उद्देश्य और लक्षित दर्शक
दो सवालों से शुरू कीजिए:
- उद्देश्य: साइट को क्या करना है? ऑनलाइन बेचना (ई-व्यवसाय), जानकारी देना, बुकिंग लेना, भरोसा बनाना, या ये सब।
- लक्षित दर्शक: कौन आएगा? उनकी उम्र, भाषा, ज़रूरतें, डिवाइस (फ़ोन या लैपटॉप) और इंटरनेट की गति।
उदाहरण: 15–25 साल के विद्यार्थियों के लिए बैग की दुकान को चमकदार फ़ोटो, फ़ोन पर जल्दी चेकआउट और साफ़ दिखते दाम चाहिए।
शुरू करने से पहले और बातें
- बजट और समय: ख़ुद बनाएँ या किसी डिज़ाइनर से बनवाएँ?
- डोमेन नाम (वेब पता) और होस्टिंग (साइट रखने वाला कंप्यूटर)।
- सामग्री: टेक्स्ट कौन लिखेगा, फ़ोटो कौन लेगा?
- ब्रांड: लोगो, रंग और भाषा-शैली जो व्यवसाय से मेल खाए।
- सुरक्षा और निजता: HTTPS, सुरक्षित भुगतान, निजता नीति।
- अपडेट: दाम और ख़बरें कौन ताज़ा रखेगा?
वेबसाइट के हिस्से और सामग्री
ज़्यादातर वेब पेजों के हिस्से एक जैसे होते हैं:
- हेडर: लोगो और व्यवसाय का नाम, हर पेज के ऊपर।
- नेविगेशन मेन्यू: मुख्य पेजों के लिंक (होम, उत्पाद, हमारे बारे में, संपर्क)।
- हीरो भाग: बड़ी तस्वीर और आप क्या देते हैं, इसका एक साफ़ संदेश।
- कॉल टू ऐक्शन (CTA): बटन जो बताए क्या करना है: “अभी ऑर्डर करें”, “टेबल बुक करें”।
- सामग्री: फ़ोटो और दाम के साथ उत्पाद, परिचय, समीक्षाएँ, सामान्य सवाल।
- फ़ुटर: संपर्क, पता-नक्शा, सोशल लिंक, नीतियाँ।
छोटे व्यवसाय की साइट में आमतौर पर ये पेज चाहिए: होम, उत्पाद/सेवाएँ, परिचय, संपर्क, और ई-व्यवसाय के लिए कार्ट, चेकआउट और वापसी नीति। अच्छी सामग्री छोटी, सच्ची और ताज़ा होती है।
लेआउट, नेविगेशन और डिज़ाइन के नियम
लेआउट और नेविगेशन
पहले काग़ज़ पर योजना बनाइए: साइट मैप (पेजों का पेड़) और वायरफ़्रेम (हर पेज का डिब्बों वाला ख़ाका)। नेविगेशन सरल रखिए: कम मेन्यू आइटम, हर पेज पर एक ही जगह, कोई भी पेज लगभग तीन क्लिक में।
डिज़ाइन के नियम
- दृश्य क्रम: सबसे ज़रूरी चीज़ सबसे बड़ी और ऊपर।
- कंट्रास्ट: हल्की पृष्ठभूमि पर गहरा टेक्स्ट; CTA बटन अलग दिखे।
- ख़ाली जगह: डिब्बों के आसपास ख़ाली जगह से पढ़ना आसान।
- एकरूपता: हर जगह एक जैसे रंग, फ़ॉन्ट और बटन।
- पढ़ने योग्य टेक्स्ट: लगभग 16 px या ज़्यादा, छोटे पैराग्राफ़।
- सुलभता: चित्रों का alt टेक्स्ट, कीबोर्ड से चलना, वीडियो में कैप्शन।
रिस्पॉन्सिव (फ़ोन-अनुकूल) डिज़ाइन
ज़्यादातर लोग फ़ोन पर देखते हैं। रिस्पॉन्सिव साइट स्क्रीन के हिसाब से डिब्बे बदलती है: लैपटॉप पर कई कॉलम, फ़ोन पर एक।
साइट बनाने के साधन
- वेबसाइट बिल्डर (खींचो-छोड़ो) और ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म: जल्दी, मासिक फ़ीस, कम नियंत्रण।
- कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम (CMS): लचीला, कई थीम और प्लग-इन।
- कोडिंग: एडिटर में HTML, CSS और JavaScript; पूरा नियंत्रण, पर कौशल चाहिए।
वेबसाइट की जाँच और सुधार
किसी भी साइट, असली छोटे व्यवसायों की साइट भी, को सूची से अंक दीजिए:
- जल्दी खुलती है (कुछ सेकंड में)।
- मेन्यू आसान; चीज़ें जल्दी मिलती हैं।
- अच्छे कंट्रास्ट के साथ पढ़ने में साफ़।
- फ़ोन पर ठीक चलती है।
- साफ़ ऐक्शन बटन।
- चित्रों में alt टेक्स्ट; साइट सुलभ।
- संपर्क, दाम और नीतियाँ साफ़; HTTPS चालू।
कौन जाँच सकता है?
लक्षित दर्शकों में से लोग, शिक्षक, स्थानीय व्यवसायी या वेब डिज़ाइनर। उन्हें बिना मदद कोई काम करने दीजिए (“दाम ढूँढो और ऑर्डर करो”)। देखिए वे कहाँ अटकते हैं।
सुधारिए और तय कीजिए
सबसे बड़ी समस्याएँ पहले ठीक कीजिए, फिर से परखिए, फिर अंतिम संस्करण प्रकाशित कीजिए। विज़िट और बिक्री पर नज़र रखिए: अगर लोग आते हैं पर ख़रीदते नहीं, तो साइट या व्यवसाय योजना बदलनी पड़ सकती है। वेबसाइट के आँकड़े बताते हैं कि उद्यम सफल हो सकता है या नहीं (उसकी व्यवहार्यता)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- उद्देश्य: वेबसाइट को क्या करना है
- लक्षित दर्शक: जिन लोगों के लिए साइट बनी है
- कॉल टू ऐक्शन (CTA): बटन जो बताए आगे क्या करना है
- वायरफ़्रेम: पेज का डिब्बों वाला सरल ख़ाका
- रिस्पॉन्सिव डिज़ाइन: लेआउट हर स्क्रीन के हिसाब से बदलता है
- कन्वर्ज़न दर = ख़रीदार ÷ विज़िटर × 100%
हल किए गए उदाहरण
1. एक बेकरी साइट पर महीने में 2,000 विज़िटर आते हैं और 50 ऑर्डर करते हैं। कन्वर्ज़न दर?
कन्वर्ज़न दर = 50 ÷ 2,000 × 100 = 2.5%।
2. एक दंत-चिकित्सक की साइट के मेन्यू में 14 आइटम हैं और फ़ोन नंबर केवल संपर्क पेज पर है। दो सुधार बताइए।
मेन्यू को लगभग 5 मुख्य आइटम (होम, इलाज, दाम, परिचय, संपर्क) तक घटाइए और हर पेज के हेडर में “कॉल / बुक करें” बटन लगाइए।
3. लोग कहते हैं “ख़रीदें” बटन दिखता नहीं: हल्के भूरे बटन पर भूरा टेक्स्ट। कौन-सा नियम टूटा और सुधार क्या?
कंट्रास्ट। तेज़ रंग (जैसे गहरा हरा, सफ़ेद टेक्स्ट) इस्तेमाल कीजिए जो पृष्ठभूमि से अलग दिखे।
आम गलतियाँ
- उद्देश्य और दर्शक तय किए बिना डिज़ाइन करना। तब साइट सबको ख़ुश करने की कोशिश में किसी की मदद नहीं करती।
- बहुत सारे या छिपे मेन्यू आइटम। चीज़ जल्दी न मिले तो लोग चले जाते हैं।
- केवल लैपटॉप पर जाँचना। ज़्यादातर लोग फ़ोन पर आते हैं, फ़ोन व्यू ज़रूर देखिए।
- ऑनलाइन होते ही साइट को पूरा समझना। अच्छी साइटें लगातार परखी, अपडेट और सुधारी जाती हैं।