सुदूर संवेदन क्या है?
सुदूर संवेदन का अर्थ है पृथ्वी की सतह की वस्तुओं या क्षेत्रों के बारे में दूर से, बिना छुए, जानकारी पाना। हम उनके द्वारा परावर्तित या उत्सर्जित विद्युत-चुंबकीय ऊर्जा दर्ज करते हैं।
हमारी आँखें सरल सुदूर संवेदक हैं: वे परावर्तित प्रकाश दर्ज करती हैं। कैमरे और उपग्रह संवेदक भी यही करते हैं, और वह प्रकाश भी "देखते" हैं जो आँखें नहीं देख सकतीं, जैसे अवरक्त।
गुब्बारों और विमानों से ली गई वायव फ़ोटो पहला सुदूर संवेदन थीं। 1970 के दशक से उपग्रह पूरी पृथ्वी को बार-बार देखते हैं।
सुदूर संवेदन के चरण
- ऊर्जा स्रोत: प्रायः सूर्य (निष्क्रिय संवेदन)। रडार अपनी ऊर्जा भेजता है (सक्रिय संवेदन)।
- वायुमंडल से गुज़रना: गैसें, जलवाष्प और धूल कुछ ऊर्जा सोखते या बिखेरते हैं। संवेदक उन "खिड़कियों" का उपयोग करते हैं जहाँ से ऊर्जा निकल जाती है।
- सतह से अंतःक्रिया: वस्तुएँ ऊर्जा सोखती, पार करती या परावर्तित करती हैं।
- परावर्तित या उत्सर्जित ऊर्जा वापस वायुमंडल से संवेदक तक।
- संवेदक द्वारा संसूचन: ऊर्जा दर्ज होती है।
- भू-केंद्र को प्रेषण: आँकड़े नीचे भेजे जाते हैं, जैसे हैदराबाद के पास शादनगर का NRSC केंद्र।
- आँकड़ा उत्पाद बनाना: फ़ोटो या अंकीय चित्र।
- सूचना निकालना और उपयोग: विशेषज्ञ चित्रों की व्याख्या करके उपयोगकर्ताओं के लिए मानचित्र बनाते हैं।
स्पेक्ट्रमी चिह्नक
हर वस्तु अलग तरंगदैर्ध्य पर अलग मात्रा में ऊर्जा परावर्तित करती है। यह ढंग उसका स्पेक्ट्रमी चिह्नक है, उँगलियों के निशान जैसा।
- स्वस्थ वनस्पति: कुछ हरा, बहुत कम लाल (पर्णहरित सोख लेता है), और बहुत अधिक निकट-अवरक्त (NIR)।
- साफ़ पानी: दृश्य प्रकाश में कम और NIR में लगभग शून्य, इसलिए गहरा दिखता है।
- सूखी मिट्टी: तरंगदैर्ध्य के साथ परावर्तन लगातार बढ़ता है।
बैंडों की तुलना से फ़सल और वन, गीली और सूखी भूमि, साफ़ और गंदा पानी अलग पहचाने जाते हैं।
मंच (प्लेटफ़ॉर्म)
- भूमि आधारित: टॉवर, क्रेन या हाथ के यंत्र।
- वायु आधारित: गुब्बारे, विमान और ड्रोन; छोटे क्षेत्रों के बहुत विस्तृत चित्र।
- अंतरिक्ष आधारित: उपग्रह; बड़े क्षेत्र बार-बार।
उपग्रहों के दो मुख्य प्रकार
- सूर्य-तुल्यकालिक उपग्रह: लगभग 700–900 km ऊँचाई पर, ध्रुवों के पास से गुज़रते हैं। हर दिन एक ही स्थानीय समय पर किसी अक्षांश को पार करते हैं, इसलिए हर चित्र में प्रकाश एक जैसा। भूमि, फ़सल, वन और जल के मानचित्रण के लिए। उदाहरण: IRS/रिसोर्ससैट, लैंडसैट।
- भूस्थिर उपग्रह: विषुवत् वृत्त से लगभग 36,000 km ऊपर, पृथ्वी के घूमने के साथ चलते हैं, इसलिए एक जगह के ऊपर टिके रहते हैं। पूरे गोलार्ध को लगातार देखते हैं; मौसम और संचार के लिए। उदाहरण: इनसैट श्रृंखला।
संवेदक
- फ़ोटोग्राफ़िक (कैमरा) संवेदक: पूरा दृश्य एक क्षण में फ़िल्म या चिप पर। वायव फ़ोटोग्राफ़ी में।
- अफ़ोटोग्राफ़िक (क्रमवीक्षण) संवेदक: चित्र थोड़ा-थोड़ा बनाते हैं।
- व्हिस्कब्रूम (आड़ा पथ) स्कैनर: घूमता दर्पण पथ के आर-पार झाड़ू की तरह चलकर एक-एक बिंदु दर्ज करता है।
- पुशब्रूम (अनुपथ) स्कैनर: संसूचकों की लंबी पंक्ति पूरी पंक्ति एक साथ दर्ज करती है; उपग्रह के आगे बढ़ने से पंक्ति-दर-पंक्ति चित्र बनता है।
- बहु-स्पेक्ट्रमी संवेदक एक साथ कई बैंड (नीला, हरा, लाल, NIR) दर्ज करते हैं।
विभेदन
- स्थानिक: एक पिक्सेल का ज़मीनी आकार (जैसे 5 m, 23.5 m)। छोटा = साफ़।
- स्पेक्ट्रमी: कितने और कितने संकरे बैंड।
- विकिरणमितीय: चमक के कितने स्तर (जैसे 0–255)।
- कालिक: उसी जगह का चित्र कितनी बार (पुनरावृत्ति समय)।
आँकड़ा उत्पाद
फ़ोटोग्राफ़िक उत्पाद
वायव फ़ोटो और फ़िल्म प्रिंट। रंग-छटा निरंतर (चिकनी)। एक-दूसरे पर चढ़े जोड़ों को त्रिविमदर्शी से 3D में देख सकते हैं।
अंकीय उत्पाद
अंकीय चित्र छोटे वर्गों, पिक्सेलों, का जाल है। हर पिक्सेल अपनी चमक की एक संख्या, अंकीय संख्या (DN), रखता है, प्रायः 0 (काला) से 255 (सफ़ेद)। कंप्यूटर इन्हें सुधार, वर्गीकृत और नाप सकते हैं।
रंगीन सम्मिश्र
तीन बैंड नीले, हरे और लाल से दिखाए जाते हैं। मानक छद्म रंगी सम्मिश्र (FCC) में NIR लाल, लाल हरा, और हरा नीला दिखता है। इसलिए स्वस्थ वनस्पति चमकीली लाल, साफ़ पानी गहरा नीला या काला, और नगर नीले-भूरे दिखते हैं।
चित्रों की व्याख्या
व्याख्याकार संकेत देखते हैं: रंग-छटा, आकार, आकृति, गठन (चिकना या खुरदुरा), प्रतिरूप (जैसे बाग़ की पंक्तियाँ), छाया और साहचर्य (रेल के पास कारखाना)। उपयोग: फ़सल अनुमान, वन और बाढ़ मानचित्रण, नगर विस्तार, सूखा निगरानी और आपदा राहत।
करके देखें
फ़ोन की कोई फ़ोटो इतना ज़ूम कीजिए कि छोटे वर्ग दिखें: ये पिक्सेल हैं। अब 3D के आख़िरी चरण में स्लाइडर चलाइए: किस पिक्सेल आकार पर लाल घर पहचानना बंद हो जाता है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- चरण: स्रोत → वायुमंडल → सतह → वापसी → संवेदक → केंद्र → उत्पाद → उपयोगकर्ता
- अंकीय चित्र = पिक्सेलों का जाल, हर एक में DN (जैसे 0–255)
- मानक FCC: NIR → लाल, लाल → हरा, हरा → नीला
- विभेदन: स्थानिक, स्पेक्ट्रमी, विकिरणमितीय, कालिक
हल किए गए उदाहरण
1. मानक FCC में एक बड़ा भाग चमकीला लाल है। यह क्या होगा?
स्वस्थ वनस्पति (फ़सल या वन), क्योंकि पौधे NIR में बहुत परावर्तित करते हैं, जो लाल दिखाया जाता है।
2. दिन भर चक्रवात देखने के लिए कौन सा उपग्रह?
इनसैट जैसा भूस्थिर उपग्रह, क्योंकि यह एक जगह के ऊपर टिका रहकर हर कुछ मिनट में चित्र लेता है।
3. 10 km × 10 km क्षेत्र 5 m पिक्सेल से लिया गया। एक भुजा पर कितने पिक्सेल?
10,000 ÷ 5 = 2,000 पिक्सेल (कुल 2,000 × 2,000 = 40 लाख)।
4. NIR चित्रों में पानी काला क्यों दिखता है?
पानी लगभग सारी निकट-अवरक्त ऊर्जा सोख लेता है, इसलिए संवेदक तक लगभग कुछ वापस नहीं आता।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि सुदूर संवेदन केवल उपग्रहों से होता है। वायव फ़ोटो और भूमि संवेदक भी सुदूर संवेदन हैं।
- उपग्रह उलझाना: सूर्य-तुल्यकालिक नीचे (~800 km) और ध्रुवीय; भूस्थिर ऊँचे (36,000 km) विषुवत् वृत्त के ऊपर।
- छद्म रंग चित्र में लाल को लाल वस्तु समझना। मानक FCC में लाल = अधिक NIR, प्रायः स्वस्थ पौधे।
- बड़े पिक्सेल को साफ़ चित्र मानना। छोटे पिक्सेल = अधिक स्थानिक विभेदन।