बिक्री कैसे होती है (विक्रय लेन-देन)
लेन-देन यानी एक सौदा, जिसमें माल या सेवा के बदले पैसा दिया जाता है। बिक्री आम तौर पर छह छोटे चरणों में होती है।
- पूछताछ: ग्राहक पूछता है कि क्या मिलेगा और किस दाम पर।
- भाव-पत्र (कोटेशन): विक्रेता दाम और शर्तें बताता है।
- ऑर्डर: ग्राहक हाँ कहता है और मात्रा बताता है।
- माल और चालान (इनवॉइस): माल बिल के साथ जाता है। बिल में सामान, मात्रा, दाम और कुल देय रकम लिखी होती है।
- भुगतान: ग्राहक पैसे देता है।
- रसीद: विक्रेता लिखकर मानता है कि पैसे मिल गए।
तुरंत पैसे लेकर की गई बिक्री नकद बिक्री है। बाद में पैसे देने की शर्त पर हुई बिक्री उधार बिक्री है।
भुगतान निपटाना (निपटान)
निपटान का मतलब है देय रकम चुका देना। इसके कई तरीके हैं।
- नकद: नोट और सिक्के। तेज़ पर खोने का डर।
- चेक या बैंक ट्रांसफर: पैसा एक खाते से दूसरे में जाता है और रिकॉर्ड बनता है।
- कार्ड या मोबाइल भुगतान (जैसे UPI): तुरंत और रिकॉर्ड के साथ।
- उधार: तय समय बाद, जैसे 30 दिन में।
पैसे जल्दी पाने के लिए विक्रेता नकद छूट दे सकता है: जल्दी चुकाने पर थोड़ी कटौती। यह व्यापार छूट से अलग है, जो बिक्री के समय अंकित मूल्य से कटती है।
दाम के शब्द: क्रय, अंकित, विक्रय, लाभ, हानि
3D स्तंभ देखो।
- क्रय मूल्य (CP): विक्रेता ने जितना दिया।
- मार्क-अप: खर्च और लाभ के लिए जोड़ी गई रकम।
- अंकित मूल्य (MP): क्रय मूल्य + मार्क-अप। यही टैग पर लिखा होता है।
- छूट: अंकित मूल्य से घटाई गई रकम।
- विक्रय मूल्य (SP): ग्राहक असल में जितना देता है।
SP, CP से ज़्यादा हो तो लाभ। SP, CP से कम हो तो हानि। लाभ % और हानि % दोनों क्रय मूल्य पर निकालते हैं।
व्यापारिक गणना: कर और ब्याज
हर व्यापार में दो और गणनाएँ आती हैं।
बिक्री पर कर। बिक्री कर (जैसे VAT या GST) दाम के ऊपर प्रतिशत के रूप में जुड़ता है। विक्रेता इसे लेकर सरकार को देता है। चालान की कुल रकम = दाम + कर।
उधार पर ब्याज। पैसा उधार लेने या देर से चुकाने पर साधारण ब्याज लग सकता है: I = P × r × t / 100। यहाँ P रकम है, r सालाना दर % में और t समय वर्षों में। महीनों को पहले वर्ष में बदलो (6 महीने = 0.5 वर्ष)।
खुद करके देखो
घर की कोई चीज़ लो। दुकान की लागत का अंदाज़ा लगाओ। फिर 3D के स्लाइडर से देखो कि कितना मार्क-अप और छूट रखने पर दुकान को कम से कम 5% लाभ होगा।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- लाभ = SP − CP (जब SP > CP); हानि = CP − SP (जब CP > SP)
- लाभ % = (लाभ ÷ CP) × 100; हानि % = (हानि ÷ CP) × 100
- MP = CP × (1 + मार्क-अप% ÷ 100)
- SP = MP × (1 − छूट% ÷ 100)
- चालान की कुल रकम = दाम + (दाम × कर दर ÷ 100)
- साधारण ब्याज I = P × r × t ÷ 100 (t वर्षों में)
हल किए गए उदाहरण
1. एक चीज़ 250 में खरीदी और 300 में बेची। लाभ और लाभ % निकालो।
लाभ = 300 − 250 = 50। लाभ % = 50 ÷ 250 × 100 = 20%।
2. एक बैग की लागत 800 है। विक्रेता 25% मार्क-अप जोड़ता है, फिर 10% छूट देता है। विक्रय मूल्य और लाभ % निकालो।
MP = 800 × 1.25 = 1000। SP = 1000 × 0.9 = 900। लाभ = 100। लाभ % = 100 ÷ 800 × 100 = 12.5%।
3. 15 रुपये की 20 कलमें 5% बिक्री कर के साथ बिकीं। चालान की कुल रकम निकालो।
दाम = 20 × 15 = 300। कर = 300 × 5 ÷ 100 = 15। कुल = 315।
4. 5,000 का माल 30 दिन के उधार पर लिया। 10 दिन में चुकाने पर 2% नकद छूट है। आठवें दिन चुकाने पर कितना देना होगा?
छूट = 5,000 × 2 ÷ 100 = 100। देना होगा 5,000 − 100 = 4,900।
5. एक कमीज़ 10% हानि पर 540 में बिकी। उसका क्रय मूल्य निकालो।
SP = CP का 90%, इसलिए CP = 540 ÷ 0.9 = 600।
6. 12,000 पर 10% वार्षिक दर से 6 महीने का साधारण ब्याज निकालो।
t = 0.5 वर्ष। I = 12,000 × 10 × 0.5 ÷ 100 = 600।
7. एक चीज़ की लागत 400 है। विक्रेता 10% छूट देने के बाद भी 20% लाभ चाहता है। टैग पर क्या दाम लिखे?
SP = 400 × 1.2 = 480। SP = 0.9 × MP, इसलिए MP = 480 ÷ 0.9 = 533.33 (लगभग 533)।
आम गलतियाँ
- लाभ % को विक्रय मूल्य पर निकालना। यह हमेशा क्रय मूल्य पर निकलता है।
- छूट को क्रय मूल्य पर लेना। छूट अंकित मूल्य से कटती है।
- भूल जाना कि कर दाम के ऊपर जुड़ता है, इसलिए ग्राहक टैग से ज़्यादा देता है।
- ब्याज के सूत्र में महीने सीधे रख देना। पहले महीनों को वर्षों में बदलो (6 महीने = 0.5 वर्ष)।