विद्युत अपघट्य क्या है?
धातु के तार में बिजली छोटे-छोटे इलेक्ट्रॉन ले जाते हैं। द्रव में बिजली ले जाने वाले कण अलग होते हैं: आयन। आयन वह परमाणु (या परमाणुओं का समूह) है जिस पर विद्युत आवेश होता है।
विद्युत अपघट्य वह पदार्थ है जो पानी में घुलने या पिघलने पर आयन बनाता है। आज़ाद आयन होने से द्रव बिजली बहा सकता है।
अनपघट्य पूरे, बिना आवेश वाले अणु ही रहते हैं। उनमें आयन नहीं होते, इसलिए द्रव बिजली नहीं बहाता।
- अपघट्य: नमक (NaCl), हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl), सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH), सिरका।
- अनपघट्य: चीनी, ऐल्कोहॉल, ग्लूकोज़, शुद्ध (आसुत) पानी।
वैद्युत अपघटनी वियोजन: आयन कैसे बनते हैं
नमक पानी में जाता है तो पानी के अणु आयनों को खींचकर अलग कर देते हैं। आयनों में टूटने की इस क्रिया को वैद्युत अपघटनी वियोजन कहते हैं।
NaCl → Na⁺ + Cl⁻
HCl → H⁺ + Cl⁻
NaOH → Na⁺ + OH⁻
कुल धन आवेश हमेशा कुल ऋण आवेश के बराबर होता है, इसलिए पूरा विलयन उदासीन रहता है। ठोस नमक के क्रिस्टल में भी यही आयन होते हैं, पर जाली में जमे होते हैं, इसलिए सूखा क्रिस्टल बिजली नहीं बहाता। पिघला हुआ नमक बहाता है, क्योंकि आयन फिर आज़ाद हो जाते हैं।
विलयन बिजली क्यों बहाता है?
दो छड़ें (इलेक्ट्रोड) बैटरी से जोड़कर विलयन में डुबाइए। बैटरी के ऋण सिरे वाली छड़ कैथोड (−) है। दूसरी एनोड (+) है।
धन आयन (धनायन) कैथोड की ओर जाते हैं। ऋण आयन (ऋणायन) एनोड की ओर जाते हैं। आवेश का बहना ही धारा है, इसलिए बल्ब जलता है। आज़ाद आयन जितने ज़्यादा, धारा उतनी बड़ी और बल्ब उतना तेज़।
प्रबल और दुर्बल विद्युत अपघट्य
प्रबल अपघट्य लगभग पूरी तरह आयनों में टूट जाता है। उदाहरण: HCl, H₂SO₄, HNO₃, NaOH, KOH और लगभग सभी घुलनशील लवण। बल्ब तेज़ जलता है।
दुर्बल अपघट्य बहुत थोड़ा टूटता है। ज़्यादातर पूरे अणु ही रहते हैं। उदाहरण: ऐसीटिक अम्ल (सिरका), कार्बोनिक अम्ल, अमोनिया विलयन। बल्ब हल्का जलता है। दुर्बल अपघट्य का टूटना उलटा भी होता है, इसलिए दो-तरफ़ा तीर लगाते हैं: CH₃COOH ⇌ CH₃COO⁻ + H⁺।
प्रबल या दुर्बल इस पर निर्भर है कि कितना टूटता है, इस पर नहीं कि कितना ख़तरनाक है या कितना घुला है।
वियोजन की मात्रा (α)
वियोजन की मात्रा, जिसे α लिखते हैं, बताती है कि घुली हुई इकाइयों का कितना हिस्सा आयनों में टूटा।
α = टूटी हुई इकाइयों की संख्या ÷ घुली हुई कुल इकाइयाँ
अगर हर 100 ऐसीटिक अम्ल अणुओं में से 5 टूटते हैं, तो α = 5/100 = 0.05 यानी 5%। प्रबल अपघट्य में α लगभग 1 (100%) होता है। दुर्बल में α छोटा होता है। दुर्बल अपघट्य को पतला करने पर α बढ़ता है, क्योंकि आयनों को ज़्यादा जगह मिलती है और पानी ज़्यादा इकाइयों को अलग कर देता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- α = (आयनों में टूटी इकाइयाँ) ÷ (घुली हुई कुल इकाइयाँ)
- प्रतिशत में α = α × 100
- NaCl → Na⁺ + Cl⁻ (प्रबल, एक तीर)
- CH₃COOH ⇌ CH₃COO⁻ + H⁺ (दुर्बल, दो-तरफ़ा तीर)
- विलयन में कुल धन आवेश = कुल ऋण आवेश
हल किए गए उदाहरण
1. अपघट्य या अनपघट्य छाँटिए: ग्लूकोज़, NaCl विलयन, HCl विलयन, ऐल्कोहॉल।
अपघट्य: NaCl विलयन और HCl विलयन (आयन बनाते हैं)। अनपघट्य: ग्लूकोज़ और ऐल्कोहॉल (अणु ही रहते हैं)।
2. पानी में NaOH का वियोजन लिखिए।
NaOH → Na⁺ + OH⁻। NaOH प्रबल अपघट्य है, इसलिए एक तीर लगता है।
3. 200 ऐसीटिक अम्ल अणुओं में से 8 आयनों में टूटे। α ज्ञात कीजिए।
α = 8 / 200 = 0.04 यानी 4%। यह दुर्बल अपघट्य है।
4. ठोस NaCl बिजली नहीं बहाता पर पिघला NaCl बहाता है। क्यों?
ठोस में Na⁺ और Cl⁻ आयन जाली में जमे हैं, हिल नहीं सकते। पिघलने पर आयन आज़ाद हो जाते हैं और धारा ले जा सकते हैं।
5. दो बीकरों में पदार्थ की मात्रा बराबर है। बीकर A का बल्ब तेज़ और बीकर B का हल्का जलता है। क्या कह सकते हैं?
बीकर A में आज़ाद आयन ज़्यादा हैं, इसलिए वहाँ प्रबल अपघट्य है (α बड़ा)। बीकर B में दुर्बल अपघट्य है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि विलयन में इलेक्ट्रॉन बिजली ले जाते हैं। विलयन में आयन ले जाते हैं।
- यह मानना कि सूखा नमक का क्रिस्टल बिजली बहाता है। आयन जमे होते हैं; उनका आज़ाद होना ज़रूरी है (घुलना या पिघलना)।
- प्रबल और सांद्र को एक समझना। प्रबल का मतलब α ज़्यादा। सांद्र का मतलब बहुत सारा पदार्थ घुला है।
- यह सोचना कि बिजली आयन बनाती है। आयन पहले से होते हैं या घुलने पर बनते हैं। बैटरी तो बस उन्हें चलाती है।