विद्युत-अपघटन क्या है?
विद्युत-अपघटन का मतलब है "बिजली से तोड़ना"। हम आयनों वाले द्रव में दिष्ट धारा (DC) भेजते हैं। इस द्रव को विद्युत-अपघट्य (electrolyte) कहते हैं।
- आयनिक यौगिक तभी बिजली चलाता है जब उसके आयन हिल सकें: जब वह पिघला हो या पानी में घुला हो।
- इसमें दो छड़ें डूबी होती हैं, जिन्हें इलेक्ट्रोड कहते हैं। ऋण इलेक्ट्रोड कैथोड और धन इलेक्ट्रोड ऐनोड है।
- धनायन (cations) कैथोड की ओर और ऋणायन (anions) ऐनोड की ओर खिंचते हैं। विपरीत आवेश आकर्षित करते हैं।
- इलेक्ट्रोड प्रायः अक्रिय (inert) होते हैं, जैसे ग्रेफ़ाइट या प्लैटिनम।
तार में धारा इलेक्ट्रॉन ले जाते हैं; विद्युत-अपघट्य में चलते हुए आयन।
पिघले आयनिक यौगिकों का विद्युत-अपघटन
पिघले आयनिक यौगिक में सिर्फ़ दो तरह के आयन होते हैं, इसलिए उत्पाद बताना आसान है:
- कैथोड पर धातु बनती है।
- ऐनोड पर अधातु बनती है।
उदाहरण: पिघला लेड(II) ब्रोमाइड, PbBr₂, कैथोड पर स्लेटी लेड और ऐनोड पर भूरी ब्रोमीन वाष्प देता है। पिघला सोडियम क्लोराइड सोडियम और क्लोरीन देता है।
पहले ठोस को गरम करके पिघलाना ज़रूरी है। ठोस में आयन जाली में जकड़े रहते हैं, इसलिए धारा नहीं बहती।
इलेक्ट्रोड पर अर्ध-समीकरण
अर्ध-समीकरण (half equation) एक इलेक्ट्रोड पर होने वाली क्रिया दिखाता है, इलेक्ट्रॉन को e⁻ लिखते हैं।
- कैथोड (अपचयन, इलेक्ट्रॉन पाना): Pb²⁺ + 2e⁻ → Pb
- ऐनोड (ऑक्सीकरण, इलेक्ट्रॉन खोना): 2Br⁻ → Br₂ + 2e⁻
और उदाहरण: Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu · 2H⁺ + 2e⁻ → H₂ · 2Cl⁻ → Cl₂ + 2e⁻ · 4OH⁻ → O₂ + 2H₂O + 4e⁻ · Al³⁺ + 3e⁻ → Al · 2O²⁻ → O₂ + 4e⁻
जाँचिए: दोनों ओर परमाणु और आवेश बराबर हों।
जलीय विलयनों का विद्युत-अपघटन
पानी थोड़ा-सा H⁺ और OH⁻ आयनों में टूटता है। इसलिए विलयन में दो धनायन और दो ऋणायन होड़ करते हैं।
कैथोड पर: हाइड्रोजन बनती है, जब तक धातु हाइड्रोजन से कम क्रियाशील न हो (कॉपर, चाँदी, सोना)। तब धातु बनती है।
ऐनोड पर: ऑक्सीजन बनती है, जब तक विलयन में हैलाइड आयन (Cl⁻, Br⁻, I⁻) न हो। तब हैलोजन बनता है।
| विलयन | कैथोड | ऐनोड |
|---|---|---|
| सोडियम क्लोराइड (लवण जल) | हाइड्रोजन | क्लोरीन |
| कॉपर(II) सल्फेट | कॉपर | ऑक्सीजन |
| तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल | हाइड्रोजन | ऑक्सीजन |
| कॉपर(II) क्लोराइड | कॉपर | क्लोरीन |
लवण जल में Na⁺ और OH⁻ बचे रहते हैं, इसलिए विलयन सोडियम हाइड्रॉक्साइड बन जाता है, जो एक उपयोगी क्षार है।
धातु निकालने में विद्युत-अपघटन
कार्बन से ज़्यादा क्रियाशील धातुएँ (ऐलुमिनियम, सोडियम, मैग्नीशियम) उनके ऑक्साइड को कार्बन के साथ गरम करके नहीं मिलतीं। इनके लिए विद्युत-अपघटन चाहिए, जिसमें बहुत बिजली लगती है, इसलिए यह महँगा है।
- ऐलुमिनियम ऑक्साइड 2000 °C से ऊपर पिघलता है। इसे पिघले क्रायोलाइट में घोलते हैं, तो यह लगभग 950 °C पर पिघल जाता है। ऊर्जा बचती है।
- कैथोड: Al³⁺ + 3e⁻ → Al (द्रव ऐलुमिनियम नीचे जमा होता है)।
- ऐनोड: 2O²⁻ → O₂ + 4e⁻. गरम ऑक्सीजन कार्बन ऐनोड से मिलकर कार्बन डाइऑक्साइड बनाती है, इसलिए ऐनोड बार-बार बदलने पड़ते हैं।
खुद आज़माइए: घर पर छोटा प्रयोग (बड़ों के साथ)
नमक वाले पानी के कप में दो पेंसिल की लीड (ग्रेफ़ाइट) डालिए और क्लिप वाले तारों से 9 V की बैटरी से जोड़िए। दोनों लीड पर बुलबुले देखिए। ऋण वाली लीड पर ज़्यादा बुलबुले (हाइड्रोजन) बनते हैं। खुली खिड़की के पास, सिर्फ़ एक मिनट करें, और कभी भी घर की मेन बिजली न लगाएँ। अब अंदाज़ा लगाइए: चीनी के पानी में क्या होगा? (कुछ नहीं: चीनी में आयन नहीं होते।)
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कैथोड (−): धनायन इलेक्ट्रॉन लेते हैं → अपचयन, जैसे Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu
- ऐनोड (+): ऋणायन इलेक्ट्रॉन देते हैं → ऑक्सीकरण, जैसे 2Cl⁻ → Cl₂ + 2e⁻
- पिघला यौगिक: कैथोड पर धातु, ऐनोड पर अधातु
- विलयन, कैथोड: H₂, जब तक धातु हाइड्रोजन से कम क्रियाशील न हो
- विलयन, ऐनोड: O₂, जब तक हैलाइड न हो (तब Cl₂, Br₂ या I₂)
- पानी से ऐनोड पर ऑक्सीजन: 4OH⁻ → O₂ + 2H₂O + 4e⁻
हल किए गए उदाहरण
1. पिघले ज़िंक क्लोराइड, ZnCl₂, के विद्युत-अपघटन के उत्पाद बताइए।
पिघला → सिर्फ़ Zn²⁺ और Cl⁻। कैथोड: ज़िंक (Zn²⁺ + 2e⁻ → Zn)। ऐनोड: क्लोरीन (2Cl⁻ → Cl₂ + 2e⁻)।
2. जलीय पोटैशियम ब्रोमाइड, KBr(aq), के उत्पाद बताइए।
कैथोड: पोटैशियम हाइड्रोजन से ज़्यादा क्रियाशील है, इसलिए हाइड्रोजन (2H⁺ + 2e⁻ → H₂)। ऐनोड: ब्रोमाइड हैलाइड है, इसलिए ब्रोमीन (2Br⁻ → Br₂ + 2e⁻)। विलयन में पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड बचता है।
3. जलीय सिल्वर नाइट्रेट, AgNO₃(aq), के उत्पाद बताइए।
कैथोड: चाँदी हाइड्रोजन से कम क्रियाशील है, इसलिए चाँदी (Ag⁺ + e⁻ → Ag)। ऐनोड: नाइट्रेट हैलाइड नहीं है, इसलिए ऑक्सीजन (4OH⁻ → O₂ + 2H₂O + 4e⁻)।
4. ऐलुमिनियम निष्कर्षण में कार्बन ऐनोड क्यों बदलने पड़ते हैं, और क्रायोलाइट क्यों मिलाते हैं?
ऐनोड पर बनी ऑक्सीजन गरम कार्बन से क्रिया करती है: C + O₂ → CO₂, इसलिए ऐनोड घिसता जाता है। क्रायोलाइट गलनांक 2000 °C से ऊपर से घटाकर लगभग 950 °C कर देता है, जिससे ऊर्जा और पैसा बचता है।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि ठोस आयनिक यौगिक बिजली चलाता है। वह तभी चलाता है जब पिघला या घुला हो, क्योंकि आयनों का हिलना ज़रूरी है।
- कैथोड और ऐनोड उलट देना। कैथोड ऋण है और धनायनों को खींचता है।
- यह कहना कि नमक के पानी से कैथोड पर सोडियम बनता है। सोडियम हाइड्रोजन से ज़्यादा क्रियाशील है, इसलिए हाइड्रोजन बनती है।
- इलेक्ट्रॉन गलत ओर लिखना: अपचयन (कैथोड) में इलेक्ट्रॉन बाईं ओर, ऑक्सीकरण (ऐनोड) में दाईं ओर।