माण लागत निकालिए।
मूल लागत = 60 + 40 + 10 = 110। निर्माण लागत = 110 + 30 = 140।
3. निर्माण लागत 140, दफ़्तर खर्च 15, बिक्री खर्च 25। कुल लागत?
140 + 15 + 25 = 180।
4. कुल लागत 180 है और मालिक लागत पर 20% लाभ चाहता है। बिक्री मूल्य?
लाभ = 180 का 20% = 36। बिक्री मूल्य = 180 + 36 = 216।
5. 12 बैग की कुल लागत 216 है। एक बैग की लागत?
216 ÷ 12 = 18 प्रति बैग।
6. फ़ैक्टरी 250 पर बेचती है और कुल लागत 200 है। बिक्री पर लाभ कितने प्रतिशत?
लाभ = 50। 50 ÷ 250 × 100 = बिक्री का 20% (लागत का 25%)।
आम गलतियाँ
- दाम और लागत को एक मान लेना। दाम में लाभ भी होता है।
- ब्याज या दान को सामान की लागत में जोड़ देना। ये सामान्य उत्पाद लागत नहीं हैं।
- मूल लागत में फ़ैक्टरी का किराया गिन लेना। किराया अप्रत्यक्ष है, यानी उपरिव्यय।
- कुल लागत निकालते समय दफ़्तर और बिक्री खर्च भूल जाना।