विद्युत सेल क्या है?
विद्युत सेल एक छोटी युक्ति है जो परिपथ में आवेश को धकेलती है। इसके अंदर रासायनिक अभिक्रिया होती है। सेल रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है।
हर सेल के दो टर्मिनल होते हैं: धन टर्मिनल (+) और ऋण टर्मिनल (−)। परिपथ आरेख में सेल को एक लंबी पतली रेखा (+) और एक छोटी मोटी रेखा (−) से दिखाते हैं।
बैटरी दो या ज़्यादा सेलों को जोड़कर बनती है। बोलचाल में एक AA सेल को भी "बैटरी" कह देते हैं, पर विज्ञान में वह सेल है।
सेल बिजली कैसे बनाता है
सेल को तीन चीज़ें चाहिए:
- दो अलग-अलग धातुएँ (या धातु और कार्बन), जिन्हें इलेक्ट्रोड कहते हैं।
- एक विद्युत-अपघट्य: बिजली चलाने वाला द्रव या लेई, जैसे अम्ल, नमक का पानी या नींबू का रस।
- बाहर इलेक्ट्रोडों को जोड़ने वाला तार।
ज़्यादा क्रियाशील धातु (जस्ता) विद्युत-अपघट्य से अभिक्रिया करके धीरे-धीरे घुलती है। द्रव में जाने वाला हर जस्ता परमाणु पट्टी पर 2 इलेक्ट्रॉन छोड़ जाता है। इस तरह जस्ते पर इलेक्ट्रॉन जमा होते हैं और वह ऋण टर्मिनल बनता है। तार जोड़ते ही ये इलेक्ट्रॉन तार से ताँबे (धन टर्मिनल) की ओर बहते हैं। द्रव के अंदर आयन नाम के आवेशित कण चलकर घेरा पूरा करते हैं।
अगर दोनों इलेक्ट्रोड एक ही धातु के हों, तो दोनों एक जैसी अभिक्रिया करते हैं, इसलिए कोई धक्का नहीं और कोई धारा नहीं।
सरल सेल बनाना
सामान: नींबू (या आलू, या सिरका या नमक के पानी का कप), जस्ता चढ़ी कील, ताँबे का सिक्का या पट्टी, क्लिप वाले तार, LED और हो सके तो मल्टीमीटर।
- कील और ताँबे को नींबू में लगभग 2 cm दूर लगाइए। वे छूने न पाएँ।
- नापिए: एक नींबू सेल लगभग 0.9 V देता है।
- 2–4 सेल बनाकर श्रेणी में जोड़िए: एक का ताँबा अगले के जस्ते से।
- बचे ताँबे वाले सिरे को LED की लंबी टाँग से और जस्ते वाले सिरे को छोटी टाँग से जोड़िए।
यह कमज़ोर क्यों है: नींबू सेल बहुत कम धारा देता है, इसलिए LED हल्का जलता है पर टॉर्च का बल्ब नहीं। घर की मेन बिजली से कभी प्रयोग न करें और असली बैटरी को खोलें नहीं।
पहली बैटरी: 1800 में अलेस्सांद्रो वोल्टा ने जस्ते और ताँबे की चकतियों के बीच नमक के पानी में भीगा कपड़ा रखकर ढेर बनाया। यह "वोल्टीय पुंज" पहली बैटरी थी। वोल्ट इकाई उन्हीं के नाम पर है।
श्रेणी में सेल: वोल्टेज जुड़ते हैं
जब एक सेल का + अगले सेल के − से जोड़ा जाता है, तो सेल श्रेणी में होते हैं। उनके वोल्टेज जुड़ते हैं: कुल V = V₁ + V₂ + V₃ …
- 2 AA सेल: 1.5 + 1.5 = 3 V (टॉर्च या रिमोट)।
- 6 लेड-एसिड सेल: 6 × 2 = 12 V (कार की बैटरी)।
अगर एक सेल उल्टा लग जाए तो उसका वोल्टेज घट जाता है और यंत्र शायद काम न करे।
सेलों के प्रकार
| सेल | अंदर क्या | वोल्टेज | रिचार्ज? |
|---|---|---|---|
| सरल (वोल्टीय) सेल | जस्ता, ताँबा, तनु अम्ल या रस | लगभग 1 V | नहीं |
| शुष्क सेल (जस्ता–कार्बन / ऐल्कलाइन) | जस्ते का खोल (−), नम लेई, कार्बन छड़ (+) | 1.5 V | नहीं (प्राथमिक सेल) |
| बटन सेल | जस्ता, सिल्वर ऑक्साइड या लिथियम | 1.5–3 V | अधिकतर नहीं |
| लेड-एसिड सेल | सल्फ़्यूरिक अम्ल में सीसे की प्लेटें | 2 V | हाँ (द्वितीयक सेल) |
| लिथियम-आयन सेल | लिथियम के यौगिक | लगभग 3.7 V | हाँ |
प्राथमिक सेल एक बार इस्तेमाल होता है; उसके रसायन ख़त्म हो जाते हैं। द्वितीयक सेल फिर से चार्ज हो सकता है: चार्जर उल्टी दिशा में धारा भेजकर अभिक्रिया पलट देता है।
सुरक्षित निपटान: पुराने सेलों में ऐसी धातुएँ होती हैं जो मिट्टी और पानी को नुक़सान पहुँचाती हैं। इन्हें आग या सामान्य कूड़े में न डालें; ई-कचरा संग्रह केंद्र पर दें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सेल: रासायनिक ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा
- सेल = 2 अलग इलेक्ट्रोड + विद्युत-अपघट्य
- तार में इलेक्ट्रॉन − (जस्ता) से + (ताँबा) की ओर बहते हैं
- श्रेणी में सेल: कुल V = V₁ + V₂ + …
- शुष्क सेल ≈ 1.5 V; लेड-एसिड सेल ≈ 2 V; नींबू सेल ≈ 0.9 V
- बैटरी = दो या ज़्यादा जुड़े हुए सेल
हल किए गए उदाहरण
1. एक टॉर्च में 1.5 V के 3 शुष्क सेल श्रेणी में हैं। कुल वोल्टेज कितना है?
श्रेणी में वोल्टेज जुड़ते हैं: 1.5 + 1.5 + 1.5 = 4.5 V।
2. एक नींबू सेल 0.9 V देता है। LED को कम से कम 1.8 V चाहिए। श्रेणी में कितने नींबू सेल लगेंगे?
1.8 ÷ 0.9 = 2। कम से कम 2 नींबू सेल श्रेणी में।
3. कार की बैटरी 12 V देती है। हर लेड-एसिड सेल 2 V देता है। अंदर कितने सेल हैं?
12 ÷ 2 = 6 सेल श्रेणी में।
4. एक विद्यार्थी नींबू में ताँबे की दो पट्टियाँ लगाता है। मीटर 0 V दिखाता है। क्यों?
दोनों इलेक्ट्रोड एक ही धातु के हैं, इसलिए एक जैसी अभिक्रिया करते हैं। इलेक्ट्रॉन धकेलने के लिए कोई अंतर नहीं, इसलिए कोई वोल्टेज नहीं। एक धातु अलग चाहिए, जैसे जस्ता।
5. रिमोट में 1.5 V के 2 सेल हैं, पर एक उल्टा लगा है। रिमोट को कितना वोल्टेज मिलेगा?
उल्टा सेल दूसरी दिशा में धकेलता है, इसलिए घटता है: 1.5 − 1.5 = 0 V। रिमोट काम नहीं करेगा।
6. शुष्क सेल में ऊर्जा का बदलाव और टर्मिनल बताइए।
रासायनिक ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा। जस्ते का खोल ऋण टर्मिनल है; धातु की टोपी वाली कार्बन छड़ धन टर्मिनल है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि सेल इलेक्ट्रॉनों की टंकी है जिसमें बिजली भरी है। उसमें रसायन भरे हैं; अभिक्रिया धक्का पैदा करती है।
- एक ही धातु के दो टुकड़े लगाना। सेल को दो अलग इलेक्ट्रोड चाहिए।
- विज्ञान के उत्तर में एक AA सेल को बैटरी कहना। बैटरी दो या ज़्यादा सेल से बनती है।
- यह कहना कि तार में इलेक्ट्रॉन + से − की ओर बहते हैं। इलेक्ट्रॉन − से + की ओर जाते हैं; परंपरागत धारा + से − दिखाई जाती है।