प्रयोग 1: वस्तुओं को आवेशित करना और विद्युतदर्शी
कुछ वस्तुएँ रगड़ने पर विद्युत आवेश पा लेती हैं। सूखे बालों पर रगड़ा हुआ प्लास्टिक का पेन काग़ज़ के छोटे टुकड़ों को उठा लेता है।
हमें कैसे पता चले कि कोई वस्तु आवेशित है? इसके लिए विद्युतदर्शी (electroscope) होता है। इसके ऊपर धातु की घुंडी, एक धातु की छड़ और दो बहुत पतली धातु-पन्नी की पत्तियाँ होती हैं। पत्तियाँ काँच के जार के अंदर लटकती हैं ताकि हवा उन्हें न हिलाए।
आवेशित छड़ को घुंडी के पास लाओ। आवेश धातु में आगे बढ़ता है। दोनों पत्तियों पर एक ही तरह का आवेश आ जाता है, इसलिए वे एक-दूसरे को दूर धकेलती हैं और खुल जाती हैं। आवेश जितना ज़्यादा, पत्तियाँ उतनी ज़्यादा खुलती हैं। छड़ हटाने पर आवेश लौट जाता है और पत्तियाँ गिर जाती हैं।
विद्युतदर्शी बताता है कि वस्तु आवेशित है या नहीं और लगभग कितना आवेश है। अलग से कुछ किए बिना वह यह नहीं बताता कि आवेश धन (+) है या ऋण (−)।
प्रयोग 2: आवेशित वस्तुओं के बीच बल
दो हल्की गेंदें धागों से लटकाओ। उन्हें आवेशित छड़ों से छूकर आवेशित करो।
- समान आवेश (दोनों + या दोनों −): गेंदें दूर झूलती हैं। यह प्रतिकर्षण है।
- विपरीत आवेश (+ और −): गेंदें पास झूलती हैं। यह आकर्षण है।
गेंदें जितनी पास होती हैं, धक्का या खिंचाव उतना ज़्यादा होता है। इसी साधारण जाँच से वैज्ञानिकों ने पहली बार दिखाया कि आवेश दो प्रकार के होते हैं।
प्रयोग 3: क्या पदार्थ बिजली चलाता है?
एक सेल, एक बल्ब और एक छोटी खाली जगह वाला परिपथ बनाओ। पदार्थ को इस जगह में ऐसे रखो कि वह दोनों सिरों को छुए।
- बल्ब जल उठा: धारा बह रही है, इसलिए पदार्थ चालक है (तांबा, लोहा, पेंसिल की लेड)।
- बल्ब बंद रहा: धारा नहीं, इसलिए पदार्थ कुचालक (विद्युतरोधी) है (रबड़, प्लास्टिक, लकड़ी)।
पेंसिल की लेड ग्रेफ़ाइट है। कई विद्यार्थी चौंक जाते हैं, क्योंकि यह धातु नहीं है, फिर भी बिजली चलाती है।
अगर बल्ब बहुत धीमा जले तो पदार्थ थोड़ी बिजली चलाता है। सही जाँच के लिए तेज़ बल्ब और नया सेल लो।
प्रयोग 4: आरेख से परिपथ बनाना और मीटर पढ़ना
परिपथ आरेख में चिह्न पुर्ज़े दिखाते हैं और रेखाएँ तार दिखाती हैं। परिपथ को आरेख के क्रम में ही बनाओ: सेल, फिर स्विच, फिर प्रतिरोधक और वापस सेल।
- अमीटर (धारा नापता है, मात्रक ऐम्पियर, A): इसे श्रेणी क्रम में जोड़ो, प्रतिरोधक वाली ही लाइन में, ताकि पूरी धारा उसमें से गुज़रे।
- वोल्टमीटर (वोल्टता नापता है, मात्रक वोल्ट, V): इसे पार्श्व क्रम में जोड़ो, प्रतिरोधक के दोनों सिरों के आर-पार।
हर मीटर का धन (+) टर्मिनल सेल के धन सिरे की ओर जोड़ो। चालू करने से पहले पैमाना देखो। सुई को सामने से सीधा पढ़ो, तिरछा नहीं। पाठ्यांकों के बीच स्विच खोल दो ताकि तार गरम न हो।
प्रयोग 5: वोल्टता और धारा से प्रतिरोध निकालना
प्रतिरोध बताता है कि धारा को बहने में कितनी रुकावट है। ओम के नियम से R = V ÷ I।
- एक सेल जोड़ो। V और I पढ़ो।
- दूसरा सेल, फिर तीसरा जोड़ो। हर बार V और I पढ़ो।
- हर पंक्ति के लिए V ÷ I निकालो।
- औसत निकालो। यही ओम (Ω) में प्रतिरोध है।
एक प्रतिरोधक की उदाहरण तालिका:
| सेल | V (V) | I (A) | V ÷ I (Ω) |
|---|---|---|---|
| 1 | 1.5 | 0.30 | 5 |
| 2 | 3.0 | 0.60 | 5 |
| 3 | 4.5 | 0.90 | 5 |
V और I दोनों साथ-साथ दुगने होते हैं, पर V ÷ I नहीं बदलता। इसीलिए यह उस भाग का प्रतिरोध है। V (ऊपर) और I (आगे) का ग्राफ़ बनाओ: मूल बिंदु से गुज़रती सीधी रेखा मिलती है और उसकी ढलान R है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- R = V ÷ I (ओम = वोल्ट ÷ ऐम्पियर)
- V = I × R, I = V ÷ R
- अमीटर: श्रेणी में। वोल्टमीटर: पार्श्व में।
- समान आवेश प्रतिकर्षित करते हैं। विपरीत आवेश आकर्षित करते हैं।
- चालक: बल्ब जलता है। कुचालक: बल्ब बंद रहता है।
हल किए गए उदाहरण
1. एक प्रतिरोधक के आर-पार वोल्टमीटर 6 V और अमीटर 2 A दिखाता है। प्रतिरोध निकालो।
R = V ÷ I = 6 ÷ 2 = 3 Ω।
2. एक प्रयोग में पाठ्यांक हैं: (1.5 V, 0.25 A), (3.0 V, 0.50 A), (4.5 V, 0.75 A)। प्रतिरोध निकालो।
V ÷ I = 1.5 ÷ 0.25 = 6, 3.0 ÷ 0.50 = 6, 4.5 ÷ 0.75 = 6। हर पंक्ति में 6 आया, इसलिए R = 6 Ω।
3. वोल्टमीटर 3 V दिखाता है और अमीटर 150 mA। R कितना है?
पहले mA को A में बदलो: 150 mA = 0.15 A। R = 3 ÷ 0.15 = 20 Ω।
4. दो आवेशित गेंदें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं। उनके आवेशों के बारे में क्या कह सकते हैं?
वे आकर्षित हो रही हैं, इसलिए उनके आवेश विपरीत हैं (एक + और एक −)।
5. एक विद्यार्थी वोल्टमीटर को प्रतिरोधक के श्रेणी क्रम में जोड़ देती है। वह क्या देखेगी?
वोल्टमीटर का प्रतिरोध बहुत ज़्यादा होता है, इसलिए लगभग कोई धारा नहीं बहती। अमीटर लगभग 0 दिखाएगा और बल्ब नहीं जलेगा। वोल्टमीटर पार्श्व क्रम में ही लगता है।
आम गलतियाँ
- वोल्टमीटर को श्रेणी क्रम में लगाना। उसे नापे जाने वाले भाग के आर-पार (पार्श्व क्रम में) लगाना चाहिए।
- मिलीऐम्पियर को ऐम्पियर समझ लेना। भाग देने से पहले 250 mA को 0.25 A बनाओ।
- यह सोचना कि खुली पत्तियाँ आवेश का चिह्न बताती हैं। वे सिर्फ़ यह बताती हैं कि दोनों पत्तियों पर एक जैसा आवेश है।
- सिर्फ़ एक पाठ्यांक लेना। कम से कम तीन लो और V ÷ I का औसत निकालो, ताकि एक ग़लत पाठ्यांक उत्तर न बिगाड़े।