रासायनिक सेल बिजली कैसे बनाता है
सेल में दो अलग धातुएँ (इलेक्ट्रोड) आयनों वाले द्रव या पेस्ट (विद्युत-अपघट्य) में डूबी होती हैं। रासायनिक अभिक्रिया इलेक्ट्रॉनों को परिपथ में धकेलती है।
- ज़्यादा क्रियाशील धातु आसानी से इलेक्ट्रॉन खोती है। वह ऋण टर्मिनल बनती है।
- इलेक्ट्रॉन तार से कम क्रियाशील धातु (धन टर्मिनल) तक जाते हैं।
- रासायनिक ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में बदलती है।
वोल्टेज किससे तय होता है? दोनों धातुओं की क्रियाशीलता का अंतर जितना बड़ा, वोल्टेज उतना ज़्यादा। विद्युत-अपघट्य का प्रकार और सांद्रता भी वोल्टेज बदलते हैं। एक ही धातु के दो टुकड़े 0 V देते हैं।
| धातुएँ | लगभग |
|---|---|
| ज़िंक और कॉपर | 1.1 V |
| आयरन और कॉपर | 0.8 V |
| मैग्नीशियम और कॉपर | 2.7 V |
(मानक विलयनों के मान; नींबू या नमक-पानी वाला सेल कम देता है।)
बैटरी, और रिचार्जेबल व नॉन-रिचार्जेबल सेल
बैटरी दो या अधिक सेलों को श्रेणी में (एक का धन, अगले के ऋण से) जोड़कर बनती है। वोल्टेज जुड़ते हैं, तो तीन 1.5 V सेल 4.5 V देते हैं।
- नॉन-रिचार्जेबल (जैसे ऐल्कलाइन AA सेल): अभिक्रिया एक ही दिशा में चलती है। अभिकारक ख़त्म, तो सेल "ख़त्म"; उसे रीसायकल करना होता है।
- रिचार्जेबल (जैसे लिथियम-आयन और लेड-अम्ल): बाहरी धारा अभिक्रिया को उल्टा चलाकर अभिकारक फिर बना देती है। इन्हें बार-बार इस्तेमाल कर सकते हैं।
हाइड्रोजन ईंधन सेल
ईंधन सेल को बाहर से ईंधन और ऑक्सीजन (या हवा) मिलती है। हाइड्रोजन ईंधन सेल में हाइड्रोजन का ऑक्सीकरण होकर पानी बनता है, और ऊर्जा लौ की जगह बिजली के रूप में निकलती है।
कुल अभिक्रिया: 2H₂ + O₂ → 2H₂O
अर्ध-समीकरण (अम्लीय विद्युत-अपघट्य):
- ऋण इलेक्ट्रोड: 2H₂ → 4H⁺ + 4e⁻ (ऑक्सीकरण)
- धन इलेक्ट्रोड: O₂ + 4H⁺ + 4e⁻ → 2H₂O (अपचयन)
H⁺ आयन विद्युत-अपघट्य (झिल्ली) से गुज़रते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन बाहरी परिपथ से।
ईंधन सेल बनाम रिचार्जेबल बैटरी
| हाइड्रोजन ईंधन सेल | रिचार्जेबल बैटरी | |
|---|---|---|
| कचरा | इस्तेमाल की जगह सिर्फ़ पानी | फेंकने पर ज़हरीली धातुएँ |
| चलने का समय | जब तक ईंधन मिले; मिनटों में भरें | चार्ज होने में घंटे |
| उम्र | लंबी चलती है | कई बार चार्ज के बाद घिस जाती है |
| दिक़्क़तें | हाइड्रोजन ज्वलनशील गैस है, रखना कठिन; ज़्यादातर हाइड्रोजन अभी जीवाश्म ईंधन से बनती है | चार्ज करने की बिजली जीवाश्म ईंधन से आ सकती है |
इसलिए ईंधन सेल तभी सच में "स्वच्छ" है जब हाइड्रोजन नवीकरणीय बिजली से बने।
खुद आज़माइए: नींबू वाला सेल
एक नींबू में ज़िंक चढ़ी (जस्ती) कील और ताँबे का तार लगभग 2 cm दूर गाड़िए। सस्ते मल्टीमीटर की तारें छुआइए: लगभग 0.9 V मिलना चाहिए। अंदाज़ा लगाइए: एक ही धातु की दो कीलों से क्या होगा (लगभग 0 V), और तीन नींबू श्रेणी में जोड़ने पर (लगभग तीन गुना)। बाद में नींबू न खाएँ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- क्रियाशीलता का अंतर बड़ा → सेल का वोल्टेज बड़ा
- बैटरी का वोल्टेज (श्रेणी) = सेलों के वोल्टेज का योग
- दोनों इलेक्ट्रोड एक ही धातु → 0 V
- ईंधन सेल कुल: 2H₂ + O₂ → 2H₂O
- ऋण इलेक्ट्रोड: 2H₂ → 4H⁺ + 4e⁻
- धन इलेक्ट्रोड: O₂ + 4H⁺ + 4e⁻ → 2H₂O
हल किए गए उदाहरण
1. ज़िंक और कॉपर से सेल बना है। कौन-सी धातु ऋण टर्मिनल है और इलेक्ट्रॉन किधर बहते हैं?
ज़िंक ज़्यादा क्रियाशील है, वह इलेक्ट्रॉन खोकर ऋण बनता है। इलेक्ट्रॉन तार से ज़िंक से कॉपर की ओर जाते हैं।
2. इन जोड़ियों को वोल्टेज के क्रम में (कम से ज़्यादा) लगाइए: Fe–Cu, Mg–Cu, Zn–Cu।
क्रियाशीलता में आयरन कॉपर के सबसे पास, फिर ज़िंक, फिर मैग्नीशियम। इसलिए Fe–Cu < Zn–Cu < Mg–Cu।
3. टॉर्च को 4.5 V चाहिए। कितने 1.5 V सेल और कैसे जोड़ें?
4.5 ÷ 1.5 = 3 सेल, श्रेणी में (+ से −) ताकि वोल्टेज जुड़ें।
4. कोई शहर हाइड्रोजन ईंधन-सेल बसें क्यों चुने, दो कारण, और एक विरोध का कारण बताइए।
पक्ष: धुएँ की जगह सिर्फ़ पानी निकलता है, और ईंधन मिनटों में भरता है। विपक्ष: हाइड्रोजन को सुरक्षित रखना कठिन है और वह अक्सर जीवाश्म ईंधन से बनती है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि सेल "बिजली जमा" करता है। वह रसायन जमा करता है; अभिक्रिया धारा बनाती है।
- यह कहना कि कोई भी दो धातु के टुकड़े सेल बना देंगे। धातुएँ अलग होनी चाहिए (और विद्युत-अपघट्य चाहिए)।
- यह कहना कि ईंधन सेल से बिल्कुल प्रदूषण नहीं होता। हाइड्रोजन बनाने और रखने में प्रदूषण हो सकता है।
- कौन-सी धातु ऋण है, उलट देना: ज़्यादा क्रियाशील धातु ऋण टर्मिनल होती है।