जहाज़ क्यों ज़रूरी हैं
जहाज़ बहुत भारी माल सस्ते में ले जाता है। दुनिया में आने-जाने वाला ज़्यादातर माल, जैसे तेल, अनाज, कारें और फोन, समुद्र से जाता है। जहाज़ लोगों को भी ले जाते हैं (फेरी, क्रूज़), खास काम भी करते हैं (शोध जहाज़, ड्रेजर, टग) और तट की रक्षा भी करते हैं (गश्ती जहाज़)।
जहाज़ से क्यों? पानी खुद वज़न थाम लेता है। ट्रक को सड़क से रगड़ से लड़ना पड़ता है, जबकि जहाज़ को बस पानी को चीरना होता है। इसलिए एक लीटर ईंधन से जहाज़ ज़्यादा माल बहुत दूर तक पहुँचा देता है।
मछली पकड़ने के जहाज़ और उनका महत्व
मछली पकड़ने के जहाज़ मछली, झींगे और स्क्विड किनारे तक लाते हैं। मछली भोजन भी है और रोज़गार भी: एक नाव से उसके चालक दल को, मछली बेचने वालों को, जाल सुधारने और बर्फ बनाने वालों को काम मिलता है।
मछली जहाज़ मालवाहक से अलग काम के लिए बनता है: छोटा, मज़बूत और आसानी से मुड़ने वाला। इसमें व्हीलहाउस (जहाँ कप्तान जहाज़ चलाता है), बत्तियों और रेडियो के लिए मस्तूल, जाल खींचने के लिए बूम या विंच और पकड़ी मछली ताज़ा रखने के लिए फिश होल्ड (ठंडा कमरा) होता है। आम प्रकार: ट्रॉलर (जाल घसीटता है), पर्स सीनर (मछलियों को जाल से घेरता है), लॉन्गलाइनर (काँटों वाली लंबी डोरी) और गिल-नेट वाली छोटी नावें।
जहाज़ के भाग: पतवार की बनावट
जहाज़ के शरीर को पतवार (hull) कहते हैं। ये शब्द याद करो:
- अग्र (bow): आगे का भाग, जो पानी को चीरने के आकार का होता है।
- पश्च (stern): पीछे का भाग, जहाँ प्रोपेलर और पतवार-पंख (rudder) होते हैं।
- कील (keel): सबसे नीचे चलने वाली मज़बूत पट्टी, जहाज़ की रीढ़।
- फ्रेम: पसलियों जैसी पट्टियाँ जो कील को किनारों से जोड़ती हैं।
- खोल की प्लेटें: फ्रेमों पर वेल्ड की गई लोहे की चादरें, यानी जहाज़ की त्वचा।
- डेक: जहाज़ की मंज़िलें। सबसे ऊपर वाला मुख्य डेक है।
- बल्कहेड: भीतर की लोहे की दीवारें जो पतवार को जलरोधी कमरों में बाँटती हैं। एक कमरे में रिसाव हो तो बाकी सूखे रहते हैं।
- दोहरी तली: माल के नीचे दूसरी फर्श। बाहरी खोल टूटे तो यह खाली जगह जहाज़ को बचाती है।
अग्र की ओर मुँह करके खड़े हों तो बायाँ किनारा पोर्ट और दायाँ किनारा स्टारबोर्ड कहलाता है।
लोहे का जहाज़ क्यों तैरता है
लोहा पानी से बहुत भारी है, फिर भी जहाज़ तैरता है। जहाज़ ठोस टुकड़ा नहीं है; उसके अंदर ज़्यादातर हवा है। इसलिए उसका औसत घनत्व पानी से कम है।
जहाज़ पानी में उतरता है तो पानी को किनारे हटाता है। यह पानी वापस ऊपर धक्का देता है। आर्कीमिडीज़ का सिद्धांत: ऊपर का धक्का (उत्प्लावन बल) हटाए गए पानी के भार के बराबर होता है। जहाज़ तब तक डूबता है जब तक यह धक्का उसके अपने भार के बराबर न हो जाए। तब वह तैरता है। हटाए गए पानी के भार को जहाज़ का विस्थापन (displacement) कहते हैं।
माल ज़्यादा, तो भार ज़्यादा, तो और पानी हटाना पड़ेगा, इसलिए जहाज़ और गहरा बैठता है। पानी के नीचे वाली पतवार की गहराई ड्राफ्ट है। पानी के ऊपर वाला भाग फ्रीबोर्ड है। समुद्र का पानी (लगभग 1025 kg प्रति घन मीटर) नदी के पानी (1000) से घना है, इसलिए वही जहाज़ समुद्र में थोड़ा ऊँचा तैरता है।
समुद्र की घटनाएँ जो नाविक को जाननी चाहिए
जहाज़ चलते हुए समुद्र पर रहता है। चार बातें सबसे ज़रूरी हैं:
- लहरें: हवा से बनती हैं। तेज़ हवा और लंबा खुला समुद्र हो तो लहरें बड़ी होती हैं। जहाज़ करवट लेता है (रोल) और आगे-पीछे झुकता है (पिच)।
- ज्वार-भाटा: चंद्रमा और सूर्य के खिंचाव से समुद्र दिन में लगभग दो बार चढ़ता-उतरता है। बड़े जहाज़ उथले बंदरगाह में ऊँचे ज्वार में घुसते हैं।
- धाराएँ: समुद्र के भीतर की नदियाँ। धारा के साथ चलने से ईंधन बचता है, उसके विरुद्ध चलने में खर्च होता है।
- हवाएँ और तूफ़ान: मौसमी हवाएँ (जैसे हिंद महासागर का मानसून) और चक्रवात तय करते हैं कि कौन-सा रास्ता और कौन-सा समय सुरक्षित है।
समुद्र का पानी नमकीन है, इसलिए घना है और उसमें लोहे को जंग जल्दी लगता है। कोहरे और बर्फ़ में विशेष सावधानी चाहिए।
जहाज़ों के प्रकार
जहाज़ का नाम उसके काम से पड़ता है:
- मालवाहक जहाज़: बल्क कैरियर (अनाज, कोयला, अयस्क), कंटेनर जहाज़ (सामान के डिब्बे) और सामान्य माल।
- टैंकर: टंकियों में तरल ले जाते हैं, जैसे कच्चा तेल, ईंधन, रसायन या गैस। डेक पर कई टंकियाँ, पाइप और पंप होते हैं।
- मछली जहाज़: ट्रॉलर और मछली पकड़ने की दूसरी नावें।
- यात्री जहाज़: फेरी और क्रूज़, जिनमें कई डेक और केबिन होते हैं।
- विशेष जहाज़: टग, ड्रेजर, शोध जहाज़, बर्फ़ तोड़ने वाले जहाज़, नौसेना और तटरक्षक के जहाज़।
हर जहाज़ की पतवार उसके काम के हिसाब से बनती है: कंटेनर जहाज़ का डेक चौड़ा और खुला, टैंकर में अलग-अलग टंकियाँ, मछली जहाज़ छोटा और जल्दी मुड़ने वाला।
जहाज़ों के नियम
समुद्र किसी एक देश का नहीं है, इसलिए कई देश संयुक्त राष्ट्र की संस्था अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के ज़रिये एक जैसे नियम मानते हैं। मुख्य नियम:
- लोड लाइन नियम: पतवार पर बना निशान बताता है कि जहाज़ ज़्यादा से ज़्यादा कितना डूब सकता है। इसे प्लिमसोल निशान भी कहते हैं।
- SOLAS (समुद्र में जीवन की सुरक्षा): लाइफ़बोट, आग से बचाव, रेडियो, जलरोधी बनावट।
- MARPOL: जहाज़ों से तेल, कचरे और धुएँ का प्रदूषण रोकता है।
- COLREGs: समुद्र के रास्ते के नियम, यानी कौन किसको रास्ता देगा और कौन-सी बत्तियाँ जलानी हैं।
- STCW: नाविकों का प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र।
फिर हर देश अपना कानून बनाता है और जहाज़ों की जाँच करता है (भारत में नौवहन महानिदेशालय)। हर जहाज़ किसी एक देश में पंजीकृत होता है और उसका झंडा लगाता है, जैसे गाड़ी की नंबर प्लेट होती है।
जहाज़ों से जुड़े उद्योग
कई काम-धंधे जहाज़ों पर टिके हैं: जहाज़ निर्माण और मरम्मत के यार्ड (लोहा काटना, वेल्ड करना, इंजन लगाना), बंदरगाह (क्रेन, गोदाम, पायलट, टग), शिपिंग कंपनियाँ और माल-ढुलाई एजेंट, समुद्री उपकरण निर्माता (इंजन, प्रोपेलर, नेविगेशन यंत्र, लाइफ़बोट), मछली पकड़ना और प्रसंस्करण (बर्फ़ कारखाने, शीत-भंडार, डिब्बाबंदी), जहाज़ की मज़बूती जाँचने वाली वर्गीकरण संस्थाएँ और समुद्री बीमा। भारत में कोच्चि, मुंबई, विशाखापत्तनम जैसे तटीय शहर इन्हीं उद्योगों के कारण बढ़े।
करके देखो: फॉयल की नाव तैराओ
एक एल्युमिनियम फॉयल और पानी का कटोरा लो। फॉयल को गोला बनाकर डालो: वह डूब जाएगा। अब दूसरे फॉयल से छोटी खुली नाव बनाओ। वह तैरेगी। उसमें एक-एक करके सिक्के रखो और देखो नाव कैसे गहरी बैठती है। गिनो कि किनारे से पानी आने से पहले कितने सिक्के आए। यही उसकी लोड लाइन है! पहले अंदाज़ा लगाओ, फिर जाँचो: क्या चौड़ी नाव ज़्यादा सिक्के उठाएगी?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- तैरना: जहाज़ का भार = उत्प्लावन बल = हटाए गए पानी का भार
- विस्थापन (टन) = पानी में डूबा आयतन (m³) × पानी का घनत्व (t/m³); समुद्री पानी ≈ 1.025 t/m³
- डिब्बे जैसी पतवार: विस्थापन = लंबाई × चौड़ाई × ड्राफ्ट × 1.025 t
- फ्रीबोर्ड = पतवार की गहराई − ड्राफ्ट
- मुख्य शब्द: अग्र (bow) आगे, पश्च (stern) पीछे, कील (keel) नीचे की रीढ़, पोर्ट बायाँ, स्टारबोर्ड दायाँ
हल किए गए उदाहरण
1. एक डिब्बेनुमा बजरा 20 m लंबा और 8 m चौड़ा है और समुद्र में 2 m ड्राफ्ट पर तैरता है। उसका कुल भार (विस्थापन) निकालो।
पानी के नीचे का आयतन = 20 × 8 × 2 = 320 m³। उतने समुद्री पानी का भार = 320 × 1.025 = 328 t। बजरे और माल का कुल भार 328 t है।
2. यही बजरा खाली होने पर 164 t का है। ऊपर वाले 328 t तक पहुँचने के लिए वह कितना माल ले सकता है?
माल = 328 − 164 = 164 t। (जाँच: खाली बजरे का ड्राफ्ट 164 ÷ (20 × 8 × 1.025) = 1 m होता है, और 164 t माल लादने पर 2 m हो जाता है।)
3. 328 t का यह बजरा समुद्र से नदी (मीठा पानी, 1.000 t/m³) में आता है। नया ड्राफ्ट निकालो।
ज़रूरी आयतन = 328 ÷ 1.000 = 328 m³। ड्राफ्ट = 328 ÷ (20 × 8) = 2.05 m। यानी वह 5 cm और गहरा बैठा, क्योंकि मीठा पानी हल्का है।
4. बजरे की पतवार 4 m गहरी है (कील से डेक तक)। ड्राफ्ट 2.05 m हो तो फ्रीबोर्ड कितना है? क्या और माल लादना सुरक्षित है?
फ्रीबोर्ड = 4 − 2.05 = 1.95 m। अभी बहुत जगह है, पर सीमा केवल फ्रीबोर्ड से नहीं, लोड लाइन से तय होती है। उससे ज़्यादा कभी मत लादो।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि लोहा हल्का है इसलिए जहाज़ तैरता है। लोहा भारी है; अंदर हवा होने से पूरा जहाज़ औसतन अपने हटाए पानी से हल्का होता है।
- पोर्ट और स्टारबोर्ड उलझाना। अग्र की ओर मुँह करो: पोर्ट बायाँ, स्टारबोर्ड दायाँ।
- सोचना कि बड़ा जहाज़ हमेशा ज़्यादा डूबता है। ड्राफ्ट भार पर निर्भर है, केवल आकार पर नहीं।
- पानी का घनत्व भूल जाना: वही जहाज़ नदी में समुद्र से ज़्यादा डूबता है।