China 九年级(初三) Physics
अध्याय: 11
1. Ch.13 Internal energy
Heat and specific heat capacity · Kinetic molecular theory basics · Internal energy
- विशिष्ट ऊष्मा धारिता और ऊष्मा संतुलन – हर पदार्थ को गर्म होने के लिए अलग-अलग ऊर्जा चाहिए। किसी पदार्थ की विशिष्ट ऊष्मा धारिता (c) वह ऊर्जा है जो उसके 1 kg का ताप 1 °C (या 1 K) बढ़ाती है। इसका मात्रक J/(kg·°C) है। किसी भी मात्रा को गर्म करने की ऊर्जा Q = m × c × ΔT होती है। पानी की c बहुत बड़ी है (लगभग 4200 J/(kg·°C)), इसलिए वह धीरे गर्म होता है और धीरे ठंडा होता है। जब गर्म और ठंडी चीज़ मिलती हैं और ऊष्मा बाहर नहीं जाती, तो गर्म चीज़ द्वारा दी गई ऊष्मा = ठंडी चीज़ द्वारा ली गई ऊष्मा। इसे ऊष्मा संतुलन कहते हैं और कैलोरीमीटर इसी पर काम करता है।
- द्रव्य का कण मॉडल – हर द्रव्य बहुत छोटे कणों से बना है जो हमेशा गति करते रहते हैं। ठोस में कण पास-पास होते हैं और बस काँपते हैं; द्रव में पास होते हुए भी फिसलते हैं; गैस में दूर-दूर होकर हर दिशा में तेज़ भागते हैं। गरम करने पर कणों को ऊर्जा मिलती है: या तो वे तेज़ चलते हैं (तापमान बढ़ता है) या उनके बीच का खिंचाव टूटता है (अवस्था बदलती है, तापमान स्थिर रहता है)। गैस दाब कणों की दीवार से टक्कर से बनता है।
- आंतरिक ऊर्जा (Internal Energy) – हर चीज़ बहुत छोटे कणों से बनी है। कण हिलते-डुलते हैं (गतिज ऊर्जा) और आपस में बलों से बँधे रहते हैं (स्थितिज ऊर्जा)। सब कणों की इन ऊर्जाओं का कुल जोड़ आंतरिक ऊर्जा U है। गर्म करने पर U बढ़ती है: या तो कण तेज़ चलते हैं और तापमान बढ़ता है (Q = mcΔT), या बंधन टूटते हैं और अवस्था बदलती है, तापमान वही रहता है (Q = mL)। रगड़ना या दबाना (कार्य) भी U बढ़ाता है।
2. Ch.14 Using internal energy
Energy transformation and conservation · Heat engines · Efficiency; heat value of fuels · Interdisciplinary: simple heat-engine model
- कार्य, ऊर्जा और शक्ति – जब बल किसी वस्तु को खिसकाता है, तब कार्य होता है: W = F × s, मात्रक जूल (J)। ऊर्जा यानी कार्य करने की क्षमता। चलती वस्तु में गतिज ऊर्जा ½mv² होती है, ऊँचाई पर रखी वस्तु में स्थितिज ऊर्जा mgh। ऊर्जा न बनती है न नष्ट होती है, बस एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। शक्ति यानी कार्य कितनी जल्दी हुआ: P = W ÷ t, मात्रक वाट। उत्तोलक और घिरनी जैसी सरल मशीनें कम बल से भारी वस्तु उठाने में मदद करती हैं।
- ऊष्मा इंजन – ऊष्मा इंजन वह मशीन है जो ऊष्मा को यांत्रिक कार्य में बदलती है। ईंधन जलकर ऊष्मा Q = q × m देता है, जहाँ q ईंधन का ऊष्मीय मान (दहन की ऊष्मा) और m उसका द्रव्यमान है। गर्म गैस फैलकर पिस्टन को धकेलती है या टरबाइन घुमाती है। चार स्ट्रोक इंजन चूषण, संपीडन, शक्ति और निष्कासन दोहराता है। ऊष्मा का केवल कुछ भाग उपयोगी कार्य बनता है, बाक़ी बेकार ऊष्मा बनकर निकल जाता है। दक्षता η = W ÷ Q × 100%। इंजन CO₂ और दूसरी गैसें भी छोड़ते हैं जो हवा को गंदा और धरती को गर्म करती हैं।
- सरल ऊष्मा-इंजन का मॉडल बनाओ – ऊष्मा-इंजन गर्मी को गति में बदलता है। सरल हवा-इंजन में लौ फ्लास्क की हवा को गरम करती है। गरम हवा फैलकर पिस्टन को ऊपर धकेलती है और भार उठता है। यही कार्य है। ठंडा करने पर पिस्टन लौट आता है। गर्मी का केवल एक हिस्सा कार्य बनता है, बाक़ी निकल जाता है। दक्षता = निकला कार्य ÷ ली गई ऊष्मा।
3. Ch.15 Current and circuits
Two kinds of charge · Current and circuits · Series and parallel circuits · Measuring current; current rules in series/parallel
- स्थिर विद्युत (Static Electricity) – दो अलग चीज़ों को रगड़ने पर इलेक्ट्रॉन एक से दूसरी पर चले जाते हैं। जो इलेक्ट्रॉन पाता है वह ऋण आवेशित होता है, जो खोता है वह धन आवेशित। आवेश बनता या मिटता नहीं, सिर्फ़ जगह बदलता है। समान आवेश एक-दूसरे को धकेलते हैं, असमान आवेश खींचते हैं। आवेशित वस्तु प्रेरण से उदासीन वस्तु को भी खींचती है। भूसंपर्कण से अतिरिक्त आवेश सुरक्षित ज़मीन में चला जाता है।
- विद्युत धारा, विभवांतर और विद्युत परिपथ – विद्युत धारा आवेश के बहने की दर है: I = Q/t, मात्रक एम्पियर, इसे श्रेणी में लगे ऐमीटर से मापते हैं। विभवांतर एकांक आवेश को दो बिंदुओं के बीच ले जाने में किया गया कार्य है: V = W/Q, मात्रक वोल्ट, इसे पार्श्व में लगे वोल्टमीटर से मापते हैं। धारा केवल बंद परिपथ में बहती है।
- प्रतिरोधकों का श्रेणीक्रम और पार्श्वक्रम संयोजन – श्रेणीक्रम में प्रतिरोधक एक ही रास्ता बनाते हैं: हर एक में धारा समान, विभवांतर जुड़ते हैं और R_s = R₁ + R₂ + R₃। पार्श्वक्रम में हर प्रतिरोधक की अपनी शाखा होती है: हर एक पर विभवांतर समान, धाराएँ जुड़ती हैं और 1/R_p = 1/R₁ + 1/R₂ + 1/R₃, इसलिए R_p सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम होता है।
4. Ch.16 Voltage and resistance
Voltage; rules in series/parallel · Resistance · Rheostats · Interdisciplinary: dimmable desk lamp
- विद्युत धारा, विभवांतर और विद्युत परिपथ – विद्युत धारा आवेश के बहने की दर है: I = Q/t, मात्रक एम्पियर, इसे श्रेणी में लगे ऐमीटर से मापते हैं। विभवांतर एकांक आवेश को दो बिंदुओं के बीच ले जाने में किया गया कार्य है: V = W/Q, मात्रक वोल्ट, इसे पार्श्व में लगे वोल्टमीटर से मापते हैं। धारा केवल बंद परिपथ में बहती है।
- प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक और प्रतिरोधकता – तार का प्रतिरोध लंबाई बढ़ने पर बढ़ता है और मोटा होने पर घटता है: R = ρL/A। स्थिरांक ρ (रो) पदार्थ की प्रतिरोधकता है, मात्रक Ω m। यह केवल पदार्थ और ताप पर निर्भर है। धातुओं की प्रतिरोधकता कम, मिश्रधातुओं की अधिक और विद्युतरोधियों की बहुत अधिक होती है।
- मंद-तेज़ होने वाला टेबल लैंप बनाओ – डिमर लैंप के श्रेणीक्रम में जुड़ा एक परिवर्ती प्रतिरोध है। ग्रेफ़ाइट की छड़ पर संपर्क खिसकाने से धारा को छड़ का कम या ज़्यादा हिस्सा पार करना पड़ता है। लंबा रास्ता यानी ज़्यादा प्रतिरोध, कम धारा और मद्धम लैंप। मोटी छड़ में प्रतिरोध कम होता है। लैंप पूरा बुझाने के लिए अलग स्विच चाहिए।
5. Ch.17 Ohm's law
Current vs voltage and resistance · Ohm's law · Measuring resistance · Ohm's law in series/parallel
- ओम का नियम – स्थिर ताप पर किसी चालक में बहने वाली धारा उसके सिरों के विभवांतर के समानुपाती होती है: V = I × R। R प्रतिरोध है, मात्रक ओम (Ω); 1 Ω = 1 V/1 A। ओमीय चालक का V–I ग्राफ मूल बिंदु से गुज़रती सीधी रेखा होता है।
- प्रतिरोधकों का श्रेणीक्रम और पार्श्वक्रम संयोजन – श्रेणीक्रम में प्रतिरोधक एक ही रास्ता बनाते हैं: हर एक में धारा समान, विभवांतर जुड़ते हैं और R_s = R₁ + R₂ + R₃। पार्श्वक्रम में हर प्रतिरोधक की अपनी शाखा होती है: हर एक पर विभवांतर समान, धाराएँ जुड़ती हैं और 1/R_p = 1/R₁ + 1/R₂ + 1/R₃, इसलिए R_p सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम होता है।
6. Ch.18 Electric power
Electrical energy and work · Electric power (rated/actual) · Interdisciplinary: saving electricity at home · Joule's law
- विद्युत शक्ति और विद्युत ऊर्जा – विद्युत शक्ति विद्युत ऊर्जा के उपयोग की दर है: P = VI = I²R = V²/R, मात्रक वाट। ऊर्जा = शक्ति × समय। घर में ऊर्जा किलोवाट-घंटा में मापते हैं: 1 kWh = 1 यूनिट = 3.6 × 10⁶ J। बिल = यूनिट × दर।
- घर में बिजली बचाओ: जाँच और बचत योजना – घर की बिजली की जाँच में हर उपकरण की शक्ति (वाट) और रोज़ चलने के घंटे लिखे जाते हैं। ऊर्जा = शक्ति × समय, जो किलोवाट-घंटा (यूनिट) में दिखाई जाती है। सबसे ऊँचे स्तंभ बताते हैं कि पहले कहाँ बचत करें। कुशल उपकरण लो, उन्हें कम चलाओ और स्टैंडबाय बंद करो, फिर नया बिल निकालकर बचत देखो।
- विद्युत धारा का तापीय प्रभाव – प्रतिरोधक में धारा बहने पर विद्युत ऊर्जा ऊष्मा में बदलती है। जूल का नियम: H = I²Rt, यानी ऊष्मा धारा के वर्ग, प्रतिरोध और समय के अनुक्रमानुपाती है। हीटर, इस्त्री, टोस्टर, बल्ब और फ्यूज़ सब इसी प्रभाव पर काम करते हैं।
7. Ch.19 Electricity in daily life
Electrical safety · Household circuits · Interdisciplinary: design a home circuit
- घरेलू विद्युत परिपथ – घर में 220 V, 50 Hz की प्रत्यावर्ती धारा (AC) विद्युन्मय और उदासीन तार से आती है; सभी साधित्र पार्श्व (समांतर) क्रम में 5 A और 15 A के अलग परिपथों पर जुड़े होते हैं, और विद्युन्मय तार में लगा फ्यूज या MCB तथा भूसंपर्क तार घर को सुरक्षित रखते हैं।
8. Ch.20 Electricity and magnetism
Magnets and fields; Earth's magnetism · Magnetic effect of current · Electromagnets and relays · Electric motor · Interdisciplinary: simple DC motor · Electromagnetic induction; generator
- विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव – जिस तार में विद्युत धारा बहती है, उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र बन जाता है। सीधे तार के चारों ओर यह वृत्तों में होता है, वृत्ताकार लूप के केंद्र पर लगभग सीधा होता है, और परिनालिका के अंदर एकसमान होता है, जिससे परिनालिका छड़ चुंबक जैसी बन जाती है।
- धारावाही चालक पर बल, विद्युत मोटर और प्रेरण – चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही तार पर एक धक्का यानी बल लगता है। तार क्षेत्र से 90° पर हो तो बल सबसे ज़्यादा, और क्षेत्र के समांतर हो तो शून्य। बल की दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम से मिलती है। मोटर इसी बल से कुंडली घुमाती है; जनित्र उल्टा काम करके गति से धारा बनाता है।
- सरल DC मोटर बनाओ – DC मोटर विद्युत ऊर्जा को घूमने की गति में बदलती है। चुंबकीय क्षेत्र में रखी धारावाही कुंडली की दो भुजाओं पर बल लगता है, एक ऊपर और एक नीचे, इसलिए वह घूमती है। दिक्परिवर्तक (स्प्लिट रिंग) हर आधे चक्कर पर धारा उलट देता है, इसलिए कुंडली एक ही दिशा में घूमती रहती है। वोल्टेज, फेरे या चुंबक बढ़ाने से गति बढ़ती है।
9. Ch.21 Electromagnetic waves
Electromagnetic waves (wavelength, frequency, speed) · Broadcasting, TV and mobile communication · Satellite and optical-fibre communication
- विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम – विद्युतचुंबकीय (EM) तरंगें बदलते विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों की अनुप्रस्थ तरंगें हैं। इन्हें माध्यम नहीं चाहिए और निर्वात में सब 3 × 10⁸ m/s से चलती हैं। घटती तरंगदैर्ध्य (बढ़ती आवृत्ति और ऊर्जा) के क्रम में: रेडियो, माइक्रोवेव, अवरक्त, दृश्य प्रकाश, पराबैंगनी, एक्स-किरण और गामा किरण। चाल = आवृत्ति × तरंगदैर्ध्य (c = fλ)। हर प्रकार के उपयोग हैं; ज़्यादा ऊर्जा वाली (पराबैंगनी, एक्स, गामा) आयनकारी हैं और जीवित कोशिकाओं को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
- रेडियो, टीवी और मोबाइल: संकेत कैसे चलते हैं – रेडियो, टीवी और मोबाइल रेडियो तरंगों से जानकारी भेजते हैं। आवाज़ और चित्र को छोटे बिजली-संकेत में बदला जाता है। संकेत टावर की तेज़ वाहक तरंग पर सवार होकर जाता है। रिसीवर एक आवृत्ति पर ट्यून होकर संकेत को वापस आवाज़ और चित्र बनाता है। मोबाइल नेटवर्क इलाक़े को सेल में बाँटता है, हर सेल का अपना टावर होता है।
- उपग्रह और ऑप्टिकल फ़ाइबर: दूर के संचार – रेडियो तरंगें गोल पृथ्वी के पार नहीं मुड़तीं, इसलिए दूर के संपर्क के लिए अंतरिक्ष में रिले या काँच का धागा चाहिए। उपग्रह ज़मीन से माइक्रोवेव लेता है (अपलिंक) और उन्हें नीचे भेजता है (डाउनलिंक)। ऑप्टिकल फ़ाइबर पूर्ण आंतरिक परावर्तन से प्रकाश के स्पंद ले जाता है और बहुत सारा डेटा कम हानि से भेजता है।
10. Ch.22 Energy and sustainability
Energy use and challenges · New energy (nuclear, solar) · Interdisciplinary: energy-saving plan
- खनिज तथा ऊर्जा संसाधन – खनिज चट्टानों में मिलने वाले प्राकृतिक पदार्थ हैं। ये धात्विक (लौह या अलौह), अधात्विक या ऊर्जा खनिज होते हैं। ऊर्जा पारंपरिक स्रोतों (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, बिजली) और गैर-पारंपरिक स्रोतों (सूर्य, पवन, परमाणु, बायोगैस, ज्वार, भूतापीय) से मिलती है। दोनों का संरक्षण ज़रूरी है।
- ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोत – अनवीकरणीय स्रोत (कोयला, तेल, गैस, यूरेनियम) प्रकृति के बनाने से तेज़ खर्च होते हैं, और जीवाश्म ईंधन CO₂ छोड़ते हैं। नवीकरणीय स्रोत प्रकृति फिर से भरती है: सौर (फ़ोटोवोल्टिक सेल और सौर तापन), पवन (P ∝ v³), जलविद्युत (P = η ρ g h Q), ज्वारीय, भूतापीय और जैव भार। हाइड्रोजन ईंधन सेल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बिजली और पानी बनाता है। धूप और हवा बदलती रहती हैं, इसलिए भंडारण (बैटरी, पंप किया पानी) और कई स्रोतों का मिश्रण चाहिए। हर स्रोत की कुछ क़ीमत है: ज़मीन, सामग्री, लागत और प्रकृति पर असर।
- ऊर्जा-बचत योजना: अपने घर का ऊर्जा ऑडिट – ऊर्जा-बचत योजना के पाँच कदम हैं: उपकरणों की सूची बनाना, E = P × t से ऊर्जा (kWh में) नापना, सबसे बड़ा खर्च खोजना, आदतें बदलना (कम घंटे चलाना) और उपकरण बदलना (LED जैसे कुशल उपकरण)। फिर नया कुल और बची हुई रक़म जाँचना।
11. Structure of matter (standard 1.3)
Molecules, atoms, nuclear model; scales of the universe
- परमाणु की संरचना – परमाणु के बीच में एक बहुत छोटा, भारी और धनावेशित नाभिक होता है, जिसमें प्रोटॉन और न्यूट्रॉन रहते हैं। इलेक्ट्रॉन इसके चारों ओर तय कोशों K, L, M, N में घूमते हैं। प्रोटॉन की संख्या (Z) से तत्व तय होता है; प्रोटॉन + न्यूट्रॉन = द्रव्यमान संख्या (A)। बाहरी इलेक्ट्रॉन संयोजकता तय करते हैं।