वैद्युत-अपघटनी सेल
वैद्युत-अपघटनी सेल में बाहर से मिली विद्युत ऊर्जा ऐसी अभिक्रिया करवाती है जो अपने-आप नहीं होती (ΔG > 0)। इसे वैद्युत अपघटन कहते हैं।
- कैथोड बैटरी के ऋण सिरे से जुड़ा है। धनायन वहाँ जाकर अपचयित होते हैं।
- ऐनोड धन सिरे से जुड़ा है। ऋणायन वहाँ जाकर ऑक्सीकृत होते हैं।
| गैल्वेनी सेल | वैद्युत-अपघटनी सेल | |
|---|---|---|
| ऊर्जा | रासायनिक → विद्युत | विद्युत → रासायनिक |
| अभिक्रिया | स्वतः (ΔG < 0) | अस्वतः (ΔG > 0) |
| ऐनोड का चिह्न | − | + |
| कैथोड का चिह्न | + | − |
उपयोग: सक्रिय धातुएँ (Na, Mg, Al) निकालना, कॉपर का शोधन, विद्युत-लेपन, NaOH और Cl₂ बनाना।
फैराडे के वैद्युत अपघटन के नियम
माइकल फैराडे ने नापा कि वैद्युत अपघटन में कितना पदार्थ बदलता है।
पहला नियम
इलेक्ट्रोड पर बदला द्रव्यमान गुज़रे आवेश के समानुपाती है: m = Z × Q = Z × I × t। Z विद्युत-रासायनिक तुल्यांक है (ग्राम प्रति कूलॉम)।
दूसरा नियम
एक ही आवेश अलग-अलग विद्युत-अपघट्यों से गुज़रे तो बदले द्रव्यमान उनके तुल्यांकी भार (मोलर द्रव्यमान ÷ प्रति आयन इलेक्ट्रॉन) के अनुपात में होते हैं।
गणना कैसे करें
एक मोल इलेक्ट्रॉन पर 96 500 C = 1 फैराडे (F)। Mⁿ⁺ + ne⁻ → M में 1 मोल M के लिए n F चाहिए।
e⁻ के मोल = I t / F, M के मोल = I t / (nF), m = M × I t / (nF)।
वैद्युत अपघटन के उत्पाद
उत्पाद इस पर निर्भर है कि किसका अपघटन हो रहा है, इलेक्ट्रोड किसके बने हैं, और सांद्रता कितनी है।
- गलित NaCl: सिर्फ़ Na⁺ और Cl⁻ हैं। कैथोड पर Na धातु, ऐनोड पर Cl₂।
- जलीय NaCl: पानी मुकाबला करता है। कैथोड पर H₂O (E° = −0.83 V) का अपचयन Na⁺ (E° = −2.71 V) से बहुत आसान है, तो H₂ बनती है और विलयन NaOH बन जाता है। ऐनोड पर E° के हिसाब से पानी का ऑक्सीकरण आसान होना चाहिए, पर उसे बहुत ज़्यादा अतिरिक्त वोल्टेज (अधिविभव) चाहिए, इसलिए Cl₂ निकलती है।
- कॉपर इलेक्ट्रोड के साथ जलीय CuSO₄: कैथोड पर Cu जमता है और कॉपर ऐनोड घुलता है (Cu → Cu²⁺)। कॉपर का शोधन ऐसे ही होता है।
- प्लैटिनम (अक्रिय) इलेक्ट्रोड के साथ जलीय CuSO₄: कैथोड पर Cu, ऐनोड पर O₂।
- तनु H₂SO₄: कैथोड पर H₂, ऐनोड पर O₂। सांद्र H₂SO₄ से ऐनोड पर परऑक्सोडाइसल्फ़ेट (S₂O₈²⁻) भी बन सकता है।
आसान नियम: कैथोड पर जिसका अपचयन विभव ज़्यादा है वह पहले अपचयित होगा; ऐनोड पर जो (अधिविभव जोड़कर) सबसे आसानी से ऑक्सीकृत हो वह पहले।
बैटरियाँ: प्राथमिक और द्वितीयक
बैटरी एक या ज़्यादा गैल्वेनी सेलों का समूह है जो स्थिर वोल्टेज देता है।
प्राथमिक बैटरी (एक बार इस्तेमाल)
अभिक्रिया आसानी से उलटी नहीं होती।
- शुष्क सेल (लेक्लांशे सेल): जिंक का डिब्बा = ऐनोड, कार्बन (ग्रेफ़ाइट) छड़ = कैथोड जिसके चारों ओर MnO₂ + कार्बन, और NH₄Cl व ZnCl₂ का लेप। ऐनोड: Zn → Zn²⁺ + 2e⁻। कैथोड: MnO₂ + NH₄⁺ + e⁻ → MnO(OH) + NH₃। लगभग 1.5 V।
- मर्करी सेल (घड़ी, कान की मशीन): Zn–Hg अमलगम ऐनोड, HgO + कार्बन कैथोड, KOH + ZnO का लेप। कुल: Zn(Hg) + HgO → ZnO + Hg। लगभग 1.35 V, और यह स्थिर रहता है क्योंकि किसी आयन की सांद्रता नहीं बदलती।
द्वितीयक बैटरी (रिचार्ज होने वाली)
- लेड संचायक बैटरी: ऐनोड Pb, कैथोड PbO₂ भरी जाली, विद्युत-अपघट्य ~38% H₂SO₄।
डिस्चार्ज: Pb + PbO₂ + 2H₂SO₄ → 2PbSO₄ + 2H₂O। चार्ज करने पर उलटा। डिस्चार्ज में अम्ल पतला होता जाता है। - निकेल–कैडमियम सेल: लेड सेल से लंबी उम्र। Cd + 2Ni(OH)₃ → CdO + 2Ni(OH)₂ + H₂O।
ईंधन सेल
ईंधन सेल ऐसा गैल्वेनी सेल है जिसमें अभिकारक लगातार डाले जाते हैं, इसलिए यह खत्म नहीं होता।
H₂–O₂ ईंधन सेल: H₂ और O₂ सांद्र NaOH या KOH में सरंध्र कार्बन इलेक्ट्रोडों (Pt या Pd उत्प्रेरक के साथ) से होकर बुलबुले बनाती हैं।
- ऐनोड: 2H₂ + 4OH⁻ → 4H₂O + 4e⁻
- कैथोड: O₂ + 2H₂O + 4e⁻ → 4OH⁻
- कुल: 2H₂ + O₂ → 2H₂O (लगभग 1.23 V)
क्यों ज़रूरी: लगभग 70% दक्षता (ईंधन जलाने वाले बिजलीघर में करीब 40%), कोई प्रदूषण नहीं (सिर्फ़ पानी), और पानी पीने लायक। अंतरिक्ष यानों और कुछ बसों में उपयोग।
संक्षारण
संक्षारण धातु का हवा, पानी और आसपास के रसायनों से धीरे-धीरे खराब होना है। लोहे पर जंग, कॉपर पर हरी परत और चाँदी पर काली परत इसके उदाहरण हैं।
जंग लगना एक वैद्युत-रासायनिक सेल है
- ऐनोड (लोहे पर एक जगह): 2Fe → 2Fe²⁺ + 4e⁻ (E° = −0.44 V)
- कैथोड (दूसरी जगह, जहाँ हवा पानी तक पहुँचती है): O₂ + 4H⁺ + 4e⁻ → 2H₂O (E° = +1.23 V)। H⁺ पानी में घुली CO₂ से आता है।
- कुल E° = 1.67 V, यानी स्वतः अभिक्रिया।
- फिर हवा Fe²⁺ को और ऑक्सीकृत करके जलयोजित आयरन(III) ऑक्साइड बनाती है: Fe₂O₃·xH₂O = जंग।
खारा पानी इसे तेज़ करता है क्योंकि उसमें ज़्यादा आयन होते हैं और वह बेहतर चालन करता है।
रोकथाम
- परत: पेंट, तेल, ग्रीस, प्लास्टिक।
- यशदलेपन (जस्तीकरण): लोहे पर जिंक की परत। जिंक ज़्यादा सक्रिय है, पहले खुद संक्षारित होता है और खरोंच लगने पर भी लोहे को बचाता है।
- बलि ऐनोड: जहाज़ों और पाइपों पर Mg या Zn के टुकड़े लगाना।
- जंगरोधी विलयन जैसे बिस्फ़ीनॉल, और मिश्रधातु (स्टेनलेस स्टील)।
करके देखो: चाबी पर ताँबे की परत
किसी बड़े के साथ: एक चम्मच कॉपर सल्फेट पानी में घोलो। ताँबे की पट्टी को 1.5 V सेल के + सिरे से और साफ़ स्टील की चाबी को − सिरे से जोड़कर दोनों डुबाओ। 10 मिनट में चाबी गुलाबी (ताँबे जैसी) हो जाती है। पहले 3D (चरण 1) से अंदाज़ा लगाओ: धारा दुगनी करो तो ताँबा कितना? समय दुगना? साथ ही दो कीलें एक हफ़्ता सादे पानी और खारे पानी में रखकर जंग की तुलना करो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- Q = I × t (कूलॉम = ऐम्पियर × सेकंड)
- 1 F = 96 500 C mol⁻¹ (1 मोल e⁻ का आवेश)
- m = Z I t (फैराडे का पहला नियम)
- m = M × I × t / (n × F)
- m₁/m₂ = E₁/E₂ (तुल्यांकी भार, दूसरा नियम)
- लेड सेल: Pb + PbO₂ + 2H₂SO₄ ⇌ 2PbSO₄ + 2H₂O
- ईंधन सेल: 2H₂ + O₂ → 2H₂O
- जंग: 2Fe + O₂ + 4H⁺ → 2Fe²⁺ + 2H₂O ; E° = 1.67 V
हल किए गए उदाहरण
1. CuSO₄ विलयन से 2 A धारा 965 s तक बहती है। जमा कॉपर का द्रव्यमान निकालो (Cu = 63.5 g mol⁻¹)।
चरण 1: Q = I t = 2 × 965 = 1930 C। चरण 2: e⁻ के मोल = 1930 / 96 500 = 0.02 mol। चरण 3: Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu, तो Cu के मोल = 0.02 / 2 = 0.01 mol। चरण 4: द्रव्यमान = 0.01 × 63.5 = 0.635 g।
2. 1.27 g कॉपर जमाने के लिए 2 A धारा कितनी देर बहानी होगी?
चरण 1: Cu के मोल = 1.27 / 63.5 = 0.02 mol। चरण 2: e⁻ के मोल = 2 × 0.02 = 0.04 mol। चरण 3: Q = 0.04 × 96 500 = 3860 C। चरण 4: t = Q / I = 3860 / 2 = 1930 s (लगभग 32 मिनट)।
3. AgNO₃ विलयन से 0.5 A धारा 1930 s तक बहाई गई। जमा चाँदी का द्रव्यमान निकालो (Ag = 108)।
चरण 1: Q = 0.5 × 1930 = 965 C। चरण 2: e⁻ के मोल = 965 / 96 500 = 0.01 mol। चरण 3: Ag⁺ + e⁻ → Ag, तो 0.01 mol Ag। चरण 4: द्रव्यमान = 0.01 × 108 = 1.08 g।
4. Al³⁺ से 1 मोल Al बनाने में कितने कूलॉम लगेंगे?
चरण 1: Al³⁺ + 3e⁻ → Al। चरण 2: 1 mol Al के लिए 3 mol e⁻ = 3 F। चरण 3: Q = 3 × 96 500 = 289 500 C।
5. श्रेणी में जुड़े AgNO₃ और CuSO₄ सेलों से एक ही आवेश गुज़रता है। 1.08 g Ag जमता है। कितना Cu जमेगा?
चरण 1: Ag के मोल = 1.08 / 108 = 0.01 mol, यानी 0.01 mol e⁻ गुज़रे। चरण 2: Cu को प्रति परमाणु 2e⁻ चाहिए: Cu के मोल = 0.01 / 2 = 0.005 mol। चरण 3: Cu का द्रव्यमान = 0.005 × 63.5 = 0.3175 g।
6. 1 A धारा 60 s बहे तो कितने इलेक्ट्रॉन बहेंगे? (e = 1.602 × 10⁻¹⁹ C)
चरण 1: Q = 1 × 60 = 60 C। चरण 2: संख्या = Q / e = 60 / (1.602 × 10⁻¹⁹)। चरण 3: ≈ 3.75 × 10²⁰ इलेक्ट्रॉन।
7. पानी के वैद्युत अपघटन में 9650 C से STP पर कितनी H₂ बनेगी?
चरण 1: e⁻ के मोल = 9650 / 96 500 = 0.1 mol। चरण 2: 2H⁺ + 2e⁻ → H₂, तो H₂ के मोल = 0.05 mol। चरण 3: आयतन = 0.05 × 22.4 L = 1.12 L।
8. जलीय NaCl के वैद्युत अपघटन में कैथोड पर Na नहीं, H₂ क्यों बनती है?
चरण 1: तुलना करो: Na⁺ + e⁻ → Na, E° = −2.71 V; 2H₂O + 2e⁻ → H₂ + 2OH⁻, E° = −0.83 V। चरण 2: जिसका मान ज़्यादा (कम ऋणात्मक) है उसका अपचयन पहले होगा। चरण 3: इसलिए पानी अपचयित होकर H₂ देता है; Na⁺ विलयन में NaOH के रूप में रह जाता है।
आम गलतियाँ
- चिह्न उलझाना: वैद्युत अपघटन में ऐनोड + और कैथोड − है, गैल्वेनी सेल से उलटा। पर ऑक्सीकरण फिर भी ऐनोड पर ही होता है।
- n भूलना: Cu²⁺ को प्रति मोल Cu 2 मोल e⁻ चाहिए, Al³⁺ को 3। इलेक्ट्रॉन के मोल को n से भाग दो।
- Q = I × t में सेकंड की जगह मिनट लगा देना।
- यह सोचना कि जलीय NaCl से कैथोड पर Na बनेगा। पहले पानी अपचयित होकर H₂ देता है।