जल-निकास और सीवरेज
जल-निकास (drainage) इस्तेमाल हुए पानी को इमारत से बाहर ले जाता है। सीवरेज पूरे शहर की पाइपों (सीवर) की प्रणाली है जो उसे शोधन संयंत्र तक ले जाती है। नाली के पाइप ज़्यादातर गुरुत्व से चलते हैं: पाइप आंशिक भरा रहता है और पानी बस ढलान पर बहता है। दाब नहीं होता, इसलिए पाइप चौड़ा और ढलान वाला होता है।
गंदे पानी के प्रकार
- मल-जल (soil water) शौचालय से (ठोस बहुत)।
- अपशिष्ट जल (waste water, ग्रे वॉटर) सिंक, शावर और वॉशिंग मशीन से।
- वर्षा जल छतों और आँगन से।
सीवर प्रणालियाँ
- पृथक: मलजल के लिए एक सीवर, वर्षा जल के लिए दूसरा। नए इलाक़ों में आम।
- संयुक्त: दोनों के लिए एक सीवर। सस्ता, पर भारी वर्षा में उफन सकता है।
फिर मलजल शोधन संयंत्र में जाता है: जालियाँ बड़ी चीज़ें हटाती हैं, टंकियों में ठोस बैठते हैं, जीवाणु पानी साफ़ करते हैं और नदी में लौटने से पहले पानी का कीटाणु-शोधन होता है। जहाँ सीवर नहीं है वहाँ सेप्टिक टैंक और सोख-गड्ढा इस्तेमाल होता है।
जल-निकास और वेंट प्रतिष्ठानों का डिज़ाइन
ढलान (ग्रेडिएंट)
क्षैतिज नाली में ऐसी ढलान चाहिए कि पानी ठोस को साथ ले जाए। सामान्य नियम लगभग 1:50 से 1:100 (प्रति मीटर 1 से 2 सेमी गिरावट) है। बहुत सपाट: ठोस जम जाते हैं और रुकावट बनती है। बहुत तेज़: पानी आगे निकल जाता है और ठोस पीछे रह जाते हैं।
पाइप का आकार
पाइप का आकार फ़िक्स्चरों के भार ("फ़िक्स्चर यूनिट") से तय होता है: बेसिन छोटा भार, शावर ज़्यादा, शौचालय सबसे ज़्यादा। शौचालय के लिए लगभग 100 mm का पाइप चाहिए। नाली का पाइप प्रवाह की दिशा में कभी पतला नहीं होता। खड़ा स्टैक मल-जल और अपशिष्ट को नीचे इमारत की नाली तक ले जाता है।
ट्रैप और जल-सील
हर फ़िक्स्चर के नीचे ट्रैप (U-मोड़ या P-ट्रैप) में जल-सील (आमतौर पर 50 mm या ज़्यादा गहरी) रुकी रहती है। वह सीवर गैस, बदबू और कीड़ों को रोकती है।
वेंट क्यों चाहिए
स्टैक में बहुत पानी गिरे तो वह आगे हवा को धकेलता है (दाब) और पीछे कम दाब छोड़ता है (चूषण)। चूषण ट्रैप का पानी खींच सकता है, या दाब उसे कमरे में उछाल सकता है। वेंट पाइप नाली-प्रणाली को खुली हवा से (आमतौर पर छत से) जोड़ता है ताकि हवा आ-जा सके और दाब सामान्य रहे। वेंट छत के ऊपर और खिड़कियों से दूर खुलते हैं।
अन्य डिज़ाइन बातें
- धीमे मोड़ और 45° के जोड़, तीखे कोहनी-मोड़ नहीं।
- मोड़ों पर और स्टैक के तल पर सफ़ाई के (क्लीनआउट) ढक्कन।
- पाइप सामग्री: PVC, कच्चा लोहा, HDPE।
- उपयोग से पहले प्रणाली को पानी या हवा से परखिए।
घरों में जल आपूर्ति और निकास
घर में दो अलग पाइप प्रणालियाँ होती हैं जो कभी आपस में नहीं जुड़तीं:
- आपूर्ति: साफ़ पानी, दाब के साथ, छोटे पाइपों (लगभग 15 से 25 mm) में। नलों, शौचालय की टंकी, हीटर और वॉशिंग मशीन तक जाता है। वाल्व से बंद किया जा सकता है।
- निकास: इस्तेमाल हुआ पानी, बिना दाब, बड़े पाइपों (लगभग 40 से 100 mm) में जो नीचे की ओर ढलान वाले हैं। इनमें ट्रैप और वेंट होते हैं।
हर फ़िक्स्चर पर आपूर्ति ऊपर से (नल से) आती है और निकास नीचे से (ट्रैप से) जाता है। नल और बेसिन के पानी के बीच हवा का अंतर (air gap) गंदे पानी को उलटकर आपूर्ति में खिंचने से रोकता है।
भीतरी व्यवस्था के सुझाव: पाइप छोटे और सीधे रखिए, बाथरूम और रसोई स्टैक के पास रखिए, हर पाइप की सफ़ाई का रास्ता रखिए और छत का वेंट खुला और साफ़ रखिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- गिरावट = लंबाई × ढलान (1:50 के लिए, गिरावट = लंबाई ÷ 50)
- ढलान (%) = गिरावट ÷ लंबाई × 100
- बची सील = ट्रैप की सील की गहराई − चूषण या वाष्पीकरण से हानि (लगभग 25 mm से ऊपर रहनी चाहिए)
- मलजल ≈ आपूर्ति किए गए पानी का 80 %
- फ़िक्स्चर यूनिट: शाखा के सभी फ़िक्स्चरों के भार जोड़िए
हल किए गए उदाहरण
1. 5 m लंबी क्षैतिज नाली में 1:50 ढलान चाहिए। बाहरी सिरा कितना नीचा होगा?
गिरावट = 5 ÷ 50 = 0.10 m = 10 cm।
2. एक पाइप 2 m में 4 cm गिरता है। ढलान प्रतिशत में और 1 में n के रूप में निकालिए।
ढलान = 0.04 ÷ 2 = 0.02 = 2 प्रतिशत = 1 में 50।
3. ट्रैप में 50 mm की सील है। एक फ़्लश 20 mm खींच लेता है। कितनी बचेगी, और अगर कम से कम 25 mm बचनी ज़रूरी हो तो क्या यह सुरक्षित है?
बची = 50 − 20 = 30 mm। यह 25 mm से ज़्यादा है, इसलिए सुरक्षित है, पर वेंट सील को पूरे 50 mm पर रखता।
4. 5 सदस्यों का परिवार प्रति व्यक्ति 135 L प्रतिदिन इस्तेमाल करता है। लगभग कितना मलजल बनेगा?
पानी = 5 × 135 = 675 L। मलजल ≈ 0.8 × 675 = 540 L प्रतिदिन।
5. एक बाथरूम में एक बेसिन (1 यूनिट), एक शावर (2 यूनिट) और एक शौचालय (4 यूनिट) है। कुल भार फ़िक्स्चर यूनिट में निकालिए।
कुल = 1 + 2 + 4 = 7 फ़िक्स्चर यूनिट। इसी संख्या से तालिका देखकर पाइप का आकार चुनते हैं।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि ट्रैप केवल चीज़ें पकड़ने के लिए है। उसका काम जल-सील है जो सीवर गैस रोकती है।
- वेंट छोड़ देना। तब फ़्लश से सील खाली हो सकती है।
- बहुत तेज़ ढलान (लगभग 1:20 से ज़्यादा) देना। पानी आगे निकल जाता है और ठोस पीछे रह जाते हैं।
- आपूर्ति और निकास पाइप जोड़ देना। उन्हें अलग रहना चाहिए।