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प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक और प्रतिरोधकता

तार का प्रतिरोध लंबाई बढ़ने पर बढ़ता है और मोटा होने पर घटता है: R = ρL/A। स्थिरांक ρ (रो) पदार्थ की प्रतिरोधकता है, मात्रक Ω m। यह केवल पदार्थ और ताप पर निर्भर है। धातुओं की प्रतिरोधकता कम, मिश्रधातुओं की अधिक और विद्युतरोधियों की बहुत अधिक होती है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. यह ताँबे का 1 m लंबा पतला तार है, 6 V स्रोत से जुड़ा। इसका प्रतिरोध बहुत छोटा है, इसलिए बड़ी धारा बहती है। लेबल पर R और I पढ़ो।
  2. अब तार को 2 m लंबा करते हैं। इलेक्ट्रॉनों को दोगुनी दूरी चलनी है और दोगुने परमाणुओं से टकराना है, इसलिए प्रतिरोध दोगुना और धारा आधी।
  3. अब तार को दोगुना मोटा करते हैं (क्षेत्रफल दोगुना)। इलेक्ट्रॉनों के लिए दोगुनी गलियाँ, इसलिए प्रतिरोध आधा।
  4. आकार वही, पदार्थ नया: नाइक्रोम। इसकी प्रतिरोधकता ताँबे से लगभग 60 गुना है, इसलिए प्रतिरोध बहुत बढ़ जाता है और धारा बहुत घट जाती है।
  5. लोहे के तार को गरम करते हैं। गरम परमाणु ज़्यादा काँपते हैं, इलेक्ट्रॉन ज़्यादा टकराते हैं, इसलिए प्रतिरोध बढ़ता है। धातुओं में ताप बढ़ने पर R बढ़ता है।
  6. अब तुम्हारी बारी: लंबाई, मोटाई, पदार्थ और ताप बदलो। हर बार नीचे जाँचो कि R = ρL/A।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

लंबे तार का प्रतिरोध ज़्यादा क्यों?

इलेक्ट्रॉनों को ज़्यादा दूर चलना पड़ता है और रास्ते में ज़्यादा परमाणुओं से टकराना पड़ता है। 3D में L दोगुना करने पर R दोगुना होता है।

मोटे तार का प्रतिरोध कम क्यों?

ज़्यादा क्षेत्रफल यानी इलेक्ट्रॉनों के लिए साथ-साथ ज़्यादा रास्ते, जैसे सड़क पर ज़्यादा लेन। A दोगुना तो R आधा।

प्रतिरोध और प्रतिरोधकता में क्या अंतर है?

प्रतिरोध एक ख़ास तार का होता है और उसकी लंबाई-मोटाई से बदलता है। प्रतिरोधकता पदार्थ की होती है; ताँबे के हर तार का ρ एक जैसा।

गरम होने पर धातु का प्रतिरोध क्यों बढ़ता है?

गरम परमाणु ज़ोर से काँपते हैं, इसलिए चलते इलेक्ट्रॉन उनसे ज़्यादा बार टकराते हैं। 3D में 'गरम करें' आज़माओ।

घर की वायरिंग ताँबे की क्यों, नाइक्रोम की क्यों नहीं?

ताँबे की बहुत कम प्रतिरोधकता से तार का प्रतिरोध नगण्य रहता है, वह गरम नहीं होता और ऊर्जा बर्बाद नहीं होती। नाइक्रोम गरम हो जाता।

तार खींचकर दोगुना लंबा करने पर R चार गुना क्यों, दोगुना क्यों नहीं?

खींचने पर आयतन वही रहता है, तार पतला भी हो जाता है: L दोगुना और A आधा। दोनों से R दोगुना होता है, कुल चार गुना।

प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है?

कई तारों को जाँचने पर पता चलता है कि तार का प्रतिरोध चार बातों पर निर्भर है:

  1. लंबाई (L): R ∝ L। लंबाई दोगुनी, प्रतिरोध दोगुना।
  2. अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल (A): R ∝ 1/A। मोटे तार का प्रतिरोध कम। A = πr², इसलिए त्रिज्या दोगुनी करने पर A चार गुना और R एक-चौथाई।
  3. पदार्थ की प्रकृति: ताँबा और चाँदी कम प्रतिरोध वाले, नाइक्रोम और मैंगनिन बहुत अधिक।
  4. ताप: धातुएँ गरम होने पर उनका प्रतिरोध बढ़ता है।

पहली दो बातें मिलाकर: R = ρ L / A।

प्रतिरोधकता किसे कहते हैं?

R = ρL/A में स्थिरांक ρ (रो) पदार्थ की प्रतिरोधकता (विशिष्ट प्रतिरोध) है। ρ = RA/L से, यह उस पदार्थ के 1 m लंबे और 1 m² अनुप्रस्थ काट वाले टुकड़े का प्रतिरोध है।

SI मात्रक: Ω m (ओम मीटर)। प्रतिरोधकता पदार्थ और ताप पर निर्भर है, तार की लंबाई या मोटाई पर नहीं। प्रतिरोध इन सब पर निर्भर है।

चालक, मिश्रधातु और विद्युतरोधी

धातुओं की प्रतिरोधकता बहुत कम, लगभग 10−8 से 10−6 Ω m होती है: चाँदी (लगभग 1.6 × 10−8) और ताँबा (लगभग 1.7 × 10−8) सबसे अच्छे, फिर ऐलुमिनियम, टंगस्टन, लोहा। काँच और रबर जैसे विद्युतरोधियों की 1012 से 1017 Ω m।

मिश्रधातुएँ (नाइक्रोम, मैंगनिन, कॉन्स्टेन्टन) की प्रतिरोधकता शुद्ध धातुओं से बहुत अधिक होती है, ताप से कम बदलती है और गरम होने पर आसानी से ऑक्सीकृत (जलती) नहीं होतीं। इसलिए हीटर, टोस्टर और इस्त्री की कुंडली नाइक्रोम की होती है। विद्युत संचरण और घरेलू तारों में ताँबा व ऐलुमिनियम लगते हैं क्योंकि कम प्रतिरोधकता से ऊर्जा कम बर्बाद होती है।

प्रतिरोधकता के आंकिक प्रश्नों के टिप्स

मात्रक ज़रूर बदलो: 1 mm = 10−3 m और 1 mm² = 10−6 m²। तार को खींचने पर आयतन वही रहता है: L, n गुना हो तो A, 1/n गुना और R, n² गुना हो जाता है। तार को n बराबर टुकड़ों में काटने पर हर टुकड़े का प्रतिरोध 1/n, पर प्रतिरोधकता वही।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. 4 Ω के तार की लंबाई दोगुनी (मोटाई वही) की गई। नया प्रतिरोध?

R ∝ L, इसलिए R = 2 × 4 = 8 Ω.

2. एक ही पदार्थ और लंबाई के दो तार: B की त्रिज्या A से दोगुनी है। प्रतिरोधों की तुलना करो।

A ∝ r², इसलिए B का क्षेत्रफल 4 गुना। R ∝ 1/A, तो R_B = R_A / 4.

3. ताँबे का तार 2 m लंबा, क्षेत्रफल 1 mm², ρ = 1.7 × 10⁻⁸ Ω m. R ज्ञात करो।

A = 10⁻⁶ m². R = 1.7 × 10⁻⁸ × 2 / 10⁻⁶ = 0.034 Ω.

4. 1 m लंबे, 0.5 mm² क्षेत्रफल वाले तार का प्रतिरोध 2 Ω है। प्रतिरोधकता ज्ञात करो।

ρ = RA/L = 2 × 0.5 × 10⁻⁶ / 1 = 1 × 10⁻⁶ Ω m.

5. 20 Ω की कुंडली के लिए नाइक्रोम तार (ρ = 1 × 10⁻⁶ Ω m, क्षेत्रफल 0.2 mm²) कितना लंबा चाहिए?

L = RA/ρ = 20 × 0.2 × 10⁻⁶ / 10⁻⁶ = 4 m.

6. 10 Ω के तार को खींचकर तीन गुना लंबा किया गया। नया प्रतिरोध?

आयतन वही: L → 3L, A → A/3. R → 3 × 3 × 10 = 90 Ω.

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. प्रतिरोधकता का SI मात्रक:
2. तार का क्षेत्रफल दोगुना (लंबाई वही) करने पर प्रतिरोध:
3. तार की प्रतिरोधकता निर्भर करती है:
4. हीटर की कुंडली नाइक्रोम की होती है क्योंकि:
5. इनमें सबसे अच्छा चालक:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक कौन-से हैं?

लंबाई (R ∝ L), अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल (R ∝ 1/A), पदार्थ की प्रकृति (प्रतिरोधकता) और ताप।

प्रतिरोधकता का SI मात्रक क्या है?

ओम मीटर (Ω m)।

तापन युक्तियों में मिश्रधातु क्यों लगाते हैं?

नाइक्रोम जैसी मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता अधिक होती है और ऊँचे ताप पर ये आसानी से ऑक्सीकृत नहीं होतीं, इसलिए खूब गरम होती हैं और लंबे समय चलती हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 10विद्युत धारा के प्रभाव
चीन九年级(初三)Ch.16 Voltage and resistance
चीन高一Compulsory 3 Ch.11 Circuits

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