नेटवर्क डिज़ाइन: खरीदने से पहले योजना
डिज़ाइन का मतलब है कुछ भी खरीदने से पहले तय करना कि नेटवर्क को क्या करना है। अच्छे डिज़ाइनर ये पूछते हैं:
- कौन इस्तेमाल करेगा, अभी और 3 साल बाद कितने लोग?
- क्या करेंगे: ईमेल, वीडियो कॉल, साझा प्रिंटर, डेटाबेस?
- कितनी तेज़ चाहिए (बैंडविड्थ) और कितनी बार बंद हो सकता है (विश्वसनीयता)?
- कितनी सुरक्षा और कितना बजट?
फिर ढाँचा (टोपोलॉजी) चुनते हैं। स्टार में ठीक करना आसान है क्योंकि हर कंप्यूटर की अपनी केबल है। बस सस्ती है पर एक टूटन से सब बंद। मेश बहुत सुरक्षित है पर केबल बहुत लगती हैं: n डिवाइस के पूरे मेश में n(n-1)/2 लिंक चाहिए।
साथ में पता योजना (किस कमरे को कौन-सी IP रेंज) और सबके पढ़ने लायक नक्शा बनता है। आगे बढ़ने की जगह हमेशा रखो। इसे स्केलेबिलिटी कहते हैं।
नेटवर्क का निर्माण
निर्माण योजना के अनुसार एक-एक चरण में होता है:
- लगाओ: केबल (ट्विस्टेड पेयर, फ़ाइबर) और सॉकेट, या वाई-फाई एक्सेस पॉइंट। हर केबल के दोनों सिरों पर नाम लिखो।
- डिवाइस रखो: स्विच, राउटर, सर्वर, प्रिंटर। इन्हें ठंडी, बंद रैक में रखो।
- कॉन्फ़िगर करो: IP पते दो, राउटर सेट करो, पासवर्ड लगाओ, फ़ायरवॉल चालू करो।
- जाँच करो: क्या हर कंप्यूटर सर्वर और इंटरनेट तक पहुँचता है? गति योजना जितनी है?
- लिख लो कि क्या किया (दस्तावेज़) और उपयोगकर्ताओं को सिखाओ।
जाँच कभी मत छोड़ो। गलती अभी मिले तो मिनटों में ठीक, बाद में मिले तो पूरा दिन काम रुकता है।
संचालन, निगरानी और खराबी सुधार
उपयोगकर्ता आ जाएँ तो काम है संचालन: नए यूज़र जोड़ना, बैकअप लेना, अपडेट डालना और सरल टूल से ट्रैफ़िक, गति और चालू रहने के समय की निगरानी।
कुछ खराब हो तो शांति से यह तरीका अपनाओ (खराबी सुधार):
- पता करो क्या खराब है और किसे असर है (एक कंप्यूटर, एक कमरा, या सब)?
- कारण का अंदाज़ा लगाओ: केबल, डिवाइस, सेटिंग या सॉफ़्टवेयर। सबसे आसान से शुरू करो।
- ठीक करो, या स्पेयर लगाओ।
- जाँचो कि सच में चल रहा है।
- दर्ज करो ताकि अगली बार जल्दी हो।
काम की संख्या: उपलब्धता = (चालू समय ÷ कुल समय) × 100। 1000 घंटे में 999 घंटे चला तो उपलब्धता 99.9%।
सिस्टम ऑडिट: पूरे सिस्टम की जाँच
सिस्टम ऑडिट एक ध्यान से की गई जाँच है, जो वह व्यक्ति करता है जिसने सिस्टम नहीं बनाया। वह देखता है कि सिस्टम योजना के अनुसार चलता है, सुरक्षित है और नियम-कानून मानता है। ऑडिटर तीन चीज़ें देखता है:
- दस्तावेज़: योजना, बदलाव का रिकॉर्ड, यूज़र सूची, बैकअप लॉग।
- सेटिंग: पासवर्ड, फ़ायरवॉल नियम, अपडेट, कौन क्या खोल सकता है।
- प्रमाण: लॉग, जो दिखाते हैं कि सच में क्या हुआ।
ऑडिटर रिपोर्ट लिखता है, जिसमें मिली समस्याएँ और सुझाव होते हैं। मालिक उन्हें ठीक करता है और ऑडिट दोबारा होता है। ऑडिट समय-समय पर होता है, इसलिए नेटवर्क सुधरता रहता है।
खुद करके देखो: घर का नेटवर्क बनाओ
कागज़ पर अपने घर का नेटवर्क बनाओ। बीच में वाई-फाई राउटर रखो। हर फ़ोन, टीवी और लैपटॉप का एक बिंदु बनाओ और गिनो। अब सोचो: दो लोग और आ जाएँ तो भी क्या तेज़ चलेगा? फिर एक मिनट के लिए राउटर बंद करके देखो किसे असर हुआ। यह डिज़ाइन, खराबी की जाँच और छोटा ऑडिट, तीनों हो गया।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पूरा मेश लिंक = n(n-1)/2
- स्टार: केबल = n (हर डिवाइस की एक)
- उपलब्धता % = (चालू समय ÷ कुल समय) × 100
- ट्रांसफ़र समय (सेकंड) = फ़ाइल आकार (बिट) ÷ गति (बिट प्रति सेकंड)
- /24 नेटवर्क में उपयोगी होस्ट = 256 − 2 = 254
हल किए गए उदाहरण
1. एक ऑफिस में 12 कंप्यूटर स्टार ढाँचे में हैं। स्विच तक कितनी केबल जाएँगी?
स्टार में हर कंप्यूटर की अपनी केबल होती है। इसलिए 12 केबल।
2. 6 डिवाइस में हर एक सीधे हर दूसरे से जुड़ना है। कितने लिंक चाहिए?
n(n-1)/2 = 6 × 5 / 2 = 15 लिंक। इसी वजह से पूरा मेश महँगा है।
3. एक सर्वर 1000 घंटे में 998 घंटे चालू रहा। उपलब्धता निकालो।
998 / 1000 × 100 = 99.8%।
4. 100 MB की फ़ाइल 100 Mbit/s लिंक पर भेजी। कितना समय लगेगा?
100 MB = 100 × 8 = 800 Mbit। समय = 800 / 100 = 8 सेकंड (आदर्श स्थिति में)।
5. ऑफिस में एक कंप्यूटर सर्वर तक नहीं पहुँच रहा पर बाकी पहुँच रहे हैं। पहले क्या देखोगे?
असर सिर्फ़ एक कंप्यूटर पर है, इसलिए उसके पास देखो: 1) केबल और पोर्ट की लाइट, 2) IP सेटिंग, 3) नेटवर्क कार्ड। सर्वर और स्विच ठीक हैं क्योंकि बाकी चल रहे हैं।
6. ऑडिट में 40 जाँचें हैं और 34 पास हुईं। पास दर क्या है और आगे क्या होगा?
34 / 40 × 100 = 85%। 6 फ़ेल जाँचें रिपोर्ट में जाएँगी, मालिक ठीक करेगा और ऑडिटर दोबारा देखेगा।
आम गलतियाँ
- पहले डिवाइस खरीद लेना और बाद में योजना बनाना। पहले योजना बनाओ, तब ज़रूरी चीज़ें ही खरीदोगे।
- सिर्फ़ आज के लिए योजना बनाना। और लोगों के लिए जगह रखो (स्केलेबिलिटी)।
- निर्माण के बाद जाँच और दस्तावेज़ छोड़ देना। जो किसी को समझ नहीं आता, उसे कोई ठीक नहीं कर सकता।
- ऑडिट को सिर्फ़ गलती पकड़ने वाला मानना। उसका काम सिस्टम को बेहतर और सुरक्षित बनाना है।