डिमर क्या करता है
लैंप से जितनी ज़्यादा धारा बहती है, वह उतना तेज़ चमकता है। डिमर धारा को नियंत्रित करता है। वह एक परिवर्ती प्रतिरोध (रिओस्टेट) है जो लैंप के श्रेणीक्रम में जुड़ता है। धारा दोनों से एक के बाद एक गुज़रती है।
धारा I = V ÷ (Rलैंप + Rछड़) होती है। Rछड़ बढ़ने पर I घटती है और लैंप मद्धम होता है।
बनाने की विधि (केवल बैटरी)
चाहिए: होल्डर में 2 AA बैटरी (3 V) या 4 AA (6 V), होल्डर वाला छोटा टॉर्च बल्ब, लंबी नरम पेंसिल लेड (2B या ज़्यादा काली) या आधी कटी पेंसिल, मगरमच्छ-क्लिप वाले तार और एक स्विच (या ढीला तार)।
- बैटरी, बल्ब और पेंसिल लेड का एक सिरा जोड़कर लूप बनाओ।
- दूसरी क्लिप को खिसकने वाला संपर्क बनाओ। उसे लेड पर लगाओ और बैटरी तक जोड़ दो।
- क्लिप को लेड पर खिसकाओ और बल्ब को बदलते देखो।
- बल्ब बंद करने के लिए लूप में स्विच जोड़ो।
सावधानी: केवल बैटरी लो। ऐसे प्रोजेक्ट के लिए दीवार के सॉकेट का इस्तेमाल कभी मत करो।
लंबाई और मोटाई क्यों मायने रखती है
तांबे की तुलना में ग्रेफ़ाइट कमज़ोर चालक है। रास्ता जितना लंबा, आवेश उतने धीमे होते हैं। R = ρ × L ÷ A: प्रतिरोध लंबाई L के साथ बढ़ता है और क्षेत्रफल A (मोटाई) बढ़ने पर घटता है।
- क्लिप को पहले सिरे से दूर खिसकाओ: L बढ़ी, R बढ़ा, लैंप मद्धम।
- मोटी लेड लो: A बढ़ा, R घटा, उसी जगह पर लैंप ज़्यादा चमकता है।
लैंप के हिसाब से छड़ चुनो। छड़ बहुत छोटी या मोटी हो तो मद्धम करना मुश्किल है। बहुत लंबी हो तो शुरू में ही लैंप बहुत मद्धम हो सकता है।
डिज़ाइन के फ़ैसले और ईमानदार सीमाएँ
श्रेणीक्रम की छड़ से लैंप पूरी तरह नहीं बुझता, क्योंकि छड़ का प्रतिरोध सीमित होता है। इसके लिए स्विच चाहिए। साथ ही श्रेणीक्रम वाला डिमर ऊर्जा बर्बाद करता है: जो विद्युत ऊर्जा लैंप नहीं लेता वह छड़ में ऊष्मा बन जाती है। छड़ गरम हो सकती है। घर के डिमर बहुत तेज़ी से धारा चालू-बंद करने वाले इलेक्ट्रॉनिक भाग लगाते हैं, इसलिए वे बहुत कम ऊर्जा बर्बाद करते हैं।
अपना डिज़ाइन बनाओ, जाँचो, फिर सुधारो: क्या मद्धम करना सहज है? क्या छड़ गरम है? क्या लैंप पूरा तेज़ हो पाता है?
करके देखो
पहले अंदाज़ा लगाओ, फिर जाँचो। (1) लेड पर हर 2 सेमी पर निशान लगाओ। हर निशान पर चमक का अंदाज़ा लगाओ, फिर आँख से जाँचो। (2) लेड बदलकर मोटी लगाओ। (3) चार की जगह दो बैटरी लो। (4) एक मिनट बाद छड़ छूकर देखो: गरम या ठंडी? क्यों? हर बात का एक वाक्य लिखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- I = V ÷ (R_लैंप + R_छड़) (श्रेणीक्रम)
- R = ρ × L ÷ A (लंबाई, क्षेत्रफल)
- P = I² × R (लैंप में शक्ति)
- लंबी या पतली छड़: ज़्यादा R, कम I, मद्धम लैंप
हल किए गए उदाहरण
1. 6 V की बैटरी, 6 Ω का लैंप और 6 Ω की छड़ श्रेणीक्रम में हैं। धारा ज्ञात करो।
कुल R = 6 + 6 = 12 Ω। I = 6 ÷ 12 = 0.5 A।
2. उसी सर्किट में लैंप की शक्ति ज्ञात करो।
P = I² × R = 0.5² × 6 = 1.5 W। छड़ न हो तो 1 A और 6 W होते, यानी लैंप 25% पर है।
3. 12 सेमी पेंसिल लेड का प्रतिरोध 4 Ω है। उसी लेड के 30 सेमी का प्रतिरोध क्या होगा?
R लंबाई के समानुपाती है। 30 ÷ 12 = 2.5, इसलिए R = 2.5 × 4 = 10 Ω।
4. 18 Ω की छड़ पूरी लगी है, 6 Ω का लैंप और 6 V की बैटरी है। लैंप की शक्ति ज्ञात करो।
I = 6 ÷ 24 = 0.25 A। P = 0.25² × 6 = 0.375 W। यह पूरी शक्ति का लगभग 6% है।
5. मोटी छड़ का प्रतिरोध उसी लंबाई की पतली छड़ से आधा होता है। 12 Ω की पतली छड़ की जगह मोटी लगाई। नया R क्या है?
क्षेत्रफल दोगुना होने से R आधा: 12 ÷ 2 = 6 Ω।
6. उदाहरण 2 में पूरा सर्किट कितनी शक्ति लेता है और छड़ में कितनी ऊष्मा बनती है?
कुल P = V × I = 6 × 0.5 = 3 W। लैंप 1.5 W, छड़ = 0.5² × 6 = 1.5 W ऊष्मा। आधी ऊर्जा ऊष्मा में बर्बाद।
आम गलतियाँ
- छड़ को लैंप के समांतर जोड़ना। डिमर श्रेणीक्रम में होना चाहिए ताकि पूरी धारा दोनों से गुज़रे।
- यह सोचना कि छड़ के अंत में लैंप पूरा बुझ जाएगा। छड़ का प्रतिरोध सीमित है, इसलिए थोड़ी धारा बहती रहती है।
- बहुत कठोर (H) पेंसिल लेड लेना। वह बहुत प्रतिरोधी है और लैंप ठीक से नहीं जलेगा। नरम 2B या 4B लो।
- भूल जाना कि छड़ ऊर्जा को ऊष्मा में बर्बाद करती है। श्रेणीक्रम का डिमर मद्धम करने के अनुपात में बिजली नहीं बचाता।